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डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, UPI लेन-देन पर कितना चार्ज लगे? RBI को आप भी सौंपे सुझाव

RBI ने अपने डिस्कशन पेपर में कन्वीनियंस फीस को लेकर भी सवाल पूछा है. रेगुलेटर को इस मामले में काफी शिकायतें मिली हैं. लोगों ने इसमें पारदर्शिता की कमी की शिकायत की है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

मुंबई: क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाले चार्ज आने वाले समय में कम हो सकते हैं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक डिस्कशन पेपर जारी किया है, जिसमें सभी स्टेकहोल्डर्स से उनके सुझाव मांगे हैं. RBI ने सभी पेमेंट सिस्टम पर लगने वाले चार्जेस और उससे जुड़ी शिकायतों को लेकर लोगों से भी सुझाव मांगे हैं. अपनी राय देने के लिए लोगों को 3 अक्टूबर 2022 तक का समय दिया गया है.  

RBI ने जारी किया डिस्कशन पेपर
डिस्कशन पेपर में पेमेंट सिस्टम जैसे  IMPS, NEFT, RTGS, UPI से सभी तरह के चार्जेस को कवर किया गया है. इसके अलावा डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स यानी PPI से जुड़े चार्जेस पर भी लोगों से सुझाव मांगे गए हैं. रिजर्व बैंक का कहना है कि पेमेंट सर्विसेज के लिए चार्ज यूजर्स के लिए वाजिब होना चाहिए, और कंपनियों को भी इससे कमाई होनी चाहिए. जो भी फीडबैक मिलेगा उसका इस्तेमाल पॉलिसी बनाने और रणनीति बनाने में होगा. रिजर्व बैंक ने दिसंबर में एक डिस्कशन पेपर लाने का प्रस्ताव दिया था. जो डिजिटल पेमेंट के सभी तरह के चार्ज पर हो, जिससे डिजिटल लेन-देन को यूजर्स के लिए सस्ता और सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए फायदेमंद बनाया जा सके. 

डिस्कशन पेपर में क्या है

1- डिस्कशन पेपर में पूछा गया है कि क्या डेबिट कार्ड लेन-देन पर सामान्य फंड ट्र्रांसफर की तरह चार्ज लगना चाहिए और क्या सभी मर्चेंट्स के लिए MDR एक समान होना चाहिए. MDR का मतलब है मर्चेंट डिस्काउंट रेट, ये एक कमीशन होता है जो बैंक और कार्ड जारी करने वाले (  जैसे- VISA, Mastercard, AMEX) आपस में शेयर करते हैं. 

2- फिलहाल डेबिट कार्ड्स, RuPay और UPI पर किसी तरह का चार्ज नहीं लगता है क्योंकि ये सरकार की Zero-MDR पॉलिसी के तहत आते हैं. मतलब मर्चेंट इन मोड से किए गए किसी भी पेमेंट पर चार्ज नहीं वसूल सकते. हालांकि Visa और Mastercard डेबिट कार्ड पर 0.4 से 0.9 परसेंट तक MDR चार्ज लगता है. 

3- डिस्कशन पेपर में रिजर्व बैंक ने पूछा है कि क्या RuPay कार्ड को MDR के मामले में दूसरे अंतरराष्ट्रीय कार्ड्स से अलग देखा जाना चाहिए, साथ ही क्या रिजर्व बैंक को डेबिट कार्ड के लिए MDR को डी-रेगुलेट कर देना चाहिए और स्टेकहोल्डर्स पर छोड़ देना चाहिए कि वो अपने हिसाब से MDR चार्ज की वसूली करें. क्रेडिट कार्ड्स के लिए भी रिजर्व बैंक ने लोगों से सुझाव मांगे हैं.  रिजर्व बैंक ने पूछा है कि क्या क्रेडिट कार्ड पर MDR चार्ज वाजिब हैं, और क्या रिजर्व बैंक को क्रेडिट कार्ड्स और PPI के लिए MDR को रेगुलेट करना चाहिए. 

4- UPI को लेकर RBI ने पूछा है कि अगर UPI लेन-देन पर चार्ज लगता है, तो क्या उसे RBI की देखरेख में होना चाहिए या फिर उसे मार्केट के हवाले कर देना चाहिए. अगर ग्राहकों पर कोई सरचार्ज लगाया जाता है तो उसे किसको रेगुलेट करना चाहिए. 

5- इसके अलावा रिजर्व बैंक ने पूछा है कि क्या NEFT की सुविधा पर रिजर्व बैंक को बैंकों से चार्ज लेना चाहिए साथ ही में क्या बैंकों को भी छूट दी जाए कि वो ग्राहकों से NEFT के बदले फीस ले सकें. 

कन्वीनियंस फीस को लेकर भी सवाल 
RBI ने अपने डिस्कशन पेपर में कन्वीनियंस फीस को लेकर भी सवाल पूछा है. जब आप कोई हवाई टिकट, रेलवे का टिकट या फिल्म का टिकट खरीदते हैं तो आपसे कन्वीनियंस फीस वसूली जाती है. अब इस कन्वीनियंस फीस को लेकर पारदर्शिता नहीं है. क्योंकि अगर आपने एक ही ट्रांजैक्शन में कई लोगों को टिकट बुक किए, तो सभी पर अलग-अलग कन्वीनियंस चार्ज लगता है, जबकि टिकट तो एक ही समय में एक ही ट्रांजैक्शन से बुक हुआ है. इस तरह की शिकायतें मिलने के बाद रिजर्व बैंक ने अपने डिस्कशन पेपर में पूछा है कि क्या ये चार्ज फिक्स होने चाहिए, या फिर ट्रांजैक्शन की वैल्यू के हिसाब से तय होने चाहिए. 

RBI को ऐसे दें सुझाव 
अगर आप भी रिजर्व बैंक को अपने सुझाव देना चाहते हैं तो अपनी राय dpssfeedback@rbi.org.in पर भेज सकते हैं . आपके पास 3 अक्टूबर तक का समय है. इन सुझावों के आधार पर रिजर्व बैंक नीतियां और रणनीति बनाएगा.

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