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Flipkart के एग्जिट से गिरी ABFRL की हिस्सेदारी, 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचा शेयर
Flipkart के बाहर निकलने से ABFRL के शेयरों को नुकसान पहुंचा है. वहीं, यह संकेत भी मिला है कि फ्लिपकार्ट अब अपने पोर्टफोलियो को IPO से पहले हल्का और व्यवस्थित कर रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को जहां एक ओर शेयर बाजार रिकवरी मोड में नजर आया, वहीं दूसरी ओर कुछ चुनिंदा शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली. इन कंपनियों में शामिल रही आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (ABFRL), जिसके शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली. कंपनी का शेयर 10.8 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 76.79 रुपये पर बंद हुआ, जबकि इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान यह 76.10 रुपये तक फिसल गया. यह स्तर कंपनी के लिए पिछले 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर है.
फ्लिपकार्ट ने बेची पूरी 6% हिस्सेदारी
शेयरों में इस गिरावट की मुख्य वजह रही ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट द्वारा ABFRL में अपनी समूची हिस्सेदारी की बिक्री. फ्लिपकार्ट ने ओपन मार्केट में डील के जरिए ABFRL में अपनी 6 प्रतिशत हिस्सेदारी 587.71 करोड़ रुपये में बेच दी. इस लेनदेन के बाद फ्लिपकार्ट और उसकी सब्सिडियरी फ्लिपकार्ट इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड अब ABFRL से पूरी तरह बाहर हो चुकी हैं. गौरतलब है कि ABFRL देश के नामी परिधान ब्रांड्स जैसे पैंटालून्स, वैन ह्यूसेन, और लुइस फिलिप का संचालन करती है.
डील का ब्योरा: 7.31 करोड़ शेयर बेचे गए
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, फ्लिपकार्ट ने 7,31,70,731 शेयरों का निपटान 80.32 रुपये प्रति शेयर के औसत भाव पर किया. इस तरह कुल सौदे का मूल्य 587.71 करोड़ रुपये रहा. हालांकि, इस बात की जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी कि इन शेयरों को किन संस्थानों या निवेशकों ने खरीदा. यह भी उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2020 में फ्लिपकार्ट ने ABFRL में 1,500 करोड़ रुपये निवेश किए थे, जो अब उसने आंशिक नुकसान या लाभ के साथ वापस निकाल लिए हैं.
फ्लिपकार्ट की IPO की तैयारी तेज
फ्लिपकार्ट का यह एग्जिट ऐसे समय हुआ है जब कंपनी खुद IPO की तैयारियों में जुटी हुई है. वॉलमार्ट ग्रुप के स्वामित्व वाली यह ई-कॉमर्स दिग्गज हाल ही में घोषणा कर चुकी है कि वह अपना हेडक्वार्टर सिंगापुर से भारत स्थानांतरित करेगी. यह कदम IPO की प्रक्रिया को सुगम बनाने की दिशा में एक अहम रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि भारत में लिस्टिंग से कंपनी को घरेलू निवेशकों का बेहतर समर्थन मिल सकता है.
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