देश में एक और इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू, आम लोगों को PM मोदी ने दिया तोहफा

पहले फेज में यहां से डोमेस्टिक फ्लाइट की सेवाएं शुरू की गई हैं. इस एयरपोर्ट का निर्माण लगभग 400 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है

Last Modified:
Tuesday, 12 July, 2022
PM Modi

देवघर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने मंगलवार को झारखंड के देवघर में नवनिर्मित इंटरनेशनल एयरपोर्ट और देवघर एम्स राष्ट्र को समर्पित किया. उन्होंने देवघर में आयोजित एक शानदार कार्यक्रम में देवघर एयरपोर्ट से कोलकाता के लिए इंडिगो एयरलाइन्स की पहली फ्लाइट को उड़ने की इजाजत दी.

रांची के बाद दूसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
देवघर एयरपोर्ट झारखंड में रांची के बाद दूसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है. पहले फेज में यहां से डोमेस्टिक फ्लाइट की सेवाएं शुरू की गई हैं. इस एयरपोर्ट का निर्माण लगभग 400 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है. इसमें 50 फीसदी अंशदान डीआरडीओ का है. यह हवाई अड्डा सामरिक नजरिए से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होगा. एयरपोर्ट की इमारत पर यहां के विश्वप्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर की प्रतिकृति बनायी गयी है. इस पर ब्रास से पंचशूल बनाया गया है, जो दूर से ही दिखता है। ऐसा ही पंचशूल बाबा वैद्यनाथ मंदिर में भी है.

2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था शिलान्यास
गौरतलब है कि इस एयरपोर्ट का ऑनलाइन शिलान्यास 25 मई, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. देवघर में प्रतिवर्ष सावन में एक महीने तक विशाल श्रावणी मेले का आयोजन होता है, जिसमें बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिदिन करीब एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं. मेले के पहले यहां से उड़ान सेवाएं शुरू होने से बाहर से आनेवाले श्रद्धालुओं पर काफी सहूलियत होगी.

16 हजार 800 करोड़ रुपये की विकास परियोजना
प्रधानमंत्री ने झारखंड में हाईवे, रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण, गैस बॉटलिंग प्लांट सहित 16 हजार 800 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन-शिलान्यास किया. इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएं झारखंड की तकदीर बदलेंगी. इनके जरिए सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास की सोच को साकार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से इनसे झारखंड की आधुनिक कनेक्टिविटी, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आस्था और पर्यटन को बहुत अधिक बल मिलेगा.

सिंधिया ने क्या कहा
इस मौके पर मौजूद केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि झारखंड के दुमका, बोकारो और जमशेदपुर में भी एयरपोर्ट को जल्द ऑपरेशनल किया जायेगा. उन्होंने कहा कि यह हवाई चप्पल पहनने वालों की सुगम हवाई यात्रा की प्रधानमंत्री मोदी की परिकल्पना को जमीन पर उतारने की दिशा में ठोस कदम है.


‘जायंट किलर’ स्मृति ईरानी की BJP में दमदार वापसी, राष्ट्रीय महामंत्री की मिली बड़ी जिम्मेदारी

नितिन नबीन की टीम में 8 राष्ट्रीय महामंत्रियों में शामिल स्मृति ईरानी, 2027 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अहम भूमिका में नजर आएंगी

Last Modified:
Tuesday, 18 August, 2026
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भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाकर संगठन में उनकी दमदार वापसी कराई है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में आठ राष्ट्रीय महामंत्रियों में शामिल स्मृति ईरानी अब पार्टी के शीर्ष संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा होंगी. 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले उनकी नियुक्ति को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. चुनावी रणनीति, संगठन को मजबूत करने और पार्टी के संदेश को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में उन्हें अहम जिम्मेदारी मिल सकती है.

दो दशक से ज्यादा का राजनीतिक अनुभव

स्मृति ईरानी ने 2003 में बीजेपी से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र बीजेपी की युवा इकाई में काम किया और संगठन में आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय महामंत्री बनीं. वह बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. वर्ष 2011 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया. करीब दो दशक से अधिक के राजनीतिक सफर में स्मृति ईरानी ने संगठन, संसद, सरकार और चुनावी राजनीति में अलग-अलग भूमिकाएं निभाई हैं.

अमेठी में राहुल गांधी को हराकर बनीं ‘जायंट किलर’

स्मृति ईरानी की राजनीतिक पहचान को सबसे बड़ी मजबूती अमेठी से मिली. 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के गढ़ अमेठी से राहुल गांधी को चुनौती दी. हालांकि उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अगले पांच वर्षों तक क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहकर संगठन और मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत की. 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने राहुल गांधी को 55,120 वोटों के अंतर से हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया. इस जीत के बाद उन्हें बीजेपी की ‘जायंट किलर’ के तौर पर पहचान मिली.

मोदी सरकार में संभालीं कई अहम जिम्मेदारियां

स्मृति ईरानी का केंद्रीय मंत्रिमंडल का अनुभव भी उनकी नई जिम्मेदारी में अहम भूमिका निभाएगा. उन्होंने मानव संसाधन विकास, कपड़ा, सूचना एवं प्रसारण, महिला एवं बाल विकास और अल्पसंख्यक मामलों जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले. मोदी सरकार में वह पार्टी और सरकार की प्रमुख एवं मुखर आवाजों में शामिल रहीं. संसद से लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और राष्ट्रीय मंचों तक उनकी प्रभावी संवाद क्षमता ने उन्हें बीजेपी के प्रमुख महिला नेताओं में स्थापित किया.

यूपी चुनाव से पहले नियुक्ति का खास महत्व

स्मृति ईरानी की नई जिम्मेदारी का महत्व उत्तर प्रदेश के संदर्भ में और बढ़ जाता है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी को ऐसे नेताओं की जरूरत है, जिनके पास राष्ट्रीय पहचान के साथ संगठनात्मक अनुभव और जमीनी राजनीति की समझ हो. अमेठी से उनका पुराना जुड़ाव, महिला मोर्चा की कमान संभालने का अनुभव और महिला एवं बाल विकास मंत्री के रूप में उनकी भूमिका उन्हें महिला मतदाताओं के बीच पार्टी का संदेश पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण चेहरा बनाती है.

संगठन में वापसी से बढ़ेगा राजनीतिक प्रभाव

राष्ट्रीय महामंत्री की भूमिका में स्मृति ईरानी से राजनीतिक संदेश को संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं तक पहुंचाने की अपेक्षा होगी. उनकी राष्ट्रीय लोकप्रियता और कार्यकर्ताओं से जुड़ने की क्षमता इस भूमिका में उनके लिए बड़ी ताकत साबित हो सकती है. यह नियुक्ति इस बात का भी संकेत है कि बीजेपी चुनावी राजनीति के साथ-साथ संगठन को मजबूत करने के लिए अपने अनुभवी नेताओं को फिर से सक्रिय भूमिका में ला रही है.

‘जायंट किलर’ से राष्ट्रीय संगठन की अहम जिम्मेदारी तक

स्मृति ईरानी का राजनीतिक सफर बीजेपी के संगठनात्मक मॉडल की एक मिसाल भी माना जा सकता है. पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर शुरुआत करने से लेकर राष्ट्रीय स्तर की नेता, केंद्रीय मंत्री और अब राष्ट्रीय महामंत्री बनने तक उन्होंने कई महत्वपूर्ण पड़ाव तय किए हैं. नई जिम्मेदारी के साथ वह एक बार फिर पार्टी निर्माण और चुनावी रणनीति के केंद्र में लौट आई हैं. बीजेपी में उनकी यह वापसी ऐसे समय हुई है जब पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव समेत आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए संगठन को मजबूत करने में जुटी है.


भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान, वसुंधरा राजे-स्मृति ईरानी समेत इन नेताओं को मिली बड़ी जिम्मेदारी

नितिन नवीन ने की राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई टीम की घोषणा, 13 उपाध्यक्ष और 8 महासचिव शामिल

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर दी. नई टीम में कई बड़े और अनुभवी नेताओं को अहम संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है, जबकि राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और भाजपा के वरिष्ठ नेता राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. नई राष्ट्रीय टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और 8 राष्ट्रीय महासचिव शामिल हैं. पार्टी ने विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों के नेताओं को जगह देकर संगठनात्मक और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश की है. 

ये बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

नई टीम में वसुंधरा राजे सिंधिया, तीरथ सिंह रावत, राम माधव, बैजयंत जय पांडा, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोषी, डॉ. भारती प्रवीण पवार, मनप्रीत सिंह बादल, लाल सिंह आर्य, प्रो. एम. नागराजा, प्रो. तारिक मंसूर और डॉ. मधुचंद्र कर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है.

बीएल संतोष संगठन महासचिव, शिवप्रकाश को भी अहम जिम्मेदारी

बीएल संतोष राष्ट्रीय संगठन महासचिव के पद पर बने रहेंगे. वहीं शिवप्रकाश को राष्ट्रीय सह-संगठन महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है.

स्मृति ईरानी को बड़ी जिम्मेदारी

स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है और उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभार भी सौंपा गया है. उनकी नियुक्ति को भाजपा की नई संगठनात्मक टीम में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. 

पीयूष गोयल बने कोषाध्यक्ष

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को भाजपा का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है. पार्टी ने इसके साथ विभिन्न मोर्चों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के लिए भी नई नियुक्तियां की हैं. भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम को आगामी चुनावों और संगठन के विस्तार की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है. पार्टी ने इस फेरबदल में अनुभवी नेताओं, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और नई पीढ़ी के नेतृत्व के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया है. 
 


शहजाद पूनावाला के X बायो में बदलाव, BJP छोड़ने की अटकलों ने पकड़ा जोर

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने गुरुवार को अपने X प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें उनके बायो से 'नेशनल स्पोक्सपर्सन, BJP' हट चुका था.

Last Modified:
Friday, 31 July, 2026
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भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रोफाइल बायो में बदलाव के बाद उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं. पूनावाला ने अपने बायो से 'नेशनल स्पोक्सपर्सन, BJP' हटा दिया है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनके इस्तीफे को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं. हालांकि, अब तक न तो BJP और न ही शहजाद पूनावाला की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है.

बायो में किया ये बदलाव

नए बायो में उन्होंने लिखा है, "धर्म: इस्लाम, संस्कृति: हिंदू, विचारधारा: भारतीय, लेखक: GST की यात्रा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आजीवन अनुयायी."

दिलचस्प बात यह है कि उनके इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर अब भी उन्हें BJP का राष्ट्रीय प्रवक्ता बताया गया है. X पर भी पहले यही जानकारी दर्ज थी. इसके अलावा उन्होंने अपने कुछ पुराने इंटरव्यू के वीडियो भी दोबारा साझा किए हैं, जिनमें वे सक्रिय राजनीति छोड़ने पर विचार करने की बात करते नजर आते हैं.

हालांकि, इन बदलावों के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने वास्तव में BJP या सक्रिय राजनीति से इस्तीफा दिया है. पार्टी और पूनावाला, दोनों की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान सामने नहीं आया है.

कांग्रेस से BJP तक का सफर

पेशे से वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शहजाद पूनावाला ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी. वर्ष 2017 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव पर सवाल उठाने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी और बाद में BJP में शामिल हो गए. वर्ष 2021 में उन्हें दिल्ली BJP के सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई. इसके बाद वे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने और टीवी बहसों में BJP का पक्ष रखने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल रहे.

फिलहाल, X बायो में बदलाव के आधार पर उनके इस्तीफे की चर्चा जरूर तेज है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि होने तक इसे केवल अटकल के तौर पर ही देखा जा रहा है.
 


ट्रंप का दावा- हमास के निरस्त्रीकरण पर बनी सहमति, गाजा से चरणबद्ध तरीके से हटेगी इजरायली सेना

ट्रंप के अनुसार, इस समझौते के तहत हमास का निरस्त्रीकरण और इजरायली सैनिकों की गाजा से वापसी चरणबद्ध तरीके से होगी.

Last Modified:
Friday, 31 July, 2026
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि बोर्ड ऑफ पीस (Board of Peace) ने गाजा में हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के पूर्ण निरस्त्रीकरण को लेकर समझौता कर लिया है. यह समझौता गाजा के लिए ट्रंप के व्यापक राजनीतिक और सुरक्षा ढांचे को लागू करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

ट्रंप के अनुसार, इस समझौते के तहत हमास का निरस्त्रीकरण और इजरायली सैनिकों की गाजा से वापसी चरणबद्ध तरीके से होगी. इसके बाद एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (International Stabilization Force) और नई फिलिस्तीनी पुलिस बल सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि एक फिलिस्तीनी प्रशासन गाजा के शासन का संचालन करेगा.

इजरायली सेना की वापसी होगी चरणों में

ट्रंप ने कहा कि यह व्यवस्था गाजा के लिए उनके 20-सूत्रीय शांति प्लान का हिस्सा है. इस योजना में सशस्त्र समूहों के निरस्त्रीकरण को इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी से जोड़ा गया है. उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा, "यह एक ऐतिहासिक दिन है. हम युद्धविराम के बाद से जिस लक्ष्य की दिशा में काम कर रहे थे, यह उसकी ओर एक महत्वपूर्ण कदम है और मेरे 20-सूत्रीय प्लान को लागू करने की दिशा में बड़ी प्रगति है."

प्रस्तावित ढांचे के तहत जैसे-जैसे निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे इजरायली सेना गाजा से पीछे हटेगी. अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल नई फिलिस्तीनी पुलिस के साथ मिलकर काम करेगा और धीरे-धीरे सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन को सौंपी जाएगी.

ट्रंप ने कहा कि अंतिम लक्ष्य फिलिस्तीन के नेतृत्व वाली सरकार की स्थापना करना है, जो इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को भी ध्यान में रखेगी. उन्होंने कहा, "गाजा का शासन एक नई फिलिस्तीनी सरकार के जरिए चलाया जाएगा, जो गाजा के लोगों की सेवा के लिए बोर्ड ऑफ पीस के साथ मिलकर काम करेगी."

मिस्र, कतर और तुर्किये की भूमिका की सराहना

अमेरिकी राष्ट्रपति ने वार्ता में भूमिका निभाने के लिए मिस्र, कतर और तुर्किये का धन्यवाद किया. उन्होंने अपने प्रशासन के अधिकारियों की भी सराहना की, जो इस प्रक्रिया में शामिल रहे.

ट्रंप ने कहा कि एक साल पहले की स्थिति की तुलना में काफी प्रगति हुई है, जब गाजा में युद्ध जारी था, बंधक कैद में थे और मानवीय संकट गहरा रहा था. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अभी कई महत्वपूर्ण काम बाकी हैं. उन्होंने कहा, "हम एक साल पहले की स्थिति से काफी आगे आ चुके हैं, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है."

समझौते के क्रियान्वयन पर कई सवाल बाकी

हालांकि, इस घोषणा के बाद भी कई अहम मुद्दों का समाधान होना बाकी है. इनमें निरस्त्रीकरण की समयसीमा, इजरायली सेना की वापसी का कार्यक्रम, हथियारों के समर्पण की पुष्टि और सुरक्षा जिम्मेदारियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया शामिल हैं.

2025 में संयुक्त राष्ट्र ने दी थी गाजा ढांचे को मंजूरी

यह घोषणा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा 17 नवंबर 2025 को प्रस्ताव 2803 पारित किए जाने के बाद आई है. इस प्रस्ताव में गाजा संघर्ष को समाप्त करने के लिए ट्रंप की व्यापक योजना का समर्थन किया गया था. इस प्रस्ताव को 13 देशों का समर्थन मिला था, जबकि चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था.

प्रस्ताव में बोर्ड ऑफ पीस को अंतरिम प्रशासन के रूप में मान्यता दी गई थी और गाजा में अस्थायी अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती को मंजूरी दी गई थी. इसके तहत संक्रमण काल के दौरान रोजमर्रा के नागरिक प्रशासन के लिए एक फिलिस्तीनी तकनीकी समिति बनाने का भी प्रावधान किया गया था.

जनवरी 2026 में इस ढांचे को और आगे बढ़ाया गया, जब अली शआथ (Ali Sha’ath) को गाजा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति का प्रमुख नियुक्त किया गया और मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स को अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल का कमांडर बनाया गया.

हमास के हथियार बने सबसे बड़ी चुनौती

प्रशासनिक ढांचे में प्रगति के बावजूद हमास के हथियारों का भविष्य इस योजना को लागू करने में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बना हुआ था.

बोर्ड ऑफ पीस की मई में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को दी गई रिपोर्ट में हथियारों के सत्यापित निष्क्रियकरण और हमास से नियंत्रण हस्तांतरण को प्रमुख लंबित मुद्दों के रूप में बताया गया था.

रॉयटर्स के अनुसार, मार्च में बोर्ड ऑफ पीस ने हमास को लिखित निरस्त्रीकरण प्रस्ताव दिया था. यह प्रस्ताव युद्ध के बाद की सुरक्षा व्यवस्था और गाजा में सत्ता हस्तांतरण को लेकर चल रही बातचीत का हिस्सा था.

ट्रंप की ताजा घोषणा इस योजना के सबसे विवादित हिस्सों में से एक पर प्रगति का संकेत देती है. हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निरस्त्रीकरण, इजरायली सेना की वापसी और गाजा में सुरक्षा व प्रशासनिक जिम्मेदारियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है.
 


एंटी-पेपर लीक कानून पर PM मोदी का बड़ा संदेश, बोले- पेपर माफियाओं के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में सुधार, तकनीक के बेहतर इस्तेमाल और मजबूत कानूनी प्रावधानों के जरिए पारदर्शी एवं प्रभावी व्यवस्था बनाने पर काम कर रही है.

Last Modified:
Friday, 31 July, 2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद से पारित संशोधित एंटी-पेपर लीक विधेयक का स्वागत करते हुए इसे देश की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया है. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पेपर लीक माफियाओं व संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रधानमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था से सार्वजनिक परीक्षाएं अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनेंगी.

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में सुधार, तकनीक के बेहतर इस्तेमाल और मजबूत कानूनी प्रावधानों के जरिए पारदर्शी एवं प्रभावी व्यवस्था बनाने पर काम कर रही है. उन्होंने बताया कि परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए बेहतर सिस्टम, फास्ट-ट्रैक व्यवस्था और राज्यों के साथ लगातार विचार-विमर्श किया गया है.

पेपर लीक पर और सख्त होगी सजा

संशोधित विधेयक को गुरुवार को राज्यसभा ने ध्वनिमत से पारित किया, जबकि लोकसभा इसे एक दिन पहले मंजूरी दे चुकी थी. यह संशोधन सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनुचित गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए मौजूदा कानून को और मजबूत बनाता है.

यह कानून संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनल सेलेक्शन (IBPS) और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) जैसी संस्थाओं द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा.

10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना

संशोधित कानून के तहत सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक या अनुचित साधनों का दोषी पाए जाने पर पांच से 10 वर्ष तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. वहीं, संगठित अपराध या पेपर लीक गिरोहों के मामलों में कम से कम सात वर्ष की सजा और न्यूनतम 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है.

'पेपर माफियाओं को नहीं बख्शा जाएगा'

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पेपर लीक कई वर्षों से देश के लिए गंभीर चुनौती रहा है, जिससे केंद्र और राज्यों की विभिन्न परीक्षाएं प्रभावित हुई हैं और लाखों युवाओं के भविष्य पर असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन, फास्ट-ट्रैक तंत्र और राज्यों से सुझाव लेने जैसे कई कदम उठाए हैं. प्रधानमंत्री ने कहा, "पेपर माफिया और पेपर लीक में शामिल गिरोह, जो देश के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करते हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा."

परीक्षा प्रणाली को और पारदर्शी बनाने की कोशिश

सरकार का मानना है कि संशोधित कानून से सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बढ़ेगी. हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में पेपर लीक की घटनाओं के बाद परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की मांग लगातार उठ रही थी. नए संशोधन को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
 


लोकसभा से पास हुआ एंटी पेपर लीक संशोधन बिल; दोषियों को 10 साल जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 27 जुलाई को यह संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया था. यह कदम देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच उठाया गया है.

Last Modified:
Wednesday, 29 July, 2026
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परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक पर सख्ती बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. लोकसभा ने बुधवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी. नए प्रावधानों के तहत पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के दोषियों को अधिकतम 10 साल तक की सजा और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

पेपर लीक मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान

लोकसभा ने बुधवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को पारित कर दिया. यह विधेयक परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है. विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के बीच यह बिल सदन से पास हुआ.

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 27 जुलाई को यह संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया था. यह कदम देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच उठाया गया है.

NEET पेपर लीक मामले में 52 FIR दर्ज

विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने NEET पेपर लीक मामले में तेजी से कार्रवाई की है. उन्होंने बताया कि साल 2024 में पेपर लीक विरोधी कानून लागू होने के बाद से अब तक 52 FIR दर्ज की जा चुकी हैं.

उन्होंने कहा कि संशोधन विधेयक सरकार के अनुभवों से सीखने और परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है. उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक से जुड़े मामलों के कारण होने वाली आत्महत्याओं की संख्या में कमी आई है.

विपक्ष पर जितेंद्र सिंह का हमला

लोकसभा में बोलते हुए जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि उन्हें संसदीय नियमों और सरकार के कामकाज की पूरी जानकारी नहीं है. बिल पारित होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई.
 


प्रल्हाद जोशी को मिली शिक्षा मंत्रालय की कमान, 5 बार के सांसद और कई अहम मंत्रालयों का अनुभव

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.

Last Modified:
Monday, 27 July, 2026
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने वरिष्ठ भाजपा नेता प्रल्हाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी है. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि नए शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी कौन हैं और उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा है.

पांच बार के सांसद, संगठन से सरकार तक मजबूत पकड़

प्रल्हाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र का लगातार पांच बार प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. उन्होंने पहली बार 2004 में लोकसभा चुनाव जीता था. इसके बाद 2009, 2014, 2019 और 2024 में भी लगातार जीत दर्ज कर संसद पहुंचे. पार्टी संगठन और संसदीय राजनीति, दोनों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है.

कर्नाटक से हुई राजनीतिक शुरुआत

जोशी का राजनीतिक सफर कर्नाटक से शुरू हुआ. 1990 के दशक में हुबली के ईदगाह मैदान विवाद के दौरान हुए आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें राज्य की राजनीति में पहचान दिलाई. इसके बाद उन्होंने संगठन में लगातार काम किया और भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं

प्रल्हाद जोशी ने 2012 से 2016 तक भाजपा की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई. उनके कार्यकाल में पार्टी ने राज्य में अपने संगठन को मजबूत किया और चुनावी रणनीति को नई दिशा दी.

मोदी सरकार में संभाले कई अहम मंत्रालय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाने वाले प्रल्हाद जोशी केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री, कोयला एवं खनन मंत्री के रूप में काम किया है. वर्तमान में उनके पास उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी है.

अब शिक्षा मंत्रालय की बड़ी चुनौती

जोशी ने ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाला है, जब नीट पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं. उनके सामने परीक्षा व्यवस्था में छात्रों का भरोसा बहाल करने, सुधारों को लागू करने और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े दीर्घकालिक मुद्दों के समाधान की बड़ी चुनौती होगी.
 


नीट पेपर लीक विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पीएम मोदी को भेजा पद छोड़ने का प्रस्ताव

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक लंबा पत्र साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है.

Last Modified:
Saturday, 25 July, 2026
BWHindia

नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों के लगातार विरोध-प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा भेजने की जानकारी खुद सोशल मीडिया पर साझा करते हुए प्रधान ने बड़ा राजनीतिक संकेत दिया. यदि उनका इस्तीफा स्वीकार होता है, तो वह मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में इस्तीफा देने वाले दूसरे केंद्रीय मंत्री होंगे. इस घटनाक्रम को छात्रों के आंदोलन और बढ़ते जनदबाव की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है.

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज हो रहा है. इसे मोदी सरकार के कार्यकाल में दूसरा ऐसा मौका माना जा रहा है, जब किसी बड़े जनआंदोलन और सामाजिक दबाव के बाद किसी केंद्रीय मंत्री को पद छोड़ना पड़ा है.

पहले भी जनदबाव में बदले हैं सरकार के फैसले

मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों में कुछ ऐसे अवसर भी आए हैं, जब व्यापक विरोध के बाद सरकार को अपने फैसलों में बदलाव करना पड़ा. वर्ष 2015 में भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक विपक्ष और आरएसएस से जुड़े संगठनों के विरोध के चलते वापस लेना पड़ा था. वहीं, नवंबर 2021 में एक साल से अधिक चले किसान आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को भी वापस ले लिया था.

इसके अलावा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद भी सरकार ने लंबे समय तक इसके नियम लागू नहीं किए थे. हालांकि, विवादों में घिरे मंत्रियों को आमतौर पर तत्काल हटाने के बजाय मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल के दौरान हटाया जाता रहा है.

नीट आंदोलन ने बढ़ाया सरकार पर दबाव

नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के खिलाफ 20 जुलाई से छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हुआ. 'संसद चलो' मार्च के दौरान भारी भीड़ उमड़ी, जिसके बाद पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. इस कार्रवाई की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सरकार की व्यापक आलोचना हुई.

बढ़ते दबाव के बीच शिक्षा मंत्रालय में प्रशासनिक फेरबदल किए गए और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को हटाया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से संवाद किया और पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट तथा सख्त कानून का भरोसा दिया. केंद्रीय कैबिनेट ने भी पेपर लीक से जुड़े कानून में संशोधन को मंजूरी दे दी है, जिसे जल्द संसद में पेश किया जाएगा.

प्रदर्शनकारियों की बाकी मांगें अब भी कायम

सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहे हैं. हालांकि, आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि उनकी चार प्रमुख मांगों में से अभी केवल एक ही पूरी हुई है. उनका कहना है कि जब तक नीट पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा, प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी और पुलिस कार्रवाई पर सार्वजनिक माफी जैसी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.


पेपर लीक पर सरकार का बड़ा एक्शन, 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने वाले बिल को कैबिनेट की मंजूरी

प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट को कानूनी आधार दिया जाएगा.

Last Modified:
Friday, 24 July, 2026
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प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पेपर लीक कानून में संशोधन से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी गई. सरकार इस विधेयक को अगले सप्ताह संसद के मानसून सत्र में पेश कर सकती है. सूत्रों के अनुसार, इसे 27 जुलाई या सोमवार को लोकसभा में लाया जा सकता है. 

फास्ट ट्रैक कोर्ट में तीन महीने के भीतर होगी सुनवाई

प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट को कानूनी आधार दिया जाएगा. सरकार का लक्ष्य है कि जांच और मुकदमे की पूरी प्रक्रिया अधिकतम तीन महीने के भीतर पूरी हो, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके और परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा मजबूत हो.

दोषियों को 10 साल तक की जेल, ₹10 करोड़ तक जुर्माना

कैबिनेट से मंजूर प्रस्ताव में पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ सख्त दंड का प्रावधान किया गया है. इसके तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 साल तक की कैद और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. सरकार का कहना है कि इस कदम से संगठित पेपर लीक गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई संभव होगी.

नीट विवाद के बाद बढ़ी सख्त कानून की मांग

पिछले कुछ वर्षों में कई भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए हैं. खासकर नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के बाद देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए थे. विपक्षी दलों ने भी परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए कड़े कानून की मांग की थी.

पीएम मोदी ने पहले ही दिए थे संकेत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात जारी अपने वीडियो संदेश में पेपर लीक को लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया था. उन्होंने कहा था कि सरकार इस अपराध के खिलाफ सख्त कानून लाएगी और मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था करेगी. प्रधानमंत्री ने यह भी बताया था कि पिछले ढाई महीनों में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और 22 लाख छात्रों की परीक्षा कराकर 19 जुलाई को परिणाम भी घोषित किए गए.

पहले से लागू है यह कानून

केंद्र सरकार जून 2024 में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024' लागू कर चुकी है. इस कानून के तहत पेपर लीक, संगठित नकल, इम्पर्सनेशन और परीक्षा से जुड़े कंप्यूटर सिस्टम या नेटवर्क से छेड़छाड़ को अपराध माना गया है. मौजूदा कानून में सामान्य मामलों में तीन से पांच साल तक की जेल और ₹10 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है, जबकि संगठित पेपर लीक गिरोहों के लिए पांच से 10 साल की जेल और कम से कम ₹1 करोड़ जुर्माने का प्रावधान पहले से मौजूद है. अब सरकार इन प्रावधानों को और प्रभावी बनाने के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया को भी तेज करने की तैयारी में है.
 


सरकार के आश्वासन के बाद सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनिश्चितकालीन अनशन, मांगों पर सकारात्मक रुख का भरोसा

गुरुवार देर रात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मेदांता अस्पताल पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की, जिसके बाद उन्होंने अनशन खत्म करने का फैसला लिया.

Last Modified:
Friday, 24 July, 2026
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सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार की ओर से उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक पहल का आश्वासन मिलने के बाद अपना अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी. गुरुवार देर रात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मेदांता अस्पताल पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की, जिसके बाद उन्होंने अनशन खत्म करने का फैसला लिया.

देर रात अस्पताल में हुई अहम बैठक

गुरुवार देर रात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मेदांता अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक से मुलाकात की. इस दौरान वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो समेत अन्य लोग भी मौजूद रहे. बैठक में सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाने का भरोसा दिया, जिसके बाद वांगचुक ने अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया. इसे लेकर सोनम वांगचुक ने अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट भी शेयर किया है.

प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं करने का भरोसा

सरकार ने संकेत दिया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों और 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा. सरकार ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई से बचने का प्रयास किया जाएगा.

किन मुद्दों पर बनी सहमति?

सरकार ने वांगचुक की ओर से उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक पहल का भरोसा दिया है. हालांकि, इन मांगों को लागू करने की समय-सीमा या विस्तृत रोडमैप फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया गया है. सरकार और आंदोलनकारियों के बीच आगे भी बातचीत जारी रहने की संभावना है.