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कंपनी का ये कैसा फरमान, कर्मचारियों से पूछा- टेंशन है? हां, बोलने वालों को नौकरी से निकाला
शार्क टैंक इंडिया में आ चुका होम सलून सर्विस वाला स्टार्टअप यस मैडम (YesMadam) तो आपको याद ही होगा. इस वक्त यस मैडम विवादों में फंस गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सोशल मीडिया पर इन दिनों नोएडा बेस्ड एक स्टार्टअप कंपनी का ईमेल चर्चा का हॉट टॉपिक बना हुआ है, जिस पर लोगों के तरह-तरह के रिएक्शन देखने को मिल रहे हैं. दरअसल, स्टार्टअप कंपनी 'यस मैडम' इन दिनों इंटरनेट पर सुर्खियों में है. कंपनी पर एक पूर्व कर्मचारी ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि एक मेंटल हेल्थ सर्वे के आधार पर करीब 100 लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया है. इस घटना ने सोशल मीडिया पर बड़ा बवाल खड़ा कर दिया है और लोग अब कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं.
मेंटल हेल्थ सर्वे बना छंटनी का आधार?
पूर्व कर्मचारी ने बताया कि कंपनी ने एक आंतरिक मेंटल हेल्थ सर्वे कराया, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों की मानसिक स्थिति और काम के दबाव को समझना था, लेकिन इस सर्वे के परिणामों को आधार बनाकर उन कर्मचारियों को निकाल दिया गया, जिन्होंने काम के दबाव की शिकायत की थी. कंपनी के इस कदम को कर्मचारियों और इंटरनेट यूजर्स ने अमानवीय करार दिया है. उनका कहना है कि मेंटल हेल्थ पर बातचीत को प्रोत्साहित करने के बजाय, इसे कर्मचारियों के खिलाफ इस्तेमाल करना गलत है.
मेल में क्या लिखा था?
यस मैडम की HR टीम ने मेल में लिखा कि हमने कार्यस्थल पर तनाव का पता लगाने के लिए एक सर्वे किया. आपकी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए और एक स्वस्थ कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए, हमने उन कर्मचारियों को अलग करने का निर्णय लिया है, जिन्होंने अपने तनाव की बात कही. यह कदम तुरंत प्रभाव से लागू होगा. सबसे बड़ी बात कि इस मेल में कंपनी के सह-संस्थापक मयंक आर्या को भी शामिल किया गया था. मयंक आर्या ने सिंगापुर पॉलिटेक्निक से नॉटिकल स्टडीज में डिप्लोमा किया है. 2016 में उन्होंने यस मैडम की स्थापना की. कंपनी का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाते हुए ब्यूटी और वेलनेस सेवाओं को घर-घर पहुंचाना है. वर्तमान में यस मैडम 50 से अधिक शहरों में सक्रिय है.
लोग क्या कह रहे हैं?
कई लिंक्डइन यूजर्स ने इस कदम की कड़ी आलोचना की. एक यूजर ने लिखा, "तनावग्रस्त कर्मचारियों को निकालना उनकी समस्याओं का समाधान नहीं है." अनुष्का दत्ता ने लिखा, "यस मैडम में कर्मचारियों को ऐसे निकाला गया जैसे वे इंसान नहीं, केवल आंकड़े हैं." वहीं कुछ लोग इसे पीआर स्टंट बता रहे हैं, जबकि, अन्य इसे 'टॉक्सिक वर्क कल्चर' का उदाहरण मानते हैं. हालांकि, अभी तक यस मैडम की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
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