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डॉ. अशोक के. चौहान: एमिटी की शिक्षा क्रांति के पीछे का आदमी

उद्यमिता में सफलता से लेकर एमिटी के वैश्विक शिक्षण ब्रह्मांड तक, उनकी दृष्टि पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago

हर वर्ष 24 अक्तूबर को एमिटी एजुकेशन ग्रुप अपने संस्थापक दिवस (Founder’s Day) का उत्सव मनाता है ताकि डॉ. अशोक के. चौहान — रितनंद बालवेद एजुकेशन फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष और ए.के.सी. ग्रुप ऑफ कंपनियों के चेयरमैन — के जीवन और दृष्टि को सम्मानित किया जा सके. यह दिन उस व्यक्ति को समर्पित है जिनके सपने और संकल्प ने भारत की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित शिक्षा प्रणालियों में से एक की नींव रखी.

दृष्टि से शुरू हुई यात्रा
1942 में उत्तर प्रदेश में जन्मे डॉ. चौहान ने 1963 में रसायन शास्त्र में एम.एससी. पूरी की और इसके बाद उन्होंने भारत के एक प्रमुख औद्योगिक समूह के साथ अपना पेशेवर जीवन आरंभ किया. 1966 में उन्हें पश्चिम जर्मनी में केमिकल इंजीनियरिंग और प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में अनुसंधान करने के लिए छात्रवृत्ति मिली, जिससे उनका करियर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ा. अपनी असाधारण प्रतिभा और लगन के बल पर वे डैटवाइलर यूरोप में रिसर्च एंड डेवलपमेंट विभाग के प्रमुख बने.

यूरोप में अनुसंधान और पेशेवर जीवन में अपार सफलता प्राप्त करने के बाद डॉ. चौहान ने उद्यमिता की दिशा में कदम बढ़ाया. 1973 में उन्होंने फ्रैंकफर्ट में अपना व्यवसाय शुरू किया, जो शीघ्र ही विकसित होकर ए.के.सी. ग्रुप ऑफ कंपनियों के रूप में विस्तारित हुआ — एक अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक और ट्रेडिंग समूह जिसका कारोबार 1.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है, जिसमें पेट्रोकेमिकल्स, मैन्युफैक्चरिंग, हाई टेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में गतिविधियां शामिल हैं.

उद्योग से शिक्षा की ओर
अपने व्यावसायिक जीवन की इन सफल दशकों के दौरान डॉ. चौहान ने यह विश्वास विकसित किया कि शिक्षा ही किसी राष्ट्र के रूपांतरण की कुंजी है. उनका मानना था कि यदि युवाओं को विश्वस्तरीय व्यावसायिक शिक्षा दी जाए और उसमें मूल्यों की मजबूत नींव जोड़ी जाए, तो वे ऐसे वैश्विक नेता बन सकते हैं जो भविष्य को आकार देंगे. इसी विश्वास के साथ उन्होंने 1986 में रितनंद बालवेद एजुकेशन फाउंडेशन (RBEF) की स्थापना की, जिसमें वैज्ञानिक, अकादमिक और कॉर्पोरेट जगत के प्रतिष्ठित लोगों को एक मंच पर लाया गया ताकि उनके विज़न को साकार किया जा सके.

आज वही विज़न एमिटी एजुकेशन ग्रुप के रूप में साकार हुआ है, जिसे अपने वैश्विक स्तर के कैंपसों और नवाचारपूर्ण अकादमिक मॉडल के लिए पहचाना जाता है. यह समूह अब पाँच विश्वविद्यालयों, 17 स्कूलों और प्री-स्कूलों तथा 150 से अधिक संस्थानों का नेटवर्क है, जो 1,000 एकड़ में फैले 15 कैंपसों में 95,000 से अधिक छात्रों को शिक्षा प्रदान कर रहा है. एमिटी की शैक्षणिक पेशकशों में नर्सरी से लेकर पीएच.डी. तक के 240 कार्यक्रम शामिल हैं, जिन्हें उत्कृष्ट शिक्षकों और पेशेवरों द्वारा संचालित किया जाता है.

भविष्य गढ़ने वाली नेतृत्व दृष्टि
डॉ. चौहान की नेतृत्व शैली सदैव संतुलन पर आधारित रही है — ‘एक दृष्टि पर नज़र और एक क्रियान्वयन पर’. उनके इस व्यावहारिक और दूरदर्शी दृष्टिकोण ने ए.के.सी. ग्रुप और आर.बी.ई.एफ. दोनों को स्थायी, मूल्य-आधारित संस्थानों के रूप में विकसित किया है, जिन्होंने देश के शिक्षा परिदृश्य को नई दिशा दी है.

अपने चार ‘E’ — Edge, Enthusiasm, Excellence और Execution — से प्रेरित होकर डॉ. चौहान एमिटी के छात्रों और शिक्षकों की पीढ़ियों को प्रेरित करते रहे हैं. शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के उनके मिशन ने एमिटी को गुणवत्ता, नवाचार और ईमानदारी का पर्याय बना दिया है.

एमिटी फाउंडर’s डे केवल डॉ. चौहान के जन्मदिन का उत्सव नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों का भी उत्सव है. एमिटी के सभी कैंपसों में इस दिन विशेष सभाएं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और शैक्षणिक व सह-पाठ्यक्रम उपलब्धियों के लिए छात्रों का सम्मान किया जाता है. छात्र डॉ. चौहान की शैक्षणिक विचारधारा पर अपने विचार भी प्रस्तुत करते हैं, विशेषकर उनके “BHAAG” सिद्धांत पर — Behaviour, Hard Work, Attitude, Ambition और God — जो एमिटी की शिक्षण संस्कृति की आत्मा को दर्शाता है.

एक अकेले दृष्टिकोण से आरंभ हुई यह यात्रा आज एक ऐसे शैक्षणिक ब्रह्मांड में परिवर्तित हो चुकी है जो हजारों जीवनों को स्पर्श करती है. डॉ. अशोक के. चौहान की कहानी इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ विश्वास, उत्कृष्टता और निरंतर क्रियान्वयन के बल पर शिक्षा के माध्यम से एक राष्ट्र के भाग्य को गढ़ा जा सकता है. जैसा कि वे स्वयं कहते हैं — “मेरा मिशन है राष्ट्र निर्माण, शिक्षा के माध्यम से और उससे भी आगे.”


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