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भारत का पहला पोलर रिसर्च वेसल अब स्वदेश में होगा तैयार, GRSE और नॉर्वे की कंपनी Kongsberg के बीच समझौता
इस समझौता ज्ञापन के तहत भारत को अत्याधुनिक पोलर रिसर्च वेसल के निर्माण के लिए डिज़ाइन विशेषज्ञता प्राप्त होगी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
भारत अब खुद अपने पोलर रिसर्च वेसल (PRV) को डिज़ाइन और तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा चुका है। कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और नॉर्वे की कंपनी Kongsberg के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जिसकी जानकारी केंद्रीय पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) ने दी।
इस समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत भारत को अत्याधुनिक पोलर रिसर्च वेसल के निर्माण के लिए डिज़ाइन विशेषज्ञता प्राप्त होगी। यह जहाज़ नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशियन रिसर्च (NCOPR) की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया जाएगा, जो अंटार्कटिका और दक्षिणी महासागरों में अनुसंधान कार्य करता है।
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “यह समझौता सिर्फ एक जहाज़ के निर्माण की शुरुआत नहीं है, बल्कि भारत की वैज्ञानिक तरक्की, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नई मिसाल है। यह वेसल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।”
GRSE को जटिल समुद्री जहाज़ जैसे युद्धपोत, सर्वे और अनुसंधान पोतों के निर्माण का अनुभव है, और अब यही कंपनी कोलकाता स्थित अपने यार्ड में भारत का पहला PRV बनाएगी।
सोनोवाल हाल ही में नॉर्वे में आयोजित उच्चस्तरीय मंत्री स्तरीय बैठक ‘शिपिंग की भूमिका भविष्य के निर्माण में’ में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इस बैठक में समुद्री व्यापार को दीर्घकालिक, स्थिर और पर्यावरण के अनुकूल दिशा में आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया।
सोनोवाल ने नॉर्वेजियन शिपओनर्स को भारत के उभरते समुद्री क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया। नॉर्वेजियन शिपओनर्स एसोसिएशन (NSA) के साथ आयोजित राउंडटेबल मीटिंग में उन्होंने संगठन के अध्यक्ष हेराल्ड फोटलैंड का धन्यवाद करते हुए कहा कि “भारत और नॉर्वे के साझा मूल्य – नवाचार, स्थिरता और विकास – इस साझेदारी को और मजबूत बनाएंगे।”
यह समझौता न केवल भारत के शिपबिल्डिंग सेक्टर के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह देश के वैज्ञानिक मिशनों को स्वदेशी तकनीक से मज़बूती देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम भी है।
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