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इस राज्य में सरकारी अधिकारियों को अब नहीं मिलेगी फ्री बिजली, मुख्यमंत्री भी भरेंगे बिजली का बिल
असम के मुख्यमंत्री ने राज्य के मंत्रियों, अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली सब्सिडी बिजली पर रोक लगा दी है. साथ ही वह खुद भी बिजली का बिल भरेंगे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
असम (Assam) में दशकों पुराना वीआईपी (VIP) कल्चर खत्म होने जा रहा है. दरअसल, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने ये घोषणा की है कि अब राज्य सरकार अपने मंत्री और अधिकारियों के घरों पर खपत होने वाली बिजली का बिल नहीं भरेगी, साथ ही मुख्यमंत्री के घर के बिल का खर्च भी अब राज्य सरकारी खजाने से नहीं भरा जाएगा.
1 जुलाई से भरने पड़ेंगे बिजली
हिमंत बिस्वा ने घोषणा करते हुए कहा है कि 1 जुलाई से सभी मंत्रियों और अधिकारियों को बिजली बिल देना होगा. वह खुद भी बिजली का बिल भरेंगे. ये घोषणा उन्होंने असम सचिवालय परिसर में आयोजित एक समारोह में जनता भवन सौर परियोजना, 2.5 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता ग्रिड से जुड़ी छत और जमीन पर लगे सौर पीवी प्रणाली का उद्घाटन के दौरान कही.
सरकारी क्वार्टर में लगेंगे प्रीपेड मीटर
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने जानकारी दी कि हालिया संवाद के दौरान बिजली विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन से बहुत ही मामूली राशि बिजली बिल के रूप में काटी जाती है. उन्होंने अब विभाग को निर्देश दिया कि मंत्रियों की कॉलोनी सहित सभी सरकारी क्वार्टर में प्रीपेड मीटर लगाए जाएं.
75 वर्षों से चला आ रहा वीआईपी कल्चर होगा खत्म
असम के मुख्यमंत्री ने कहा है कि टैक्सपेयर के पैसों से सरकारी अधिकारियों के बिजली के बिल भरने का वीआईपी कल्चर खत्म होने जा रहा है. मंत्री और हाई रैंकिंग की सरकारी अधिकारियों की बिजली का बिल सरकारी खजाने से भरा जाता है और यह 75 वर्षों से चला आ रहा है. वहीं, इस कल्चर के कारण बिजली बोर्ड को होने वाले घाटे के बदले बिजली शुल्क में बढ़ोतरी भी करनी पड़ती थी. उन्होंने कहा है कि उन्हें 3 साल से मुफ्त में बिजली मिल रही थी लेकिन उन्हें इसका पता नहीं था इसके बारे में हाल ही में चर्चा के दौरान पता चला होगा. उन्हें उम्मीद है कि उनके इस कदम से बिजली बोर्ड को मदद मिलेगी.
देश का पहला ग्रीन स्टेट गवर्नमेंट हेडक्वार्टर
असम सचिवालय परिसर देश का पहला ऐसा सचिवालय बन गया है, जो दैनिक खपत के लिए पूरी तरह से सौर ऊर्जा से उत्पन्न बिजली पर निर्भर है. 25 वर्षों के जीवनकाल के साथ, यह सौर संयंत्र सालाना 3060 मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन और अपने जीवनकाल के दौरान 76,500 मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन खत्म कर देगा. इस परियोजना से मासिक रूप से औसतन 3 लाख यूनिट बिजली प्राप्त होगी और निवेश राशि 12.56 करोड़ रुपये की वसूली 4 साल की अवधि के भीतर होने का अनुमान है. इससे मासिक बचत लगभग 30 लाख रुपये होगी.
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