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आखिर क्यों Google को डिजिटल ईस्ट इंडिया कंपनी बता रहे हैं Anupam Mittal?
गूगल ने अपनी पॉलिसी में बदलाव किया था. अब गूगल के ऑप्शनल बिलिंग सिस्टम को चुनने पर भी डेवलपर्स को सर्विस फीस चुकानी होगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
पिछले कुछ समय से सर्च इंजन गूगल (Google) और इसकी पैरेंट कंपनी Alphabet Inc. को दुनिया भर में बहुत से विवादों का सामना करना पड़ रहा है. अब कुछ ऐसा हुआ है जिसकी वजह से गूगल को भारत में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. बिजनेस रियलिटी शो शार्क टैंक इंडिया के जज और बिजनेसमैन अनुपम मित्तल (Anupam Mittal) ने गूगल के बिलिंग सिस्टम पर देश के कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.
भारतीय कानून के विरुद्ध है गूगल की बिलिंग
Shaadi.com के फाउंडर अनुपम मित्तल ने गूगल के बिलिंग सिस्टम को “गैर-कानूनी” बताया है और गूगल कि पैरेंट कंपनी Alphabet Inc. को ‘डिजिटल ईस्ट इंडिया कंपनी’ बताया है. अनुपम मित्तल को उम्मीद है कि इस मुद्दे पर PMO (प्रधानमंत्री कार्यालय) को ध्यान देना चाहिए. अनुपम मित्तल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक ट्वीट किया है जिसमें लिखा है कि “गूगल से कॉल आई थी. जिसमें गूगल ने भारतीय डेवलपर्स के लिए पेमेंट्स को जरूरी बना दिया है. यह CCI (कम्पटीशन कमीशन ऑफ इंडिया) के आदेशों और भारतीय कानूनों के विरुद्ध है. मुझे उम्मीद है कि मीडिया, अदालत और PMO इस मुद्दे पर ध्यान देंगे. डिजिटल ईस्ट कंपनी आ चुकी है.
Received a call from @Google today mandating their payments for Indian developers in continued violation & disregard of @CCI_India orders & Indian laws. Neo-colonialism at its worst! Hope the media,
— Anupam Mittal (@AnupamMittal) April 20, 2023
courts & @PMOIndia ?? are taking note … the Digital East India Co is here
गूगल बिलिंग में बदलाव
हाल ही में गूगल ने अपनी पॉलिसी में बदलाव किया था. अब गूगल के ऑप्शनल बिलिंग सिस्टम को चुनने पर भी डेवलपर्स को सर्विस फीस चुकानी होगी. हालांकि यह फीस स्टैण्डर्ड फीस की तुलना में 4% तक कम होगी. इससे पहले भी कई बार गूगल पर CCI के आदेशों का उल्लंघन करने और ऑप्शनल बिलिंग सिस्टम को चुनने वाले ऐप डेवलपर्स से 11-26% जितना कमीशन लेने जैसे आरोप लगाए जा चुके हैं. ADIF (एसोसिएशन ऑफ डिजिटल इंडिया फाउंडेशन) ने CCI सहित अन्य सरकारी संस्थाओं से इस मामले पर ध्यान देने का अनुरोध किया था और साथ ही यह निवेदन भी किया था कि गूगल किसी भी तरह से CCI के आदेशों का उल्लंघन न करे.
गूगल कैसे कर रहा है नियमों का उल्लंघन
डिजिटल स्टार्टअप्स की पॉलिसी से जुड़े थिंक-टैंक ADIF ने बयान देते हुए कहा था कि हाल ही में गूगल ने ऐप डेवलपर्स के लिए अपने बिलिंग सिस्टम में बदलाव किया है. गूगल ने बताया है कि अगर कोई यूजर ऑप्शनल बिलिंग सिस्टम के जरिये पेमेंट करेगा तो गूगल प्ले की सर्विस की फीस लगभग 4% कम हो जायेगी लेकिन ऐसे में अगर कोई ऐप डेवलपर गूगल प्ले सर्विस का इस्तेमाल नहीं करता है तो भी उसे गूगल को कमीशन देनी पड़ेगी. ADIF का कहना था कि इस तरह से गूगल साफ़ तौर पर CCI के आदेशों का उल्लंघन कर रहा है. CCI ने गूगल को आदेश दिया था कि कंपनी को ऐप डेवलपर्स पर कोई भी ऐसी शर्त नहीं लगानी चाहिए जो अनुचित और गैर कानूनी हो. यूजर द्वारा थर्ड-पार्टी प्रोसेसिंग सर्विस का इस्तेमाल न करने पर भी कंपनी 11-26% का कमीशन क्यों ले रही है इसे लेकर गूगल की तरफ से साफ तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है.
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