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बजट 2025 सत्र शुरू करने से पहले वित्त मंत्री ने लिया हलवा सेरेमनी में भाग, जानिए क्या होती है ये परंपरा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार हलवा सेरेमनी मनाई. ये परंपरा बजट की छपाई प्रक्रिया का संकेत देती है, जिसके बाद से बजट से जुड़े अधिकारियों की लॉक-इन अवधि शुरू हो जाती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
बजट सत्र 2025 शुरू होने से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार यानी 25 जनवरी, 2025 को नई दिल्ली नॉर्थ ब्लॉक में हलवा सेरेमनी का आयोजन किया .इस खास परंपरा के बाद बजट से जुड़ेी टीम की 'लॉक-इन' अवधि शुरू होती है, जिसमें बजट से जुड़ी टीम संसद में बजट पेश होने तक मंत्रालय परिसर में ही रहती है. वित्त वर्ष 2025-26 का बजट 1 फरवरी को पेश होगा. यह बजट कमजोर जीडीपी और खपत के आंकड़ों के बीच पेश हो रहा है. तो आइए जानते हैं आखिर बजट से पहले हलवा सेरेमनी का आयोजन क्यों होता है और इसके क्या मायने हैं?
बजट की छपाई शुरू होने से पहले होती है हलवा सेरेमनी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को नॉर्थ ब्लॉक में पारंपरिक हलवा सेरेमनी में हिस्सा लिया. हर साल बजट की तैयारी के 'लॉक-इन' प्रोसेस से पहले हलवा समारोह का आयोजन किया जाता है. हलवा समारोह में नॉर्थ ब्लॉक में एक बड़ी कड़ाही में हलवा तैयार किया जाता है. वित्त मंत्री औपचारिक रूप से कड़ाही को चलाती हैं. वह बजट बनाने की प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों को हलवा परोसती हैं. इस सेरेमनी में राज्य मंत्री पंकज चौधरी, सचिव और बजट निर्माण प्रक्रिया में शामिल अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे. हलवा सेरेमनी बजट की छपाई शुरू होने से पहले होती है, जोकि वित्त मंत्रालय के कर्मचारियों की कड़ी मेहनत को सम्मानित करने का एक तरीका है. इस समारोह के बाद एक विशेष अवधि शुरू होती है जिसे 'लॉक-इन' कहते हैं. बता दें, बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू होगा और 4 अप्रैल को समाप्त हो जाएगा. इस बजट के साथ सीतारमण सातवां बजट पेश करेंगी जो पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड को पार कर जाएगा. यह बजट कमजोर जीडीपी और खपत के आंकड़ों के बीच पेश किया जा रहा है, इसलिए सभी की निगाहें सरकार के आर्थिक दिशानिर्देशों पर होंगी.
लॉक-इन क्या है?
लॉक-इन एक ऐसी अवधि होती है जिसमें बजट बनाने की प्रक्रिया में शामिल सभी लोग पूरी तरह से बाहरी दुनिया से कट जाते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य बजट के बारे में किसी भी तरह की जानकारी लीक होने से रोकना है. आमतौर पर, बजट बनाने वाले अधिकारी और कर्मचारी एक सुरक्षित स्थान पर रहते हैं, जैसे कि नॉर्थ ब्लॉक का बेसमेंट, इस दौरान वे लगातार बजट पर काम करते हैं और इसे अंतिम रूप देते हैं. उन्हें अपने परिवार और दोस्तों से मिलने या फोन करने की अनुमति नहीं होती है.
इसलिए जरूरी है लॉक-इन
लॉक-इन इसलिए जरूरी है ताकि बजट के बारे में कोई भी जानकारी बाहर न जा सके. अगर बजट के बारे में पहले से ही जानकारी लीक हो जाती है तो इसका देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. लॉक-इन की अवधि आमतौर पर कुछ दिनों की होती है और यह बजट पेश होने तक जारी रहती है. लॉक-इन का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि यह बजट बनाने की प्रक्रिया की गोपनीयता सुनिश्चित करता है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि बजट में कोई भी बदलाव या संशोधन अंतिम समय में नहीं किया जा सकेगा.
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