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अफोर्डेबल हाउसिंग बनेगा अगला ग्रोथ इंजन, नीति आयोग ने खोले टैक्स और फंडिंग के रास्ते

नीति आयोग का यह प्रस्तावित रोडमैप अगर लागू होता है, तो आने वाले वर्षों में देश में किफायती आवास की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago

देश में करोड़ों लोगों के लिए अपने घर का सपना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो सकता है. नीति आयोग ने किफायती आवास को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें बिल्डर्स और घर खरीदारों दोनों के लिए टैक्स छूट, सस्ते लोन और स्टांप ड्यूटी में राहत जैसे कई बड़े वित्तीय प्रोत्साहनों का सुझाव दिया गया है. इसका मकसद है तेजी से बढ़ती शहरी आबादी की जरूरतों को पूरा करना और सस्ते घरों की उपलब्धता बढ़ाना.

2050 तक आधी आबादी शहरों में रहेगी

नीति आयोग के मुताबिक, साल 2050 तक भारत की शहरी आबादी बढ़कर करीब 50 प्रतिशत यानी लगभग 85 करोड़ हो सकती है. जबकि 2021 में यह आंकड़ा करीब 35 प्रतिशत या 50 करोड़ के आसपास था. ऐसे में आने वाले वर्षों में किफायती आवास की मांग तेजी से बढ़ने वाली है. इसी चुनौती को देखते हुए आयोग ने सरकार को कई अहम नीतिगत सुझाव दिए हैं.

डेवलपर्स को फिर मिल सकती है 100% टैक्स छूट

आयोग ने किफायती आवास परियोजनाओं में शामिल डेवलपर्स के लिए धारा 80-IBA के तहत 100 प्रतिशत टैक्स छूट दोबारा लागू करने की सिफारिश की है. यह छूट पहले जून 2016 से मार्च 2022 तक लागू थी. आयोग का मानना है कि इससे निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी, प्रोजेक्ट्स तेजी से पूरे होंगे और बाजार में सस्ते घरों की सप्लाई बढ़ेगी.

REITs और निवेशकों को भी मिलेगी टैक्स राहत

रिपोर्ट में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) से जुड़े निवेशकों को भी बड़ी राहत देने का सुझाव दिया गया है. इसमें कैपिटल गेन और किराये से होने वाली आय पर टैक्स छूट शामिल है. इससे किफायती आवास सेक्टर में निवेश बढ़ेगा और प्रोजेक्ट्स के लिए फंड जुटाना आसान होगा.

क्यों बनी हुई है सस्ते घरों की इतनी कमी?

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में किफायती आवास की कमी सिर्फ महंगी जमीन या कम सप्लाई की वजह से नहीं है, बल्कि होम लोन और फंडिंग सिस्टम की कमजोरियों के कारण भी है. घर खरीदारों और बिल्डरों दोनों को कई तरह की वित्तीय और प्रक्रियात्मक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिससे यह सेक्टर जोखिम भरा और कम मुनाफे वाला बन गया है.

होम लोन की सीमा बढ़ाकर 40 लाख करने का सुझाव

नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि कम आय वर्ग के लिए क्रेडिट रिस्क गारंटी फंड योजना के तहत होम लोन की अधिकतम सीमा 40 लाख रुपये की जाए. इससे बड़े शहरों में भी किफायती घरों की खरीद को बढ़ावा मिल सकेगा.

NHB को टैक्स-फ्री बॉन्ड जारी करने की इजाजत

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) को इनकम टैक्स एक्ट की धारा 54EC के तहत टैक्स-फ्री बॉन्ड जारी करने की अनुमति दी जानी चाहिए. इस पैसे का इस्तेमाल EWS और LIG वर्ग के लिए सस्ते घरों के प्रोजेक्ट्स को कम ब्याज पर फंड देने में किया जा सकेगा.

स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस में भी राहत

आयोग ने सुझाव दिया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 और अन्य किफायती आवास परियोजनाओं के तहत बनने वाले घरों पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट दी जाए. इसके अलावा, अगर किसी जमीन पर सिर्फ किफायती घर बनाए जाते हैं तो लैंड यूज चेंज चार्ज भी माफ करने की सिफारिश की गई है.

क्या होंगे इन नीतियों के फायदे?

रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी कदमों से किफायती घरों की न्यूनतम कीमत में बड़ी कमी आ सकती है. इससे एक तरफ आम लोगों के लिए घर खरीदना आसान होगा, वहीं दूसरी तरफ बिल्डर्स के लिए यह सेक्टर ज्यादा आकर्षक और व्यावसायिक रूप से फायदेमंद बन जाएगा.

 


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