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सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद ट्रंप ने लगाया नया 10% टैरिफ, आपात व्यापार शक्तियों का सहारा
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि 1974 के कानून के तहत लगाए गए नए टैरिफ को भी अदालत में चुनौती दी जा सकती है. यह देखना अहम होगा कि प्रशासन “मौलिक अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं” के अपने दावे को किस तरह साबित करता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक आयात पर लगाए गए अपने व्यापक टैरिफ को सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक ठहराए जाने के तुरंत बाद नई 10 प्रतिशत अस्थायी आयात शुल्क व्यवस्था लागू कर दी है. इस कदम के साथ ही राष्ट्रपति और न्यायपालिका के बीच शक्तियों की सीमा को लेकर नया कानूनी और राजनीतिक टकराव शुरू हो गया है.
सुप्रीम कोर्ट का 6-3 का ऐतिहासिक फैसला
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of the United States) ने 6-3 के बहुमत से दिए गए ऐतिहासिक फैसले में कहा कि राष्ट्रपति ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर व्यापक टैरिफ लगाकर अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण किया है.
मुख्य न्यायाधीश John Roberts ने बहुमत का फैसला लिखते हुए अमेरिकी संविधान का हवाला दिया, जिसमें कर और शुल्क लगाने का अधिकार स्पष्ट रूप से कांग्रेस को दिया गया है. अदालत ने माना कि राष्ट्रपति द्वारा अपनाया गया कानूनी आधार इस तरह के व्यापक टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता.
IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ को झटका
ट्रंप ने अपने वैश्विक टैरिफ अभियान के लिए International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का सहारा लिया था. उनका तर्क था कि राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर वे “असीमित राशि, अवधि और दायरे” के टैरिफ लगा सकते हैं.
हालांकि अदालत ने इस व्याख्या को खारिज कर दिया और कहा कि यह कानून इतने व्यापक आयात शुल्क लगाने की अनुमति नहीं देता. इस फैसले से उन लगभग 175 अरब डॉलर की राशि पर भी सवाल खड़ा हो गया है, जो अब तक अमेरिकी आयातकों से वसूली जा चुकी है.
ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया
फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में कुछ न्यायाधीशों की आलोचना की और कहा कि वे देश के हित में “साहसिक फैसला” लेने में विफल रहे. उन्होंने बिना सबूत यह भी आरोप लगाया कि बहुमत विदेशी हितों से प्रभावित था.
इसके साथ ही उन्होंने अदालत द्वारा निरस्त किए गए टैरिफ को औपचारिक रूप से रद्द करते हुए वैकल्पिक कानूनी रास्ता अपनाने की घोषणा कर दी.
1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का इस्तेमाल
ट्रंप ने Trade Act of 1974 की धारा 122 के तहत नया कदम उठाया है. यह प्रावधान राष्ट्रपति को “मौलिक अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं” से निपटने के लिए अधिकतम 15 प्रतिशत तक का टैरिफ 150 दिनों के लिए लगाने की अनुमति देता है.
राष्ट्रपति की घोषणा के तहत अधिकांश आयात पर 10 प्रतिशत का टैरिफ 150 दिनों के लिए लागू किया गया है. हालांकि महत्वपूर्ण खनिज, धातु और ऊर्जा उत्पादों को इससे छूट दी गई है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस धारा का इस तरह इस्तेमाल पहले किसी राष्ट्रपति ने नहीं किया है.
कांग्रेस से टकराव की आशंका
कानून के अनुसार, 150 दिनों से आगे टैरिफ बढ़ाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी. ऐसे में आने वाले महीनों में व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच टकराव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उन व्यापार समझौतों पर भी अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिन्हें ट्रंप प्रशासन ने हाल के महीनों में उच्च टैरिफ की धमकी के बीच बातचीत के जरिए तय किया था. अब जब टैरिफ का कानूनी आधार सीमित हो गया है, तो अन्य देश इन समझौतों की वैधता और स्थायित्व की समीक्षा कर सकते हैं.
शक्तियों के बंटवारे पर संवैधानिक बहस
इस पूरे विवाद के केंद्र में संविधान के तहत शक्तियों के पृथक्करण का प्रश्न है. हालांकि कांग्रेस ने वर्षों में व्यापार नीति के कुछ अधिकार कार्यपालिका को सौंपे हैं, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया है कि कर लगाने जैसे मूल अधिकारों की सीमाएं हैं.
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि 1974 के कानून के तहत लगाए गए नए टैरिफ को भी अदालत में चुनौती दी जा सकती है. यह देखना अहम होगा कि प्रशासन “मौलिक अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं” के अपने दावे को किस तरह साबित करता है.
फिलहाल, यह फैसला न्यायपालिका द्वारा राष्ट्रपति की व्यापार नीति पर लगाया गया एक महत्वपूर्ण अंकुश माना जा रहा है. हालांकि वैकल्पिक कानूनी प्रावधानों के इस्तेमाल से यह भी स्पष्ट हो गया है कि अमेरिकी व्यापार कानूनों के तहत राष्ट्रपति के पास अभी भी पर्याप्त लचीलापन मौजूद है, और वैश्विक व्यापार को लेकर टकराव का दौर फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा है.
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