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Surrogacy पर सरकार का बड़ा फैसला, 'सरोगेट मदर' के लिए राहत वाली खबर
नियमों के अनुसार स्वास्थ्य बीमा का राशि इतनी होनी चाहिए, जिससे प्रेग्नेंसी के दौरान और डिलीवरी के बाद होने वाली समस्याओं के इलाज के खर्चे को कवर किया जा सके.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: सरोगेसी को लेकर सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है. जो कपल सरोगेसी के जरिए पैरेंट्स बनने की चाहत रखते हैं, सरकार ने उनके लिए एक नया नियम जारी किया है. नए नियम के अनुसार, जो कपल माता-पिता बनने के लिए सरोगेसी का रास्ता अपनाना चाहते हैं, उन्हें सरोगेट मां के पक्ष में भी 36 महीने की अवधि का स्वास्थ्य बीमा कवरेज (General Health Insurance) खरीदना होगा. सरोगेसी से संबंधित जारी नियमों में इसे शामिल किया गया है.
सरोगेसी प्रॉसेस की अधिकतम संख्या तीन
नियमों के अनुसार स्वास्थ्य बीमा का राशि इतनी होनी चाहिए, जिससे प्रेग्नेंसी के दौरान और डिलीवरी के बाद होने वाली सभी समस्याओं के इलाज में होने वाले खर्चे को कवर किया जा सके. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 21 जून को जारी नियमों के अनुसार, सरोगेट मां पर किसी भी सरोगेसी प्रॉसेस की अधिकतम संख्या तीन होनी चाहिए. मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 के अनुसार सरोगेसी की प्रक्रिया के दौरान सरोगेट मदर को गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है.
36 महीने की अवधि वाला जनरल हेल्थ इंश्योरेंस
सरोगेसी को लेकर सरकार के नए नियमों में कहा गया है कि इच्छुक दंपति को सरोगेट मां के पक्ष में 36 महीने की अवधि वाला जनरल हेल्थ इंश्योरेंस लेना होगा, ताकि उसकी सेहत को लेकर होने वाले खर्चे का अतिरिक्त दबाव सरोगेट मां पर नहीं पड़े.
अदालत में एक हलफनामा भी देना होगा
इतना ही नहीं, नए नियम के अनुसार इच्छुक दंपति को सरोगेट मां के मेडिकल पर होने वाले खर्च, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, कोई हानि, कोई बीमारी या उसकी मृत्यु और सरोगेट मां पर किए गए अन्य निर्धारित खर्चों के मुआवजे की गारंटी के रूप में अदालत में एक हलफनामा भी देना होगा.
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