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सस्ते फोन बनाने वाली Xiaomi को महंगा पड़ा ये काम, जब्त होंगे 5,551 करोड़ रुपए

चीनी मोबाइल कंपनी शाओमी (Xiaomi) सस्ते फोन बनाने के लिए पहचानी जाती है. भारतीय मार्केट पर उसकी अच्छी पकड़ है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

चीनी स्मार्टफोन कंपनी शाओमी (Xiaomi) को जोरदार झटका लगा है. विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (Fema) के उल्लंघन के आरोप में शाओमी के 5,551 करोड़ रुपए जब्त करने के प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) के फैसले पर फेमा प्राधिकरण ने मुहर लगा दी है. कंपनी के बैंक खातों में जमा ये रकम अब जब्त कर ली जाएगी. इसे देश में अब तक की सबसे बड़ी जब्ती कार्रवाई बताया जा रहा है. इसके पहले कर्नाटक हाई कोर्ट ED की कार्रवाई के खिलाफ शाओमी की अपील को खारिज कर चुका है.

अथॉरिटी की मंजूरी ज़रूरी
ED ने 29 अप्रैल को फेमा कानून के तहत बैंक खातों में जमा शाओमी के 5,551 करोड़ रुपए जब्त करने का आदेश दिया था, जिसे बाद में फेमा प्राधिकरण की स्वीकृति के लिए भेजा गया था. विदेशी मुद्रा विनिमय के उल्लंघन से संबंधित मामलों में इस तरह की कार्रवाई के लिए प्राधिकरण की मंजूरी लेना जरूरी होता है. अब जब प्राधिकरण से मंजूरी मिल गई है, तो चीनी मोबाइल कंपनी का पैसा जब्त करने का रास्ता साफ हो गया है.   

ED के आरोपों को सही पाया
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ED ने एक बयान में कहा कि फेमा कानून की धारा 37A के तहत शाओमी टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ उसकी बैंक जमाओं को जब्त करने का आदेश जारी किया गया है. यह भारत में जब्ती के आदेश वाली सर्वाधिक राशि है, जिसे प्राधिकरण की मंजूरी मिली है. ED ने बताया कि प्राधिकरण ने चीनी कंपनी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय के आरोपों को सही पाया है.

आखिर क्यों हुई कार्रवाई?
शाओमी इंडिया पर अनधिकृत ढंग से पैसा भारत से बाहर भेजे जाने का आरोप है. ED का कहना है कि रॉयल्टी भुगतान के नाम पर देश के बाहर विदेशी मुद्रा भेजना फेमा कानून का खुला उल्लंघन है. अधिकारियों के अनुसार, इस चीनी कंपनी ने 2014 में भारत में काम शुरू किया और अगले साल से ही रॉयल्टी  के नाम पर करोड़ रुपए बाहर पैसा भेजना शुरू कर दिया. रॉयल्टी तीन कंपनियों को भेजी जाती थी. इसमें एक चीन स्थित मूल कंपनी शाओमी और अमेरिका स्थित दो अन्य कंपनियां शामिल थीं. जबकि अमेरिका स्थिति दोनों कंपनियों का भारत में शाओमी के कामकाज से कोई संबंध नहीं था.
 


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