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आखिर साल के अंत में ब्‍याज दरों में कमी की क्‍यों जताई जा रही है संभावना? 

अभी अप्रैल के पहले सप्‍ताह में हुई RBI की मौद्रिक नीति की बैठक के गुरुवार को मिनट्स ऑफ मीटिंग जारी हुए हैं जिसका अध्‍ययन करने के बाद जानकार इसकी संभावना जता रहे हैं. 

ललित नारायण कांडपाल 3 years ago

कल जारी हुए आरबीआई की अंतिम मीटिंग के मिनट्स ऑफ मीटिंग जारी होने के बाद अलग-अलग जानकार इसका अपने तरह से अध्‍ययन कर रहे हैं. कुछ का मानना है कि आरबीआई ने जो कदम उठाए है वो आने वाले दिनों में उसके नतीजों पर निगाह बनाए रखना चाह रहा है तो वहीं दूसरी ओर कुछ जानकारों का मानना है इनके अध्‍ययन के बाद लग ऐसा रहा है कि साल के अंत तक ब्‍याज दरों में कटौती हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो निश्चित तौर से बाजार में जारी उच्‍च ब्‍याज दरों से आम आदमी को राहत मिल सकती है. 

साल के अंत में हो सकती है कटौती 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा समय में भारत में उधार की लागत शायद चरम पर है, ऐसे में केंद्रीय बैंक वर्ष के अंत तक ब्‍याज दरों में कटौती शुरू कर सकता है. ऐसा कई जानकारों का मानना है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इनमें बार्कलेज बैंक पीएलसी और नोमुरा होल्डिंग्स इंक मानते हैं कि रिजर्व बैंक आने वाले दिनों में भी ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी को विराम दे सकता है उनका मानना है कि जब भी ब्‍याज दरें ज्‍यादा होती हैं तो वो अर्थव्यवस्था में मांग पर भार डालती हैं. इसी तरह नोमुरा के अर्थशास्त्री ऑरोदीप नंदी और सोनल वर्मा मानती हैं कि नीतिगत ठहराव इस अक्टूबर से शुरू होने वाली दरों में कटौती की दिशा में एक रास्ता बन सकते हैं. उनका यहां तक मानना है कि मार्च तक 75 आधार अंकों की दर में कटौती का अनुमान लगाया जा रहा है. उनका ये भी कहना है कि हम वैश्विक मंदी के प्रभाव के कारण मंदी की उम्मीद करते हैं, जिसका असर घरेलू नीति पर पड़ने वाले प्रभाव से भी जुड़ा हुआ है. 

सर्वसम्‍मति से लिया था स्थिर रखने का फैसला 
अप्रैल के शुरुआती सप्‍ताह में भारतीय रिज़र्व बैंक की छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने बेंचमार्क नीति दर को 6.50% पर ही रखने के लिए सर्वसम्मति से मतदान किया था.  लेकिन गवर्नर शक्तिकांत दास ने आगाह किया कि यह अभी तक कटौती की ओर नहीं है क्योंकि मुद्रास्फीति के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. उन्‍होंने ये भी कहा कि आने वाले दिनों में इस पर नजर रखने की जरूरत है. जबकि मार्च में तीन महीनों में पहली बार खुदरा मुद्रास्फीति अपने 2% -6% लक्ष्य बैंड के भीतर रही है जबकि  अनिश्चित मौसम, जो फसलों और ईंधन की कीमतों को नुकसान पहुंचा सकता है. 

गिरावट के बीच मुश्किल होगी बढ़ोतरी 
वहीं एक दूसरे जानकार का कहना है कि अर्थशास्त्री समीरन चक्रवर्ती और बकर मुर्तजा जैदी ने एक नोट में लिखा है कि अगर धीरे-धीरे महंगाई दरों में कमी का दौर जारी रहता है तो रिजर्व बैंक के लिए दरों में बढ़ोतरी का विकल्प चुनना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि वर्ष के शुरुआत में विकास को लेकर भी कुछ जोखिम भी पैदा हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि अब कोई भी दर वृद्धि बाजारों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं होगी. 
 


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