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सबकुछ तो ठीक चल रहा था फिर Swiggy ने क्यों बदल लिया अपना नाम, आखिर क्या रही वजह?

फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी की प्रतियोगी कंपनी जोमैटो पहले से स्टॉक मार्केट में लिस्ट है. अब स्विगी भी लिस्ट होना चाहती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी (Swiggy) ने अपना नाम बदला लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बन गई है. इससे पहले फरवरी में बेंगलुरु स्थित इस कंपनी ने अपना रजिस्टर्ड नाम बंडल टेक्नोलॉजीज (Bundl Technologies Pvt Ltd ) से बदलकर स्विगी प्राइवेट लिमिटेड (Swiggy Pvt Ltd) किया था. स्विगी ने ऐसा इसलिए किया था ताकि कंपनी के कॉर्पोरेट नाम को पहचान स्थापित करने में मदद मिल सके. अब एक बार फिर उसने नाम बदल किया है. 

आवश्यक प्रक्रिया का हिस्सा
दरअसल, स्विगी अपना आईपीओ लाने की तैयारी में है. इसी के मद्देनजर उसने खुद को प्राइवेट लिमिटेड से पब्लिक लिमिटेड कंपनी बनाया है. आईपीओ लाने के लिए ऐसा करना कंपनी के नियमानुसार आवश्यक था. स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने की इच्छा रखने वाली किसी भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सार्वजनिक कंपनी में परिवर्तित होना पड़ता है, ये एक आवश्यक प्रक्रिया है. माना जा रहा है कि स्विगी का आईपीओ इसी साल आ सकता है. Swiggy की प्रतियोगी कंपनी जोमैटो पहले से ही बाजार में लिस्ट है.

कितना होगा आईपीओ का साइज?
स्विगी अगले कुछ महीनों में IPO के लिए जरूरी ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल कर सकती है. कंपनी 1 बिलियन डॉलर के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) की योजना बना रही है. पिछले साल, Ola Electric, FirstCry और Awfis ने भी अपने ड्राफ्ट आईपीओ पेपर बाजार नियामक SEBI के समक्ष प्रस्तुत किए थे. जबकि ब्यूटी एवं पर्सनल केयर ब्रैंड मामाअर्थ की मूल कंपनी, होनासा कंज्यूमर पिछले साल नवंबर में लिस्ट हुई थी. ओला इलेक्ट्रिक के आईपीओ का भी काफी समय से इंतजार किया जा रहा है, लेकिन अभी तक कंपनी ने इसके लिए कोई डेट फाइनल नहीं की है.

कैसी है Swiggy की आर्थिक सेहत?
कंपनी की आर्थिक सेहत खास अच्छी नहीं रही है. कंपनी आईपीओ से पहले वित्तीय तौर पर मजबूत होने की कोशिशों में लगी है. इसी के तहत लागत कम करने के लिए छंटनी जैसे कदम भी उठाए गए हैं. इसी साल जनवरी में Swiggy द्वारा 400 कर्मचारियों को निकालने की बात सामने आई थी. अक्सर कंपनियां आईपीओ से पहले अपनी बैलेंसशीट मजबूत करना चाहती हैं, ताकि इन्वेस्टमेंट से पहले निवेशकों के मन में कंपनी की आर्थिक सेहत को लेकर कोई शंका न रहे. अगर कंपनी घाटे वाली बैलेंसशीट के साथ आईपीओ लाती है, तो निवेशकों के उससे दूरी बनाने की आशंका बनी रहती है. 

Ola इलेक्ट्रिक का भी बदला नाम
पिछले साल ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) ने भी खुद को प्राइवेट लिमिटेड से पब्लिक लिमिटेड में बदल लिया था. इस संबंध में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा एक प्रमाणपत्र जारी किया गया था, जिसमें लिखा था - ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड को कंपनी अधिनियम 1956 के तहत 3 फरवरी 2017 को मान्यता दी गई थी. अब उसे कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 18 के तहत सार्वजनिक कंपनी में परिवर्तित किया गया है. ओला इलेक्ट्रिक आईपीओ के जरिये अपनी भविष्य की योजनाओं के लिए फंड जुटाना चाहती है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आईपीओ से मिले फंड से कंपनी को टेक्नोलॉजी में निवेश करने में मदद मिलेगी. इसके अलावा प्रतिस्पर्धी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए आवश्यक पूंजी लगा पाएगी. 


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