यह डील भारतीय क्रिकेट और स्पोर्ट्स बिजनेस के इतिहास की सबसे बड़ी डील्स में से एक मानी जा रही है. इससे न केवल Rajasthan Royals की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी, बल्कि IPL की ब्रांड वैल्यू को भी नया आयाम मिलने की उम्मीद है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
खेल और कॉरपोरेट जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. मित्तल परिवार ने इंडियन प्रीमियर लीग (Indian Premier League) की फ्रेंचाइजी राजस्थाैन रॉयल्स (Rajasthan Royals) को खरीदने के लिए अदार पूनावाला के साथ मिलकर लगभग 1.65 अरब डॉलर की डील पर सहमति बना ली है. कंपनी के बयान के अनुसार, यह सौदा नियामकीय मंजूरी के अधीन है और इसके 2026 की तीसरी तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद है.
डील में शामिल फ्रेंचाइज़ियों का बड़ा पोर्टफोलियो
यह सौदा मौजूदा मालिक मनोज बडाले और उनके कंसोर्टियम के साथ किया गया है. इस डील में केवल राजस्थान रॉयल्स ही नहीं, बल्कि दक्षिण अफ्रीका की पार्ल रॉयल्स और कैरेबियन की बार्बाडोस रॉयल्स जैसी टीमें भी शामिल हैं.
हिस्सेदारी का गणित क्या रहेगा
डील पूरी होने के बाद मित्तल परिवार के पास करीब 75 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि अदार पूमावालालगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेंगे. बाकी करीब 7 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूदा निवेशकों के पास ही रहेगी, जिनमें मनोज बडाले भी शामिल हैं. बडाले टीम के साथ एक “ब्रिजिंग रोल” में जुड़े रहेंगे, ताकि पुराने और नए मालिकों के बीच संतुलन बना रहे.
मंजूरी के बाद ही पूरी होगी प्रक्रिया
इस डील को पूरा करने के लिए कई अहम संस्थाओं की मंजूरी जरूरी होगी, जिनमें बीसीसीआई,सीसीआई और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल शामिल हैं. सभी आवश्यक शर्तें पूरी होने के बाद यह सौदा 2026 की तीसरी तिमाही में पूरा होने की उम्मीद है.
बोर्ड में शामिल होंगे बड़े नाम
डील पूरी होने के बाद लक्ष्मी एन मित्तल, आदित्य मित्तल, वनीषा मित्तल भाटिया, अदार पूनावाला और मनोज बडाले, सभी राजस्थान रॉयल्स के बोर्ड में शामिल होंगे.
लक्ष्मी मित्तल ने कहा कि उन्हें क्रिकेट से बेहद लगाव है और उनका परिवार राजस्थान से जुड़ा है, इसलिए राजस्थान रॉयल्स से बेहतर कोई टीम उनके लिए नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि बचपन से ही क्रिकेट उनके जीवन का हिस्सा रहा है और वह टीम के साथ जुड़कर भविष्य की सफलताओं का हिस्सा बनने को लेकर उत्साहित हैं.
टीम की विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर
आदित्य मित्तल ने कहा कि IPL बहुत कम समय में दुनिया की सबसे बड़ी स्पोर्ट्स लीग्स में शामिल हो गया है और राजस्थान रॉयल्स इसकी सबसे प्रतिष्ठित टीमों में से एक है. उन्होंने टीम की युवा प्रतिभाओं को निखारने की परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई और “हल्ला बोल” के साथ टीम के उज्ज्वल भविष्य की बात कही.
पूनावाला और बडाले की प्रतिक्रिया
अदार पूनावाला ने इस निवेश को लेकर खुशी जताई और आदित्य मित्तल के साथ साझेदारी को लेकर उत्साह व्यक्त किया. वहीं, मनोज बडाले ने नए मालिकों का स्वागत करते हुए कहा कि वह आगे भी टीम का समर्थन करते रहेंगे.
आज सुबह GIFT निफ्टी में 100 से अधिक अंकों की तेजी देखी गई और यह 24,236 के करीब कारोबार करता नजर आया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं. वैश्विक बाजारों में मजबूती और GIFT निफ्टी में तेज बढ़त से यह उम्मीद जताई जा रही है कि घरेलू बाजार की शुरुआत मजबूत रह सकती है. हालांकि, निवेशकों की नजर आज कई अहम ट्रिगर्स जैसे चुनावी नतीजे, तिमाही नतीजे (Q4) और IPO गतिविधियों पर टिकी हुई है.
GIFT निफ्टी से मजबूत शुरुआत के संकेत
आज सुबह GIFT निफ्टी में 100 से अधिक अंकों की तेजी देखी गई और यह 24,236 के करीब कारोबार करता नजर आया. यह संकेत देता है कि निफ्टी 50 इंडेक्स हरे निशान में खुल सकता है. निवेशकों का रुझान फिलहाल सकारात्मक है, लेकिन वे वैश्विक संकेतों और घरेलू घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं.
चुनावी नतीजों पर टिकी बाजार की नजर
देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में जारी मतगणना का असर बाजार की दिशा तय कर सकता है. राजनीतिक स्थिरता और आने वाली आर्थिक नीतियों को लेकर निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है. चुनावी नतीजों के आधार पर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
एशियाई बाजारों में मजबूती
एशिया-प्रशांत बाजारों में आज तेजी का माहौल देखने को मिला. दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया और इसमें लगभग 3.5% की उछाल दर्ज हुई. जापान का निक्केई 225 भी करीब 0.38% की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा. इन सकारात्मक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है.
US वॉल स्ट्रीट से मिले सकारात्मक संकेत
अमेरिकी शेयर बाजारों में पिछले सत्र में मिला-जुला रुख रहा, लेकिन कुल मिलाकर माहौल सकारात्मक रहा. S&P 500 और नैस्डैक में बढ़त देखने को मिली. मजबूत कॉरपोरेट नतीजों और आर्थिक आंकड़ों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जबकि महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव का असर सीमित रहा.
कच्चे तेल और कमोडिटी बाजार की चाल
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है. शुरुआती गिरावट के बाद यह करीब 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर हुआ. वहीं, सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जो निवेशकों के बदलते रुख को दर्शाती है.
आज आएंगे बड़ी कंपनियों के Q4 नतीजे
आज कई प्रमुख कंपनियां अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी, जिनमें अंबुजा सीमेंट्स, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स (BHEL), पेट्रोनेट LNG, गोदरेज प्रॉपर्टीज, टाटा टेक्नोलॉजीज, जिंदल स्टेनलेस, एथर एनर्जी, आदित्य बिड़ला कैपिटल, एक्साइड इंडस्ट्रीज, सोभा, ज्योति लैब्स और कैश मैनेजमेंट सर्विसेज जैसी कंपनियां शामिल हैं. इन कंपनियों के नतीजों का असर उनके शेयरों की चाल पर साफ देखने को मिल सकता है.
IPO बाजार में बढ़ी हलचल
प्राइमरी मार्केट में भी आज गतिविधि तेज बनी हुई है. OnEMI टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस IPO दूसरे दिन में पहुंच गया है, लेकिन पहले दिन इसे केवल 0.25 गुना सब्सक्रिप्शन मिला और कंपनी करीब 925 करोड़ रुपये जुटाने की योजना में है. Value 360 कम्युनिकेशंस IPO आज सब्सक्रिप्शन का अंतिम दिन है. Bagmane प्राइम ऑफिस IPO आज खुल गया है, जिसका इश्यू साइज करीब 3,405 करोड़ रुपये है. Recode स्टूडियोज IPO भी आज निवेश के लिए खुला है और इसका साइज लगभग 44.59 करोड़ रुपये है.
कुल मिलाकर, आज का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए कई मायनों में अहम रहने वाला है. GIFT निफ्टी की तेजी और वैश्विक संकेत जहां सकारात्मक माहौल बना रहे हैं, वहीं चुनावी नतीजे और कॉरपोरेट नतीजे बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. निवेशकों को सतर्क रहते हुए सोच-समझकर फैसले लेने की जरूरत है.
आने वाले सप्ताह में 4 मई से 7 मई के बीच कुल तीन पब्लिक ऑफर सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेंगे. इनमें एक मेनबोर्ड सेगमेंट का बड़ा इश्यू और दो SME सेगमेंट के IPO शामिल हैं.
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रितु राणा
प्राइमरी मार्केट में कुछ समय की सुस्ती के बाद अब हलचल तेज होने जा रही है. अगले सप्ताह 3,491 करोड़ रुपए के तीन नए IPO बाजार में दस्तक देने वाले हैं, जिनमें एक बड़ा मेनबोर्ड REIT इश्यू भी शामिल है. हाल के IPO की शानदार लिस्टिंग और निवेशकों के उत्साह को देखते हुए इन इश्यूज को भी मजबूत प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है.
4 से 7 मई के बीच खुलेंगे तीन पब्लिक इश्यू
आने वाले सप्ताह में 4 मई से 7 मई के बीच कुल तीन पब्लिक ऑफर सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेंगे. इनमें एक मेनबोर्ड सेगमेंट का बड़ा इश्यू और दो SME सेगमेंट के IPO शामिल हैं. कुल मिलाकर कंपनियां इन इश्यूज के जरिए 3,491 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही हैं.
सबसे बड़ा दांव
इस हफ्ते का सबसे बड़ा और प्रमुख इश्यू बैगमेन प्राइम ऑफिस (Bagmane Prime Office REIT) का होगा. इसका सब्सक्रिप्शन 5 मई से 7 मई तक खुला रहेगा. कंपनी इस इश्यू के जरिए 3,405 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है, जिसमें 2,390 करोड़ रुपए का फ्रेश इश्यू और 1,015 करोड़ रुपए का ऑफर फॉर सेल शामिल है. इसकी प्राइस बैंड 95 से 100 रुपए प्रति यूनिट तय की गई है.
प्रीमियम ऑफिस प्रॉपर्टी में निवेश का मौका
यह REIT निवेशकों को बेंगलुरु की प्रीमियम कमर्शियल ऑफिस प्रॉपर्टीज में निवेश का अवसर देता है. इसके पोर्टफोलियो में 20.3 मिलियन वर्ग फीट में फैले 6 ग्रे A+ बिजनेस पार्क शामिल हैं, जिनमें जून 2025 तक करीब 97.9 प्रतिशत स्पेस लीज पर दिया जा चुका है. इसके प्रमुख किरायेदारों में गूगल (Google), अमेजन (Amazon) और एनवीडिया (Nvidia) जैसी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं, जो इसकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती हैं.
कमाई और विस्तार पर फोकस
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों में ट्रस्ट ने 829 करोड़ रुपए का मुनाफा दर्ज किया, जबकि कुल आय 1,960 करोड़ रुपए रही. इस इश्यू से जुटाई गई राशि का बड़ा हिस्सा नई ऑफिस प्रॉपर्टीज खरीदने में लगाया जाएगा, जिससे किराये से होने वाली आय और स्थिरता बढ़ेगी.
SME सेगमेंट में भी हलचल
मेनबोर्ड के अलावा SME सेगमेंट में भी दो कंपनियां बाजार में उतरेंगी. वैल्यू 360 कम्यूनिकेशन्स (Value 360 Communications) का IPO 4 से 6 मई के बीच खुलेगा. कंपनी 41.7 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही है, जिसकी प्राइस बैंड 95-98 रुपए प्रति शेयर है.
इसके बाद रिकोड स्टूडियोज (Recode Studios) का IPO 5 से 7 मई तक खुलेगा. कंपनी 44.6 करोड़ रुपए जुटाने की तैयारी में है और इसकी प्राइस बैंड 150-158 रुपए प्रति शेयर तय की गई है. दोनों SME इश्यू मिलकर 86 करोड़ रुपए से अधिक की फंडरेजिंग करेंगे.
निवेशकों की नजर मेनबोर्ड इश्यू पर
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जो स्थिर रिटर्न और नियमित आय प्रदान कर सकें. ऐसे में REIT इश्यू में संस्थागत और खुदरा निवेशकों की खास दिलचस्पी देखने को मिल सकती है.
IPO बाजार में फिर लौट रही रौनक
हालिया IPO की मजबूत लिस्टिंग और बढ़ते निवेशक भरोसे के बीच यह सप्ताह प्राइमरी मार्केट के लिए अहम माना जा रहा है. अगर इन इश्यूज को अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है, तो आने वाले महीनों में IPO बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है.
भारत और इक्वाडोर के बीच प्रस्तावित PTA के तहत भारत से दवाओं, ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग सामानों का निर्यात बढ़ेगा, जबकि भारत को इक्वाडोर से कच्चे तेल और कृषि उत्पादों का आयात सस्ता और आसान होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा रहा है. दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर के साथ प्रस्तावित प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) के जरिए दोनों देश आपसी व्यापार को बढ़ाने और आयात-निर्यात को आसान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. इस समझौते के लागू होने पर कई उत्पाद सस्ते हो सकते हैं और नए बाजारों के दरवाजे खुलेंगे.
ट्रेड एग्रीमेंट से दोनों देशों को फायदा
भारत और इक्वाडोर के बीच प्रस्तावित PTA के तहत चुनिंदा उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती की जाएगी. इससे भारत से दवाओं, ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग सामानों का निर्यात बढ़ेगा, जबकि भारत को इक्वाडोर से कच्चे तेल और कृषि उत्पादों का आयात सस्ता और आसान होगा.
विदेश मंत्रियों की बैठक में मजबूत हुई रणनीति
इस दिशा में हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर और इक्वाडोर की विदेश मंत्री गैब्रिएला सोमरफेल्ड रोसेरो के बीच अहम बैठक हुई. इस दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने पर जोर दिया. दो दिवसीय भारत यात्रा के दौरान इक्वाडोर प्रतिनिधिमंडल ने व्यापार, निवेश, कृषि, स्वास्थ्य और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई.
स्वास्थ्य, कृषि और टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ेगा
दोनों देशों ने स्वास्थ्य सेवाओं, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई. इसके साथ ही सांस्कृतिक संबंधों, क्षमता निर्माण और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को भी मजबूत किया जाएगा.
इक्वाडोर ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) और इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) में शामिल होने का भी निर्णय लिया है, जिससे भारत के साथ उसके रणनीतिक संबंध और गहरे होंगे.
विकास परियोजनाओं के लिए भारत देगा अनुदान
भारत ने इक्वाडोर में ‘क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स’ (QIPs) के लिए 5 साल में 12 करोड़ रुपये तक की अनुदान सहायता देने का फैसला किया है. इस फंड के जरिए सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़ी परियोजनाएं लागू की जाएंगी, जिससे स्थानीय समुदायों को सीधे लाभ मिलेगा.
व्यापार रोडमैप और सप्लाई चेन पर फोकस
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ हुई बैठक में PTA के लिए विस्तृत रोडमैप पर चर्चा की गई. बातचीत में भारतीय दवाओं के निर्यात को बढ़ाने और तांबा व सोना जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन में साझेदारी को भी प्राथमिकता दी गई.
स्वास्थ्य सहयोग को मिलेगा नया आयाम
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ बातचीत में किफायती स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों पर जोर दिया गया. इस दौरान इक्वाडोर द्वारा ‘इंडियन फार्माकोपिया’ को मान्यता देने पर भी चर्चा हुई, जिससे दवाओं के क्षेत्र में सहयोग और आसान होगा.
दोनों देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक औपचारिक समझौते पर भी सहमति जताई है.
ग्लोबल ट्रेड में भारत की बढ़ती भूमिका
भारत और इक्वाडोर के बीच यह संभावित समझौता न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को भी मजबूत करेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और नए बाजारों तक पहुंच के जरिए भारत आने वाले समय में वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका और मजबूत कर सकता है.
उद्योग के खुदरा बिक्री आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से अप्रैल के दौरान यात्री EV बिक्री 69.5 प्रतिशत बढ़कर 79,063 यूनिट रही.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग लगातार मजबूत होती दिख रही है. जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच देश में यात्री इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री करीब 70 प्रतिशत बढ़कर 79 हजार यूनिट के पार पहुंच गई. खास बात यह रही कि मार्च में रिकॉर्ड तेजी के बाद अप्रैल में भी बाजार लगभग उसी स्तर पर बना रहा. जिससे साफ है कि EV सेगमेंट अब अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी ग्रोथ के दौर में प्रवेश कर चुका है.
जनवरी-अप्रैल में शानदार प्रदर्शन
उद्योग के खुदरा बिक्री आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से अप्रैल के दौरान यात्री EV बिक्री 69.5 प्रतिशत बढ़कर 79,063 यूनिट रही. यह बढ़ोतरी दिखाती है कि उपभोक्ताओं का झुकाव तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रहा है.
मार्च 2026 में EV बिक्री 23,097 यूनिट रही थी, जो अप्रैल में मामूली गिरावट के साथ 22,677 यूनिट रही. आमतौर पर मार्च के बाद अप्रैल में मांग कमजोर पड़ती है. लेकिन इस बार बाजार मजबूत बना रहा.
अप्रैल में मामूली गिरावट. मांग बनी मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल में बिक्री में हल्की कमी का कारण कम कार्य दिवस और मौसमीय बदलाव रहे. इसके बावजूद मांग कमजोर नहीं हुई. यदि बिक्री दिनों के हिसाब से आंकड़ों को समायोजित किया जाए तो EV बाजार स्थिर और मजबूत नजर आता है.
जनवरी में 32 से 34 बिक्री दिन, फरवरी में 27 से 29, मार्च में 28 से 30 और अप्रैल में केवल 26 से 28 बिक्री दिन रहे. यानी कम समय के बावजूद बिक्री मजबूत बनी रही.
टाटा मोटर्स ने कायम रखी बादशाहत
भारतीय EV बाजार में टाटा मोटर्स ने अपनी बढ़त बरकरार रखी. कंपनी ने जनवरी से अप्रैल के दौरान कुल 31,604 यूनिट इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की, जो सालाना आधार पर 65.2 प्रतिशत की वृद्धि है. टाटा की लगातार मजबूत मौजूदगी यह दिखाती है कि कंपनी अभी भी भारत के EV बाजार की सबसे बड़ी खिलाड़ी बनी हुई है.
महिंद्रा ने दिखाई सबसे तेज रफ्तार
महिंद्रा एंड महिंद्रा इस अवधि की सबसे तेज बढ़ने वाली कंपनी रही. कंपनी की बिक्री जनवरी-अप्रैल 2025 के 6,714 यूनिट से बढ़कर इस साल 18,153 यूनिट पहुंच गई. यह 170.4 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि है.
यह संकेत देता है कि महिंद्रा के नए इलेक्ट्रिक मॉडल्स को ग्राहकों से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है.
MG Motor दूसरे स्थान पर
एमजी मोटर इंडिया 19,036 यूनिट बिक्री के साथ इस अवधि में दूसरी सबसे बड़ी EV कंपनी रही. हालांकि इसकी सालाना वृद्धि दर 18.9 प्रतिशत रही, जो बाजार की कुल वृद्धि से कम है.
मारुति सुजुकी की एंट्री से बढ़ी प्रतिस्पर्धा
हाल ही में EV सेगमेंट में कदम रखने वाली मारुति सुजुकी ने भी शुरुआती दौर में अच्छा प्रदर्शन किया. जनवरी में कंपनी की बिक्री 221 यूनिट थी, जो अप्रैल तक बढ़कर 1,200 यूनिट से अधिक पहुंच गई.
EV बिक्री के ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार अब तेज विस्तार के दौर में है. बढ़ती चार्जिंग सुविधाएं, नए मॉडल, बेहतर रेंज और सरकारी समर्थन आने वाले महीनों में इस सेक्टर को और गति दे सकते हैं.
फोर्स मोटर्स ने अपने प्रमुख ट्रैवलर प्लेटफॉर्म के जरिए वैन सेगमेंट में 70 प्रतिशत से अधिक बाजार हिस्सेदारी बनाए रखी. यह सेगमेंट कंपनी की मुख्य ताकत बना हुआ है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की प्रमुख वैन निर्माता और ऑटोमोबाइल कंपनी फोर्स मोटर्स (Force Motors Limited) ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. कंपनी ने 31 मार्च 2026 को समाप्त चौथी तिमाही और पूरे वित्त वर्ष के नतीजे जारी करते हुए कहा कि यह वर्ष उसके इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ है.
सभी सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन
कंपनी के अनुसार, लगातार बेहतर तिमाही प्रदर्शन, मजबूत ऑपरेटिंग लीवरेज और सभी उत्पाद श्रेणियों में व्यापक वृद्धि ने इस रिकॉर्ड प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाई है. यह नतीजे कंपनी के अनुशासित और केंद्रित बिजनेस मॉडल को दर्शाते हैं.
घरेलू बाजार में 20% की वृद्धि**
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की कुल थोक बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. घरेलू बाजार में यह प्रदर्शन कंपनी की मजबूत पकड़ और बढ़ती मांग को दर्शाता है.
वैन सेगमेंट में दबदबा कायम
फोर्स मोटर्स ने अपने प्रमुख ट्रैवलर प्लेटफॉर्म के जरिए वैन सेगमेंट में 70 प्रतिशत से अधिक बाजार हिस्सेदारी बनाए रखी. यह सेगमेंट कंपनी की मुख्य ताकत बना हुआ है.
प्रीमियम मोबिलिटी और नए मॉडल्स में तेज ग्रोथ
प्रीमियम पैसेंजर मोबिलिटी सेगमेंट में कंपनी के अर्बानिया मॉडल ने सालाना आधार पर 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की. वहीं, ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों में ट्रैक्स प्लेटफॉर्म को भी मजबूत प्रतिक्रिया मिली, जिससे इसमें 70 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई.
संस्थागत और डिफेंस ऑर्डर्स से मजबूती
कंपनी ने संस्थागत और रक्षा क्षेत्र में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है. भारतीय सशस्त्र बलों के लिए विशेष वाहनों से जुड़े कई महत्वपूर्ण ऑर्डर्स सफलतापूर्वक पूरे किए गए.
वित्तीय अनुशासन और जीरो-डेट स्टेटस बरकरार
फोर्स मोटर्स ने अपना “जीरो-डेट” स्टेटस बनाए रखा है, जो मजबूत वित्तीय प्रबंधन और अनुशासित पूंजी आवंटन को दर्शाता है.
कंपनी के प्रबंध निदेशक प्रसन फिरोदिया ने कहा कि फोर्स मोटर्स शुरुआत से ही सेगमेंट क्रिएटर रही है और अब प्रीमियम शेयर्ड मोबिलिटी सेगमेंट में मजबूत स्थिति बना रही है. उन्होंने कहा कि ट्रैवलर और ट्रैक्स जैसे प्लेटफॉर्म बड़े पैमाने पर बाजार पहुंच दे रहे हैं, जबकि रक्षा और संस्थागत ग्राहकों के साथ काम कंपनी की इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाता है.
भविष्य की रणनीति पर फोकस
कंपनी ने कहा कि आने वाले समय में उसका ध्यान अनुशासन के साथ सतत विकास पर रहेगा. ग्राहकों की जरूरतों के साथ जुड़ाव, उत्पाद नवाचार और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना भविष्य की ग्रोथ का मुख्य आधार होगा.
अप्रैल के दौरान कोल ऑफटेक यानी ग्राहकों को की गई आपूर्ति में भी गिरावट देखने को मिली. यह 2 प्रतिशत घटकर 63.2 मिलियन टन रह गई, जो पिछले साल अप्रैल में 64.5 मिलियन टन थी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की प्रमुख सरकारी कोयला कंपनी कोल इंडिया (Coal India Ltd) के कोयला उत्पादन में अप्रैल महीने में करीब 9.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब देश में भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है.
उत्पादन में सालाना गिरावट
कंपनी ने अप्रैल में 56.1 मिलियन टन MT कोयला उत्पादन किया, जो पिछले साल इसी महीने के 62.1 मिलियन टन के मुकाबले कम है. यह जानकारी शुक्रवार को बीएसई में दाखिल अंतरिम आंकड़ों में दी गई.
कोयले की बिक्री में भी कमी
अप्रैल के दौरान कोल ऑफटेक यानी ग्राहकों को की गई आपूर्ति में भी गिरावट देखने को मिली. यह 2 प्रतिशत घटकर 63.2 मिलियन टन रह गई, जो पिछले साल अप्रैल में 64.5 मिलियन टन थी.
सहायक कंपनियों का प्रदर्शन मिला-जुला
कंपनी की कई सहायक इकाइयों में उत्पादन घटा है, जिनमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड शामिल हैं. वहीं, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड में उत्पादन बढ़ा है.
बिजली उत्पादन में कोयले की अहम भूमिका
भारत की बिजली व्यवस्था में कोयले की अहम भूमिका बनी हुई है और कुल बिजली उत्पादन का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कोयले से आता है. Coal India Ltd देश के कुल घरेलू कोयला उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत और बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कोयले का करीब तीन-चौथाई हिस्सा सप्लाई करती है.
बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर के करीब
ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को देश में बिजली की अधिकतम मांग 255.85 गीगावाट GW तक पहुंच गई, जो शनिवार को दर्ज 256.11 GW के सर्वकालिक उच्च स्तर के करीब है.
भीषण गर्मी बनी मुख्य वजह
देशभर में तेज गर्मी के चलते एयर कंडीशनर और कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा है, जिससे बिजली की मांग में तेजी आई है. ऐसे में कोयला उत्पादन में गिरावट ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा सकती है.
यह एयरपोर्ट यमुना एक्सप्रेसवे और पूर्वी व पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख परिवहन मार्गों से जुड़ा हुआ है. भविष्य में इसे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के साथ एक बड़े लॉजिस्टिक्स हब के रूप में भी विकसित किया जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
उत्तर भारत और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र NCR के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 15 जून 2026 से वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत होने जा रही है. इस ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट से पहली उड़ान इंडिगो द्वारा संचालित की जाएगी, जबकि अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस भी जल्द ही अपनी सेवाएं शुरू करने की तैयारी में हैं. विस्तृत उड़ान कार्यक्रम और गंतव्यों की घोषणा आने वाले हफ्तों में की जाएगी.
भीड़ कम होगी, कनेक्टिविटी बढ़ेगी
इस एयरपोर्ट के शुरू होने से एनसीआर NCR के मौजूदा हवाई अड्डों पर यात्री दबाव कम होने की उम्मीद है, साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलेगी. यह परियोजना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यापक विमानन दृष्टि के अनुरूप है.
नियामकीय मंजूरी और विश्वस्तरीय सुविधाएं
एयरपोर्ट का औपचारिक उद्घाटन और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो द्वारा एयरोड्रोम सिक्योरिटी प्रोग्राम की मंजूरी मिलने के बाद उड़ान संचालन शुरू होगा. यह मंजूरी सुरक्षा और संचालन मानकों के पूर्ण अनुपालन की पुष्टि करती है. यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित इस एयरपोर्ट में आधुनिक टर्मिनल, उन्नत संचालन प्रणाली और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी की सुविधाएं मौजूद हैं.
बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर
यह एयरपोर्ट यमुना एक्सप्रेसवे और पूर्वी व पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख परिवहन मार्गों से जुड़ा हुआ है. भविष्य में इसे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के साथ एक बड़े लॉजिस्टिक्स हब के रूप में भी विकसित किया जाएगा.
आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
एयरपोर्ट से वाणिज्यिक सेवाओं की शुरुआत से क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है. इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, निवेश बढ़ेगा और लॉजिस्टिक्स, पर्यटन व मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलेगा. यह उत्तर प्रदेश को एक प्रमुख एविएशन और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में भी अहम कदम है.
क्षमता और भविष्य की योजना
फिलहाल एयरपोर्ट में एक रनवे और एक टर्मिनल है, जिसकी वार्षिक क्षमता 1.2 करोड़ यात्रियों की है. दीर्घकालिक योजना के तहत इसे बढ़ाकर 7 करोड़ से अधिक यात्रियों की क्षमता तक ले जाने का लक्ष्य है, जिससे यह भारत के सबसे बड़े विमानन केंद्रों में शामिल हो सके.
पर्यावरण पर भी फोकस
साथ ही, यह एयरपोर्ट पर्यावरणीय स्थिरता पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है और नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसमें आधुनिक डिजाइन और उच्च संचालन दक्षता का समावेश है.
अप्रैल 2026 का GST संग्रह पिछले वर्ष अप्रैल के ₹2.33 लाख करोड़ की तुलना में 8.7 प्रतिशत अधिक रहा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह अप्रैल 2026 में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया. मजबूत आयात, वित्त वर्ष के अंत में स्टॉक क्लियरेंस और बेहतर टैक्स अनुपालन के चलते GST कलेक्शन ₹2.42 लाख करोड़ दर्ज किया गया. यह आंकड़ा देश की खपत क्षमता और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत देता है.
सालाना आधार पर 8.7% की बढ़ोतरी
अप्रैल 2026 का GST संग्रह पिछले वर्ष अप्रैल के ₹2.33 लाख करोड़ की तुलना में 8.7 प्रतिशत अधिक रहा. खास बात यह है कि पहली बार इतना बड़ा रिकॉर्ड बिना किसी मुआवजा उपकर (Compensation Cess) के समर्थन के हासिल हुआ है. इससे कोर GST राजस्व की मजबूती सामने आई है.
घरेलू संग्रह में सीमित बढ़त, आयात से बड़ा योगदान
GST पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, घरेलू लेनदेन से ₹1.85 लाख करोड़ से अधिक का संग्रह हुआ, जिसमें 4.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. वहीं, आयात से मिलने वाला राजस्व ₹57,000 करोड़ से ऊपर पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 25.8 प्रतिशत की तेज बढ़त है. यह दर्शाता है कि अप्रैल के कुल GST कलेक्शन में विदेशी व्यापार की बड़ी भूमिका रही.
रिफंड में भी तेज उछाल
महीने के दौरान GST रिफंड 19.3 प्रतिशत बढ़ा. इसके बाद शुद्ध GST संग्रह लगभग ₹2.11 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 7.3 प्रतिशत अधिक है.
मार्केट विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू राजस्व वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही क्योंकि रिफंड में तेजी आई, खासकर इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत. इनपुट टैक्स क्रेडिट के बढ़ते दबाव और रिफंड आउटफ्लो ने अनुपालन प्रक्रिया को जटिल बनाया है और कारोबारियों की लागत बढ़ाई है.
विवाद निपटान और सिस्टम बदलाव का भी असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल के आंकड़ों को पुराने टैक्स विवादों से जुड़े प्री-डिपॉजिट और GST पोर्टल पर इनपुट टैक्स क्रेडिट सेट-ऑफ नियमों में बदलाव से भी समर्थन मिला. इन प्रशासनिक और संरचनात्मक कारणों ने कुल संग्रह को मजबूत बनाए रखने में मदद की.
अप्रैल का रिकॉर्ड GST संग्रह बताता है कि भारत की कर व्यवस्था मजबूत बनी हुई है. हालांकि, घरेलू मांग की रफ्तार कुछ संतुलित नजर आ रही है, जबकि आयात आधारित वृद्धि और नीतिगत बदलाव फिलहाल राजस्व प्रवाह को सहारा दे रहे हैं.
AGR बकाये में कटौती का फैसला VI के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है. हालांकि आगे का रास्ता आसान नहीं है, लेकिन यह राहत कंपनी को दोबारा प्रतिस्पर्धा में मजबूती से उतरने का मौका जरूर देती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया (VI) के लिए सरकार ने बड़ा राहत पैकेज जैसा कदम उठाया है. समायोजित सकल राजस्व (AGR) बकाये में करीब 27% की कटौती कर इसे 64,046 करोड़ रुपये तक सीमित कर दिया गया है. इस फैसले से कंपनी की वित्तीय स्थिति को सहारा मिलने के साथ ही बैंकों से कर्ज जुटाने और नेटवर्क विस्तार की राह आसान होने की उम्मीद है.
AGR कटौती से मिली बड़ी राहत
केंद्र सरकार के इस फैसले को VI के लिए ‘लाइफलाइन’ माना जा रहा है. लंबे समय से भारी कर्ज और बकाये के दबाव में चल रही कंपनी को इससे तत्काल वित्तीय राहत मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कंपनी के कैश फ्लो पर दबाव कम होगा और वह अपने संचालन को स्थिर कर पाएगी.
बैंकों से फंड जुटाना होगा आसान
AGR बकाया कम होने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब VI के लिए बैंकों से कर्ज लेना आसान हो जाएगा. विश्लेषकों के मुताबिक, कंपनी करीब 25,000 करोड़ रुपये कर्ज और 10,000 करोड़ रुपये गैर-ऋण साधनों से जुटाने की योजना बना रही है. यह फंड अगले तीन वर्षों में 45,000 करोड़ रुपये के कैपेक्स (पूंजीगत खर्च) में लगाया जाएगा.
नेटवर्क विस्तार और 5G पर फोकस
VI अब अपने नेटवर्क को मजबूत करने और 5G सेवाओं के विस्तार पर जोर दे सकती है. तेजी से बढ़ते डेटा उपयोग और 5G अपनाने की रफ्तार के बीच कंपनी के लिए यह निवेश बेहद अहम होगा. साथ ही, टैरिफ बढ़ोतरी की संभावनाएं भी उसकी आय में सुधार ला सकती हैं.
आगे की चुनौती: स्पेक्ट्रम भुगतान
हालांकि राहत के बावजूद चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि वित्त वर्ष 2027 से कंपनी को स्पेक्ट्रम खरीद से जुड़े बड़े भुगतान करने होंगे. ऐसे में VI को अपनी कमाई (EBITDA) तेजी से बढ़ानी होगी, ताकि भविष्य के वित्तीय दबाव को संभाला जा सके.
लंबी अवधि में भुगतान का नया स्ट्रक्चर
सरकार ने AGR बकाया के भुगतान को लंबी अवधि में फैलाते हुए बड़ा बोझ कम करने की कोशिश की है.
1. कुल भुगतान को अगले 10 वर्षों में सीमित किया गया है.
2. संशोधित बकाया की गणना 31 दिसंबर 2025 तक तय कर दी गई है.
3. इस राशि पर अतिरिक्त ब्याज नहीं लिया जाएगा.
4. भुगतान की समयसीमा बढ़ाकर वित्त वर्ष 2041 तक कर दी गई है.
यह संरचना कंपनी को दीर्घकालिक स्थिरता देने में मदद कर सकती है.
कंपनी के पुनरुद्धार की दिशा में कदम
VI इस राहत के सहारे अपने बिजनेस को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश करेगी. कंपनी की रणनीति में नेटवर्क सुधार, ग्राहक आधार बनाए रखना और लाभप्रदता बढ़ाना शामिल है. अगर ये योजनाएं सफल होती हैं, तो VI भारतीय टेलीकॉम बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है.
भारत और तंजानिया के बीच लोकल करेंसी ट्रेड की दिशा में उठाया गया यह कदम केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और पूर्वी अफ्रीकी देश तंजानिया के बीच आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है. दोनों देशों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापारिक लेन-देन (लोकल करेंसी ट्रेड) शुरू करने की संभावना पर गंभीर चर्चा की है. यह पहल न केवल द्विपक्षीय व्यापार को आसान बना सकती है, बल्कि अफ्रीका में बढ़ते चीन के प्रभाव के बीच भारत के लिए एक रणनीतिक कदम भी मानी जा रही है.
लोकल करेंसी ट्रेड पर फोकस
भारत सरकार और दार-एस-सलाम के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत में यह प्रस्ताव सामने आया कि व्यापार को डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय मुद्राओं में निपटाया जाए. इससे लेन-देन की लागत कम हो सकती है और व्यापारिक प्रक्रियाएं अधिक सरल बन सकती हैं. यह मुद्दा 29-30 अप्रैल 2026 को तंजानिया की राजधानी दार-एस-सलाम में आयोजित भारत-तंजानिया संयुक्त व्यापार समिति (JTC) की बैठक में प्रमुखता से उठाया गया.
अफ्रीका में चीन की मजबूत पकड़
तंजानिया में चीन पहले से ही एक बड़ा व्यापारिक साझेदार और निवेशक है. वह वहां इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और खनन जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश कर चुका है. खासतौर पर ग्रेफाइट और सोने जैसे रणनीतिक खनिजों पर उसकी नजर है. इसके अलावा, चीन ने मई 2026 से तंजानिया सहित कई अफ्रीकी देशों के लिए ‘जीरो-टैरिफ’ नीति लागू की है, जिससे उसकी आर्थिक पकड़ और मजबूत होने की उम्मीद है. ऐसे में भारत की नई पहल को सीधे तौर पर प्रतिस्पर्धी कदम के रूप में देखा जा रहा है.
भारत और चीन की रणनीति में अंतर
जहां चीन का फोकस खनिज संसाधनों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर है, वहीं भारत तंजानिया के कृषि उत्पादों जैसे दालें और काजू का प्रमुख खरीदार बना हुआ है. भारत की रणनीति ज्यादा संतुलित और साझेदारी आधारित मानी जाती है, जिसमें क्षमता निर्माण और स्थानीय विकास पर जोर दिया जाता है.
कई सेक्टरों में सहयोग की संभावना
बैठक के दौरान दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की, जिनमें शामिल हैं:
1. भारतीय व्यापारियों के लिए लंबी अवधि के व्यापार वीजा
2. फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर में नियामक सहयोग
3. स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में साझेदारी
4. जहाज निर्माण और बंदरगाह विकास
5. कौशल विकास और क्षमता निर्माण
इसके अलावा, डिजिटल सहयोग जैसे रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम और डिजिलॉकर जैसी सेवाओं पर भी बातचीत हुई.
भारत के प्रमुख ऑफर
भारत ने तंजानिया को कई क्षेत्रों जैसे शिपयार्ड और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, रेलवे आधुनिकीकरण, लोकोमोटिव और रोलिंग स्टॉक की आपूर्ति, विशेष प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से स्किल डेवलपमेंट में सहयोग का प्रस्ताव दिया है, ये पहल तंजानिया की आर्थिक संरचना को मजबूत करने के साथ-साथ भारत की तकनीकी विशेषज्ञता को भी स्थापित कर सकती हैं.
बढ़ता द्विपक्षीय व्यापार
भारत और तंजानिया के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है.
1. 2024-25: 8.64 अरब डॉलर
2. 2025-26: 9.02 अरब डॉलर
यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं.
बता दें, भारत और तंजानिया के बीच लोकल करेंसी ट्रेड की दिशा में उठाया गया यह कदम केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम है. अफ्रीका में चीन की बढ़ती मौजूदगी के बीच भारत का यह प्रयास उसे एक मजबूत और विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित कर सकता है. आने वाले समय में यह पहल वैश्विक व्यापार के नए समीकरण भी तय कर सकती है.