मुंबई में 1,000 बेटियों के लिए वित्तीय सुरक्षा पहल, 10 साल में ₹20 करोड़ का योगदान

महाराष्ट्र में वित्तीय समावेशन की पहल के तहत 1,000 वंचित छात्राओं को सरकारी बचत योजनाओं से जोड़ा गया; 10 साल तक हर साल ₹20,000 का योगदान करने का ऐलान

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Monday, 10 August, 2026
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मुंबई में 1,000 वंचित बालिकाओं को दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा से जोड़ने की एक पहल शुरू की गई है. इसके तहत छात्राओं के लिए सरकार समर्थित बचत खाते खोले गए और उनके परिवारों को पासबुक सौंपी गईं. इस पहल में प्रत्येक लाभार्थी के खाते में शुरुआती ₹20,000 जमा किए गए हैं और अगले 10 वर्षों तक हर साल इतनी ही राशि का योगदान करने की प्रतिबद्धता जताई गई है. इसके तहत कुल व्यक्तिगत प्रतिबद्धता ₹20 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है.

सुकन्या समृद्धि और NPS वात्सल्य से जोड़ी गईं छात्राएं

मुंबई के घाटकोपर (पश्चिम) स्थित एसपीआरजे कन्याशाला ट्रस्ट स्कूल में आयोजित ‘एम्पावरिंग हर फ्यूचर – 1000 बेटियां, 1000 सपने, एक विश्वास’ कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 1,000 छात्राओं को सम्मानित किया. कार्यक्रम में भाजपा एमएलसी प्रसाद लाड के अलावा शिक्षाविद, बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधि, छात्राएं और उनके अभिभावक मौजूद रहे. पहल के तहत 10 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं को सुकन्या समृद्धि योजना और 10 वर्ष से अधिक उम्र की बालिकाओं को NPS वात्सल्य योजना से जोड़ा गया है. इसका उद्देश्य छात्राओं के नाम पर लंबी अवधि में एक वित्तीय कोष तैयार करना है, जिसका इस्तेमाल भविष्य में उच्च शिक्षा और अन्य महत्वपूर्ण जरूरतों के लिए किया जा सके.

10 साल तक हर साल ₹20,000 का योगदान

इस पहल की शुरुआत मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल लिमिटेड के गौरव भंडारी की ओर से की गई है. प्रत्येक बालिका के खाते में शुरुआती ₹20,000 का योगदान किया गया है. इसके साथ ही अगले 10 वर्षों तक हर साल इतनी ही राशि जमा करने की प्रतिबद्धता जताई गई है. 1,000 लाभार्थियों के हिसाब से शुरुआती योगदान ₹2 करोड़ बैठता है. यदि अगले 10 वर्षों तक हर वर्ष ₹2 करोड़ का योगदान किया जाता है, तो कुल व्यक्तिगत प्रतिबद्धता ₹20 करोड़ होगी. गौरव भंडारी ने कहा इस पहल का एक अहम पहलू वित्तीय साक्षरता और औपचारिक वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच बढ़ाना है. लाभार्थियों और उनके परिवारों को बचत योजनाओं की जानकारी देने के साथ खातों के संचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं के बारे में भी जानकारी दी गई.

आयोजकों के अनुसार, स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों, बैंकिंग साझेदारों और अभिभावकों के सहयोग से करीब 15 दिनों में सभी 1,000 खातों को खोलने की प्रक्रिया पूरी की गई. इसके लिए जरूरी दस्तावेजीकरण, जागरूकता सत्र और अन्य औपचारिकताएं भी पूरी की गईं.

वित्तीय सुरक्षा और शिक्षा पर फोकस

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वित्तीय समावेशन और शिक्षा के जरिए वंचित वर्ग की बालिकाओं को अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत प्रतिबद्धता और सामाजिक जिम्मेदारी के जरिए समाज में बदलाव लाया जा सकता है. फडणवीस ने आगे कहा इस पहल के तहत तैयार किया जाने वाला वित्तीय कोष छात्राओं के लिए लंबी अवधि की बचत का माध्यम होगा. इसका उद्देश्य भविष्य में उनकी शिक्षा और अन्य महत्वपूर्ण जीवन जरूरतों के लिए वित्तीय आधार तैयार करना है.

कार्यक्रम के अंत में लाभार्थी छात्राओं को पासबुक वितरित की गईं. आयोजकों के मुताबिक, पहल का फोकस एकमुश्त सहायता के बजाय नियमित बचत और लंबी अवधि की वित्तीय योजना के जरिए छात्राओं को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने पर है.

 


65 महीने तक नहीं बदलेगी होम लोन की EMI! Kotak Bank ने लॉन्च किया हाइब्रिड लोन

ब्याज दर बढ़ने की टेंशन होगी कम, ग्राहक 39, 52 या 65 महीने के लिए रेट लॉक कर सकेंगे; फिलहाल 7.6% से शुरू हो रही ब्याज दर

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Monday, 10 August, 2026
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होम लोन लेने वालों के लिए ब्याज दरों में बदलाव और बढ़ती EMI की चिंता को कम करने के लिए कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) ने नया हाइब्रिड होम लोन लॉन्च किया है. इस सुविधा के तहत ग्राहक अपने होम लोन की ब्याज दर को अधिकतम 65 महीने तक लॉक कर सकेंगे. यानी इस तय अवधि के दौरान RBI की रेपो रेट में बदलाव होने के बावजूद ग्राहक की ब्याज दर और EMI में बदलाव नहीं होगा. बैंक का कहना है कि इससे घर खरीदने वाले परिवारों को लोन के शुरुआती वर्षों में अपने बजट और दूसरे वित्तीय खर्चों की बेहतर प्लानिंग करने में मदद मिलेगी.

39, 52 या 65 महीने के लिए लॉक कर सकेंगे ब्याज दर

कोटक महिंद्रा बैंक के इस हाइब्रिड होम लोन में ग्राहक अपनी जरूरत के मुताबिक 39, 52 या 65 महीने की फिक्स्ड ब्याज दर अवधि चुन सकते हैं. इस दौरान रेपो रेट में उतार-चढ़ाव का असर उनकी ब्याज दर और EMI पर नहीं पड़ेगा. तय अवधि खत्म होने के बाद लोन अपने आप फ्लोटिंग रेट व्यवस्था में चला जाएगा.

7.6% से शुरू होगी ब्याज दर

बैंक फिलहाल होम लोन 7.6 प्रतिशत की शुरुआती ब्याज दर पर उपलब्ध करा रहा है. फिक्स्ड अवधि पूरी होने के बाद लागू होने वाली फ्लोटिंग ब्याज दर RBI की रेपो रेट और लोन मंजूर करते समय तय किए गए अतिरिक्त मार्जिन यानी स्प्रेड से जुड़ी होगी. बैंक के मुताबिक, अगर ब्याज दरें हाल के ऊंचे स्तर तक बढ़ती हैं, तो 1 करोड़ रुपये के होम लोन पर ग्राहक को 3.46 लाख रुपये तक की बचत हो सकती है.

अलग से नहीं देना होगा कोई प्रीमियम

यह हाइब्रिड लोन होम लोन के साथ-साथ प्रॉपर्टी के बदले लोन के लिए भी उपलब्ध है. बैंक के अनुसार, इसकी कीमत उसके सामान्य फ्लोटिंग-रेट होम लोन के बराबर है और हाइब्रिड स्ट्रक्चर चुनने के लिए ग्राहकों से अलग से कोई प्रीमियम नहीं लिया जाएगा. कोटक महिंद्रा बैंक के हेड (मॉर्गेज) नकुल सक्सेना के मुताबिक, होम लोन आमतौर पर कई दशकों तक चलता है और इस दौरान ब्याज दरों में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं. ऐसे में हर ब्याज दर चक्र के दौरान उधारकर्ता के सामने यह सवाल रहता है कि अगली दर में बदलाव से उसकी EMI और घर का बजट कितना प्रभावित होगा.

शुरुआती वर्षों में वित्तीय प्लानिंग होगी आसान

बैंक का कहना है कि घर खरीदने के शुरुआती वर्षों में परिवारों को EMI के साथ-साथ घर की साज-सज्जा, बच्चों की शिक्षा, बचत और रोजमर्रा के अन्य खर्चों का भी प्रबंधन करना होता है. ऐसे में 65 महीने तक ब्याज दर लॉक रहने से परिवारों को अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों की पहले से बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है.

मॉर्गेज पोर्टफोलियो 15% बढ़ा

कोटक महिंद्रा बैंक का मॉर्गेज पोर्टफोलियो 30 जून 2026 तक सालाना आधार पर 15 प्रतिशत बढ़कर 1,50,903 करोड़ रुपये हो गया. पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के अंत में यह 1,31,792 करोड़ रुपये था. बैंक के मुताबिक, नया हाइब्रिड होम लोन पूरे भारत में योग्य वेतनभोगी और स्वरोजगार वाले उधारकर्ताओं के लिए उपलब्ध है.


RBI का बड़ा प्रस्ताव: ग्रामीण को-ऑपरेटिव बैंकों से अब 3 करोड़ तक मिलेगा होम लोन

RBI के नए ड्राफ्ट के तहत बड़े ग्रामीण को-ऑपरेटिव बैंक एक ग्राहक को 3 करोड़ रुपये तक का हाउसिंग लोन दे सकेंगे. साथ ही, लोन चुकाने के लिए ज्यादा समय और अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर मोरेटोरियम की सुविधा भी मिल सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 08 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 08 August, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्रामीण सहकारी बैंकों (Rural Cooperative Banks) के लिए कर्ज और जोखिम प्रबंधन से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है. RBI ने 6 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सर्कुलर में होम लोन की सीमा बढ़ाने, लोन की अवधि तय करने और कुछ सदस्यों को सिक्योरिटी के बदले कर्ज देने से जुड़े नए प्रावधान प्रस्तावित किए हैं. इन बदलावों से ग्रामीण और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए घर खरीदना या बनाना आसान हो सकता है.

बैंक की जमा राशि के हिसाब से तय होगी होम लोन लिमिट

नए प्रस्ताव के मुताबिक, ग्रामीण सहकारी बैंकों से मिलने वाले होम लोन की अधिकतम सीमा बैंक की कुल जमा राशि के आधार पर तय होगी.

- 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा वाले बैंक एक ग्राहक को 3 करोड़ रुपये तक का होम लोन दे सकेंगे.
- 1,000 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपये तक जमा वाले बैंक 2 करोड़ रुपये तक का कर्ज दे सकेंगे.
- 100 करोड़ से 1,000 करोड़ रुपये तक जमा वाले बैंक 1.4 करोड़ रुपये तक का होम लोन दे सकेंगे.
- 100 करोड़ रुपये से कम जमा वाले छोटे बैंकों के लिए यह सीमा 60 लाख रुपये होगी.

इस बदलाव से बड़े ग्रामीण सहकारी बैंकों के ग्राहकों को पहले के मुकाबले ज्यादा रकम का होम लोन मिल सकेगा.

लोन चुकाने के लिए भी मिलेगी ज्यादा मोहलत

RBI ने सिर्फ कर्ज की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं दिया है, बल्कि लोन रिपेमेंट की शर्तों में भी राहत का प्रस्ताव रखा है. 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा वाले ग्रामीण सहकारी बैंक अपने बोर्ड की मंजूरी से लोन की अवधि तय कर सकेंगे. वहीं, अन्य ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए हाउसिंग लोन की अधिकतम अवधि 20 साल प्रस्तावित है. इस अवधि में मोरेटोरियम यानी शुरुआती समय में EMI भुगतान से मिलने वाली छूट भी शामिल होगी.

अंडर-कंस्ट्रक्शन घर के लिए 24 महीने का मोरेटोरियम

अगर ग्राहक ऐसा घर खरीदता है जिसका निर्माण अभी चल रहा है, तो उसे 24 महीने तक का मोरेटोरियम मिल सकता है. यानी इस अवधि में होम लोन की EMI चुकाने से राहत मिल सकती है. इससे अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी खरीदने वाले ग्राहकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

FD, सोना और इंश्योरेंस पॉलिसी के बदले मिलेगा लोन

RBI ने 'नॉमिनल मेंबर्स' को लेकर भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है. बैंक के नियमों में प्रावधान होने पर ऐसे सदस्यों को भी लोन दिया जा सकेगा. हालांकि, यह कर्ज सिक्योरिटी के बदले मिलेगा. इसके लिए ग्राहक बैंक में अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), सोने-चांदी के आभूषण, जीवन बीमा पॉलिसी या सरकारी प्रतिभूतियां गिरवी रख सकता है. इससे जरूरत के समय ग्राहकों के लिए बैंक से फंड जुटाने का एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होगा.

अनसिक्योर्ड लोन और रियल एस्टेट एक्सपोजर पर सीमा

RBI ने ग्रामीण सहकारी बैंकों के जोखिम को नियंत्रित करने के लिए कुछ सीमाएं भी प्रस्तावित की हैं. किसी एक ग्राहक या संस्था को बैंक अपनी टियर-1 कैपिटल के अधिकतम 20 फीसदी तक ही कर्ज दे सकेंगे. इसके अलावा, बैंकों के कुल लोन में बिना गारंटी वाले यानी अनसिक्योर्ड लोन की हिस्सेदारी 15 फीसदी तक सीमित रखने का प्रस्ताव है. रियल एस्टेट सेक्टर में भी बैंकों के एक्सपोजर की सीमा तय की गई है.

1 अप्रैल 2027 से लागू होने का प्रस्ताव

RBI ने इन प्रस्तावित बदलावों पर संबंधित पक्षों से 28 अगस्त 2026 तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं. अगर ड्राफ्ट को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाने का प्रस्ताव है. कुल मिलाकर, RBI के प्रस्ताव से ग्रामीण सहकारी बैंकों के ग्राहकों के लिए होम लोन की उपलब्धता और रकम दोनों बढ़ सकती हैं. खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में घर खरीदने या बनाने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह बदलाव अहम साबित हो सकता है.


कोटक MF ने लॉन्च किया निफ्टी बैंक इंडेक्स फंड, बैंकिंग सेक्टर में निवेश का नया मौका

यह फंड निवेशकों को निफ्टी बैंक इंडेक्स के जरिए भारत के बैंकिंग सेक्टर में पैसिव निवेश का अवसर देगा.

Last Modified:
Monday, 03 August, 2026
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कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (Kotak AMC) ने कोटक निफ्टी बैंक इंडेक्स फंड लॉन्च करने की घोषणा की है. यह एक ओपन-एंडेड इंडेक्स फंड है, जिसका उद्देश्य ट्रैकिंग एरर के अधीन रहते हुए निफ्टी बैंक इंडेक्स के प्रदर्शन को दोहराना और उसका अनुसरण करना है. इस फंड का न्यू फंड ऑफर (NFO) 3 अगस्त 2026 से निवेशकों के लिए खुल गया है, जो 17 अगस्त 2026 तक खुला रहेगा.

यह फंड निवेशकों को निफ्टी बैंक इंडेक्स के जरिए भारत के बैंकिंग सेक्टर में पैसिव निवेश का अवसर देगा. निफ्टी बैंक इंडेक्स देश की सबसे बड़ी और सबसे अधिक तरलता वाली बैंकिंग कंपनियों के पूंजी बाजार प्रदर्शन को दर्शाता है. इस इंडेक्स में NSE में सूचीबद्ध 14 बैंकिंग शेयर शामिल हैं और सेक्टर का सही प्रतिनिधित्व बनाए रखने के लिए इसका हर छह महीने में पुनर्संतुलन (रीबैलेंसिंग) किया जाता है.

पारदर्शी और नियम-आधारित चयन प्रक्रिया

निफ्टी बैंक इंडेक्स में शामिल कंपनियों का चयन पूरी तरह पारदर्शी और नियम-आधारित प्रक्रिया के तहत किया जाता है. इसके लिए ट्रेडिंग फ्रीक्वेंसी, लिस्टिंग इतिहास, तरलता (लिक्विडिटी) और फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन जैसे मानकों को आधार बनाया जाता है. साथ ही डेरिवेटिव्स सेगमेंट में उपलब्ध कंपनियों को प्राथमिकता दी जाती है और अंतिम चयन फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर होता है.

लंबी अवधि में शानदार प्रदर्शन

ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, निफ्टी बैंक टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) ने अपनी शुरुआत से अब तक लगभग 17.8 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दी है. वहीं, इसी अवधि में निफ्टी 50 TRI का CAGR लगभग 12.3 प्रतिशत रहा है.

क्या बोले निलेश शाह?

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक निलेश शाह ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर लंबे समय से भारत के आर्थिक और वित्तीय विकास की आधारशिला रहा है. निफ्टी 50 इंडेक्स में बैंकों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक रही है, जिससे यह भारत की विकास गाथा और इक्विटी बाजार के प्रदर्शन का अहम हिस्सा बनता है. उन्होंने कहा कि कोटक निफ्टी बैंक इंडेक्स फंड लॉन्च के माध्यम से निवेशकों को भारत के प्रमुख बैंकिंग संस्थानों में केंद्रित निवेश का अवसर मिलेगा.

निवेशकों को मिलेगा सरल और किफायती विकल्प

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के फंड मैनेजर सतीश डोंडापति ने कहा कि यह फंड उन निवेशकों के लिए तैयार किया गया है, जो व्यक्तिगत शेयर चुनने की जटिलता के बिना भारत के बैंकिंग सेक्टर में निवेश करना चाहते हैं. यह योजना निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंकों में एक्सपोजर प्रदान करेगी और एक सरल, पारदर्शी तथा कम लागत वाले पैसिव निवेश विकल्प के रूप में काम करेगी.

न्यूनतम निवेश कितना?

निवेशक NFO के दौरान न्यूनतम 1,000 रुपये से निवेश की शुरुआत कर सकते हैं. इसके बाद स्कीम इंफॉर्मेशन डॉक्यूमेंट (SID) में निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार किसी भी राशि का निवेश किया जा सकेगा.

हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि पिछला प्रदर्शन भविष्य में समान रिटर्न की गारंटी नहीं देता. कोटक एएमसी कोटक महिंद्रा एएमसी किसी भी तरह के निश्चित या भविष्य के रिटर्न का वादा नहीं करती है. निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेने की सलाह दी गई है.
 


होम लोन लेने वालों के लिए खुशखबरी! बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने घटाई ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस भी माफ

अगर आप निकट भविष्य में घर खरीदने या नया होम लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो बैंक ऑफ महाराष्ट्र का यह सीमित अवधि का ऑफर आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

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Monday, 03 August, 2026
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अगर आप भी एक नया घर खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो ये खबर आपके काम की हो सकती है. दरअसल, सरकारी क्षेत्र के बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BoM) ने घर खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए सीमित अवधि का 'मॉनसून धमाका' ऑफर लॉन्च किया है. बैंक का कहना है कि इस विशेष अभियान का उद्देश्य ग्राहकों के लिए लोन की कुल लागत कम करना और उनकी मासिक EMI का बोझ घटाना है. ग्राहक बैंक के डिजिटल लोन एप्लिकेशन प्लेटफॉर्म के जरिए भी तेजी से आवेदन कर सकते हैं. तो आइए आपके इसके बारे में विस्तार से बताते हैं.

प्रोसेसिंग फीस और डॉक्यूमेंटेशन चार्ज भी पूरी तरह माफ 

बैंक ने होम लोन की शुरुआती ब्याज दर घटाकर 7% सालाना कर दी है. इसके साथ ही प्रोसेसिंग फीस और डॉक्यूमेंटेशन चार्ज भी पूरी तरह माफ कर दिए गए हैं.  बैंक द्वारा शनिवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि उसने कार लोन की सालाना ब्याज दर भी घटाकर 7.45 प्रतिशत कर दी है. इससे ये दोनों उत्पाद उद्योग में सबसे कम ब्याज दर वाले ऑफर में शामिल हो गए हैं. बैंक का कहना है कि कम ब्याज दर और शुरुआती चार्ज माफ करने का मकसद ग्राहकों के लिए लोन लेने की कुल लागत और हर महीने की किस्त का बोझ कम करना है.

CIBIL स्कोर के आधार पर ब्याज दर

बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने CIBIL स्कोर के आधार पर होम लोन की ब्याज दरें तय की हैं.

CIBIL स्कोर              वेतनभोगी               गैर-वेतनभोगी 
800 या अधिक              7.00%               7.10% 
750-799                     7.25%               7.35% 
725-749                     7.70%               7.80% 
700-724                     7.75%               7.95% 
650-699                     8.35%               8.55% 
600-649                     8.75%               8.95% 
600 से कम                  9.15%               9.65% 
NTC / -1 से 05            7.70%               7.90% 

किन ग्राहकों को मिलेगा 7% का फायदा?

7% की न्यूनतम ब्याज दर उन वेतनभोगी ग्राहकों के लिए है जिनका CIBIL स्कोर 800 या उससे अधिक है. साथ ही वे केंद्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) अथवा सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में कार्यरत हों, उनका न्यूनतम मासिक सकल वेतन 50,000 रुपये हो और उनका आवेदन DSA के माध्यम से न आया हो.

बैंक ने स्पष्ट किया है कि होम लोन की ब्याज दरें RLLR (Repo Linked Lending Rate) से जुड़ी हैं. इसलिए समय-समय पर इनमें बदलाव संभव है. बैंक का मानना है कि कम ब्याज दर और शुरुआती शुल्क में छूट से ग्राहकों के लिए घर खरीदना पहले की तुलना में अधिक किफायती हो सकता है.

20 लाख और 50 लाख के होम लोन पर कितनी होगी EMI?

उदाहरण के तौर पर यदि कोई ग्राहक 20 साल (240 महीने) के लिए होम लोन लेता है, तो अनुमानित मासिक EMI इस प्रकार होगी:

लोन राशि                ब्याज दर               अवधि             अनुमानित मासिक EMI       कुल ब्याज (लगभग)

20 लाख रुपये            7.00%              20 वर्ष             ₹15,500                           ₹17.2 लाख 

50 लाख रुपये             7.00%             20 वर्ष             ₹38,800                            ₹43.1 लाख 

नोट: EMI अनुमानित है. वास्तविक EMI बैंक की शर्तों, लोन अवधि और स्वीकृत ब्याज दर के अनुसार अलग हो सकती है.


अब म्यूचुअल फंड से हर महीने पैसा निकालना होगा आसान, SEBI ने डीमैट निवेशकों को दी बड़ी सुविधा

इस कदम से निवेशकों को अपने निवेश को मैनेज करना आसान होगा और वे तय समय पर पैसे निकालने या एक स्कीम से दूसरी स्कीम में ट्रांसफर करने की सुविधा हासिल कर सकेंगे.

Last Modified:
Saturday, 18 July, 2026
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बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने डीमैट अकाउंट में रखे म्यूचुअल फंड निवेश को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब ऐसे निवेशक भी SWP और STP के लिए ऑटोमैटिक निर्देश दे सकेंगे. इससे डीमैट फॉर्म में म्यूचुअल फंड यूनिट रखने वाले निवेशकों को भी वही सुविधाएं मिलेंगी, जो अब तक केवल स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट (SOA) के रूप में रखी गई यूनिट्स पर उपलब्ध थीं.

अभी तक निवेशक केवल उन म्यूचुअल फंड यूनिट्स के लिए SWP और STP की सुविधा ले सकते थे, जो एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) या उनके रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट (RTA) के पास SOA के रूप में मौजूद होती थीं. डीमैट अकाउंट में रखी गई यूनिट्स के लिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी.

दो चरणों में लागू होगा नया नियम

SEBI के नए नियम को दो चरणों में लागू किया जाएगा. पहले चरण में निवेशक यूनिट आधारित SWP और STP का विकल्प चुन सकेंगे. इसके तहत वे तय समय पर म्यूचुअल फंड की एक निश्चित संख्या में यूनिट बेचकर पैसा निकाल सकेंगे या उसी फंड हाउस की किसी दूसरी स्कीम में ट्रांसफर कर सकेंगे.

दूसरे चरण में रकम आधारित SWP और STP की सुविधा शुरू की जाएगी. इसके तहत निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार एक तय राशि को नियमित अंतराल पर निकाल सकेंगे या दूसरी स्कीम में ट्रांसफर कर सकेंगे.

SEBI ने डिपॉजिटरीज को निर्देश दिया है कि यूनिट आधारित सुविधा 31 जनवरी 2027 तक शुरू की जाए. वहीं, रकम आधारित सुविधा को 30 अप्रैल 2027 तक लागू करना होगा. इसके अलावा डिपॉजिटरीज को 31 अक्टूबर तक अपनी वेबसाइट पर इस प्रक्रिया से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी.

क्या होता है SWP और STP?

सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) के जरिए निवेशक अपने म्यूचुअल फंड निवेश से नियमित अंतराल पर एक निश्चित राशि या कुछ यूनिट्स निकाल सकते हैं. यह सुविधा खासतौर पर उन निवेशकों के लिए उपयोगी होती है, जिन्हें नियमित आय की जरूरत होती है.

वहीं, सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के जरिए निवेशक एक ही फंड हाउस की एक म्यूचुअल फंड स्कीम से दूसरी स्कीम में धीरे-धीरे अपना निवेश ट्रांसफर कर सकते हैं. इसका इस्तेमाल निवेशक बाजार की स्थिति और अपने वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से करते हैं.

निवेशकों को क्या फायदा मिलेगा?

SEBI के इस फैसले से डीमैट अकाउंट में म्यूचुअल फंड रखने वाले निवेशकों के लिए निवेश प्रबंधन आसान हो जाएगा. उन्हें अब पैसे निकालने या निवेश को दूसरी स्कीम में ट्रांसफर करने के लिए अलग प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा.

यह बदलाव खासतौर पर उन निवेशकों के लिए फायदेमंद होगा, जो अपने म्यूचुअल फंड निवेश को डीमैट फॉर्म में रखते हैं और नियमित निकासी या निवेश ट्रांसफर की योजना बनाते हैं.

नॉमिनी को म्यूचुअल फंड यूनिट ट्रांसफर करना भी आसान

इसके अलावा, एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) ने निवेशक की मृत्यु के बाद म्यूचुअल फंड यूनिट्स को नॉमिनी के नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया है. AMFI ने निवेशक के नाम, पते और हस्ताक्षर में मामूली अंतर या छोटी गलतियों से जुड़े नियमों में राहत दी है. नए नियमों के तहत, यदि मृतक निवेशक के रिकॉर्ड में दर्ज पते और मौजूदा पते में अंतर है, तो एसेट मैनेजमेंट कंपनियां नए पते को स्वीकार कर सकती हैं, बशर्ते इसके लिए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं. इन बदलावों का उद्देश्य म्यूचुअल फंड निवेशकों के अनुभव को बेहतर बनाना और निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल और सुविधाजनक बनाना है.
 


प्रॉपर्टी और सोना बेचने वालों को राहत, CBDT ने बढ़ाया कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स; ऐसे घटेगा LTCG टैक्स

CBDT आयकर अधिनियम, 1961 के तहत हर साल कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स अधिसूचित करता है. इसका उद्देश्य महंगाई के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए पूंजीगत लाभ (Capital Gain) की सही गणना करना है.

Last Modified:
Thursday, 16 July, 2026
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अगर आप वित्त वर्ष 2026-27 में पुरानी प्रॉपर्टी, जमीन, सोना या अन्य लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट बेचने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (Cost Inflation Index-CII) को 376 से बढ़ाकर 384 कर दिया है. इससे इंडेक्सेशन का लाभ लेने वाले टैक्सपेयर्स की लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स देनदारी कम हो सकती है, क्योंकि संपत्ति की खरीद लागत को महंगाई के अनुसार समायोजित किया जाएगा.

हर साल अपडेट होता है कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स

CBDT आयकर अधिनियम, 1961 के तहत हर साल कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स अधिसूचित करता है. इसका उद्देश्य महंगाई के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए पूंजीगत लाभ (Capital Gain) की सही गणना करना है. वित्त वर्ष 2025-26 में यह इंडेक्स 376 था, जिसे अब बढ़ाकर 384 कर दिया गया है. नया इंडेक्स वित्त वर्ष 2026-27 में होने वाले ट्रांजैक्शन पर लागू होगा.

क्या है कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स?

कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (CII) एक ऐसा पैमाना है, जो किसी संपत्ति की खरीद कीमत को महंगाई के हिसाब से समायोजित करने में मदद करता है. इसे इंडेक्सेशन कहा जाता है. इसका फायदा यह होता है कि टैक्स केवल वास्तविक मुनाफे पर लगाया जाता है, न कि महंगाई की वजह से बढ़ी कीमत पर. इससे टैक्स योग्य लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन कम हो जाता है और टैक्स का बोझ भी घटता है.

किन एसेट्स पर मिलेगा फायदा?

नया कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स उन लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट्स पर लागू होगा, जहां मौजूदा टैक्स नियमों के तहत इंडेक्सेशन का लाभ उपलब्ध है. इसमें मकान, फ्लैट, जमीन जैसी अचल संपत्तियां, सोना और अन्य ज्वेलरी के अलावा कुछ योग्य सिक्योरिटीज और अन्य पूंजीगत संपत्तियां शामिल हैं. इन एसेट्स की खरीद लागत को महंगाई के अनुरूप बढ़ाकर टैक्स योग्य लाभ की गणना की जाती है.

कब माना जाता है लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट?

किसी संपत्ति को लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट माना जाएगा या नहीं, यह उसकी होल्डिंग अवधि पर निर्भर करता है. अचल संपत्ति और अनलिस्टेड शेयर 24 महीने से अधिक समय तक रखने पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट माने जाते हैं. वहीं, लिस्टेड सिक्योरिटीज के लिए यह अवधि 12 महीने है. अधिकांश अन्य कैपिटल एसेट्स के लिए कम से कम 36 महीने की होल्डिंग जरूरी होती है.

टैक्सपेयर्स को कैसे होगा फायदा?

वित्त वर्ष 2026-27 में योग्य लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट बेचने वाले टैक्सपेयर्स 384 के नए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स का इस्तेमाल कर सकेंगे. इससे उनकी संपत्ति की खरीद लागत महंगाई के हिसाब से बढ़ जाएगी, जिससे टैक्स योग्य लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन कम निकलेगा और कुल टैक्स देनदारी में राहत मिलेगी. यही वजह है कि प्रॉपर्टी और सोना बेचने वाले निवेशकों के लिए इसे एक महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है.

किन लोगों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद?

विशेषज्ञों के मुताबिक, जिन लोगों ने कई साल पहले प्रॉपर्टी, जमीन या सोना खरीदा था और अब उसे बेचने की योजना बना रहे हैं, उन्हें इस फैसले का सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा. इंडेक्सेशन के कारण उनकी खरीद लागत अधिक मानी जाएगी, जिससे टैक्स योग्य मुनाफा कम होगा और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स भी घट जाएगा. हालांकि, इंडेक्सेशन का लाभ केवल उन्हीं मामलों में मिलेगा, जहां मौजूदा आयकर नियम इसकी अनुमति देते हैं.
 


PhonePe पर अब मिनटों में भरें ITR और GST, लॉन्च हुई नई टैक्स फाइलिंग सर्विस

डिजिटल पेमेंट्स कंपनी PhonePe पर इस फीचर के जरिए नौकरीपेशा लोगों, फ्रीलांसरों और छोटे कारोबारियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर ITR और GST से जुड़े काम करने की सुविधा मिलेगी.

Last Modified:
Friday, 10 July, 2026
BWHindia

डिजिटल पेमेंट्स कंपनी फोनपे (PhonePe) ने टैक्स कंप्लायंस प्लेटफॉर्म TaxBuddy के साथ साझेदारी कर अपने ऐप में 'टैक्स फाइलिंग' फीचर लॉन्च किया है. इस फीचर के जरिए नौकरीपेशा लोगों, फ्रीलांसरों और छोटे कारोबारियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर ITR और GST से जुड़े काम करने की सुविधा मिलेगी. कंपनी का दावा है कि इस फीचर में जरूरत पड़ने पर टैक्स एक्सपर्ट की मदद भी मिलेगी.

सिर्फ 24 रुपये से शुरू होगी सर्विस

फोनपे की नई टैक्स फाइलिंग सर्विस की शुरुआती कीमत 24 रुपये रखी गई है. जो यूजर खुद अपना इनकम टैक्स रिटर्न भरना चाहते हैं, वे सेल्फ-फाइलिंग विकल्प चुन सकते हैं. वहीं जटिल टैक्स मामलों के लिए एक्सपर्ट-असिस्टेड प्लान भी उपलब्ध हैं. इसके अलावा छोटे दुकानदारों और कारोबारियों के लिए हर महीने GST रिटर्न फाइल करने की सुविधा भी ऐप पर दी गई है.

ऐप के अंदर ही पूरा होगा टैक्स फाइलिंग का काम

कंपनी के मुताबिक, अब यूजर्स को ITR फाइल करने के लिए अलग-अलग वेबसाइटों या पोर्टल पर जाने की जरूरत नहीं होगी. PhonePe ऐप के भीतर ही पूरी टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी. इसके साथ ITR ऑप्टिमाइजेशन, एक्सपर्ट गाइडेंस और नियमित GST कंप्लायंस जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी.

क्या बोली कंपनी?

फोनपे में 'इन-ऐप कैटेगरीज' की हेड निहारिका सहगल ने कहा कि कंपनी अपने यूजर्स की रोजमर्रा की वित्तीय जरूरतों को आसान बनाने के लिए लगातार नए समाधान जोड़ रही है. उनका कहना है कि किफायती कीमत पर एक्सपर्ट टैक्स सहायता उपलब्ध कराकर कंपनी नौकरीपेशा लोगों से लेकर छोटे कारोबारियों तक सभी के लिए टैक्स मैनेजमेंट को सरल बनाना चाहती है.

ऐसे करें ITR और GST फाइल

फोनपे ऐप पर इस सुविधा का इस्तेमाल तीन आसान स्टेप्स में किया जा सकता है.

1. सबसे पहले फोनपे ऐप खोलें और 'Recharge & Pay Bills' सेक्शन में जाएं.
2. इसके बाद 'Utilities & Others' के तहत दिए गए 'File ITR' विकल्प पर टैप करें.
3. अब अपनी जरूरत के अनुसार Self-Filing, Expert-Assisted या Monthly GST Filing का विकल्प चुनकर प्रक्रिया पूरी करें.


KCC के नियमों में बड़ा बदलाव: 2 लाख रुपये तक बिना गारंटी मिलेगा लोन, किसानों को राहत

RBI ने किसान क्रेडिट कार्ड के नियम बदले, फसल अवधि से लेकर लोन सीमा तक कई अहम बदलाव 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे.

Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2026
BWHindia

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जिनका उद्देश्य किसानों को आसान और समय पर कर्ज उपलब्ध कराना है. नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे. इन बदलावों के तहत फसल अवधि की नई परिभाषा तय की गई है, वहीं 2 लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर गारंटी की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है. माना जा रहा है कि इससे छोटे और सीमांत किसानों को सबसे अधिक राहत मिलेगी.

फसल सीजन के लिए बने एक समान नियम

अब तक अलग-अलग बैंक फसल की अवधि को अलग-अलग तरीके से तय करते थे, जिससे ऋण चुकाने की अवधि को लेकर भ्रम की स्थिति बनती थी. आरबीआई ने इसे समाप्त करने के लिए फसल सीजन की एक समान परिभाषा तय की है. नए नियमों के अनुसार, कम अवधि वाली फसलों के लिए फसल सीजन 12 महीने और लंबी अवधि वाली फसलों के लिए 18 महीने माना जाएगा. आरबीआई के मुताबिक फसल सीजन में बुआई से लेकर फसल की कटाई और बिक्री तक की पूरी अवधि शामिल होगी.

2 लाख रुपये तक के लोन पर नहीं देनी होगी गारंटी

नए नियमों के तहत किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए खेती और उससे जुड़े कार्यों के लिए 2 लाख रुपये तक का ऋण लेने पर किसी प्रकार की गारंटी या अतिरिक्त सुरक्षा नहीं देनी होगी. बैंक इस सीमा तक के ऋण पर जमीन, संपत्ति या अन्य किसी प्रकार का कोलेटरल नहीं मांग सकेंगे. इससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए ऋण प्राप्त करना आसान हो जाएगा.

स्वेच्छा से सोना-चांदी गिरवी रखने की रहेगी सुविधा

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई किसान अपनी इच्छा से सोना या चांदी गिरवी रखकर कृषि ऋण लेना चाहता है तो इसे कोलेटरल-फ्री लोन नियमों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा. यानी किसान और बैंक की सहमति से गोल्ड या सिल्वर के बदले भी कृषि ऋण लिया जा सकेगा.

2 लाख रुपये से अधिक के लोन पर क्या होंगे नियम

यदि किसान 2 लाख रुपये से अधिक का केसीसी ऋण लेते हैं, तो गारंटी और मार्जिन से जुड़े नियम संबंधित बैंक अपनी आंतरिक ऋण नीति और आरबीआई के मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार तय करेंगे, हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में किसानों को अतिरिक्त राहत भी दी जा सकती है.

3 लाख रुपये तक के ऋण पर भी मिल सकती है छूट

आरबीआई के अनुसार यदि ऋण फसल या स्टॉक के आधार पर दिया जाता है तो बैंक 3 लाख रुपये तक के ऋण पर भी गारंटी संबंधी शर्तों में राहत दे सकते हैं. इससे किसानों को अधिक राशि का ऋण लेने में आसानी हो सकती है. हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित बैंक की नीति के आधार पर होगा.

समय-समय पर होगी क्रेडिट लिमिट की समीक्षा

केंद्रीय बैंक ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे कृषि और उससे जुड़े कार्यों के लिए दी गई अल्पकालिक ऋण सीमा की नियमित समीक्षा करें. जरूरत पड़ने पर किसानों की ऋण सीमा बढ़ाई या उसका नवीनीकरण भी किया जा सकेगा, जिससे बदलती कृषि जरूरतों के अनुसार किसानों को पर्याप्त पूंजी उपलब्ध हो सके.

बिना गारंटी लोन सीमा बढ़ाने की मांग नहीं मानी

नियमों पर सुझाव मांगने के दौरान कई पक्षों ने बिना गारंटी वाले कृषि ऋण की सीमा बढ़ाने की मांग की थी. हालांकि आरबीआई ने इसे स्वीकार नहीं किया. केंद्रीय बैंक का कहना है कि दिसंबर 2024 में ही बिना गारंटी वाले कृषि ऋण की सीमा बढ़ाई जा चुकी है, इसलिए फिलहाल इसमें और बदलाव की आवश्यकता नहीं है.

किसानों को क्या होगा फायदा?

नए नियम लागू होने के बाद ऋण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल हो सकती है. फसल अवधि को लेकर भ्रम कम होगा, छोटे किसानों को बिना गारंटी ऋण मिलने में आसानी होगी और सभी बैंकों में एक समान नियम लागू होंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से किसानों को समय पर खेती के लिए पूंजी उपलब्ध होगी और कृषि क्षेत्र में संस्थागत ऋण की पहुंच भी बढ़ेगी.
 


SEBI ने म्यूचुअल फंड्स को दी बड़ी राहत, इंट्राडे उधारी के नियम हुए आसान

कैश मैनेजमेंट, ट्रेड सेटलमेंट और डेरिवेटिव दायित्वों के लिए अब ले सकेंगे शॉर्ट-टर्म लोन, परिचालन दक्षता बढ़ने की उम्मीद

Last Modified:
Saturday, 20 June, 2026
BWHindia

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण नियामकीय बदलाव करते हुए इंट्राडे उधारी से जुड़े नियमों को आसान बना दिया है. नए नियमों के तहत म्यूचुअल फंड हाउस अब कारोबार के दौरान लिए जाने वाले अल्पकालिक ऋण का उपयोग केवल निवेशकों को भुगतान करने तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि कैश मैनेजमेंट, ट्रेड सेटलमेंट, विदेशी मुद्रा दायित्वों और डेरिवेटिव मार्जिन जरूरतों को पूरा करने के लिए भी कर सकेंगे. माना जा रहा है कि इससे एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) की परिचालन क्षमता में सुधार होगा और निवेशकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी.

SEBI बोर्ड बैठक में मिली मंजूरी

शुक्रवार को हुई SEBI बोर्ड की बैठक में म्यूचुअल फंड विनियम, 2026 में संशोधन को मंजूरी दी गई. इसके तहत फंड हाउसों को इंट्राडे उधारी के उपयोग के लिए अधिक लचीलापन दिया गया है. नियामक का मानना है कि यह कदम बाजार की बदलती जरूरतों और परिचालन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है.

किन उद्देश्यों के लिए मिल सकेगी उधारी?

नए नियमों के अनुसार, म्यूचुअल फंड स्कीम्स अब एसेट क्लास के भीतर भुगतान और प्राप्तियों के बीच समय अंतराल को संभालने, विदेशी मुद्रा (FX) से जुड़े सेटलमेंट दायित्वों को पूरा करने और डेरिवेटिव पोजिशन में उतार-चढ़ाव से उत्पन्न मार्जिन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शॉर्ट-टर्म उधार ले सकेंगी. इससे फंड हाउसों को अचानक पैदा होने वाली नकदी जरूरतों को पूरा करने में आसानी होगी और निवेश संबंधी गतिविधियों पर असर नहीं पड़ेगा.

क्यों जरूरी था यह बदलाव?

SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि विभिन्न म्यूचुअल फंड स्कीम्स में नकदी के प्रवाह और भुगतान के बीच अक्सर समय का अंतर होता है. कई बार इस वजह से भुगतान दायित्वों को समय पर पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. ऐसे में इंट्राडे उधारी की सुविधा फंड हाउसों के लिए महत्वपूर्ण सहारा साबित हो सकती है.

उधारी पर रहेंगी सख्त शर्तें

हालांकि SEBI ने नियमों में ढील दी है, लेकिन इसके साथ कुछ नियामकीय सुरक्षा उपाय भी लागू रहेंगे. नियामक ने स्पष्ट किया है कि कारोबार के दौरान ली जाने वाली उधारी की राशि दिन के दौरान अपेक्षित प्राप्तियों तक ही सीमित होगी. यदि किसी स्कीम को निर्धारित सीमा से अधिक उधार की आवश्यकता पड़ती है, तो उसका उपयोग केवल मौजूदा नियमों के तहत अनुमत उद्देश्यों, जैसे निवेशकों को भुगतान, के लिए ही किया जा सकेगा.

उसी दिन चुकाना होगा पूरा लोन

SEBI ने यह भी अनिवार्य किया है कि कारोबार के दौरान लिया गया पूरा ऋण उसी कारोबारी दिन समाप्त होने से पहले चुका दिया जाए. यदि किसी कारणवश यह उधारी अगले दिन तक जारी रहती है, तो उसे नियामकीय सीमाओं के भीतर रहकर केवल अनुमत उद्देश्यों के लिए ही मान्य माना जाएगा.

उद्योग और निवेशकों को होगा फायदा

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि SEBI का यह फैसला म्यूचुअल फंड उद्योग की परिचालन दक्षता बढ़ाने, नकदी प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने और निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे फंड हाउसों को लेनदेन और सेटलमेंट से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में अधिक लचीलापन मिलेगा और पूरी प्रणाली की कार्यकुशलता मजबूत होगी.
 


अब UPI और ATM से निकाल सकेंगे PF का पैसा, जून के अंत तक शुरू हो सकती है नई सुविधा

नई व्यवस्था लागू होने के बाद सदस्य क्लेम की स्वीकृत राशि सीधे अपने बैंक खाते में प्राप्त कर सकेंगे और फिर जरूरत पड़ने पर ATM से नकदी निकाल सकेंगे.

Last Modified:
Friday, 19 June, 2026
BWHindia

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने 7 करोड़ से अधिक सदस्यों के लिए बड़ी सुविधा शुरू करने जा रहा है. जल्द ही कर्मचारी अपने पीएफ खाते से UPI और ATM के जरिए सीधे पैसा निकाल सकेंगे. सूत्रों के मुताबिक, यह सुविधा जून के अंत तक शुरू की जा सकती है. इससे पहले नए आईटी सिस्टम को लागू करने के लिए EPFO के सर्वर करीब तीन दिन तक बंद रह सकते हैं.

EPFO 2.01 के तहत तैयार हुआ नया सिस्टम

श्रम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, EPFO 2.01 के तहत केंद्रीकृत आईटी प्रणाली का काम लगभग पूरा हो चुका है. इसी परियोजना के तहत सदस्यों को UPI के माध्यम से पीएफ निकासी की सुविधा दी जाएगी.

नई व्यवस्था लागू होने के बाद सदस्य क्लेम की स्वीकृत राशि सीधे अपने बैंक खाते में प्राप्त कर सकेंगे और फिर जरूरत पड़ने पर ATM से नकदी निकाल सकेंगे. इससे पीएफ निकासी की प्रक्रिया पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएगी.

महीने के अंत तक शुरू हो सकती है सुविधा

अधिकारियों का कहना है कि संगठन इस नई सेवा को जून के अंत तक शुरू करने की तैयारी में है. इसके साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 के लिए घोषित 8.25 प्रतिशत ब्याज भी इसी महीने सदस्यों के खातों में जमा किया जा सकता है. EPFO का मानना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था से क्लेम निपटान में लगने वाला समय कम होगा और सदस्यों को तत्काल लाभ मिलेगा.

सिस्टम अपग्रेड के लिए तीन दिन का ब्लैकआउट

नई सुविधा लागू करने से पहले EPFO अपने तकनीकी ढांचे को अपग्रेड करेगा. इसके लिए संगठन के सर्वर कम से कम तीन दिनों के लिए ब्लैकआउट मोड में जा सकते हैं.

अधिकारियों के मुताबिक, EPFO 2.01 प्लेटफॉर्म को पूरी तरह सक्रिय करने और नई सेवाओं को एकीकृत करने के लिए यह कदम जरूरी है. इस दौरान कुछ ऑनलाइन सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती हैं.

पीएफ निकासी के मौजूदा नियम क्या हैं?

EPFO के नियमों के अनुसार, सदस्य के खाते में जमा अंशदान का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा न्यूनतम बैलेंस के रूप में बना रहना जरूरी है. वहीं बीमारी, शिक्षा, विवाह और घर निर्माण जैसी जरूरतों के लिए 5 लाख रुपये तक के दावों का ऑटो-सेटलमेंट किया जाता है. नई डिजिटल सुविधा लागू होने के बाद ऐसे दावों के भुगतान की प्रक्रिया और अधिक तेज होने की उम्मीद है.

करोड़ों कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

UPI और ATM के जरिए पीएफ निकासी की सुविधा शुरू होने से करोड़ों कर्मचारियों को अपने पैसे तक आसान और त्वरित पहुंच मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम EPFO की सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है और सदस्यों के अनुभव को बेहतर बनाएगा.