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Byju’s के 22 बिलियन डॉलर से 220 मिलियन डॉलर्स तक के सफर में छुपी है ये सीख!

काम करने के तरीके के साथ-साथ रणनीतिक रूप से कुछ गलत कदम भी कंपनी द्वारा उठाये गए थे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

एक वक्त ऐसा था जब Byju’s 22 बिलियन डॉलर्स की वैल्यूएशन वाली कंपनी हुआ करती थी और इस वक्त कंपनी की वैल्यूएशन मात्र 220 मिलियन डॉलर्स रह गई है. अगर हम Byju’s के 22 बिलियन से 220 मिलियन डॉलर्स तक के इस सफर को ध्यान से देखें तो हमें बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है. कंपनी की वैल्यूएशन में नाटकीय रूप से आई इस गिरावट से हमें टेक और एडटेक इंडस्ट्री में मौजूद अनिश्चितता के बारे में पता चलता है. 

कहां से हुई शुरुआत?
कंपनी की वैल्यूएशन में गिरावट की शुरुआत ऐसे अधिग्रहणों की वजह से हुई जो कंपनी द्वारा अपने कारोबार के विस्तार के लिए जल्दबाजी में किये गए थे. इसके साथ ही कैपिटल में बढ़ोत्तरी के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे थे और काम करने के तरीके के साथ-साथ रणनीतिक रूप से कुछ गलत कदम भी कंपनी द्वारा उठाये गए थे जिसकी वजह से कंपनी की वैल्यूएशन में यह गिरावट देखने को मिली है. Byju’s द्वारा दर्जन भर कंपनियों के अधिग्रहण के लिए 2.5 बिलियन डॉलर्स खर्च किये गए. इसकी वजह से कंपनी के संसाधनों में कमी हुई और कंपनी का ध्यान अपने प्रमुख क्षेत्र से हटकर कहीं और केन्द्रित हो गया. 

मामले से मिली ये सीखें
इसके साथ ही कंपनी ने लगभग 1 बिलियन डॉलर्स जितनी रकम एडवर्टाइजिंग में इन्वेस्ट की थी और इस क्षेत्र में कंपनी ने अपनी कमाई का लगभग 79% हिस्सा एडवर्टाइजिंग पर खर्च किया. इसके साथ ही कंपनी को गवर्नेंस और इन्वेस्टर के अविश्वास से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ा. Byju’s के मामले से हमें ये 5 सीखें मिलती हैं: 

वृद्धि का ज्यादा टिकाऊ रास्ता: वृद्धि का ऐसा रास्ता बहुत जरूरी है जो पूरी तरह से बाहरी फंडिंग पर निर्भर न हो. कंपनियों को अपनी वृद्धि का रास्ता काम करने के अपने मजबूत सिद्धांतों के साथ तय करना चाहिये ताकि लंबे समय तक स्थिरता बनी रह सके. 

अकाउंटिंग से संबंधित अभ्यास: कंपनियों को अकाउंटिंग से संबंधित भरपूर अभ्यास जारी रखने चाहिए ताकि कंपनी पर किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही न की जा सके. 

खराब गवर्नेंस: Byju’s के मामले से हमें पता चलता है कि गवर्नेंस सिस्टम में पारदर्शिता होनी चाहिए और स्टेकहोल्डर्स के साथ स्पष्ट रूप से बातचीत जारी रखनी चाहिए.  

मार्केट की स्थिति: Byjus के मामले से हमें मार्केट की स्थिति की महत्ता के बारते में भी पता चलता है जिससे फंडरेजिंग में बाधा पड़ सकती है साथ ही इससे कंपनी की वैल्यूएशन पर भी फर्क पड़ता है. 

रणनीतिक विजन: रणनीतिक स्तर पर Byju’s द्वारा एक बहुत बड़ी गलती की गई थी. कंपनी ने अपनी रणनीति इस तरह से बनाई कि उसे प्रमुख रूप से एक हार्डवेयर बेचने वाली कंपनी के रूप में देखा जाने लगा न कि एक एडटेक या एजुकेशन कंपनी के रूप में.
 

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