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संसद सत्र से पहले थरूर की टिप्पणियों से कांग्रेस में घमासान, पार्टी कर सकती है अनुशासनात्मक कार्रवाई : रिपोर्ट
शशि थरूर की बेबाकी और स्वतंत्र सोच एक बार फिर कांग्रेस के भीतर असहजता पैदा कर रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
जैसे-जैसे संसद का मानसून सत्र नजदीक आ रहा है, कांग्रेस सांसद शशि थरूर की हालिया टिप्पणियों और गतिविधियों ने पार्टी के भीतर हलचल मचा दी है. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व आंतरिक स्तर पर यह विचार कर रहा है कि थरूर को पार्टी लाइन से अलग बयान देने से कैसे रोका जाए.
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच यह चर्चा हो रही है कि थरूर को पार्टी की ओर से बोलने से रोका जाए. एक विकल्प यह भी विचाराधीन है कि उनके खिलाफ 'व्हिप' जारी किया जाए, जिसे न मानने पर उनकी लोकसभा सदस्यता खतरे में पड़ सकती है. हालांकि, पार्टी के कुछ अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि इतनी सख्त कार्रवाई उल्टा असर भी डाल सकती है.
थरूर ने पहले ही यह आरोप लगाया है कि उन्हें संसद में बोलने के अवसर नहीं दिए जा रहे हैं और वह यह भी कह चुके हैं कि ऐसे सांसदों को समय दिया जा रहा है जो भाषा में अधिक दक्ष नहीं हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बीजेपी “ऑपरेशन सिंदूर” से जुड़ी विदेश यात्राओं पर चर्चा के दौरान थरूर जैसे नेताओं को बोलने का अवसर दे सकती है. इसे देखते हुए, कांग्रेस ने हाल ही में अपनी संसदीय पार्टी की बैठक में थरूर का नाम शामिल किया, हालांकि उस समय वह देश से बाहर थे.
केरल कांग्रेस ने गेंद हाईकमान के पाले में डाली
केरल में कांग्रेस नेतृत्व ने थरूर से जुड़े मसले को पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व पर छोड़ दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा और आपातकाल के संदर्भ में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आलोचना ने राज्य के कांग्रेस नेताओं के साथ उनके रिश्तों में खटास ला दी है. थरूर को स्थानीय कांग्रेस कार्यक्रमों से दूर रखा जा रहा है. हाल ही में एर्नाकुलम जिला कांग्रेस समिति द्वारा आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में भी थरूर अनुपस्थित रहे.
पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और महासचिव के.सी. वेणुगोपाल समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने थरूर की सार्वजनिक आलोचना की है. वहीं, सांसद मणिकम टैगोर ने सोशल मीडिया पर एक शिकारी पक्षी की तस्वीर साझा करते हुए थरूर पर तंज कसा. पार्टी के मुखपत्र में थरूर को "अवसरवादी" करार देते हुए एक लेख भी प्रकाशित किया गया.
थरूर की सफाई
आलोचनाओं के जवाब में थरूर ने कहा कि आपातकाल पर उनकी राय उनके 1997 में प्रकाशित पुस्तक में भी दर्ज है और उनका मकसद गांधी परिवार को निशाना बनाना नहीं था. उन्होंने यह भी दोहराया कि कभी-कभी राष्ट्रीय हित में विभिन्न पार्टियों के नेताओं के साथ सहयोग आवश्यक होता है, जिसे कुछ लोग पार्टी के प्रति असहमति या अस्थिरता के रूप में देख सकते हैं.
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