✕

होम / बिजनेस / जर्मनी अकेले कर रहा है अपनी बिजली जरूरतों को पूरी, कैसे यह बन रहा है ईयू के लिए संकट

जर्मनी अकेले कर रहा है अपनी बिजली जरूरतों को पूरी, कैसे यह बन रहा है ईयू के लिए संकट

जर्मनी, जो यूरोपीय संघ का हिस्सा है, ने अपने ऊर्जा क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए एक समझौता किया है जिसका अन्य सभी देशों पर प्रभाव पड़ेगा.

उर्वी श्रीवास्तव 3 years ago

नई दिल्लीः यूरोपीय संघ (ईयू) 27 देशों की एक आर्थिक इकाई है. किसी एक देश द्वारा उठाए गए किसी भी कदम का अन्य सभी देशों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा. जर्मनी, जो यूरोपीय संघ का हिस्सा है, ने अपने ऊर्जा क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए एक समझौता किया है जिसका अन्य सभी देशों पर प्रभाव पड़ेगा. 

क्या हुआ है?

कुछ अनुमानों के अनुसार जर्मनी यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और हाल ही में अपने घरों और व्यवसायों के लिए 200 बिलियन यूरो ऊर्जा सहायता योजना जारी की है. अन्य अर्थव्यवस्थाओं को डर है कि यह संकट के समय में एकल बाजार को भंग कर सकता है. यह समस्याग्रस्त है क्योंकि यूरोप एक बड़े ऊर्जा संकट के बीच में है. कोविड 19 महामारी के फीके पड़ने और ऊर्जा की मांग में वृद्धि के कारण अर्थव्यवस्थाएं फिर से खुल गईं हैं. इसके बाद रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया. मॉस्को यूरोप, विशेष रूप से जर्मनी को प्राकृतिक गैस का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा है और महाद्वीप में गैस के महत्वपूर्ण प्रवाह को उत्तरोत्तर कम करने के लिए इसका लाभ उठा रहा है.

बाजार में बढ़ गई है अनिश्चितता

इन दो कारकों ने बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है और ऊर्जा की कीमत बढ़ गई है. यूरोपीय गैस की कीमत सिर्फ एक साल में 550 फीसदी बढ़ी है. यूनाइटेड किंगडम (यूके) में अप्रैल में बिलों में 54 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और अक्टूबर में 80 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है. जैसा कि अर्थव्यवस्थाएं पस्त हैं, नेताओं ने संकट के लिए संयुक्त यूरोपीय प्रतिक्रिया का आह्वान किया है.

यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जर्मनी 

जर्मनी में, जो यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी है, अगर ऊर्जा की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो मंदी में प्रवेश कर सकता है. देश में महंगाई भी 70 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और दोहरे अंक को पार कर गई है. 200 बिलियन यूरो की योजना इस स्थिति में बफर के रूप में कार्य करने की है. कम दरों पर ऊर्जा बेचने के लिए गैस आपूर्तिकर्ताओं को मुआवजा देने के लिए सरकारी संसाधनों का उपयोग किया जाएगा.

यह समस्या क्यों है?

शुरू करने के लिए, यह अन्य यूरोपीय देशों के बीच एक सब्सिडी युद्ध को गति प्रदान कर सकता है. यह जर्मनी को अनुचित लाभ भी देगा जो अब कम कीमतों पर ऊर्जा उधार ले सकता है. अन्य अर्थव्यवस्थाओं को महंगे बैंकरोल सब्सिडी कार्यक्रम स्थापित करने पड़ सकते हैं, जो उनके लिए एक मुद्दा हो सकता है. उदाहरण के लिए स्लोवाकिया के ऊर्जा मंत्री ने बर्लिन पर यूरोपीय संघ के साझा बाजार को भंग करने का आरोप लगाया.

महाद्वीप पहले गैर-गैस बिजली की कीमतों पर मूल्य कैप जैसे आंशिक उपायों पर सहमत होने में सक्षम था, बर्लिन ने गैस आपूर्ति की कीमत पर एक कैप का विरोध किया है इसकी नवीनतम योजनाएं एक संयुक्त यूरोपीय मोर्चा पेश करने के प्रयासों को जटिल बनाती हैं. जर्मनी के राजनेता इस परिदृश्य में अवहेलना कर रहे हैं और फ्रांस की ओर इशारा कर रहे हैं जिसके समान ऊर्जा लक्ष्य हैं और उन्होंने सरकार समर्थित राहत प्रदान की है. हालांकि, जर्मनी के 200 बिलियन यूरो के मुकाबले फ्रांसीसी पैकेज 12 बिलियन यूरो का था.

भारत पर पड़ेगा असर

यूरोप पिछले 50 वर्षों में सबसे खराब ऊर्जा संकट में है, और सर्दियों की शुरुआत के साथ, यह समस्या और विकराल रूप ले लेती है. ऊर्जा की मांग बढ़ेगी जबकि आपूर्ति कमजोर रहेगी. परिदृश्य का भारत पर गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है, खासकर उस क्षेत्र में जहां प्राकृतिक गैस एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इनमें सीएनजी आपूर्ति, उर्वरक आदि शामिल हैं. इसका भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' योजना और नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता यानी 2030 तक 450 GW की स्थापना पर भी प्रभाव पड़ता है.

इस परिदृश्य को देखते हुए, जर्मनी और अन्य यूरोपीय संघ के देशों के बीच वर्तमान संघर्ष केवल चीजों को और अधिक कठिन बनाने वाला है. वहीं, देशों का अकेले जाना कोई नई बात नहीं है. 1973-74 में जब पहले तेल संकट ने विश्व अर्थव्यवस्थाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है. फ्रांस ने अकेले ही अपनी सरकार द्वारा वित्त पोषित एक विशाल स्वदेशी परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम शुरू करके ऊर्जा सुरक्षा के लिए जाने का साहसिक निर्णय लिया. उन्होंने लगभग 50,000 मेगावाट के परमाणु संयंत्र जोड़े और इस तरह उन्होंने अपने देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा को सफलतापूर्वक लक्षित किया. इसका तात्पर्य है कि सरकारों ने हमेशा अपनी ऊर्जा अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए निर्णय लिए हैं और भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए अपनी गति तेज करनी चाहिए. 

VIDEO: Hyundai का दिवाली धमाका! सिर्फ इस तारीख तक कारों पर मिल रही बंपर छूट

 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

अडानी समूह पर शॉर्ट-सेलिंग हमले की फुसफुसाहट

राजीव जैन के GQG ने ITC में अपनी हिस्सेदारी बेच दी. डीलिंग रूम में चर्चा है कि कुछ ऑफशोर खिलाड़ियों को इसका पहले से अंदाजा था और उन्होंने पहले ही फंड की प्रमुख होल्डिंग्स में शॉर्ट पोजीशन बना ली थी. एलन मस्क की X पोस्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज में बिकवाली को और बढ़ा दिया.

11 hours ago

2037-38 की जरूरत की 84% हुई कोल्ड स्टोरेज क्षमता, पैक-हाउस और रीफर वाहनों की भारी कमी: रिपोर्ट

रिपोर्ट में प्रमुख बागवानी उत्पादन केंद्रों के आसपास बहु-वस्तु और अलग-अलग तापमान पर काम करने वाली सुविधाएं विकसित करने की जरूरत बताई गई है. इसके साथ भरोसेमंद रेफ्रिजरेटेड परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है.

14 hours ago

डीजल एक्सपोर्ट एक साल के टॉप पर, सितंबर में भारत से रोजाना 6.2 लाख बैरल का निर्यात; यूरोप सबसे बड़ा बाजार

सितंबर में डीजल निर्यात में आई तेजी ऐसे समय में हुई है जब यूरोप और अमेरिका समेत कई बाजारों में डीजल की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं.

17 hours ago

पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर RBI का एक्शन, शेड्यूल बैंकों की सूची से बाहर किया; पहले रद्द हो चुका है लाइसेंस

बैंक का लाइसेंस इसी साल अप्रैल में नियमों का पालन नहीं करने के चलते रद्द किया गया था. इससे पहले आरबीआई ने बैंक के खिलाफ कई कारोबारी पाबंदियां भी लगाई थीं.

17 hours ago

शारजाह में 3 अरब डॉलर निवेश करेंगी भारतीय कंपनियां, खाड़ी बाजारों के लिए खोरफक्कन पोर्ट बनेगा नया गेटवे

*हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते समुद्री तनाव के बीच शारजाह भारतीय कंपनियों को निवेश का बड़ा अवसर दे रहा है. अमीरात को 2026 और 2027 के दौरान भारत से कुल 3 अरब डॉलर निवेश मिलने की उम्मीद है.

17 hours ago


बड़ी खबरें

भारतीय दीवार पर किसका होगा कब्जा?

जैसे-जैसे बिरला ओपस, जेएसडब्ल्यू ड्यूलक्स और पिडिलाइट की हैशा स्थापित दिग्गजों को चुनौती दे रही हैं, त्योहारी सीजन यह दिखाएगा कि क्या वितरण क्षमता, डीलर अर्थशास्त्र और पेंटर का प्रभाव लंबे समय से चली आ रही उपभोक्ता आदतों को बदल सकता है.

13 hours ago

अडानी समूह पर शॉर्ट-सेलिंग हमले की फुसफुसाहट

राजीव जैन के GQG ने ITC में अपनी हिस्सेदारी बेच दी. डीलिंग रूम में चर्चा है कि कुछ ऑफशोर खिलाड़ियों को इसका पहले से अंदाजा था और उन्होंने पहले ही फंड की प्रमुख होल्डिंग्स में शॉर्ट पोजीशन बना ली थी. एलन मस्क की X पोस्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज में बिकवाली को और बढ़ा दिया.

11 hours ago

विसर्जित भारत

2047 तक विकसित, दिवाली 2026 तक विसर्जित

13 hours ago

2037-38 की जरूरत की 84% हुई कोल्ड स्टोरेज क्षमता, पैक-हाउस और रीफर वाहनों की भारी कमी: रिपोर्ट

रिपोर्ट में प्रमुख बागवानी उत्पादन केंद्रों के आसपास बहु-वस्तु और अलग-अलग तापमान पर काम करने वाली सुविधाएं विकसित करने की जरूरत बताई गई है. इसके साथ भरोसेमंद रेफ्रिजरेटेड परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है.

14 hours ago

डीजल एक्सपोर्ट एक साल के टॉप पर, सितंबर में भारत से रोजाना 6.2 लाख बैरल का निर्यात; यूरोप सबसे बड़ा बाजार

सितंबर में डीजल निर्यात में आई तेजी ऐसे समय में हुई है जब यूरोप और अमेरिका समेत कई बाजारों में डीजल की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं.

17 hours ago