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AI मानवता की सेवा के लिए है, उसका विकल्प नहीं: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत के अनुभव को ग्लोबल साउथ के लिए उपयोगी बताया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई भारत के विकास एजेंडे का अहम आधार बनेगा, लेकिन यह तकनीक पूरी तरह मानव-केंद्रित रहनी चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक का उद्देश्य इंसान की सेवा करना है, न कि उसे प्रतिस्थापित करना. प्रधानमंत्री ने यह बात India AI Impact Summit 2026 के दौरान समाचार एजेंसी एएनआई को दिए साक्षात्कार में कही. यह वैश्विक स्तर का पहला एआई शिखर सम्मेलन है, जिसकी मेजबानी ग्लोबल साउथ में भारत कर रहा है.
‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की भावना के साथ एआई विकास
पीएम मोदी ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन का आयोजन भारत की सभ्यतागत सोच ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ को दर्शाता है. सम्मेलन की थीम ‘People, Planet and Progress’ इस बात पर केंद्रित है कि एआई का उपयोग समानता और व्यापक कल्याण के लिए हो, न कि केवल नवाचार के प्रदर्शन के लिए. उन्होंने कहा, “टेक्नोलॉजी मानवता की सेवा के लिए है, उसका विकल्प बनने के लिए नहीं.”
2047 के विकसित भारत में एआई की अहम भूमिका
प्रधानमंत्री ने एआई को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा. उन्होंने इसे ‘परिवर्तनकारी अवसर’ बताते हुए कहा कि एआई पहले से ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तपेदिक और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों की शुरुआती पहचान में मदद कर रहा है.
कृषि क्षेत्र में भी एआई आधारित फसल सलाह, मिट्टी विश्लेषण और मौसम पूर्वानुमान से किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिल रही है. ग्रामीण स्कूलों में भारतीय भाषाओं में एआई-संचालित प्लेटफॉर्म छात्रों की पढ़ाई को मजबूत बना रहे हैं.
एआई में पक्षपात और विविधता की चुनौती
एआई प्रणालियों में लैंगिक, भाषाई और सामाजिक-आर्थिक पक्षपात के जोखिम को स्वीकार करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत जैसी विविधता वाले देश में केवल अंग्रेजी या शहरी डेटा पर प्रशिक्षित मॉडल ग्रामीण और क्षेत्रीय उपयोगकर्ताओं की जरूरतें पूरी नहीं कर पाएंगे.
उन्होंने बताया कि भारत विविध डाटासेट तैयार करने और निष्पक्षता पर शोध को बढ़ावा दे रहा है, ताकि एआई सभी वर्गों के लिए समान रूप से उपयोगी बने.
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से ग्लोबल साउथ को सीख
प्रधानमंत्री ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत के अनुभव को ग्लोबल साउथ के लिए उपयोगी बताया. उन्होंने कहा कि आधार और यूपीआई जैसे खुले और इंटरऑपरेबल प्लेटफॉर्म ने व्यापक समावेशन और तेज विस्तार संभव किया है.
इन बुनियादी ढांचों पर एआई की परत जोड़कर कल्याणकारी योजनाओं की बेहतर लक्ष्य-निर्धारण और सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी को और प्रभावी बनाया जा सकता है.
इंडिया एआई मिशन और बजट का समर्थन
पीएम मोदी ने बताया कि सरकार का IndiaAI Mission हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग तक पहुंच बढ़ाने और स्टार्टअप व शोध संस्थानों को समर्थन देने पर केंद्रित है. केंद्रीय बजट 2026-27 में डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए समर्थन को और मजबूत किया गया है, जिससे देश में एआई पारिस्थितिकी तंत्र को गति मिलेगी.
रोजगार पर चिंता और स्किलिंग पर जोर
नौकरियों पर संभावित प्रभाव को लेकर उठ रही चिंताओं पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास गवाह है कि तकनीकी बदलाव नए अवसर भी पैदा करते हैं. उन्होंने कौशल विकास और पुन: कौशल कार्यक्रमों पर जोर देते हुए कहा, “डर का सबसे बड़ा इलाज तैयारी है.”
आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जुड़ा एआई
एआई को आत्मनिर्भर भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत केवल एआई का उपभोक्ता नहीं, बल्कि अपने मूल्यों पर आधारित एआई प्रणालियों का निर्माता बनना चाहता है. उन्होंने लक्ष्य रखा कि भारत विश्व की शीर्ष तीन एआई शक्तियों में शामिल हो और वैश्विक सहयोग के साथ संप्रभुता और समावेशन पर आधारित एआई विकास का नेतृत्व करे.
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