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माइक्रोफाइनैंस सेक्टर को राहत का बड़ा पैकेज: ₹20,000 करोड़ की क्रेडिट गारंटी योजना लॉन्च
दिशानिर्देशों के अनुसार, एमएफआई को प्राप्त वित्तीय सहायता का उपयोग 3 महीने के भीतर नए ऋण वितरण में करना होगा. साथ ही योजना से जुड़े ऋणों के लिए अलग खाता रखना अनिवार्य किया गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
माइक्रोफाइनैंस क्षेत्र को मजबूत करने और ऋण प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ₹20,000 करोड़ की क्रेडिट गारंटी योजना की शुरुआत की है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सेक्टर नकदी की कमी और घटते बैंक फंडिंग के दबाव से जूझ रहा है. इस योजना से खासकर छोटे और मध्यम माइक्रोफाइनैंस संस्थानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
योजना का उद्देश्य और अवधि
सरकार द्वारा शुरू की गई यह योजना 20 मार्च 2026 से लागू हो गई है और 30 जून 2026 तक या ₹20,000 करोड़ की कुल गारंटी सीमा पूरी होने तक प्रभावी रहेगी. इसका मुख्य उद्देश्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों को माइक्रोफाइनैंस संस्थानों (एमएफआई) को दिए जाने वाले ऋण पर गारंटी कवर प्रदान करना है, ताकि वे बिना जोखिम के अधिक फंडिंग कर सकें.
नए ऋण पर फोकस, पुराने कर्ज नहीं होंगे शामिल
इस योजना के तहत दी जाने वाली फंडिंग केवल नए ऋण के लिए होगी. इसका उपयोग पुराने कर्ज को चुकाने में नहीं किया जा सकेगा. इससे यह सुनिश्चित किया गया है कि सेक्टर में ताजा पूंजी का प्रवाह बढ़े और नई ऋण संपत्तियां तैयार हों.
गारंटी कवरेज का ढांचा
1.योजना में एमएफआई के आकार के अनुसार गारंटी कवर तय किया गया है.
2.छोटे एमएफआई (₹500 करोड़ से कम एयूएम) को 80 प्रतिशत तक गारंटी मिलेगी.
3.मध्यम एमएफआई (₹500 करोड़ से ₹2,000 करोड़) के लिए यह 75 प्रतिशत है.
4.बड़े एमएफआई (₹2,000 करोड़ से अधिक) को 70 प्रतिशत गारंटी कवरेज दिया जाएगा.
इस संरचना का उद्देश्य छोटे संस्थानों को अधिक लाभ पहुंचाना है, जिन्हें आमतौर पर बैंक ऋण मिलने में ज्यादा कठिनाई होती है.
सेक्टर में गिरते ऋण प्रवाह की चुनौती
माइक्रोफाइनैंस सेक्टर पिछले कुछ समय से फंडिंग संकट का सामना कर रहा है. वित्त वर्ष 2023-24 की चौथी तिमाही से लेकर 2025-26 की तीसरी तिमाही तक बैंकों से मिलने वाले ऋण में लगभग 70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. अनुमान के मुताबिक करीब 50 लाख उधारकर्ता औपचारिक ऋण प्रणाली से बाहर हो चुके हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है.
ब्याज दरों पर सख्त नियंत्रण
योजना के तहत बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऋण की ब्याज दर पर सीमा तय की गई है. यह दर बाहरी बेंचमार्क उधारी दर या 1-वर्षीय एमसीएलआर के साथ अधिकतम 2 प्रतिशत अतिरिक्त तक सीमित होगी. इसके अलावा एमएफआई को अपने छोटे उधारकर्ताओं के लिए ब्याज दर को पिछले 6 महीनों की औसत दर से कम से कम 1 प्रतिशत कम रखना होगा.
छोटे और मध्यम एमएफआई के लिए विशेष प्रावधान
योजना में यह भी अनिवार्य किया गया है कि कुल ऋण का कम से कम 5 प्रतिशत छोटे एमएफआई और 10 प्रतिशत मध्यम एमएफआई को दिया जाए. इससे सेक्टर में संतुलित विकास सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है.
दिशानिर्देशों के अनुसार, एमएफआई को प्राप्त वित्तीय सहायता का उपयोग 3 महीने के भीतर नए ऋण वितरण में करना होगा. साथ ही योजना से जुड़े ऋणों के लिए अलग खाता रखना अनिवार्य किया गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गारंटी योजना बैंकों का भरोसा बहाल करेगी और माइक्रोफाइनैंस सेक्टर में फंडिंग की रफ्तार को फिर से बढ़ाएगी. खासकर छोटे और मध्यम संस्थानों के लिए यह योजना नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है, जिससे लाखों छोटे उधारकर्ताओं तक फिर से ऋण पहुंच सकेगा.
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