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चीन से तकनीक फेल होने के बाद रिलायंस ने भारत में बैटरी सेल योजना पर लगाई ब्रेक : रिपोर्ट

चीनी तकनीक हस्तांतरण पर बढ़ी सख्ती ने भारतीय कंपनियों की योजनाओं को प्रभावित किया है और इससे देश की ग्रीन एनर्जी रणनीति के सामने नई चुनौतियां खड़ी हुई हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago

मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने लिथियम-आयन बैटरी सेल्स का भारत में निर्माण शुरू करने की योजना को स्थगित कर दिया है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम उस समय आया जब चीन के सप्लायर से तकनीक हासिल करने में विफलता मिली, जो देश के स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बनाने के प्रयासों के लिए चुनौतियों को उजागर करता है.

चीन की तकनीक हस्तांतरण में रुकावट

रिलायंस इस साल सेल निर्माण शुरू करने की योजना बना रही थी और चीन की कंपनी Xiamen Hithium Energy Storage Technology के साथ लिथियम-आयरन फॉस्फेट सेल तकनीक का लाइसेंस लेने पर चर्चा कर रही थी. रिपोर्ट के अनुसार, ये बातचीत तब ठहर गई जब चीनी कंपनी ने चीन में विदेशी स्वच्छ ऊर्जा तकनीक के निर्यात पर कड़े प्रतिबंधों के बीच तकनीक साझा करना रोक दिया.

BESS निर्माण पर ध्यान

इसके परिणामस्वरूप, रिलायंस ने ध्यान बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को असेंबल करने की ओर स्थानांतरित कर दिया है, जो कि कंपनी की अपनी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों को घर में जोड़ते हैं, बजाय इसके कि सेल्स का स्थानीय उत्पादन किया जाए.

भारतीय कंपनियों के लिए चुनौतियां

चीन ने रणनीतिक लाभ बनाए रखने के लिए स्वच्छ ऊर्जा तकनीक के निर्यात पर कड़ी निगरानी बढ़ा दी है, जिससे विदेशी निर्माताओं के लिए स्थानीयकरण प्रयास जटिल हो गए हैं. रिलायंस का अनुभव उस बड़ी चुनौती को दर्शाता है जिसका सामना भारतीय कंपनियों को करना पड़ सकता है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करने की उम्मीद की जाती हैं.

रिलायंस का आधिकारिक बयान

रिलायंस के एक प्रवक्ता ने ब्लूमबर्ग को बताया कि कंपनी की कुल ऊर्जा भंडारण योजनाओं में कोई बदलाव नहीं हुआ है. उन्होंने ईमेल में कहा, “BESS निर्माण, बैटरी पैक निर्माण और सेल निर्माण हमेशा हमारी योजनाओं का हिस्सा रहे हैं और हम उनके कार्यान्वयन में अच्छी प्रगति कर रहे हैं.” उन्होंने Xiamen Hithium के साथ हुई बातचीत पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. चीनी कंपनी ने टिप्पणी के लिए अनुरोध का जवाब नहीं दिया.

अंबानी की घोषणा और भविष्य की योजना

अंबानी ने अगस्त में शेयरधारकों को बताया था कि रिलायंस का बैटरी गीगाफैक्ट्री 2026 में संचालन शुरू करेगा. हालांकि इस स्थगन से तुरंत वित्तीय प्रभाव की संभावना नहीं है, क्योंकि अधिकांश राजस्व अभी भी रिफाइनिंग और उपभोक्ता व्यवसायों से आता है, लेकिन यह समूह के महत्वाकांक्षी ग्रीन एनर्जी प्रयासों में कार्यान्वयन जोखिम बढ़ाता है.

गीगाफैक्ट्री और निवेश योजना

रिलायंस ने 2021 में जीवाश्म ईंधन से दूर जाने के लिए 10 अरब डॉलर के निवेश के हिस्से के रूप में चार गीगाफैक्ट्री बनाने की योजना की घोषणा की थी. आंतरिक आकलनों के अनुसार, यदि बिना प्रमाणित चीनी सेल तकनीक के आगे बढ़ा गया तो लागत और परियोजना के कार्यान्वयन से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर बैटरियों की अधिक आपूर्ति मौजूद है.


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