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यूपी से मिली खुशखबरी के बाद खूब उछले थे NTPC के शेयर, जानें अब क्या है हाल?
यूपी में योगी सरकार द्वारा एनटीपीसी के सहयोग से 800 मेगावाट के दो सोलर प्लांट लगाए जाएंगे. इस खबर के बाद मंगलवार को NTPC के शेयर काफी तेजी से बढ़े थे, लेकिन अब शेयर में गिरावट दर्ज हो गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
उत्तर प्रदेश (यूपी) में योगी सरकार की कैबिनेट से सोलर प्लांट लगाने की मंजूरी के बाद नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) के शेयर ने खूब छलांग लगाई थी, लेकिन अब ये शेयर धड़ाम से गिरकर नीचे आ गए हैं. मंगलवार को शेयर की कीमत ट्रेडिंग के दौरान शेयर 360 रुपये के पार पहुंच गई थी, जो अब 346.40 रुपये है. इसमें मंगलवार के मुकाबले 3.31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई.
एनटीपीसी के शेयर ने बनाया था नया रिकॉर्ड
एक्सपर्ट्स के अनुसार यूपी सरकार से दो सोलर प्लांट लगाने का प्रोजेक्ट मिलने के बाद मंगलवार को एनटीपीसी के शेयर ने एक नया रिकॉर्ड बनाया था. इसके शेयर काफी तेजी से बढ़े थे. शेयर की कीमत 358.25 रुपये पहुंच गई थी. यह एक दिन पहले के मुकाबले 1.26 प्रतिशत बढ़कर बंद हुई थी और ट्रेडिंग के दौरान शेयर 360 रुपये के पार पहुंच गया था. बुधवार को शेयर बुरी तरह से गिर गए और खबर लिखने तक इसकी कीमत 346.40 रुपये पहुंच गई थी,.
अनपरा में लगेंगे 800 मेगावाट के दो प्लांट
यूपी सरकार के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि पिछले साल लखनऊ में हुए ‘ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट’ में एनटीपीसी के साथ दो बड़े समझौते किए गए थे. उनमें ओबरा डी में 800 मेगावाट की दो प्लांट लगाने के प्रस्ताव को पिछले साल ही मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई थी. वहीं, अब अनपरा में भी 800 मेगावाट के दो सोलर प्लांट एनटीपीसी के सहयोग से लगाए जाएंगे.
प्रोजेक्ट में यूपी सरकार और एनटीपीसी की 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी
एक रिपोर्ट के अनुसार इस प्रोजेक्ट के लिए यूपी सरकार और एनटीपीसी 50-50 प्रतिशत का योगदान करेंगे. इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 8,624 करोड़ रुपये है और इसकी पहली इकाई लगभग 50 महीने (करीब चार साल) में तैयार हो जाएगी, जबकि दूसरी इकाई 56 महीने (करीब साढ़े चार साल) में शुरू हो जाएगी. जानकारी के अनुसार इसमें 30 प्रतिशत फंड इकट्ठा (इक्विटी) किया जाएगा, जो राज्य सरकार और एनटीपीसी आपस में वहन करेंगे, जबकि 70 प्रतिशत लोन के माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा.
जनता को सस्ती बिजली का लाभ
इस प्रोजेक्ट के लिए कोयला नजदीक में ही स्थित एक खादान से लिया जाएगा, जिससे सस्ती बिजली मिलने का रास्ता साफ होगा. इसके साथ ही सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन नीति को मंजूरी दी है. सूत्रों के अनुसार हाइड्रोजन का उपयोग ईंधन के रूप में बड़े कारखानों जैसे उर्वरक संयंत्र, पेट्रोरसायन संयंत्र और इस्पात संयंत्र में होता है. अभी तक हाइड्रोजन पैदा करने की जो तकनीक थी, वह बिजली या गैस के सहारे होती थी. जिसे ग्रे हाइड्रोजन कहा जाता है.
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