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AI से विश्व की आर्थिक वृद्धि में 0.8% का इजाफा, ‘विकसित भारत’ का सपना साकार संभव: IMF प्रमुख

AI इंपैक्ट समिट में बोलते हुए जॉर्जीवा ने IMF के शोध का हवाला देते हुए कहा कि AI वैश्विक उत्पादन को बढ़ाकर कोविड-19 महामारी से पहले की वृद्धि दर के करीब ला सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने बुधवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वैश्विक आर्थिक वृद्धि को 0.8 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारत AI का प्रभावी उपयोग करे तो 2047 तक “विकसित भारत” बनने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

AI से पहले जैसी वृद्धि दर संभव

AI इंपैक्ट समिट में बोलते हुए जॉर्जीवा ने IMF के शोध का हवाला देते हुए कहा कि AI वैश्विक उत्पादन को बढ़ाकर कोविड-19 महामारी से पहले की वृद्धि दर के करीब ला सकता है. उन्होंने कहा, “हमारे अनुमान के अनुसार, AI वैश्विक वृद्धि को लगभग 0.8 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है.”

जॉर्जीवा ने बताया कि तेज वृद्धि व्यापक आर्थिक अवसर पैदा करेगी, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी निर्माण और उत्पादकता में इजाफा होगा. उन्होंने कहा कि भारत के लिए AI के संभावित लाभ बहुत महत्वपूर्ण हैं और यह देश के दीर्घकालिक विकास रोडमैप के अनुरूप है.

विकसित भारत और 30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

भारत ने 2047 तक विकसित देश बनने का लक्ष्य रखा है, जो स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने के साथ मेल खाता है, और साथ ही 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की महत्वाकांक्षा भी है. जॉर्जीवा ने कहा कि AI-प्रेरित दक्षता, नवाचार और कौशल विकास इस दृष्टि को साकार करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

नौकरी बाजार में जोखिम

साथ ही IMF प्रमुख ने चेतावनी दी कि AI के तेज़ी से अपनाने से वैश्विक श्रम बाजार में व्यवधान हो सकता है. उन्होंने कहा, “जोखिम बहुत अधिक है. हम AI के प्रभाव को सुनामी के समान देखते हैं,” और चेताया कि दुनिया भर में लगभग 40 प्रतिशत नौकरियां AI से प्रभावित हो सकती हैं.

जॉर्जीवा ने क्षेत्रीय असमानताओं की ओर ध्यान दिलाया और कहा कि उभरते बाजार वैश्विक औसत के समान स्तर का संकट देख सकते हैं, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह 60 प्रतिशत तक हो सकता है.

सरकारी नीतियों की आवश्यकता

उन्होंने सरकारों से आग्रह किया कि वे संभावित नौकरी हानि को कम करने के लिए पुनःकौशल (reskilling) और सामाजिक सुरक्षा उपायों में निवेश करें. उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा, कार्यबल अनुकूलन और जिम्मेदार AI लागू करने वाली नीतियां बेहद महत्वपूर्ण होंगी.

जॉर्जीवा की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब विश्व स्तर पर AI के आर्थिक प्रभावों पर बहस तेज हो रही है, और नीति निर्माता उत्पादकता बढ़ोतरी को रोजगार हानि और असमानता की चिंताओं के साथ संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं.

 


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