जानते हैं क्‍या होता है डिविडेंड यील्‍ड फंड, क्‍या होता है इनमें खास? 

कई जानकारों का मानना है कि आपको सिर्फ ऐसी जगह निवेश नहीं करना चाहिए जहां से आपको मुनाफा मिल रहा हो बल्कि आपको ये भी देखना चाहिए कि आप बाजार के नुकसान को कैसे कम सकते है.

ललित नारायण कांडपाल by
Published - Wednesday, 26 April, 2023
Last Modified:
Wednesday, 26 April, 2023
Dividend yield fund

वैसे तो बाजार में टैक्‍स बचाने के लिए कई तरह की योजनाएं मौजूद हैं जिनमें आप पैसा लगा सकते हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी योजना के बारे में बताने जा रहे हैं कि जो पिछले कुछ समय से काफी चर्चित हो रही है. इसकी ओर लोगों का आकर्षण भी बढ़ रहा है. ये फंड इसलिए भी ज्‍यादा कारगर साबित हो रहा है कि अगर बाजार में उतार चढ़ाव होता है तो ये उसमें भी नुकसान को कम करने में सक्षम है. इसकी लोकप्रियता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि पिछले ढ़ाई साल में इसने 6542 करोड़ रुपये का निवेश हासिल किया है.

 
क्‍या होता है है डिविडेंड यील्‍ड फंड
ये एक ऐसे फंड होते हैं जो शेयरों से मिलने वाले डिविडेंड के रूप में अपने निवेशकों को ज्‍यादा रिटर्न देते हैं. इन फंड की सबसे खास बात ये होती है कि ये उन्‍हीं शेयरों में पैसा लगाते हैं जिनमें आपको डिविडेंड हासिल होता है और जिससे फंड मैनेजर अपने निवेश के जरिए ज्‍यादा से ज्‍यादा मूल्‍य निकाल सकते हैं. 


इन्‍हें लेकर क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट 
जानकार कहते हैं कि पिछले कुछ समय में जिस तरह से बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर ज्‍यादा देखने को मिला है ऐसे में समझदारी उसी में होती है कि आप उसमें निवेश करें जो शेयर होल्‍डर को केवल फायदा ही न देती हो बल्कि डिविडेंड भी देती हो. ऐसे निवेश को ज्‍यादा सुरक्षित समझा जाता है. माना जाता है कि ऐसे निवेश बाजार के उतार को संभाल लेते हैं. जानकार ये भी कहते हैं कि अगर आपको टैक्‍स की बचत करनी है तो आप डिविडेंड का भुगतान करने वाली कंपनियों में निवेश करने की बजाए डिविडेंड यील्‍ड फंड में निवेश करें. 


इनसे कैसे बचाया जा सकता है ज्‍यादा टैक्‍स 
दरअसल जानकारों का कहना है कि इनसे आप ऐसे ज्‍यादा टैक्‍स की बचत कर सकते हैं क्‍योंकि इनमें मिलने वाले डिविडेंड पर टैक्‍स की मार्जिनल दर लागू होती है, जो टैक्‍स स्‍लैब की ऊपरी सीमा में 30 प्रतिशत होता है. सिर्फ यही नहीं जब म्‍यूचुअल फंड के लिए टैक्‍स ढ़ांचा ज्‍यादा अनुकूल हो तो सरचार्ज भी लग सकता है. जानकार कहते हैं कि म्‍यूचुअल फंड पर लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स 10 फीसदी है. ये बात डिविडेंड यील्‍ड फंड को ज्‍यादा आकर्षक बनाती है और यही बात ज्‍यादा टैक्‍स बचाने में मददगार भी साबित होती है. 
 


होम लोन लेने वालों के लिए खुशखबरी! बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने घटाई ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस भी माफ

अगर आप निकट भविष्य में घर खरीदने या नया होम लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो बैंक ऑफ महाराष्ट्र का यह सीमित अवधि का ऑफर आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

Last Modified:
Monday, 03 August, 2026
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अगर आप भी एक नया घर खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो ये खबर आपके काम की हो सकती है. दरअसल, सरकारी क्षेत्र के बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BoM) ने घर खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए सीमित अवधि का 'मॉनसून धमाका' ऑफर लॉन्च किया है. बैंक का कहना है कि इस विशेष अभियान का उद्देश्य ग्राहकों के लिए लोन की कुल लागत कम करना और उनकी मासिक EMI का बोझ घटाना है. ग्राहक बैंक के डिजिटल लोन एप्लिकेशन प्लेटफॉर्म के जरिए भी तेजी से आवेदन कर सकते हैं. तो आइए आपके इसके बारे में विस्तार से बताते हैं.

प्रोसेसिंग फीस और डॉक्यूमेंटेशन चार्ज भी पूरी तरह माफ 

बैंक ने होम लोन की शुरुआती ब्याज दर घटाकर 7% सालाना कर दी है. इसके साथ ही प्रोसेसिंग फीस और डॉक्यूमेंटेशन चार्ज भी पूरी तरह माफ कर दिए गए हैं.  बैंक द्वारा शनिवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि उसने कार लोन की सालाना ब्याज दर भी घटाकर 7.45 प्रतिशत कर दी है. इससे ये दोनों उत्पाद उद्योग में सबसे कम ब्याज दर वाले ऑफर में शामिल हो गए हैं. बैंक का कहना है कि कम ब्याज दर और शुरुआती चार्ज माफ करने का मकसद ग्राहकों के लिए लोन लेने की कुल लागत और हर महीने की किस्त का बोझ कम करना है.

CIBIL स्कोर के आधार पर ब्याज दर

बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने CIBIL स्कोर के आधार पर होम लोन की ब्याज दरें तय की हैं.

CIBIL स्कोर              वेतनभोगी               गैर-वेतनभोगी 
800 या अधिक              7.00%               7.10% 
750-799                     7.25%               7.35% 
725-749                     7.70%               7.80% 
700-724                     7.75%               7.95% 
650-699                     8.35%               8.55% 
600-649                     8.75%               8.95% 
600 से कम                  9.15%               9.65% 
NTC / -1 से 05            7.70%               7.90% 

किन ग्राहकों को मिलेगा 7% का फायदा?

7% की न्यूनतम ब्याज दर उन वेतनभोगी ग्राहकों के लिए है जिनका CIBIL स्कोर 800 या उससे अधिक है. साथ ही वे केंद्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) अथवा सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में कार्यरत हों, उनका न्यूनतम मासिक सकल वेतन 50,000 रुपये हो और उनका आवेदन DSA के माध्यम से न आया हो.

बैंक ने स्पष्ट किया है कि होम लोन की ब्याज दरें RLLR (Repo Linked Lending Rate) से जुड़ी हैं. इसलिए समय-समय पर इनमें बदलाव संभव है. बैंक का मानना है कि कम ब्याज दर और शुरुआती शुल्क में छूट से ग्राहकों के लिए घर खरीदना पहले की तुलना में अधिक किफायती हो सकता है.

20 लाख और 50 लाख के होम लोन पर कितनी होगी EMI?

उदाहरण के तौर पर यदि कोई ग्राहक 20 साल (240 महीने) के लिए होम लोन लेता है, तो अनुमानित मासिक EMI इस प्रकार होगी:

लोन राशि                ब्याज दर               अवधि             अनुमानित मासिक EMI       कुल ब्याज (लगभग)

20 लाख रुपये            7.00%              20 वर्ष             ₹15,500                           ₹17.2 लाख 

50 लाख रुपये             7.00%             20 वर्ष             ₹38,800                            ₹43.1 लाख 

नोट: EMI अनुमानित है. वास्तविक EMI बैंक की शर्तों, लोन अवधि और स्वीकृत ब्याज दर के अनुसार अलग हो सकती है.


अब म्यूचुअल फंड से हर महीने पैसा निकालना होगा आसान, SEBI ने डीमैट निवेशकों को दी बड़ी सुविधा

इस कदम से निवेशकों को अपने निवेश को मैनेज करना आसान होगा और वे तय समय पर पैसे निकालने या एक स्कीम से दूसरी स्कीम में ट्रांसफर करने की सुविधा हासिल कर सकेंगे.

Last Modified:
Saturday, 18 July, 2026
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बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने डीमैट अकाउंट में रखे म्यूचुअल फंड निवेश को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब ऐसे निवेशक भी SWP और STP के लिए ऑटोमैटिक निर्देश दे सकेंगे. इससे डीमैट फॉर्म में म्यूचुअल फंड यूनिट रखने वाले निवेशकों को भी वही सुविधाएं मिलेंगी, जो अब तक केवल स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट (SOA) के रूप में रखी गई यूनिट्स पर उपलब्ध थीं.

अभी तक निवेशक केवल उन म्यूचुअल फंड यूनिट्स के लिए SWP और STP की सुविधा ले सकते थे, जो एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) या उनके रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट (RTA) के पास SOA के रूप में मौजूद होती थीं. डीमैट अकाउंट में रखी गई यूनिट्स के लिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी.

दो चरणों में लागू होगा नया नियम

SEBI के नए नियम को दो चरणों में लागू किया जाएगा. पहले चरण में निवेशक यूनिट आधारित SWP और STP का विकल्प चुन सकेंगे. इसके तहत वे तय समय पर म्यूचुअल फंड की एक निश्चित संख्या में यूनिट बेचकर पैसा निकाल सकेंगे या उसी फंड हाउस की किसी दूसरी स्कीम में ट्रांसफर कर सकेंगे.

दूसरे चरण में रकम आधारित SWP और STP की सुविधा शुरू की जाएगी. इसके तहत निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार एक तय राशि को नियमित अंतराल पर निकाल सकेंगे या दूसरी स्कीम में ट्रांसफर कर सकेंगे.

SEBI ने डिपॉजिटरीज को निर्देश दिया है कि यूनिट आधारित सुविधा 31 जनवरी 2027 तक शुरू की जाए. वहीं, रकम आधारित सुविधा को 30 अप्रैल 2027 तक लागू करना होगा. इसके अलावा डिपॉजिटरीज को 31 अक्टूबर तक अपनी वेबसाइट पर इस प्रक्रिया से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी.

क्या होता है SWP और STP?

सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) के जरिए निवेशक अपने म्यूचुअल फंड निवेश से नियमित अंतराल पर एक निश्चित राशि या कुछ यूनिट्स निकाल सकते हैं. यह सुविधा खासतौर पर उन निवेशकों के लिए उपयोगी होती है, जिन्हें नियमित आय की जरूरत होती है.

वहीं, सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के जरिए निवेशक एक ही फंड हाउस की एक म्यूचुअल फंड स्कीम से दूसरी स्कीम में धीरे-धीरे अपना निवेश ट्रांसफर कर सकते हैं. इसका इस्तेमाल निवेशक बाजार की स्थिति और अपने वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से करते हैं.

निवेशकों को क्या फायदा मिलेगा?

SEBI के इस फैसले से डीमैट अकाउंट में म्यूचुअल फंड रखने वाले निवेशकों के लिए निवेश प्रबंधन आसान हो जाएगा. उन्हें अब पैसे निकालने या निवेश को दूसरी स्कीम में ट्रांसफर करने के लिए अलग प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा.

यह बदलाव खासतौर पर उन निवेशकों के लिए फायदेमंद होगा, जो अपने म्यूचुअल फंड निवेश को डीमैट फॉर्म में रखते हैं और नियमित निकासी या निवेश ट्रांसफर की योजना बनाते हैं.

नॉमिनी को म्यूचुअल फंड यूनिट ट्रांसफर करना भी आसान

इसके अलावा, एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) ने निवेशक की मृत्यु के बाद म्यूचुअल फंड यूनिट्स को नॉमिनी के नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया है. AMFI ने निवेशक के नाम, पते और हस्ताक्षर में मामूली अंतर या छोटी गलतियों से जुड़े नियमों में राहत दी है. नए नियमों के तहत, यदि मृतक निवेशक के रिकॉर्ड में दर्ज पते और मौजूदा पते में अंतर है, तो एसेट मैनेजमेंट कंपनियां नए पते को स्वीकार कर सकती हैं, बशर्ते इसके लिए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं. इन बदलावों का उद्देश्य म्यूचुअल फंड निवेशकों के अनुभव को बेहतर बनाना और निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल और सुविधाजनक बनाना है.
 


प्रॉपर्टी और सोना बेचने वालों को राहत, CBDT ने बढ़ाया कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स; ऐसे घटेगा LTCG टैक्स

CBDT आयकर अधिनियम, 1961 के तहत हर साल कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स अधिसूचित करता है. इसका उद्देश्य महंगाई के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए पूंजीगत लाभ (Capital Gain) की सही गणना करना है.

Last Modified:
Thursday, 16 July, 2026
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अगर आप वित्त वर्ष 2026-27 में पुरानी प्रॉपर्टी, जमीन, सोना या अन्य लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट बेचने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (Cost Inflation Index-CII) को 376 से बढ़ाकर 384 कर दिया है. इससे इंडेक्सेशन का लाभ लेने वाले टैक्सपेयर्स की लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स देनदारी कम हो सकती है, क्योंकि संपत्ति की खरीद लागत को महंगाई के अनुसार समायोजित किया जाएगा.

हर साल अपडेट होता है कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स

CBDT आयकर अधिनियम, 1961 के तहत हर साल कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स अधिसूचित करता है. इसका उद्देश्य महंगाई के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए पूंजीगत लाभ (Capital Gain) की सही गणना करना है. वित्त वर्ष 2025-26 में यह इंडेक्स 376 था, जिसे अब बढ़ाकर 384 कर दिया गया है. नया इंडेक्स वित्त वर्ष 2026-27 में होने वाले ट्रांजैक्शन पर लागू होगा.

क्या है कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स?

कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (CII) एक ऐसा पैमाना है, जो किसी संपत्ति की खरीद कीमत को महंगाई के हिसाब से समायोजित करने में मदद करता है. इसे इंडेक्सेशन कहा जाता है. इसका फायदा यह होता है कि टैक्स केवल वास्तविक मुनाफे पर लगाया जाता है, न कि महंगाई की वजह से बढ़ी कीमत पर. इससे टैक्स योग्य लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन कम हो जाता है और टैक्स का बोझ भी घटता है.

किन एसेट्स पर मिलेगा फायदा?

नया कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स उन लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट्स पर लागू होगा, जहां मौजूदा टैक्स नियमों के तहत इंडेक्सेशन का लाभ उपलब्ध है. इसमें मकान, फ्लैट, जमीन जैसी अचल संपत्तियां, सोना और अन्य ज्वेलरी के अलावा कुछ योग्य सिक्योरिटीज और अन्य पूंजीगत संपत्तियां शामिल हैं. इन एसेट्स की खरीद लागत को महंगाई के अनुरूप बढ़ाकर टैक्स योग्य लाभ की गणना की जाती है.

कब माना जाता है लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट?

किसी संपत्ति को लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट माना जाएगा या नहीं, यह उसकी होल्डिंग अवधि पर निर्भर करता है. अचल संपत्ति और अनलिस्टेड शेयर 24 महीने से अधिक समय तक रखने पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट माने जाते हैं. वहीं, लिस्टेड सिक्योरिटीज के लिए यह अवधि 12 महीने है. अधिकांश अन्य कैपिटल एसेट्स के लिए कम से कम 36 महीने की होल्डिंग जरूरी होती है.

टैक्सपेयर्स को कैसे होगा फायदा?

वित्त वर्ष 2026-27 में योग्य लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट बेचने वाले टैक्सपेयर्स 384 के नए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स का इस्तेमाल कर सकेंगे. इससे उनकी संपत्ति की खरीद लागत महंगाई के हिसाब से बढ़ जाएगी, जिससे टैक्स योग्य लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन कम निकलेगा और कुल टैक्स देनदारी में राहत मिलेगी. यही वजह है कि प्रॉपर्टी और सोना बेचने वाले निवेशकों के लिए इसे एक महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है.

किन लोगों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद?

विशेषज्ञों के मुताबिक, जिन लोगों ने कई साल पहले प्रॉपर्टी, जमीन या सोना खरीदा था और अब उसे बेचने की योजना बना रहे हैं, उन्हें इस फैसले का सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा. इंडेक्सेशन के कारण उनकी खरीद लागत अधिक मानी जाएगी, जिससे टैक्स योग्य मुनाफा कम होगा और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स भी घट जाएगा. हालांकि, इंडेक्सेशन का लाभ केवल उन्हीं मामलों में मिलेगा, जहां मौजूदा आयकर नियम इसकी अनुमति देते हैं.
 


PhonePe पर अब मिनटों में भरें ITR और GST, लॉन्च हुई नई टैक्स फाइलिंग सर्विस

डिजिटल पेमेंट्स कंपनी PhonePe पर इस फीचर के जरिए नौकरीपेशा लोगों, फ्रीलांसरों और छोटे कारोबारियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर ITR और GST से जुड़े काम करने की सुविधा मिलेगी.

Last Modified:
Friday, 10 July, 2026
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डिजिटल पेमेंट्स कंपनी फोनपे (PhonePe) ने टैक्स कंप्लायंस प्लेटफॉर्म TaxBuddy के साथ साझेदारी कर अपने ऐप में 'टैक्स फाइलिंग' फीचर लॉन्च किया है. इस फीचर के जरिए नौकरीपेशा लोगों, फ्रीलांसरों और छोटे कारोबारियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर ITR और GST से जुड़े काम करने की सुविधा मिलेगी. कंपनी का दावा है कि इस फीचर में जरूरत पड़ने पर टैक्स एक्सपर्ट की मदद भी मिलेगी.

सिर्फ 24 रुपये से शुरू होगी सर्विस

फोनपे की नई टैक्स फाइलिंग सर्विस की शुरुआती कीमत 24 रुपये रखी गई है. जो यूजर खुद अपना इनकम टैक्स रिटर्न भरना चाहते हैं, वे सेल्फ-फाइलिंग विकल्प चुन सकते हैं. वहीं जटिल टैक्स मामलों के लिए एक्सपर्ट-असिस्टेड प्लान भी उपलब्ध हैं. इसके अलावा छोटे दुकानदारों और कारोबारियों के लिए हर महीने GST रिटर्न फाइल करने की सुविधा भी ऐप पर दी गई है.

ऐप के अंदर ही पूरा होगा टैक्स फाइलिंग का काम

कंपनी के मुताबिक, अब यूजर्स को ITR फाइल करने के लिए अलग-अलग वेबसाइटों या पोर्टल पर जाने की जरूरत नहीं होगी. PhonePe ऐप के भीतर ही पूरी टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी. इसके साथ ITR ऑप्टिमाइजेशन, एक्सपर्ट गाइडेंस और नियमित GST कंप्लायंस जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी.

क्या बोली कंपनी?

फोनपे में 'इन-ऐप कैटेगरीज' की हेड निहारिका सहगल ने कहा कि कंपनी अपने यूजर्स की रोजमर्रा की वित्तीय जरूरतों को आसान बनाने के लिए लगातार नए समाधान जोड़ रही है. उनका कहना है कि किफायती कीमत पर एक्सपर्ट टैक्स सहायता उपलब्ध कराकर कंपनी नौकरीपेशा लोगों से लेकर छोटे कारोबारियों तक सभी के लिए टैक्स मैनेजमेंट को सरल बनाना चाहती है.

ऐसे करें ITR और GST फाइल

फोनपे ऐप पर इस सुविधा का इस्तेमाल तीन आसान स्टेप्स में किया जा सकता है.

1. सबसे पहले फोनपे ऐप खोलें और 'Recharge & Pay Bills' सेक्शन में जाएं.
2. इसके बाद 'Utilities & Others' के तहत दिए गए 'File ITR' विकल्प पर टैप करें.
3. अब अपनी जरूरत के अनुसार Self-Filing, Expert-Assisted या Monthly GST Filing का विकल्प चुनकर प्रक्रिया पूरी करें.


KCC के नियमों में बड़ा बदलाव: 2 लाख रुपये तक बिना गारंटी मिलेगा लोन, किसानों को राहत

RBI ने किसान क्रेडिट कार्ड के नियम बदले, फसल अवधि से लेकर लोन सीमा तक कई अहम बदलाव 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे.

Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जिनका उद्देश्य किसानों को आसान और समय पर कर्ज उपलब्ध कराना है. नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे. इन बदलावों के तहत फसल अवधि की नई परिभाषा तय की गई है, वहीं 2 लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर गारंटी की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है. माना जा रहा है कि इससे छोटे और सीमांत किसानों को सबसे अधिक राहत मिलेगी.

फसल सीजन के लिए बने एक समान नियम

अब तक अलग-अलग बैंक फसल की अवधि को अलग-अलग तरीके से तय करते थे, जिससे ऋण चुकाने की अवधि को लेकर भ्रम की स्थिति बनती थी. आरबीआई ने इसे समाप्त करने के लिए फसल सीजन की एक समान परिभाषा तय की है. नए नियमों के अनुसार, कम अवधि वाली फसलों के लिए फसल सीजन 12 महीने और लंबी अवधि वाली फसलों के लिए 18 महीने माना जाएगा. आरबीआई के मुताबिक फसल सीजन में बुआई से लेकर फसल की कटाई और बिक्री तक की पूरी अवधि शामिल होगी.

2 लाख रुपये तक के लोन पर नहीं देनी होगी गारंटी

नए नियमों के तहत किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए खेती और उससे जुड़े कार्यों के लिए 2 लाख रुपये तक का ऋण लेने पर किसी प्रकार की गारंटी या अतिरिक्त सुरक्षा नहीं देनी होगी. बैंक इस सीमा तक के ऋण पर जमीन, संपत्ति या अन्य किसी प्रकार का कोलेटरल नहीं मांग सकेंगे. इससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए ऋण प्राप्त करना आसान हो जाएगा.

स्वेच्छा से सोना-चांदी गिरवी रखने की रहेगी सुविधा

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई किसान अपनी इच्छा से सोना या चांदी गिरवी रखकर कृषि ऋण लेना चाहता है तो इसे कोलेटरल-फ्री लोन नियमों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा. यानी किसान और बैंक की सहमति से गोल्ड या सिल्वर के बदले भी कृषि ऋण लिया जा सकेगा.

2 लाख रुपये से अधिक के लोन पर क्या होंगे नियम

यदि किसान 2 लाख रुपये से अधिक का केसीसी ऋण लेते हैं, तो गारंटी और मार्जिन से जुड़े नियम संबंधित बैंक अपनी आंतरिक ऋण नीति और आरबीआई के मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार तय करेंगे, हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में किसानों को अतिरिक्त राहत भी दी जा सकती है.

3 लाख रुपये तक के ऋण पर भी मिल सकती है छूट

आरबीआई के अनुसार यदि ऋण फसल या स्टॉक के आधार पर दिया जाता है तो बैंक 3 लाख रुपये तक के ऋण पर भी गारंटी संबंधी शर्तों में राहत दे सकते हैं. इससे किसानों को अधिक राशि का ऋण लेने में आसानी हो सकती है. हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित बैंक की नीति के आधार पर होगा.

समय-समय पर होगी क्रेडिट लिमिट की समीक्षा

केंद्रीय बैंक ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे कृषि और उससे जुड़े कार्यों के लिए दी गई अल्पकालिक ऋण सीमा की नियमित समीक्षा करें. जरूरत पड़ने पर किसानों की ऋण सीमा बढ़ाई या उसका नवीनीकरण भी किया जा सकेगा, जिससे बदलती कृषि जरूरतों के अनुसार किसानों को पर्याप्त पूंजी उपलब्ध हो सके.

बिना गारंटी लोन सीमा बढ़ाने की मांग नहीं मानी

नियमों पर सुझाव मांगने के दौरान कई पक्षों ने बिना गारंटी वाले कृषि ऋण की सीमा बढ़ाने की मांग की थी. हालांकि आरबीआई ने इसे स्वीकार नहीं किया. केंद्रीय बैंक का कहना है कि दिसंबर 2024 में ही बिना गारंटी वाले कृषि ऋण की सीमा बढ़ाई जा चुकी है, इसलिए फिलहाल इसमें और बदलाव की आवश्यकता नहीं है.

किसानों को क्या होगा फायदा?

नए नियम लागू होने के बाद ऋण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल हो सकती है. फसल अवधि को लेकर भ्रम कम होगा, छोटे किसानों को बिना गारंटी ऋण मिलने में आसानी होगी और सभी बैंकों में एक समान नियम लागू होंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से किसानों को समय पर खेती के लिए पूंजी उपलब्ध होगी और कृषि क्षेत्र में संस्थागत ऋण की पहुंच भी बढ़ेगी.
 


SEBI ने म्यूचुअल फंड्स को दी बड़ी राहत, इंट्राडे उधारी के नियम हुए आसान

कैश मैनेजमेंट, ट्रेड सेटलमेंट और डेरिवेटिव दायित्वों के लिए अब ले सकेंगे शॉर्ट-टर्म लोन, परिचालन दक्षता बढ़ने की उम्मीद

Last Modified:
Saturday, 20 June, 2026
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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण नियामकीय बदलाव करते हुए इंट्राडे उधारी से जुड़े नियमों को आसान बना दिया है. नए नियमों के तहत म्यूचुअल फंड हाउस अब कारोबार के दौरान लिए जाने वाले अल्पकालिक ऋण का उपयोग केवल निवेशकों को भुगतान करने तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि कैश मैनेजमेंट, ट्रेड सेटलमेंट, विदेशी मुद्रा दायित्वों और डेरिवेटिव मार्जिन जरूरतों को पूरा करने के लिए भी कर सकेंगे. माना जा रहा है कि इससे एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) की परिचालन क्षमता में सुधार होगा और निवेशकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी.

SEBI बोर्ड बैठक में मिली मंजूरी

शुक्रवार को हुई SEBI बोर्ड की बैठक में म्यूचुअल फंड विनियम, 2026 में संशोधन को मंजूरी दी गई. इसके तहत फंड हाउसों को इंट्राडे उधारी के उपयोग के लिए अधिक लचीलापन दिया गया है. नियामक का मानना है कि यह कदम बाजार की बदलती जरूरतों और परिचालन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है.

किन उद्देश्यों के लिए मिल सकेगी उधारी?

नए नियमों के अनुसार, म्यूचुअल फंड स्कीम्स अब एसेट क्लास के भीतर भुगतान और प्राप्तियों के बीच समय अंतराल को संभालने, विदेशी मुद्रा (FX) से जुड़े सेटलमेंट दायित्वों को पूरा करने और डेरिवेटिव पोजिशन में उतार-चढ़ाव से उत्पन्न मार्जिन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शॉर्ट-टर्म उधार ले सकेंगी. इससे फंड हाउसों को अचानक पैदा होने वाली नकदी जरूरतों को पूरा करने में आसानी होगी और निवेश संबंधी गतिविधियों पर असर नहीं पड़ेगा.

क्यों जरूरी था यह बदलाव?

SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि विभिन्न म्यूचुअल फंड स्कीम्स में नकदी के प्रवाह और भुगतान के बीच अक्सर समय का अंतर होता है. कई बार इस वजह से भुगतान दायित्वों को समय पर पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. ऐसे में इंट्राडे उधारी की सुविधा फंड हाउसों के लिए महत्वपूर्ण सहारा साबित हो सकती है.

उधारी पर रहेंगी सख्त शर्तें

हालांकि SEBI ने नियमों में ढील दी है, लेकिन इसके साथ कुछ नियामकीय सुरक्षा उपाय भी लागू रहेंगे. नियामक ने स्पष्ट किया है कि कारोबार के दौरान ली जाने वाली उधारी की राशि दिन के दौरान अपेक्षित प्राप्तियों तक ही सीमित होगी. यदि किसी स्कीम को निर्धारित सीमा से अधिक उधार की आवश्यकता पड़ती है, तो उसका उपयोग केवल मौजूदा नियमों के तहत अनुमत उद्देश्यों, जैसे निवेशकों को भुगतान, के लिए ही किया जा सकेगा.

उसी दिन चुकाना होगा पूरा लोन

SEBI ने यह भी अनिवार्य किया है कि कारोबार के दौरान लिया गया पूरा ऋण उसी कारोबारी दिन समाप्त होने से पहले चुका दिया जाए. यदि किसी कारणवश यह उधारी अगले दिन तक जारी रहती है, तो उसे नियामकीय सीमाओं के भीतर रहकर केवल अनुमत उद्देश्यों के लिए ही मान्य माना जाएगा.

उद्योग और निवेशकों को होगा फायदा

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि SEBI का यह फैसला म्यूचुअल फंड उद्योग की परिचालन दक्षता बढ़ाने, नकदी प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने और निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे फंड हाउसों को लेनदेन और सेटलमेंट से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में अधिक लचीलापन मिलेगा और पूरी प्रणाली की कार्यकुशलता मजबूत होगी.
 


अब UPI और ATM से निकाल सकेंगे PF का पैसा, जून के अंत तक शुरू हो सकती है नई सुविधा

नई व्यवस्था लागू होने के बाद सदस्य क्लेम की स्वीकृत राशि सीधे अपने बैंक खाते में प्राप्त कर सकेंगे और फिर जरूरत पड़ने पर ATM से नकदी निकाल सकेंगे.

Last Modified:
Friday, 19 June, 2026
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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने 7 करोड़ से अधिक सदस्यों के लिए बड़ी सुविधा शुरू करने जा रहा है. जल्द ही कर्मचारी अपने पीएफ खाते से UPI और ATM के जरिए सीधे पैसा निकाल सकेंगे. सूत्रों के मुताबिक, यह सुविधा जून के अंत तक शुरू की जा सकती है. इससे पहले नए आईटी सिस्टम को लागू करने के लिए EPFO के सर्वर करीब तीन दिन तक बंद रह सकते हैं.

EPFO 2.01 के तहत तैयार हुआ नया सिस्टम

श्रम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, EPFO 2.01 के तहत केंद्रीकृत आईटी प्रणाली का काम लगभग पूरा हो चुका है. इसी परियोजना के तहत सदस्यों को UPI के माध्यम से पीएफ निकासी की सुविधा दी जाएगी.

नई व्यवस्था लागू होने के बाद सदस्य क्लेम की स्वीकृत राशि सीधे अपने बैंक खाते में प्राप्त कर सकेंगे और फिर जरूरत पड़ने पर ATM से नकदी निकाल सकेंगे. इससे पीएफ निकासी की प्रक्रिया पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएगी.

महीने के अंत तक शुरू हो सकती है सुविधा

अधिकारियों का कहना है कि संगठन इस नई सेवा को जून के अंत तक शुरू करने की तैयारी में है. इसके साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 के लिए घोषित 8.25 प्रतिशत ब्याज भी इसी महीने सदस्यों के खातों में जमा किया जा सकता है. EPFO का मानना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था से क्लेम निपटान में लगने वाला समय कम होगा और सदस्यों को तत्काल लाभ मिलेगा.

सिस्टम अपग्रेड के लिए तीन दिन का ब्लैकआउट

नई सुविधा लागू करने से पहले EPFO अपने तकनीकी ढांचे को अपग्रेड करेगा. इसके लिए संगठन के सर्वर कम से कम तीन दिनों के लिए ब्लैकआउट मोड में जा सकते हैं.

अधिकारियों के मुताबिक, EPFO 2.01 प्लेटफॉर्म को पूरी तरह सक्रिय करने और नई सेवाओं को एकीकृत करने के लिए यह कदम जरूरी है. इस दौरान कुछ ऑनलाइन सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती हैं.

पीएफ निकासी के मौजूदा नियम क्या हैं?

EPFO के नियमों के अनुसार, सदस्य के खाते में जमा अंशदान का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा न्यूनतम बैलेंस के रूप में बना रहना जरूरी है. वहीं बीमारी, शिक्षा, विवाह और घर निर्माण जैसी जरूरतों के लिए 5 लाख रुपये तक के दावों का ऑटो-सेटलमेंट किया जाता है. नई डिजिटल सुविधा लागू होने के बाद ऐसे दावों के भुगतान की प्रक्रिया और अधिक तेज होने की उम्मीद है.

करोड़ों कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

UPI और ATM के जरिए पीएफ निकासी की सुविधा शुरू होने से करोड़ों कर्मचारियों को अपने पैसे तक आसान और त्वरित पहुंच मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम EPFO की सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है और सदस्यों के अनुभव को बेहतर बनाएगा.
 


कोटक MF ने लॉन्च किया पहला SIF, हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट रणनीति पर दांव

SEBI की नई स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड श्रेणी में अब कोटक की एंट्री भी हो गई है, निवेशकों के लिए 15 से 29 जून तक NFO खुला रहेगा.

Last Modified:
Monday, 15 June, 2026
BWHindia

कोटक म्युचुअल फंड (Kotak Mutual Fund) ने अपने पहले स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) कोटक इनफिनिटी हाईब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड के लॉन्च की घोषणा की है. इसके साथ ही कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा हाल ही में शुरू की गई स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) श्रेणी में प्रवेश किया है. नया फंड 15 जून 2026 से निवेशकों के लिए खुल गया है और इसका न्यू फंड ऑफर (NFO) 29 जून 2026 तक उपलब्ध रहेगा.

क्या है SIF श्रेणी?

स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) निवेश की एक नई श्रेणी है, जिसे पारंपरिक म्यूचुअल फंड और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) तथा अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) जैसे उन्नत निवेश उत्पादों के बीच की खाई को पाटने के उद्देश्य से पेश किया गया है. यह श्रेणी पोर्टफोलियो निर्माण में अपेक्षाकृत अधिक लचीलापन प्रदान करती है, हालांकि यह नियामकीय प्रावधानों के अधीन होती है. ऐसे निवेश उत्पाद उन निवेशकों के लिए अधिक उपयुक्त माने जाते हैं जो इनके जोखिम और विशेषताओं को अच्छी तरह समझते हैं.

हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट रणनीति पर रहेगा फोकस

कोटक इनफिनिटी हाईब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह विभिन्न बाजार परिस्थितियों में इक्विटी एक्सपोजर का गतिशील प्रबंधन कर सके. फंड की रणनीति का प्रमुख उद्देश्य जोखिम प्रबंधन और बाजार में गिरावट के दौरान पूंजी की सुरक्षा पर ध्यान देना है. इस रणनीति के तहत लॉन्ग-ओनली निवेश, नियामकीय सीमा के भीतर शॉर्ट पोजीशन और आर्बिट्राज अवसरों का संयोजन किया जाएगा. इसका उद्देश्य अलग-अलग बाजार चक्रों में संतुलित प्रदर्शन देने का प्रयास करना है.

हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि निवेश उद्देश्यों की प्राप्ति या हर बाजार परिस्थिति में स्थिर और अनुकूल रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है.

बाजार चक्रों से निपटने का नया विकल्प

कोटक महिंद्रा एएमसी (Kotak Mahindra AMC) के प्रबंध निदेशक निलेश शाह ने कहा कि म्यूचुअल फंड उद्योग ने अनुशासित लॉन्ग-ओनली निवेश के जरिए निवेशकों के लिए उल्लेखनीय संपत्ति सृजित की है. उन्होंने कहा, "एसआईएफ इस यात्रा का अगला स्वाभाविक चरण है, जो लॉन्ग-शॉर्ट रणनीतियों के माध्यम से बाजार चक्रों का बेहतर ढंग से सामना करने के लिए अधिक लचीलापन प्रदान करता है. हाइब्रिड रणनीतियों के प्रबंधन में हमारे अनुभव को देखते हुए इनफिनिटी हाईब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड निवेशकों को एक अतिरिक्त निवेश विकल्प उपलब्ध कराएगा, जिसमें अनुशासित पोर्टफोलियो निर्माण और जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा."

जोखिम प्रबंधन पर विशेष जोर

कंपनी के अनुसार यह फंड उन निवेशकों के लिए आकर्षक हो सकता है जो पारंपरिक इक्विटी निवेश से आगे बढ़कर अधिक लचीली रणनीतियों का लाभ उठाना चाहते हैं. हालांकि निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि बाजार जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं किए जा सकते और फंड का प्रदर्शन बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. सेबी की नई एसआईएफ व्यवस्था के तहत ऐसे फंड भारतीय निवेश उद्योग में अधिक परिष्कृत निवेश विकल्पों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं.
 


बैंकिंग फ्रॉड पर लगेगी लगाम! RBI ला रहा 'किल स्विच', एक क्लिक में रुक जाएंगे खाते से सभी ट्रांजैक्शन

डिजिटल लेनदेन के बढ़ते दायरे को देखते हुए RBI लगातार सुरक्षा उपायों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है ताकि ग्राहकों का भरोसा बना रहे और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके.

Last Modified:
Saturday, 30 May, 2026
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डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के मामलों में भी तेजी आई है. ऐसे में ग्राहकों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. केंद्रीय बैंक जल्द ही ‘किल स्विच’ (Kill Switch) फीचर लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसके जरिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि या फ्रॉड की आशंका होने पर ग्राहक अपने बैंक खाते से होने वाले सभी डेबिट ट्रांजैक्शन को तुरंत रोक सकेंगे. इसके अलावा RBI बड़े UPI भुगतान और डिजिटल लेनदेन की निगरानी के लिए AI आधारित सिस्टम भी विकसित कर रहा है.

संदिग्ध गतिविधि दिखते ही तुरंत लॉक होगा खाता

ऑनलाइन बैंकिंग और UPI के दौर में साइबर अपराधी कुछ ही सेकंड में खातों से पैसे उड़ा सकते हैं. इस खतरे को कम करने के लिए RBI डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ‘किल स्विच’ सुविधा जोड़ने पर काम कर रहा है.

इस फीचर के सक्रिय होते ही ग्राहक अपने खाते से होने वाले सभी निकासी लेनदेन को तत्काल रोक सकेंगे. इसका उद्देश्य साइबर ठगी का शिकार होने से पहले ही ग्राहकों को अपने पैसे सुरक्षित रखने का अवसर देना है. फिलहाल इसी तरह की सुविधा डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर उपलब्ध है, जहां ग्राहक मोबाइल ऐप के जरिए कार्ड को अस्थायी रूप से ऑन या ऑफ कर सकते हैं.

डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मिलेगा नया सुरक्षा कवच

RBI का मानना है कि जिस तरह हर डिजिटल सेवा में ‘स्विच ऑन’ का विकल्प होता है, उसी तरह आपात स्थिति में ‘स्विच ऑफ’ का विकल्प भी होना चाहिए. किल स्विच इसी अवधारणा पर आधारित है. यदि किसी ग्राहक को लगता है कि उसका मोबाइल, बैंकिंग ऐप या अकाउंट किसी साइबर हमले की चपेट में आ गया है, तो वह तुरंत इस सुविधा का इस्तेमाल कर सभी डेबिट ट्रांजैक्शन पर रोक लगा सकेगा. इससे फ्रॉड के दौरान होने वाले वित्तीय नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकेगा.

बड़े UPI ट्रांजैक्शन पर भी बढ़ेगी निगरानी

केंद्रीय बैंक UPI के जरिए होने वाले बड़े भुगतान को लेकर भी अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है. हाल ही में यह प्रस्ताव सामने आया था कि पहली बार किसी व्यक्ति को बड़ी रकम ट्रांसफर करने की स्थिति में कुछ समय का टाइम-लैग रखा जाए.

इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि यदि भुगतान किसी धोखाधड़ी या दबाव में किया जा रहा हो, तो उसे पूरा होने से पहले रोका जा सके. विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ मिनटों की यह देरी लाखों रुपये के साइबर फ्रॉड को रोकने में मददगार साबित हो सकती है.

AI करेगा हर डिजिटल लेनदेन की निगरानी

साइबर अपराधियों से मुकाबला करने के लिए RBI इसी वर्ष डिजिटल पेमेंट्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DPIP) लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है. यह प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से लैस होगा और देशभर में होने वाले डिजिटल लेनदेन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेगा.

यह सिस्टम प्रत्येक ट्रांजैक्शन का जोखिम स्तर निर्धारित करेगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की पहचान होने पर तुरंत अलर्ट जारी कर सकेगा. इससे बैंक और नियामक एजेंसियां संभावित धोखाधड़ी पर तेजी से कार्रवाई कर पाएंगी.

तेजी से बढ़ रहा है डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल

RBI के सर्वे के अनुसार, सुविधा और तेज भुगतान के कारण देश के 52 प्रतिशत लोग डिजिटल भुगतान माध्यमों का नियमित उपयोग कर रहे हैं. वहीं 67 प्रतिशत व्यापारियों का मानना है कि डिजिटल पेमेंट अपनाने से उनके कारोबार में वृद्धि हुई है.

डिजिटल लेनदेन के बढ़ते दायरे को देखते हुए RBI लगातार सुरक्षा उपायों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है ताकि ग्राहकों का भरोसा बना रहे और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके.

ग्राहकों को क्या होगा फायदा?

किल स्विच और AI आधारित निगरानी प्रणाली लागू होने के बाद ग्राहकों को साइबर फ्रॉड से अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी. संदिग्ध गतिविधि का पता चलते ही खाते को अस्थायी रूप से लॉक किया जा सकेगा, जबकि AI सिस्टम संभावित जोखिमों की पहले ही पहचान कर लेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम को और अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
 


कोटक MF ने लॉन्च किया नया इंडेक्स फंड, Alpha और Low-Volatility रणनीति पर रहेगा फोकस

यह इंडेक्स पूरी तरह नियम-आधारित ढांचे पर काम करता है और समय-समय पर इसका पुनर्संतुलन किया जाता है.

Last Modified:
Saturday, 30 May, 2026
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कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी (Kotak Mahindra AMC) ने निवेशकों के लिए एक नया निवेश विकल्प पेश करते हुए कोटक निफ्टी अल्फा लो-वॉलेटिलिटी 30 इंडेक्स फंड (Kotak Nifty Alpha Low-Volatility 30 Index Fund) लॉन्च करने की घोषणा की है. यह एक ओपन-एंडेड इंडेक्स फंड है, जो निफ्टी अल्फा लो-वॉलेटिलिटी 30 इंडेक्स को ट्रैक करेगा. इस फंड का न्यू फंड ऑफर (NFO) 29 मई 2026 से निवेश के लिए खुल गया है और 12 जून 2026 तक खुला रहेगा.

क्या है कोटक निफ्टी अल्फा लो-वॉलेटिलिटी 30 इंडेक्स फंड?

यह फंड निफ्टी अल्फा लो-वॉलेटिलिटी 30 इंडेक्स फंडकी नकल करेगा, जिसमें 30 ऐसी कंपनियां शामिल हैं जिन्हें अल्फा और लो-वॉलेटिलिटी फैक्टर्स के आधार पर चुना जाता है. Alpha उन शेयरों की क्षमता को दर्शाता है जो व्यापक बाजार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, जबकि Low-Volatility ऐसे शेयरों पर फोकस करता है जिनकी कीमतों में अपेक्षाकृत कम उतार-चढ़ाव होता है. इन दोनों रणनीतियों का संयोजन निवेशकों को बेहतर रिटर्न की संभावना के साथ जोखिम को संतुलित करने का अवसर देता है.

नियम-आधारित और पारदर्शी निवेश रणनीति

यह इंडेक्स पूरी तरह नियम-आधारित ढांचे पर काम करता है और समय-समय पर इसका पुनर्संतुलन (Rebalancing) किया जाता है. इसका उद्देश्य निवेशकों को एक व्यवस्थित और पारदर्शी निवेश ढांचा उपलब्ध कराना है, जिससे वे इक्विटी बाजार में भागीदारी कर सकें.

लंबी अवधि के निवेशकों के लिए उपयुक्त: निलेश शाह

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक निलेश शाह ने कहा कि कंपनी निवेशकों की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए समाधान पेश करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि यह नया फंड अल्फा और लो-वॉलेटिलिटी विशेषताओं को जोड़ने वाली फैक्टर-आधारित रणनीति अपनाता है. यह निवेशकों को एक संरचित और पारदर्शी ढांचे के माध्यम से इक्विटी में निवेश का अवसर प्रदान करता है. उनके अनुसार, लंबी अवधि के निवेश क्षितिज वाले निवेशक इस फंड पर विचार कर सकते हैं.

बेहतर अवसरों के साथ नियंत्रित रहेगा उतार-चढ़ाव

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के कार्यकारी उपाध्यक्ष और फंड मैनेजर देवेंद्र सिंघल ने कहा कि यह रणनीति ऐसे शेयरों की पहचान करती है जिनमें बाजार से बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता हो, जबकि वे अपेक्षाकृत स्थिर भी बने रहें. उन्होंने बताया कि समय के साथ यह दृष्टिकोण एक ऐसा विविधीकृत पोर्टफोलियो तैयार करने में मदद करता है जो निवेशकों को बाजार के अवसरों का लाभ लेने के साथ-साथ अस्थिरता को सीमित रखने में भी सहायता करता है.

निवेशकों को मिलेगा विविधीकृत इक्विटी पोर्टफोलियो

विशेषज्ञों के अनुसार, अल्फा और लो-वॉलेटिलिटी फैक्टर्स का संयोजन निवेशकों को एक संतुलित इक्विटी पोर्टफोलियो प्रदान कर सकता है. यह फंड उन निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प हो सकता है जो लंबी अवधि में इक्विटी बाजार से जुड़े रहना चाहते हैं और साथ ही बाजार की अधिक अस्थिरता से बचाव भी चाहते हैं. NFO के जरिए निवेशकों को फैक्टर-आधारित निवेश रणनीति में भागीदारी का अवसर मिलेगा, जो पारंपरिक मार्केट-कैप आधारित निवेश दृष्टिकोण से अलग एक वैकल्पिक निवेश मॉडल पेश करती है.

(डिस्क्लेमर: म्युचुअल फंड्स बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)