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बैंकर चाहें 2 दिन छुट्टी, लेकिन यहां 1 भी नहीं मिलती; कितनी वाजिब है ये मांग?

मौजूदा व्यवस्था के तहत बैंकों में महीने के हर दूसरे और आखिरी शनिवार को अवकाश रहता है. अब वो चाहते हैं कि रविवार के साथ-साथ हर शनिवार को भी छुट्टी रहे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

बैंक यूनियन ने अपनी कई मांगों को लेकर 27 जून को हड़ताल की बात कही थी, जिसे बाद में वापस ले लिया. उनकी मांगों में से एक सप्ताह में 5 दिन काम भी शामिल है. सीधे शब्दों में कहें तो कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें दो दिन छुट्टी मिले, यानी शनिवार और रविवार. मौजूदा व्यवस्था के तहत बैंकों में महीने के हर दूसरे और आखिरी शनिवार को अवकाश रहता है. अब वो चाहते हैं कि रविवार के साथ-साथ हर शनिवार को भी छुट्टी रहे.

तनाव है, पर कोई मानता नहीं

बैंक कर्मियों पर काम का बोझ और तनाव काफी ज्यादा है, लेकिन पुरानी इमेज के चलते अधिकांश लोग यह मानने को तैयार नहीं होते. पहले और आज के बैंकिंग सेक्टर में व्यापक बदलाव आया है. सरकारी की ज़्यादातर योजनायें बैंक के माध्यम से ही अमल में आती हैं, ऐसे में बैंकर्स के काम में भी इजाफा हुआ है. प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए दुनियाभर की कई कंपनियां/सरकारें 4 डे वर्किंग पर गौर कर रही हैं. लिहाजा, बैंकर्स की इस मांग को पूरी तरह से नाजायज नहीं ठहराया जा सकता. लेकिन सवाल यह भी है कि यदि बाकी सरकारी संस्थाओं के कर्मचारी भी इसी आधर पर दो दिन की छुट्टी मांगने लगें तो?

पुलिस पर नहीं किसी का ध्यान

कानून व्यवस्था का जिम्मा संभालने वाली पुलिस भारी तनाव में रहती है, इसके बावजूद पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश नहीं मिलता. जिन राज्यों में इसकी व्यवस्था है, उनमें से कुछ में आदेश कागजों से बाहर नहीं निकल पाया है. एक पुलिस ऑफिसर को 24 घंटे, 365 दिन एक्टिव रहना पड़ता है. अक्सर उनकी छुट्टी के आवेदन ऐन मौके पर रद्द कर दिए जाते हैं. मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने पुलिसकर्मियों के साप्ताहिक अवकाश का ऐलान किया था, लेकिन ये ऐलान पूरी तरह से हकीकत में नहीं बदल पाया. कमलनाथ के मुख्यमंत्री रहते समय तक पुलिसकर्मी वीक ऑफ की बांट जोहते रहे, क्योंकि ये वादा उन्हीं का था. अब जब राज्य में शिवराज सिंह की सरकार है, तब भी स्थिति जस की तस है.

महाराष्ट्र में बेहतर हैं हालात

उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश देने की घोषणा की थी, मगर वहां भी हालात खास अच्छे नहीं हैं. सबसे ज्यादा परेशानी निचली रैंक के कर्मचारियों को होती है. हालांकि, इस मामले में महाराष्ट्र में स्थिति बेहतर है. यहां पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश मिल रहा है. DCP रैंक के एक अधिकारी के मुताबिक, रोटेशन के हिसाब से सभी कर्मियों के अवकाश निर्धारित हैं और उन्हें बाकायदा दिए भी जाते हैं. किसी आपात स्थिति में ही इस व्यवस्था में बदलाव होता है. वरना पूरी कोशिश रहती है कि सभी को एक दिन की छुट्टी मिले. अब राज्य सरकार ने पुलिस अधिकारियों के आकस्मिक अवकाश (Casual Leaves ) की संख्या (एक साल में) 12 से बढ़ाकर 20 करने का फैसला किया है.

यहां है 4 Day Week की व्यवस्था

महाराष्ट्र जैसे एक-दो और राज्य हो सकते हैं, लेकिन ज़्यादातर राज्यों में पुलिसकर्मियों को कोई छुट्टी नहीं मिलती. उन्हें लगातार काम करना पड़ता है. अब यदि पुलिसकर्मी भी स्ट्राइक पर जाने लगें, तो? वैसे, बैंककर्मी जो 5 डेज वीक ऑफ की मांग कर रहे हैं, उसे लेकर विदेशों में पॉजिटिव एप्रोच है. ब्रिटेन तो हफ्ते में 4 दिन के कामकाज की तरफ बढ़ गया है. करीब 60 ब्रिटिश कंपनियों में 4 Day Week का ट्रायल किया जा रहा है. इस ट्रायल में 3000 से ज्यादा कर्मचारी शामिल हैं. ब्रिटेन के इस ट्रायल से पहले कुछ देश हफ्ते में 4 दिन काम की पॉलिसी ला चुके हैं. इसमें जापान, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, स्पेन, स्कॉटलैंड और आयरलैंड शामिल हैं. इतना ही नहीं, UAE में जनवरी 2022 से Four and Half Day काम की नीति लागू की गई है.

फायदे भी आए हैं सामने

4 Day Week के फायदे पर भी बात कर लेते हैं. जापान में माइक्रोसॉफ्ट ने बाकायदा ऐसा करके दिखाया है. कंपनी द्वारा हफ्ते में 4 दिन काम की नीति लागू करने के बाद उसकी बिजली खपत एक चौथाई कम हुई. पेपर प्रिंट करने में करीब 60% तक की कमी आई. कर्मचारी बिना तनाव अच्छे माहौल में काम करने लगे. इसकी वजह से कंपनी की प्रोडक्टिविटी 40% तक बढ़ गई. वहीं, स्कॉटलैंड में 4 Day Week के बाद काम से गैरहाजिर होने वालों की संख्या में कमी दर्ज की गई. इस बारे में कई रिसर्च भी हुए हैं. यदि भारत के कामकाजी माहौल में 5 दिन काम की गुंजाइश बन सकती है, तो उस पर गौर किया जाना चाहिए. क्योंकि इसमें कोई दो-राय नहीं कि मानसिक सुकून के बिना, काम पूरी लगन और मेहनत के नहीं हो सकता. जब कर्मचारी मानसिक सुकून में रहेगा, तो कंपनी की प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी. यानी दोनों के लिए विन-विन सिचुएशन रहेगी.


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