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Happy Birthday साक्षी मलिक : संघर्ष से स्वर्ण तक भारतीय कुश्ती की मिसाल, जिसने रच दिया इतिहास

ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक को जन्मदिन पर नमन -एक ऐसी खिलाड़ी, जिनकी हिम्मत, संघर्ष और बदलाव की आवाज आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago

साक्षी मलिक, भारतीय कुश्ती की दुनिया में वह नाम है जिसने 2016 के रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया. वह ओलंपिक में पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बनीं. उस समय जब देश में लड़कियों का कुश्ती में हिस्सा लेना भी असामान्य माना जाता था, साक्षी ने न केवल समाजिक बंधनों को तोड़ा, बल्कि परिवारिक संकोचों को भी मात दी.

एक छोटे गांव से बड़ी उड़ान

3 सितंबर 1992 को हरियाणा के रोहतक जिले के छोटे से गांव मोकड़ा में जन्मी साक्षी का सफर उनके दादा से प्रेरित था, जो खुद पहलवान थे. महज़ 12 साल की उम्र में उन्होंने कोच ईश्वर दहिया की देखरेख में स्थानीय अखाड़े में अभ्यास शुरू किया. पढ़ाई और कठिन प्रशिक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए साक्षी ने अपने जज़्बे और मेहनत से अपने लिए एक अलग पहचान बनाई.

सफलता की सीढ़ी चढ़ती साक्षी

साक्षी की अंतरराष्ट्रीय यात्रा 2010 जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के साथ शुरू हुई. इसके बाद उन्होंने 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक और 2015 के एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता. ये उपलब्धियाँ उनकी निरंतर मेहनत और लगन का प्रमाण थीं.

रियो ओलंपिक: निर्णायक पल

2016 के रियो ओलंपिक में साक्षी की असली परीक्षा थी. पहले दौर में स्वीडन की जोहाना मैटसन और मोल्डोवा की मरीआना चेर्दिवारा को हराने के बाद वह क्वार्टर फाइनल में रूस की वलेरिया कोब्लोवा से हार गईं. लेकिन कोब्लोवा के फाइनल में पहुंचने के चलते साक्षी को रेपचेज (Repechage) राउंड में दूसरा मौका मिला.

इस मौके का फायदा उठाते हुए साक्षी ने मंगोलिया की पुएरवदोर्जिन ओरखोन को हराया और फिर एशियाई चैंपियन ऐसुलू तिनिबेकोवा को 8-5 से हराकर कांस्य पदक जीत लिया. यह जीत केवल एक पदक नहीं थी, यह एक नई सोच, नई शुरुआत और नई उम्मीद का प्रतीक बन गई.

सम्मान और प्रेरणा का स्रोत

रियो ओलंपिक के बाद साक्षी को भारत सरकार ने 2016 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार और 2017 में पद्म श्री से सम्मानित किया. ये पुरस्कार सिर्फ उनकी खेल उपलब्धियों के लिए नहीं थे, बल्कि उन लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणा भी थे, जो अपने सपनों को पंख देना चाहती हैं.

खिलाड़ी से समाज सुधारक तक

खेलों के मैदान से बाहर भी साक्षी ने अपनी आवाज बुलंद की. महिला खिलाड़ियों के अधिकारों और खेल संघों में हो रहे दुर्व्यवहार के खिलाफ वह मजबूती से खड़ी रहीं. उनकी निडरता ने कुश्ती में न केवल बदलाव लाया, बल्कि महिला खिलाड़ियों के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल बनाने की दिशा में भी पहल की.

कुश्ती के बाद भी सक्रिय योगदान

2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर साक्षी ने अपने खेल जीवन को नई ऊंचाई दी. 2023 में अपने शानदार करियर के बाद उन्होंने संन्यास की घोषणा की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में कुश्ती निदेशक के रूप में और भारतीय रेलवे में अपनी सेवा जारी रखी.

व्यक्तिगत जीवन और विरासत

2017 में उन्होंने साथी पहलवान सत्यव्रत कादियन से विवाह किया. यह रिश्ता भी उनके जीवन में मजबूती और समानता का प्रतीक बना. साक्षी की कहानी सिर्फ पदकों की नहीं, बल्कि हिम्मत, संघर्ष और बदलाव की है. वह उन लड़कियों के लिए मिसाल हैं जो सीमाओं को तोड़कर अपना भविष्य खुद लिखना चाहती हैं.

साक्षी मलिक की नेट वर्थ

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार साक्षी मलिक की कुल नेट वर्थ 2024–25 में ₹ 40 करोड़(लगभग $5 मिलियन) है. यह संपत्ति उनकी खेल उपलब्धियों, ओलंपिक से मिलने वाले पुरस्कार, ब्रांड एंडोर्समेंट्स और सरकारी सम्मान जैसे फंड समारोहों से जुटी है. उन्हें रियो ओलंपिक की जीत के बाद ₹ 3.5 करोड़ की इनाम राशि मिली थी, वहीं उनकी सालाना आय लगभग ₹ 1 करोड़ है. वह Asics और JSW Sports जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड्स एंडोर्स करती हैं. साक्षी के पास BMW 320d और Datsun Go जैसी कारें हैं, जिन्हें उन्हें ओलंपिक जीत के उपलक्ष्य में दिया गया था.

BW Businessworld साक्षी मलिक को उनके जन्मदिन पर सलाम करता है - एक ऐसी प्रेरणादायक महिला जिन्होंने न सिर्फ भारत की पहली महिला ओलंपिक पदक विजेता पहलवान बनकर इतिहास रचा, बल्कि सामाजिक बंधनों और अन्याय के खिलाफ डटकर खड़ी रहीं.

जन्मदिन मुबारक हो, साक्षी मलिक
आपकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को लड़ने, बढ़ने और जीतने की प्रेरणा देती रहेगी.

 


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