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Amazon पर $2.5 अरब का जुर्माना: अमेरिका में ग्राहकों को गुमराह करने का आरोप
अमेरिका की नियामक संस्था एफटीसी (FTC) ने ग्राहकों को गुमराह करने के आरोप में ऐमजॉन पर अब तक का सबसे बड़ा 2.5 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी Amazon को अमेरिका में एक बड़े कानूनी झटके का सामना करना पड़ा है. दरअसल, अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) ने Amazon पर अपने ग्राहकों को गुमराह कर प्राइम सब्सक्रिप्शन बेचने के आरोप में भारी-भरकम जुर्माना लगाया है. इस समझौते के तहत न सिर्फ कंपनी को $2.5 अरब (₹2.21 लाख करोड़ से अधिक) चुकाने होंगे, बल्कि लाखों ग्राहकों को मुआवजा भी दिया जाएगा. साथ ही, कंपनी को अपनी नीतियों और सब्सक्रिप्शन सिस्टम में पारदर्शिता लानी होगी.
प्राइम ग्राहकों को मिलेगा पैसा
इस समझौते के तहत 1.5 अरब डॉलर की रकम करीब 3.5 करोड़ प्राइम ग्राहकों में बांटी जाएगी. हर पात्र ग्राहक को करीब 51 डॉलर मिलेंगे. वहीं, शेष 1 अरब डॉलर एफटीसी के खाते में जाएगा. यह राशि उन ग्राहकों को दी जाएगी जिन्होंने 23 जून 2019 से 23 जून 2025 के बीच प्राइम सब्सक्रिप्शन लिया था लेकिन उसके फायदे ज्यादा नहीं उठाए.
सब्सक्रिप्शन कैंसिल न कर पाने वालों को भी राहत
कोर्ट दस्तावेजों के अनुसार, वे ग्राहक जिन्होंने प्राइम सब्सक्रिप्शन कैंसिल करने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाए, वे भी इस मुआवजे के लिए दावा कर सकेंगे. ऐमजॉन का कहना है कि इस डील से कंपनी को आगे बढ़ने और ग्राहकों पर ज्यादा फोकस करने का मौका मिलेगा.
क्या है मामला?
एफटीसी ने आरोप लगाया था कि ऐमजॉन ने ग्राहकों को प्राइम सब्सक्रिप्शन लेने और उसे कैंसिल करने की प्रक्रिया को जटिल बना दिया था. अब समझौते के बाद कंपनी को एक साफ और आसान बटन देना होगा ताकि ग्राहक आसानी से सब्सक्रिप्शन रद्द कर सकें. इसके अलावा नियम और शर्तों को भी स्पष्ट करना होगा.
निगरानी के लिए स्वतंत्र सुपरवाइजर
समझौते के तहत ऐमजॉन को एक स्वतंत्र सुपरवाइजर नियुक्त करना होगा जो यह सुनिश्चित करेगा कि कंपनी नियमों का सही पालन कर रही है. हालांकि कंपनी का कहना है कि इस समझौते में ज्यादातर बदलाव पहले ही किए जा चुके हैं और नए बदलाव बहुत कम करने होंगे.
FTC की पिछली आपत्तियां
एफटीसी ने अपने केस में दावा किया था कि 2017 से 2022 के बीच ऐमजॉन के अधिकारियों ने कई सुझावों को नजरअंदाज किया जिनसे साइन-अप और कैंसिलेशन की प्रक्रिया आसान हो सकती थी. हालांकि 2022 में, एफटीसी की जांच के दौरान कंपनी ने कुछ बदलाव किए. इसके बाद ही इस पर मुकदमा दर्ज किया गया.
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