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IPO नियमों में बड़ा बदलाव: अब बड़ी कंपनियां सिर्फ 2.5% शेयर बेचकर लिस्ट हो सकेंगी
सरकार ने बदलाव के साथ यह भी सुनिश्चित किया है कि कंपनियां धीरे-धीरे सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाएं. ग्लाइड पाथ नियम से यह सुनिश्चित होगा कि 10 साल के अंदर पब्लिक होल्डिंग पर्याप्त स्तर तक पहुंचे और बाजार में स्थिरता बनी रहे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
सरकार ने स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग के दौरान बड़ी कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले शेयरों की न्यूनतम सीमा आधी कर दी है. इसका मतलब है कि अब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और रिलायंस जियो जैसे बड़े नाम भी आसानी से IPO ला सकते हैं. इस बदलाव के बाद लिस्टिंग के समय जिन कंपनियों का वैल्यू 5 लाख करोड़ रुपए (57 अरब डॉलर) से अधिक है, वे अपनी पेड-अप कैपिटल का केवल 2.5 फीसदी शेयर ही आम जनता को बेचेंगी. सरकार ने इसे औपचारिक रूप से नोटिफाई कर दिया है, जिससे नियम अब पूरी तरह लागू हो गए हैं.
रेगुलेटर ने किए महत्वपूर्ण बदलाव
1. नई गाइडलाइन के तहत अब हर इक्विटी शेयर कैटेगोरी में कम से कम 2.5 फीसदी शेयर आम जनता को ऑफर किए जा सकते हैं.
2. 25 फीसदी पब्लिक शेयरहोल्डिंग तक पहुंचने के लिए एक अनिवार्य ग्लाइड पाथ तय किया गया है. यदि लिस्टिंग के समय पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15 फीसदी से कम है, तो 15 फीसदी तक पहुंचने के लिए 5 साल और 25 फीसदी तक पहुंचने के लिए 10 साल का समय मिलेगा.
3. यदि लिस्टिंग के समय पब्लिक फ्लोट 15 फीसदी से अधिक है, तो कंपनी को 25 फीसदी तक पहुंचने के लिए 5 साल का समय मिलेगा.
4. 1 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपए के बीच मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए न्यूनतम पब्लिक फ्लोट 2.75 फीसदी तय किया गया है.
5. 50,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपए के बीच मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए न्यूनतम पब्लिक फ्लोट 8 फीसदी रखा गया है.
6. यदि कोई कंपनी सुपीरियर वोटिंग राइट्स वाले शेयर लिस्ट करती है, तो उसे साधारण शेयरों के साथ सुपीरियर वोटिंग राइट्स वाले शेयर भी लिस्ट करने होंगे.
बाजार पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से IPO मार्केट में पैसों की एक ‘सुनामी’ आ सकती है. बड़ी कंपनियों को कम शेयर ऑफर करने की अनुमति मिलने से निवेशकों की मांग पर असर पड़ेगा, और नई लिस्टिंग तेज़ी से हो पाएगी. NSE और Jio जैसी बड़ी कंपनियों के लिए यह बदलाव विशेष रूप से फायदेमंद होगा.
लंबी अवधि के लिए नियम स्थिर
सरकार ने बदलाव के साथ यह भी सुनिश्चित किया है कि कंपनियां धीरे-धीरे सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाएं. ग्लाइड पाथ नियम से यह सुनिश्चित होगा कि 10 साल के अंदर पब्लिक होल्डिंग पर्याप्त स्तर तक पहुंचे और बाजार में स्थिरता बनी रहे.
इस कदम से भारतीय IPO मार्केट में नई ऊर्जा आएगी और निवेशकों को बड़े और भरोसेमंद कंपनियों में शामिल होने का अवसर मिलेगा. नए नियमों के बाद यह साल IPO के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.
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