होम / बिजनेस / Google को लेकर CCI के फैसले के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया नया आदेश, जानिए क्या है ये?
Google को लेकर CCI के फैसले के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया नया आदेश, जानिए क्या है ये?
गूगल प्ले स्टोर को लेकर लाई गई नई बिलिंग पॉलिसी पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है, अब दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर एक अहम फैसला सुनाया है.
ललित नारायण कांडपाल 3 years ago
गूगल के प्लेस्टोर विवाद को लेकरभारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India) के पेनल्टी लगाने के बाद अब इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी एक नया निर्णय सुनाया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वो अगर गूगल के प्ले स्टोर को लेकर लगाए गए नए फेयर बाजार की स्वस्थ प्रतियोगिता के खिलाफ है तो ऐसे में सीसीआई उसकी सुनवाई कर सकता है. हाईकोर्ट ने ये फैसला गूगल द्वारा प्ले स्टोर को लेकर लगाए गए नए बिलों को लेकर एलायंस ऑफ डिजिटल इंडिया फाउंडेशन की याचिका पर ये फैसला सुनाया है. याचिका कर्ता का कहना है कि सीसीआई को इस पर 26 अप्रैल से पहले निर्णय लेना चाहिए.
आदेश पर क्या है AIDF की प्रतिक्रिया
दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए AIDF (Alliance of Digital India Foundation) ने कहा कि सीसीआई को इस नीति पर 26 अप्रैल तक निर्णय लेना चाहिए। अगर वो 26 अप्रैल तक इस पर निर्णय नहीं लेते हैं तो उन्हें उसे स्थगित कर देना चाहिए. अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो ये हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा.
क्या है ये पूरा विवाद
दरअसल गूगल की एप स्टोर को लेकर नई बिलिंग पॉलिसी को लेकर AIDF के नेतृत्व में स्टार्टअप ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है. गूगल की ये नई पॉलिसी 26 अप्रैल से शुरू होने जा रही है. इसके तहत इस पर 11-26 प्रतिशत तक का कमिशन लगाया गया है जिसे यूजर यूपीआई जैसे माध्यमों से पेमेंट कर चुका सकते हैं. लेकिन अगर ये पेमेंट Google play के बिलिंग सिस्टम के माध्यम से किया जाता है तो इस पर 15-30% तक का शुल्क लगाया जाता है. एडीआईएफ ने तर्क दिया कि यह अनुचित है कि डेवलपर्स को अधिक सेवा शुल्क का भुगतान करने के लिए कहा जा रहा है, भले ही वे Google Play बिलिंग सिस्टम का उपयोग नहीं कर रहे हों. फाउंडेशन ने तर्क दिया कि नई बिलिंग नीति 15-30% के पिछले कमीशन सिस्टम से बेहतर नहीं है. याचिकाकर्ता का कहना है कि अगर आप गूगल प्ले से पेमेंट नहीं करते हैं तो इतना हाई चार्ज नहीं लगाया जाना चाहिए. उसमें ये भी कहा गया है कि ये पिछली बिलिंग पॉलिसी से बेहतर नहीं है जिसमें 15-30 प्रतिशत का चार्ज लगाया जाता था. याचिकाकर्ता का कहना है कि सीसीआई को इस पर निर्णय लेना चाहिए अगर नहीं लेते हैं तो मौजूदा हालात को बनाए रखा जाना चाहिए.
क्या कहता है गूगल
वहीं दूसरी ओर गूगल का कहना है कि 97 प्रतिशत ऐसे डेवलपर हैं जो बिना किसी शुल्क के अपनी सेवाएं मुहैया कराते हैं. इनमें से 99 प्रतिशत ऐसे लोग हैं जो 15 प्रतिशत से नीचे की फीस को आसानी से दे सकते हैं. बाकी एक प्रतिशत जो भी लोग हैं जिनका रेवेन्यू 1 मिलियन डॉलर है वो उन्हें 30 प्रतिशत देना पड़ता है. गूगल पहले ही कह चुका है कि इस याचिका में जो कहा गया है कि ये सिस्टम आवश्यकता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है वो सही नहीं है. ASG (Attorney solicitor general of india) एन वेंकटरमन ने सीसीआई की ओर से कहा है कि कोरम में नए सदस्य की नियुक्ति प्रक्रियाधीन है.
गूगल पर लग चुका है जुर्माना
सही प्रतिस्पर्धा के नियमों का पालन न करने को लेकर गूगल के इसी एप स्टोर विवाद में उस पर अब सीसीआई की ओर से बड़ा जुर्माना लगाया जा चुका है. सीसीआई ने गूगल को दोषी पाते हुए उस पर 936 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है.
टैग्स