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€10 मिलियन प्रोजेक्ट: हिमालय में हाई-एटलिट्यूड सुपरसाइट स्थापित, ग्लेशियर और जलवायु डेटा संग्रह शुरू

CryoSCOPE प्रोजेक्ट भारत और यूरोपीय संघ के बीच सतत सहयोग का प्रतीक है. इसका लक्ष्य विश्व के सबसे संवेदनशील जलवायु क्षेत्रों में विश्वसनीय डेटा उत्पन्न करना और हिमालय में बढ़ते जलवायु और जल संकट से निपटने के लिए तैयारी करना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

भारत और यूरोपीय संघ के सहयोग से चल रहे CryoSCOPE प्रोजेक्ट ने अपना पहला वर्ष पूरा कर लिया है. इस दौरान हिमालयी जलवायु और हिमनद (Glacier) पर होने वाले परिवर्तनों को बेहतर समझने के लिए नए फील्ड ऑब्जर्वेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित किए गए हैं. चार साल के इस प्रोजेक्ट का कुल बजट लगभग €10 मिलियन है और इसे फिनिश मेट्रोलॉजिकल इंस्टिट्यूट, यूरोपीय संघ, भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार राज्य सचिवालय द्वारा वित्तपोषित किया गया है.

हिमालय में हाई-एटलिट्यूड सुपरसाइट

इस प्रोजेक्ट के तहत भारतीय हिमालय को सुपरसाइट के रूप में चुना गया है, जो क्षेत्रीय जलवायु और पर्यावरणीय अनुसंधान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. पहले वर्ष में, 3,300 मीटर से अधिक ऊँचाई पर चालोंग कैचमेंट में हाई-एटलिट्यूड सुपरसाइट स्थापित किया गया. इसमें दो ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन, तीन स्नो प्लुवियोमीटर, ग्लेशियर लेक और नदी डिस्चार्ज सेंसर, हाइड्रोलॉजिकल फ्लक्स का आइसोटोप सैंपलिंग और दो हाई-एटलिट्यूड टाइम-लैप्स कैमरा सिस्टम शामिल हैं.

इन कैमरों के माध्यम से researchers साप्ताहिक और दैनिक आधार पर बर्फ की मोटाई और मौसमीय बदलावों को ट्रैक कर सकते हैं. इसके अलावा, यह प्रोजेक्ट वायु प्रदूषण, स्थानीय पवन प्रणालियों और बदलते वर्षा पैटर्न की हिमनद पिघलने की प्रक्रिया पर प्रभाव की जांच करेगा.

वैज्ञानिक उद्देश्यों और डेटा उपयोग

IIT मद्रास के एसोसिएट प्रोफेसर चंदन सरंगी ने बताया, "ये माप हमें उच्च पर्वतीय वातावरण में वायुमंडल और भूमि प्रक्रियाओं के इंटरैक्शन को सीधे समझने में मदद करते हैं. अलग-अलग ऊँचाई और उच्च समयानुसार माप लेने से हम क्षेत्रीय जलवायु मॉडल में सुधार कर सकते हैं और हिमनद परिवर्तनों तथा जल उपलब्धता का सटीक अनुमान लगा सकते हैं."

संग्रहित डेटा को refined Earth System Models में डाला जाएगा, जिससे उच्च पर्वतीय क्रायोस्फियर प्रक्रियाओं का बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सकेगा.

हिमालय में जलवायु जोखिम बढ़ रहे हैं

पश्चिमी विक्षेप (Western Disturbances) में बदलाव और हिमालयी जलवायु में तेज़ी से परिवर्तन वर्षा, हिमपात, रनऑफ और भूस्खलन के जोखिम को प्रभावित कर रहे हैं. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हिमालय और हिंदुकुश क्षेत्र में बर्फ और हिमनद का घटना कृषि, जलविद्युत और ग्लेशियर-निर्भर समुदायों के लिए जल संकट पैदा कर सकता है.

CryoSCOPE प्रोजेक्ट का मानना है कि अगर उच्च-ऊँचाई माप और क्रायोस्फियर, वायुमंडल एवं हाइड्रोलॉजी के बीच संबंध को लंबे समय तक मापा नहीं गया, तो जलवायु और जल संसाधनों के अनुमान असुरक्षित रहेंगे, जिससे नीति निर्माण प्रभावित होगा.

भारत-ईयू वैज्ञानिक सहयोग का विस्तार

CryoSCOPE भारत और यूरोपीय संघ के बीच सबसे व्यापक जलवायु विज्ञान सहयोगों में से एक है. भारतीय फील्ड टीमें यूरोपीय सहयोगियों के साथ मिलकर सेंसर नेटवर्क को मानकीकृत कर रही हैं, विश्लेषणात्मक टूल साझा कर रही हैं और खुला डेटा सेट विकसित कर रही हैं, जिसे वैज्ञानिक, नीति निर्माता और जलवायु सेवाओं के लिए उपयोग किया जाएगा.

दूसरे वर्ष में ध्यान हिमालय से प्राप्त बढ़ते फील्ड डेटा का विश्लेषण करने पर रहेगा. उद्देश्य यह है कि हिम, बर्फ, वायुमंडल और जल के इंटरैक्शन को जलवायु और हाइड्रोलॉजिकल मॉडल में बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया जा सके.

 


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