होम / बिजनेस / अनिल अंबानी की जर्मन कंपनी के साथ रक्षा क्षेत्र में नई साझेदारी, शेयर ने भरी उड़ान
अनिल अंबानी की जर्मन कंपनी के साथ रक्षा क्षेत्र में नई साझेदारी, शेयर ने भरी उड़ान
Reliance Infra की यह सफलता न केवल कंपनी के लिए, बल्कि भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Reliance Infra) के शेयरों में हाल ही में अभूतपूर्व तेजी देखी गई है. कंपनी के शेयर 11.27 प्रतिशत बढ़कर 380.50 रुपये पर बंद हुए, जो कि उनके 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर के करीब है. इस तेजी का मुख्य कारण कंपनी की तिमाही नतीजों में मुनाफा, दिवालिया प्रक्रिया पर रोक और रक्षा क्षेत्र में नई साझेदारी है. आइए इस डील के बारे में विस्तार से जानते हैं.
मेक इन इंडिया के तहत बड़ कदम
रिलायंस डिफेंस लिमिटेड ने जर्मनी की प्रमुख रक्षा कंपनी राइनमेटॉल एजी (Rheinmetall AG) के साथ साझेदारी की है. इस साझेदारी के तहत कंपनी ने 155 मिमी आर्टिलरी गोला-बारूद का स्वदेशी डिजाइन और विकास किया है. यह पहल 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के तहत भारतीय रक्षा क्षेत्र के स्वदेशीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है.
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयरों में हाल ही में आई तेजी ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार और रक्षा क्षेत्र में नई साझेदारी से कंपनी के शेयरों में और तेजी देखने को मिल सकती है.
तिमाही लाभ में अभूतपूर्व वृद्धि
जनवरी-मार्च 2025 की तिमाही में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने 4,387 करोड़ रुपये का कर पश्चात लाभ (PAT) दर्ज किया, जबकि पिछली तिमाही में उसे 3,298 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था. यह सुधार कंपनी की वित्तीय स्थिति में मजबूती का संकेत है. बता दें, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ईपीसी सेवाएं प्रदान करने और दिल्ली में बिजली वितरण के व्यवसाय में लगी हुई है. यह रक्षा क्षेत्र और मेट्रो, टोल रोड और हवाई अड्डों जैसे बुनियादी ढांचागत क्षेत्रों में परियोजनाओं को लागू, संचालित और बनाए रखने का काम करती है.
दिवालिया कार्रवाई पर रोक
इसके अलावा रिलायंस इंफ्रा की दिवालिया प्रक्रिया पर भी रोक लग गई है, इसका असर भी शेयर पर सकारात्मक पड़ा है. दरअसल, कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित किया कि नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा पारित आदेश को निलंबित कर दिया है, जिसने कंपनी को दिवाला समाधान प्रक्रिया में स्वीकार कर लिया था. एनसीएलटी ने इस साल 30 मई को यह आदेश पारित किया था.
टैग्स