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भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन GCCs में 15% गिरावट, विशेष तकनीकी कौशल की मांग मजबूत: रिपोर्ट
भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लेकर बनी सरकारी प्रतिबद्धता और मजबूत इंजीनियरिंग पूल भविष्य में इस क्षेत्र को और गति देने की तैयारी में है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत की प्रमुख टैलेंट सॉल्यूशंस कंपनी कैरिनेट (Careernet) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 'सेमीकंडक्टर डिजाइन GCCs में टैलेंट डिमांड एनालिसिस (FY 2024-25)' जारी की है. इस रिपोर्ट में भारत के टॉप 50 डिजाइन-केंद्रित सेमीकंडक्टर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में नौकरी की मौजूदा स्थिति और टैलेंट की मांग का विस्तृत विश्लेषण किया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के पहले और अंतिम तिमाही के बीच खुले पदों में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो साल भर की भर्ती गति में ठहराव को दर्शाता है. मई 2024 में 3,760 ओपन पोजिशन के साथ नौकरी की मांग चरम पर थी, जो जनवरी 2025 तक घटकर 3,040 हो गई और मार्च 2025 में 3,181 पर बंद हुई.
गिरावट के बावजूद विशिष्ट कौशलों की मांग
रिपोर्ट बताती है कि VLSI, एम्बेडेड सिस्टम्स, और RF/एनालॉग डिजाइन जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में कौशल की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है. मध्यम आकार के GCCs ने भर्ती में अधिक लचीलापन और तेजी दिखाई है.
विभिन्न तिमाहियों में भर्ती प्रवृत्तियों में बदलाव
1. Q1 की शुरुआत धीमी रही, लेकिन मई में हल्की रिकवरी (+3%) हुई
2. Q2 में सबसे बड़ी गिरावट अगस्त (-10%) में देखी गई
3. Q3 में स्थिति स्थिर हुई, दिसंबर में +6% की रिकवरी रही
4. Q4 में जनवरी में तेज गिरावट (-9%) के बाद फरवरी में सुधार (+6%) और मार्च में हल्की गिरावट (-1%) रही
3,000 से अधिक पेशेवरों की मासिक मांग
डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास (R\&D), और मैन्युफैक्चरिंग भूमिकाओं में मासिक औसत मांग 3,000 से अधिक रही है.
उच्च मांग वाले कौशल
1. फिजिकल डिजाइन
2. डिजाइन फॉर टेस्टेबिलिटी (DFT)
3. एम्बेडेड सिस्टम्स डेवलपमेंट
4. फ्रंट-एंड और बैक-एंड VLSI डिजाइन और वेरिफिकेशन
5. RF, मिक्स्ड-सिग्नल और एनालॉग डिजाइन
6. EDA टूल्स, सेमीकंडक्टर प्रोसेस इंजीनियरिंग, यील्ड एनालिसिस, डेटा इंजीनियरिंग और एम्बेडेड सिस्टम्स के लिए साइबर सुरक्षा
AI और ML के चिप डिजाइन में बढ़ते एकीकरण के चलते ये कौशल विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गए हैं. भारत की मजबूत इंजीनियरिंग क्षमता और सरकारी योजनाएं जैसे ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ इस मांग को और गति दे रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक डिजाइन GCCs की संख्या में 30% की वृद्धि का अनुमान है.
Careernet की चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO),नीलाभ शुक्ला ने कहा भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा अब केवल एक सपना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित पहल बन चुकी है. ₹76,000 करोड़ की 'सेमीकॉन इंडिया' योजना, 'चिप्स टू स्टार्टअप', 'स्मार्ट लैब्स' और AICTE की नई VLSI पाठ्यक्रम जैसे कदम देश को सेवा-आधारित अर्थव्यवस्था से उत्पाद और R\&D केंद्रित सेमीकंडक्टर शक्ति बनने की दिशा में ले जा रहे हैं."
मध्यम आकार की कंपनियां बनीं नई मांग की धुरी
रिपोर्ट के अनुसार, मध्यम आकार की कंपनियां सबसे अधिक लचीली और मांग बढ़ाने वाली शक्ति बनकर उभरी हैं. छोटे संगठन जहां उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील रहे, वहीं बड़े संगठन वैश्विक बाजार चक्रों के अनुरूप चले. Q4 में जहां स्टार्टअप्स और छोटे संगठन आशावादी रुख से पीछे हटे, वहीं मध्यम और बड़े संगठनों में Q3 और Q4 के दौरान नई मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई.
भले ही FY 2024-25 में ओवरऑल हायरिंग में गिरावट दर्ज की गई हो, लेकिन विशिष्ट तकनीकी कौशलों की मांग में मजबूती बनी रही है. भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लेकर बनी सरकारी प्रतिबद्धता और मजबूत इंजीनियरिंग पूल भविष्य में इस क्षेत्र को और गति देने की तैयारी में है.
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