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Conclave: बेहतर भविष्य के लिए EV जरूरी और EV के लिए बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर
आने वाला समय इलेक्ट्रिक वाहनों का है, लेकिन इस राह में कई चुनौतियां भी हैं. इस संबंध में दिल्ली में आयोजित कॉन्क्लेव में चर्चा हुई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार, उससे जुड़ी चुनौतियों और अवसरों पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में चर्चा हुई. पैन IIT एलुमिनाई और एलुमिनाई एसोसिएशन ऑफ IIT - BHU द्वारा इसका आयोजन किया गया. 'द फ्यूचर सीरीज, EV इकोसिस्टम कॉन्क्लेव' नामक इस कार्यक्रम के दौरान पूरे ई-मोबिलिटी इकोसिस्टम के विशेषज्ञ, शिक्षाविद और नीति-निर्माता एक मंच पर जुटे और ईवीएस की प्रासंगिकता, इनोवेशन, एडॉप्शन और ऑटो सेक्टर की चुनौतियों पर चर्चा की.
क्या है उद्देश्य?
इस आयोजन में ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA), IIT दिल्ली एलुमिनाई एसोसिएशन, PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स और NASSCOM सेंटर ऑफ एक्सीलेंस - IoT और AI ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. कॉन्क्लेव का उद्देश्य तेजी से बदलते ईवी इकोसिस्टम की गतिशीलता को व्यापक रूप से समझना और यह पता लगाना है कि कैसे EV कार्बन उत्सर्जन को कम करने एयर क्वालिटी में सुधार करने के सबसे आशाजनक मार्गों में से एक बन सकता है.
देश के सामने बड़ा टास्क
एलुमिनाई एसोसिएशन ऑफ IIT - BHU, बनारस के अध्यक्ष संजीव निकोरे ने कहा, 'भारत ई-मोबिलिटी शिफ्ट में भारी निवेश कर रहा है. Internal Combustion Engine (ICE) वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों में शिफ्ट होने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ, भारत के सामने एक बहुत ही बड़ा टास्क है. भारतीय मोटर वाहन क्षेत्र तेजी से मजबूत बदलाव के दौर से गुजर रहा है - जीवाश्म ईंधन पर न्यूनतम निर्भरता के साथ देश को हरित भविष्य की ओर ले जाने के लिए'. उन्होंने आगे कहा कि कॉन्क्लेव इंडस्ट्री के सबसे प्रभावशाली माइंडस को एक साथ लाती है, जो अपनी अंतर्दृष्टि और सफलताओं को साझा करेंगे और स्थायी भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करेंगे.
कैसे कम करें लागत?
अगस्त 2022 तक भारतीय सड़कों पर कुल 13,92,265 EV हैं और 2030 तक, इसके 45-50 मिलियन तक पहुंचने की संभावना है. EV कारों में बैटरी सबसे महत्वपूर्ण कॉम्पोनेन्ट होता है और इसकी बढ़ती लागत से EV गाड़ियों की कीमत भी बढ़ेगी. इस बारे में कॉन्क्लेव में मौजूद पैनलिस्ट ने कहा कि भारत में लिथियम-आयन बैटरी विकसित करने के लिए कच्चे माल का आयात करना ईवी की उच्च लागत के सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है. इसलिए, बैटरी में इनोवेशन लाना आवश्यक है, जैसे कि लिथियम-आयन बैटरी को रिसाइकिल करना और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में मटेरियल एक्सट्रेक्ट करना, जिससे आगे चलकर ईवी की लागत को कम करने में मदद मिल सकती है.
चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर जरूरी
ऑटोमोटिव रिसर्च एंड ट्राइबोलॉजी सेंटर (सीएआरटी) के Dr B K Panigrahi ने कहा कि बेहतर भविष्य के लिए EV महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी राह में कई चुनौतियां भी हैं. विशेष रूप से ईवी की हाई कॉस्ट और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की धीमी गति चिंता का विषय है. इसके अलावा, अपर्याप्त सर्विस स्टेशन, स्किल्ड मैनपावर की कमी आदि भी बड़ी चुनौती है. कॉन्क्लेव में मौजूद बाकी पैनलिस्ट ने भी माना कि EV के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित करने की जरूरत है. पर्याप्त बैटरी चार्जिंग बनाने जाने चाहिए, तभी लोगों का रुझान EV की तरफ ज्यादा होगा.
इन पर देना होगा ध्यान
पैन IIT एलुमिनाई के प्रेसिडेंट देबाशीष भट्टाचार्य ने कहा कि वाहनों के लिए पारंपरिक ईंधन की जगह EV का इस्तेमाल भविष्य के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन हमें इसकी राह में आने वाली चुनौतियों को दूर करने के प्रयासों में भी तेजी लानी होगी. बैटरी टेक्नोलॉजी, रेंज, अफोर्डेबिलिटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खास ध्यान देना आवश्यक है. इसके अलावा, EV वाहनों की मेंटनेंस और रिपेयर को भी आसान बनाना होगा. Transport South Asia, The World Bank के प्रैक्टिस मैनेजर homik Raj Mehndiratta और NASSCOM सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के सीईओ Sanjeev Malhotra ने भी माना कि बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देना होगा.
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