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प्रो. सौगत रे बने NMIMS के नए VC, 30 साल से अधिक के अनुभव के साथ संभाली कमान
प्रो. सौगत रे के नेतृत्व में NMIMS शोध, अंतरविषयक शिक्षा, उद्यमिता, उद्योगों के साथ साझेदारी, वैश्विक सहयोग और AI-सक्षम शिक्षा को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान देगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 day ago
एसवीकेएम (SVKM) के नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) ने प्रो. सौगत रे को अपना नया वाइस चांसलर नियुक्त किया है. उनकी नियुक्ति 16 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई है. उच्च शिक्षा, रणनीति, नवाचार, उद्यमिता और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले प्रो. रे अब संस्थान का नेतृत्व करेंगे.
ISB और IIM कलकत्ता में निभा चुके हैं अहम जिम्मेदारियां
NMIMS से जुड़ने से पहले प्रो. सौगत रे इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) में थॉमस श्मिडहाइनी चेयर्ड प्रोफेसर ऑफ स्ट्रेटजी एंड एंटरप्रेन्योरशिप प्रैक्टिस और थॉमस श्मिडहाइनी सेंटर फॉर फैमिली एंटरप्राइज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थे.
इससे पहले उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) कलकत्ता में प्रोफेसर ऑफ स्ट्रेटजिक मैनेजमेंट, डीन और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य सहित कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं. इसके अलावा वे इंफोसिस टेक्नोलॉजीज में इनोवेशन लैब के जनरल मैनेजर भी रह चुके हैं.
NMIMS को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की उम्मीद
NMIMS के चांसलर अमरीश आर. पटेल ने कहा कि प्रो. रे की उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियां, प्रभावी नेतृत्व क्षमता और संस्थान निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें NMIMS के अगले विकास चरण का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है.
AI आधारित शिक्षा और नवाचार पर रहेगा जोर
अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रो. सौगत रे ने कहा कि ऐसे समय में NMIMS का नेतृत्व करना उनके लिए सम्मान की बात है, जब वैश्विक स्तर पर उच्च शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. उन्होंने कहा, "मैं संस्थान की मौजूदा मजबूत नींव को आगे बढ़ाते हुए नवाचार, अंतरविषयक शिक्षा और समाज पर सकारात्मक प्रभाव को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हूं. हमारा लक्ष्य ऐसे भविष्य के नेताओं को तैयार करना है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित और समावेशी दुनिया की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें."
शोध और वैश्विक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
प्रो. सौगत रे IIM अहमदाबाद और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IIEST), शिवपुर के पूर्व छात्र हैं. उन्होंने अब तक लगभग 200 शोध पत्र, लेख, पुस्तकें और केस स्टडी लिखी हैं. साथ ही IIM इंदौर, IIM कलकत्ता और ISB में संस्थान निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रयासों में भी योगदान दिया है.
उनके नेतृत्व में NMIMS शोध, अंतरविषयक शिक्षा, उद्यमिता, उद्योगों के साथ साझेदारी, वैश्विक सहयोग और AI-सक्षम शिक्षा को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान देगा.
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