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'प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना' के लिए ₹6,520 करोड़ का बजट मंजूर, करोड़ों किसानों को होगा लाभ
केंद्र सरकार द्वारा ‘प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना’ के तहत ₹6,520 करोड़ के बजट को मंजूरी देना कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए एक बड़ा कदम है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ‘प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY)’ के अंतर्गत ₹6,520 करोड़ के बजटीय परिव्यय को मंजूरी दी गई है. इसमें 15वें वित्त आयोग चक्र (2021-22 से 2025-26) के दौरान खर्च की जाने वाली ₹1,920 करोड़ की अतिरिक्त राशि भी शामिल है. इस योजना के तहत देशभर में 50 फूड इर्रेडिएशन यूनिट्स और 100 NABL-मान्यता प्राप्त फूड टेस्टिंग लैब्स बनेंगी.
दो प्रमुख परियोजनाओं की घोषणा
सरकार ने गुरुवार को दो प्रमुख परियोजनाओं की घोषणा की है, जिनमें ₹1,000 करोड़ की लागत से देशभर में 50 मल्टी-प्रोडक्ट फूड इर्रेडिएशन यूनिट्स स्थापित की जाएंगी. साथ ही, 100 उन्नत फूड टेस्टिंग लैब्स (FTLs) की स्थापना की जाएगी, जिन्हें NABL (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) से मान्यता प्राप्त होगी. इन दोनों योजनाओं को ‘इंटीग्रेटेड कोल्ड चेन एंड वैल्यू एडिशन इंफ्रास्ट्रक्चर (ICCVAI)’ और ‘फूड सेफ्टी एंड क्वालिटी एश्योरेंस इंफ्रास्ट्रक्चर (FSQAI)’ घटकों के तहत लागू किया जाएगा. शेष ₹920 करोड़ की राशि योजना के अन्य घटकों में परियोजनाओं की मंजूरी के लिए खर्च की जाएगी.
खाद्य संरक्षण और गुणवत्ता जांच में आएगी क्रांतिकारी बढ़त
सरकार का अनुमान है कि इन फूड इर्रेडिएशन यूनिट्स से हर साल 20 से 30 लाख मीट्रिक टन खाद्य उत्पादों की संरक्षण क्षमता विकसित होगी. इससे खाद्य अपव्यय में कमी आएगी और किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलेगा. वहीं, 100 नई फूड टेस्टिंग लैब्स के माध्यम से खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता जांच और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुदृढ़ होगा, जिससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित और प्रमाणित खाद्य उत्पाद मिल सकेंगे.
EOI के माध्यम से परियोजनाओं के लिए आमंत्रण
सरकार ने जानकारी दी है कि ICCVAI और FSQAI दोनों योजनाएं मांग आधारित (demand-driven) होंगी. इसके लिए जल्द ही Expression of Interest (EOI) जारी किया जाएगा, जिसके माध्यम से पात्र संस्थाएं आवेदन कर सकेंगी. विस्तृत मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद परियोजनाओं को मंजूरी दी जाएगी.
रोजगार और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
इस निर्णय से न केवल कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नई ताकत मिलेगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे. सरकार का मानना है कि यह पहल 'कृषक-उद्योग-उपभोक्ता' की पूरी चेन को जोड़ते हुए सस्टेनेबल एग्री-इकोनॉमी की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी.
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