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'आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया' को मिली बड़ी कामयाबी, भारतीय इकोनॉमी को मिलेगा बूस्ट
स्टील मैन्यूफैक्चरिंग की क्षमता बढ़ाने की अनुमति मिलने से सरकार की राष्ट्रीय इस्पात नीति को भी प्रोत्साहन मिलेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: आर्सेलर मित्तल और निप्पॉन स्टील के ज्वाइंट वेंचर 'आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया' ने गुरुवार को यह घोषणा की कि उसे गुजरात के हजीरा प्लांट में कच्चे स्टील के उत्पादन की क्षमता 9 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 15 मिलियन टन प्रति वर्ष करने के लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरी मिल गई है.
राष्ट्रीय इस्पात नीति को भी मिलेगा प्रोत्साहन
स्टील मैन्यूफैक्चरिंग की क्षमता बढ़ाने की अनुमति मिलने से सरकार की राष्ट्रीय इस्पात नीति को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिसमें 2030 तक स्टील मैन्यूफैक्चरिंग की घरेलू क्षमता दोगुनी बढ़ाकर 300 मिलियन टन प्रति वर्ष करने की परिकल्पना की गई है. साथ ही, 'आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया' का भी स्टील उत्पादन की क्षमता बढ़ाने का अपना एक लॉन्ग टर्म प्लान है.
चेयरमैन आदित्य मित्तल ने क्या कहा
'आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया' के चेयरमैन आदित्य मित्तल ने कहा, "2019 में बाजार में प्रवेश करने के बाद से हमने अपने हजीरा प्लांट में प्रदर्शन में काफी सुधार किया है और इंडियन स्टील इंडस्ट्री के डीकार्बोनाइजेशन और डेवलपमेंट में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण निर्धारित किया है. हम भारत के साथ और भारत के लिए विकास करना चाहते हैं. हम अपने पर्यावरणीय प्रदर्शन में निरंतर सुधार और उच्च गुणवत्ता वाले, टिकाऊ स्टील का उत्पादन करने के लिए के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसकी भारत को अपनी आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए जरूरत है. आज का दिन हमारी यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है."
कंपनी के CEO ने क्या कहा
'आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया' के CEO दिलीप ओमन ने कहा, "यह विस्तार हमारे विकास के अगले चरण को गति देगा, जिससे हम घरेलू बाजार की बढ़ती मांग को पूरा करने में सक्षम होंगे. हम उच्च क्षमता वाले स्टील का उत्पादन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. हम 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत की विकास यात्रा का समर्थन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं."
ऐसे हुई पूरी प्रक्रिया
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा पर्यावरण मंजूरी को अप्रूव्ड किया गया था, जो मंत्रालय द्वारा निर्धारित एक विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन का पालन करता है. इसकी रिपोर्ट गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपी गई थी, जिसने जुलाई में सूरत जिले के जिला कलेक्टर और मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में हजीरा में एक पब्लिक कंसल्टेशन किया गया. इसके निष्कर्षों को फाइनल अप्रूवल के लिए केंद्रीय मंत्रालय के सामने प्रस्तुत किया गया था.
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