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सस्ते हुए प्रोडक्ट्स, बढ़ी पेमेंट की झंझट : FMCG कंपनियों की नई चुनौती

GST दरों में कटौती उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर जरूर है, लेकिन इसका व्यावहारिक असर मूल्य निर्धारण में असमानता और भुगतान की जटिलता के रूप में सामने आ रहा है.

रितु राणा 11 months ago

देशभर में हाल ही में लागू हुई नई जीएसटी दरों के बाद एफएमसीजी कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतें घटा दी हैं. लेकिन इससे एक नई समस्या खड़ी हो गई है, जिन प्रोडक्ट्स की कीमतें पहले ₹1, ₹2 और ₹5 जैसे आसान आंकड़ों में होती थीं, अब वे अजीब कीमतों जैसे ₹4.45, ₹1.77 या 88 पैसे में बिक रही हैं. इससे ग्राहकों और दुकानदारों दोनों को भुगतान में दिक्कत हो रही है क्योंकि एक रुपये से कम के सिक्के अब चलन में नहीं हैं. इसे लेकर कंपनियां की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई हैं, तो चलिए जानते हैं उनका क्या कहना है?

पारले-जी ने दो दशक बाद बदली कीमत

भारत के सबसे लोकप्रिय बिस्किट ब्रांड पारले-जी ने करीब 20 साल में पहली बार अपने सबसे छोटे पैक की कीमत घटाई है. पहले यह पैक ₹5 में मिलता था, अब इसकी नई कीमत ₹4.45 हो गई है. पारले प्रोडक्ट्स के वाइस प्रेसिडेंट मयंक शाह ने बताया “शुरुआत में थोड़ा असर जरूर पड़ेगा, लेकिन उम्मीद है कि ग्राहक UPI जैसे डिजिटल पेमेंट माध्यमों से पूरा भुगतान करेंगे या फिर बड़ा पैक खरीदेंगे. हम सरकार से यह स्पष्टता चाहते हैं कि क्या टैक्स में कटौती का फायदा हम वजन बढ़ाकर दे सकते हैं.”

कैडबरी, ओरियो और 5 स्टार भी सस्ते, लेकिन असामान्य कीमतों पर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोंडलेज इंडिया, जो कैडबरी और ओरियो जैसे ब्रांड्स बनाती है, उसने भी कीमतें घटाई हैं. जैसे बॉर्नविटा अब ₹30 के बजाय ₹26.69, ओरियो बिस्किट ₹10 के बजाय ₹8.90 और 5 स्टार और जेम्स का ₹20 वाला पैक अब ₹17.80 में मिलेगा. मोंडलेज ने अपने डीलरों और वितरकों को सूचित किया है कि नई एमआरपी में जीएसटी लाभ शामिल है, और उन्हें यह लाभ ग्राहकों तक पहुंचाना होगा.

नेस्ले ने दिखाया संतुलन: कीमत भी कम, वजन भी बढ़ाया

कुछ कंपनियों ने इस दुविधा से निपटने का व्यावहारिक तरीका अपनाया है. नेस्ले इंडिया ने अपने कई उत्पादों की कीमतों में कटौती की है और साथ में वजन भी बढ़ाया है. 30 रुपये वाले वेज आटा नूडल्स अब ₹28, ₹120 वाला मैगी नूडल्स पैक अब ₹116 में (वजन 560g से 600g),  ₹190 की मैगी केचप अब ₹178 और किटकैट की कीमत ₹35 से घटाकर ₹30 कर दी गई है.

उद्योग जगत की मिली-जुली प्रतिक्रिया

GST दरों में कटौती को लेकर उद्योग जगत में मिश्रित लेकिन आशान्वित प्रतिक्रिया देखी गई है. एक ओर कंपनियां सरकार के इस कदम का स्वागत कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर व्यावहारिक समस्याएं, खासकर मूल्य निर्धारण और ग्राहकों तक लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को लेकर कुछ चिंताएं भी जाहिर की गई हैं. 

1. केल्लानोवा इंडिया के एमडी, प्रशांत पेरेस ने कहा “इन अजीब कीमतों की वजह से इंडस्ट्री को परेशानी हो रही है. शॉर्ट टर्म में कीमतें कम रहेंगी, लेकिन लॉन्ग टर्म में हम वजन बढ़ाकर फिर से पुरानी कीमतों पर लौटेंगे.”

2. डेलॉइट इंडिया के पार्टनर हार्दिक गांधी ने कहा "एफएमसीजी कंपनियाँ जीएसटी दर में बदलाव के चलते मूल्य-बिंदु वाले उत्पादों पर संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं. ₹5, ₹10 या ₹20 जैसे मूल्य बिंदुओं पर एमआरपी बदलना मुश्किल होता है, इसलिए कई कंपनियाँ उसी कीमत पर पैक की मात्रा बढ़ा रही हैं. इससे उपभोक्ताओं को जीएसटी का लाभ मिल जाता है, जबकि उनकी कीमत संबंधी अपेक्षाएँ भी बनी रहती हैं. कुछ कंपनियाँ सीधे एमआरपी घटाकर भी फायदा पहुँचा रही हैं. उपभोक्ताओं को जानकारी देने के लिए विज्ञापन, वेबसाइट और डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क का सहारा लिया जा रहा है. हालांकि, पहले से छपे पैकेजिंग स्टॉक में मात्रा बढ़ाने पर नए नेट वेट की जानकारी देना जरूरी होता है, जो लीगल मेट्रोलॉजी नियमों के तहत एक चुनौती है. हालांकि एमआरपी में बदलाव के लिए कुछ रियायतें मौजूद हैं."

3. डीएस ग्रुप की कन्फेक्शनरी बिजनेस हेड ज्योति रूप बड़ुआ ने कहा कि GST 2.0 का कदम भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल बनाने की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक निर्णय है. उन्होंने कहा “हम सरकार की इस पहल का स्वागत करते हैं. यह न केवल पारदर्शिता को बढ़ावा देगा, बल्कि अनुपालन को भी आसान बनाएगा. इससे उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ेगी और आवश्यक वस्तुएं पहले की तुलना में सस्ती और अधिक सुलभ होंगी. एफएमसीजी सेक्टर के लिए यह एक ‘विन-विन’ स्थिति है.” उनके अनुसार, डीएस ग्रुप पहले से ही इस परिवर्तन को लागू करने की दिशा में कदम उठा चुका है और वह पूरी तरह से सरकार की मंशा के साथ खड़ा है.

4. समुद्री खाद्य उद्योग की ओर से, Dam Good Fish Co.के संस्थापक शैलेश पटेल ने इस परिवर्तन को गेम-चेंजर बताया. उन्होंने कहा कि टैक्स दरों में कटौती से सप्लाई चेन के हर स्तर पर लागत घटेगी, जिससे उपभोक्ताओं तक गुणवत्ता वाले प्रोटीन को किफायती दाम पर पहुंचाना संभव होगा. शैलेश का मानना है कि इस फैसले से न केवल मछुआरा समुदायों को आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी. “12% से घटाकर 5% टैक्स करने से पूरे सेक्टर को मजबूती मिलेगी और हम अधिक स्वच्छ, टिकाऊ और सस्ती सीफ़ूड उपलब्ध करवा सकेंगे.”

5. पर्सनल केयर और स्किनकेयर के क्षेत्र से जुड़ी CITTA कंपनी के COO और सह-संस्थापक तनय शर्मा ने बताया कि कम कीमत वाले उत्पादों पर बदलावों को लागू करना आसान नहीं है. उन्होंने कहा  “GST में आई राहत उपभोक्ताओं के लिए तो अच्छी है, लेकिन कंपनियों के लिए मूल्य निर्धारण में बहुत सतर्कता की जरूरत है. खासकर तब, जब उत्पादों की कीमतें दशमलव में जाती हैं, जैसे ₹1.77, ₹4.45 आदि. इससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं. इसलिए हम कीमतों को राउंड ऑफ करने पर विचार कर रहे हैं, ताकि ब्रांड की पारदर्शिता और ग्राहक का भरोसा बना रहे.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सिर्फ अनुपालन का मुद्दा नहीं, बल्कि ब्रांड की विश्वसनीयता और मूल्य-समर्पण का विषय है.

6. FMCG उत्पादों की एक बड़ी कंपनी विप्रो कंज्यूमर केयर के सीईओ नीरज खत्री ने कहा “हमने GST दरों में बदलाव के लागू होते ही 40 मिनट के भीतर नई MRP वाले उत्पादों की इनवॉइसिंग शुरू कर दी थी. यह सुनिश्चित करने के लिए हमने अपने चैनल पार्टनर्स के साथ पूरा सिस्टम पहले से तैयार रखा था, ताकि उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके.” नीरज ने यह भी बताया कि कंपनी अपने सभी वितरण चैनलों पर नजर रख रही है ताकि यह तय हो सके कि GST का लाभ वास्तव में अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचे.


 


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