होम / पॉलिटिकल एनालिसिस / कांग्रेस की पीएम मोदी से मांग, युद्ध विराम पर चर्चा के लिए बुलाएं विशेष संसद सत्र
कांग्रेस की पीएम मोदी से मांग, युद्ध विराम पर चर्चा के लिए बुलाएं विशेष संसद सत्र
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर पहलगाम आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
लंबे तनाव और गतिरोध के बाद शनिवार को भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर सहमति बनी तो सरकार के इस कदम से विपक्षी दलों में घमासान मच गया. अब सीजफायर पर चर्चा के लिए विपक्षी दलों के नेता लगातार संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम तो पहले से ही मांग कर रहे हैं कि संसद का विशेष सत्र बुलाएं, जहां सभी लोग चर्चा करेंगे क्या स्थिति है और आगे क्या कर रहे हैं. अगर विशेष सत्र बुलाएंगे, चर्चा हो जाएगी तो ठीक रहेगा.
राहुल गांधी ने क्या कहा?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने पत्र में लिखा कि यह स्पेशल सेशन आने वाली राष्ट्रीय चुनौतियों पर विचार करने और उन पर सामूहिक संकल्प व्यक्त करने का अवसर होगा. उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि इस पर "गंभीरता और तेजी" से विचार किया जाए. राहुल गांधी ने यह भी बताया कि युद्धविराम की घोषणा सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई थी, जिससे इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति और बहस की आवश्यकता और भी बढ़ गई है.
कांग्रेस अध्यक्ष ने भी की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी अपने पुराने पत्र का हवाला देते हुए इस मांग को दोहराया. उन्होंने कहा कि उन्होंने 28 अप्रैल को ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर संसद का स्पेशल सेशन बुलाने का आग्रह किया था, ताकि पहलगाम आतंकी हमले जैसे "अमानवीय कृत्य" पर देश की संसद में चर्चा हो सके. अब, जब ऑपरेशन सिंदूर और युद्धविराम की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, ऐसे में संसद को इन सब पर एक संयुक्त रूप से गंभीर मंथन करना चाहिए.
स्पेशल सेशन की हुई मांग
इस बीच राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी संसद का स्पेशल सेशन बुलाने और एक सर्वदलीय बैठक आयोजित करने की मांग की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष फिलहाल किसी तरह की आलोचना नहीं कर रहा है, बल्कि सरकार से गंभीर बातचीत और पारदर्शिता की अपेक्षा कर रहा है. सिब्बल ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि जब तक प्रधानमंत्री स्वयं बैठक में उपस्थित होने का आश्वासन नहीं देते, तब तक वे ऐसी किसी बैठक में हिस्सा न लें. इन नेताओं की ओर से उठाई गई यह मांग बताती है कि विपक्ष चाहता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुली बहस हो और सरकार इन विषयों पर जवाबदेह बने. यह घटनाक्रम संसद की कार्यप्रणाली और लोकतंत्र की सशक्तता के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
टैग्स