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5 साल बाद Tata Group से आने वाली है ऐसी खबर, खिल जाएंगे सैकड़ों चेहरे!  

डिविडेंड के लिए किसी भी फाइनेंशियल ईयर में मुनाफा होना जरूरी है. टाटा मोटर्स को इस बार मुनाफा हुआ है, इसलिए कंपनी अपने इन्वेस्टर्स को खुशखबरी देते हुए डिविडेंड का ऐलान कर सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

टाटा ग्रुप (Tata Group) की ऑटो कंपनी टाटा मोटर्स (Tata Motors) अपने निवेशकों को बड़ी खुशखबरी देने जा रही है. दरअसल, वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में कंपनी को 3,043 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था. लिहाजा रतन टाटा की यह कंपनी अपने निवेशकों को भी इसका कुछ फायदा देना चाहती है और इसलिए उसने डिविडेंड (Dividend) देने का मन बना लिया है. Tata Motors की बोर्ड मीटिंग 12 मई को होनी है, इस बैठक में निर्णय लिया जाएगा कि डिविडेंड कितना और कब देना है.

2016 में हुई थी आखिरी घोषणा 
बीते 5 सालों में यह पहला मौका होगा जब टाटा मोटर्स अपने शेयरधारकों को डिविडेंड का ऐलान करेगी. इससे पहले वित्त वर्ष 2016 में कंपनी ने निवेशकों को डिविडेंड दिया था. इसके बाद लगातार घाटे के चलते कंपनी ने डिविडेंड नहीं दिया. वैसे, अकेले टाटा ही नहीं, कई कंपनियां निवेशकों को डिविडेंड देने वाली हैं, क्योंकि उनके तिमाही नतीजे अच्छे रहे हैं. कुछ ने इसका ऐलान भी कर दिया है. पब्लिक सेक्टर के यूनियन बैंक ने भी बेहतर तिमाही परिणामों के बाद डिविडेंड देने की घोषणा की है.  

क्या होता है Dividend?
डिविडेंड के लिए किसी भी फाइनेंशियल ईयर में मुनाफा होना जरूरी है. टाटा मोटर्स को इस बार मुनाफा हुआ है, इसलिए कंपनी अपने इन्वेस्टर्स को खुशखबरी देते हुए डिविडेंड का ऐलान कर सकती है. चलिए ये भी जान लेते हैं कि आखिर डिविडेंड क्या होता है? दरअसल, डिविडेंड एक तरह का पेमेंट है जो कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स को करती है. दूसरे शब्दों में कहें तो हर कंपनी मुनाफा कमाने के लिए काम करती है. कई कंपनियां अपने मुनाफे में अपने शेयरहोल्डर्स को भी हिस्सेदारी मानती हैं, ऐसे में जब कोई कंपनी साल भर में कमाए गए अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा शेयरहोल्डर्स में बांटती है तो उसे ही डिविडेंड कहते हैं. हालांकि कई बार ऐसे भी होता है कि कंपनियां मुनाफे की बजाय सरप्लस कैश से भी शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड बांटती हैं. 

क्या हर कंपनी देती है डिविडेंड?
कंपनियों के लिए डिविडेंड देना जरूरी नहीं होता है, क्योंकि इससे कंपनियों को कुछ हासिल नहीं होता, सिवाय शेयरहोल्डर्स की खुशी और भरोसे के. इसलिए कंपनी चाहे तो वो अपने मुनाफे में से एक भी पैसा शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड के रूप में न दे. अक्सर देखा गया है कि छोटी-छोटी कंपनियां या जिन्होंने अभी अभी अपना काम शुरू किया है वो कंपनियों डिविडेंड नहीं देती हैं. क्योंकि वो अपने मुनाफे को शेयरहोल्डर्स को देने की बजाय वापस बिजनेस के विस्तार और ग्रोथ में लगा देती हैं. जो कंपनियां डिविडेंड देती हैं वो आमतौर पर पूरी तरह से स्थापित और बड़ी कंपनियां होती हैं, लेकिन हर बड़ी कंपनी डिविडेंड दे ये भी जरूरी नहीं. 

कैसे मिलता है डिविडेंड?
कंपनी जो भी डिविडेंड जारी करती है वो फेस वैल्यू पर होता है. फेस वैल्यू किसी भी शेयर की एक नॉमिनल वैल्यू होती है, जो कुछ खास मौकों को छोड़ दें तो कभी नहीं बदलती. डिविडेंड कैसे मिलता है जरा इसको समझते हैं. मान लीजिए कोई कंपनी है XYZ, इसके एक शेयर की कीमत है 2000 रुपये. डिविडेंड के लिए फेस वैल्यू है 10 रुपये है. कंपनी ने अगर 400 परसेंट का डिविडेंड घोषित किया है तो डिविडेंड होगा फेस वैल्यू का 400 परसेंट  यानी 40 रुपये. 
 


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