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एक फोन कॉल से वित्तमंत्री बने मनमोहन सिंह, बदली भारतीय अर्थव्यवस्था की तकदीर

जनवरी 1991 में देश आर्थ‍िक संकट से गुजर रहा था. इस कठ‍िन दौर में मनमोहन स‍िंह को व‍ित्‍त मंत्रालय की ज‍िम्‍मेदारी सौंपी थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन स‍िंह का गुरुवार रात द‍िल्‍ली के एम्‍स में न‍िधन हो गया. उन्‍होंने 92 साल की उम्र में आख‍िरी सांस ली. साल 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री के पद पर रहने वाले मनमोहन स‍िंह को ऐसे समय में व‍ित्‍त मंत्री की कुर्सी सौंपी गई जब देश भारी आर्थ‍िक संकट से गुजर रहा था. 1991 में ज‍िस समय उन्‍हें व‍ित्‍त मंत्रालय की ज‍िम्‍मेदारी सौंपी गई उस समय भारत के पास महज 89 करोड़ डॉलर की विदेशी मुद्रा रह गई थी. इस पैसे से केवल दो सप्ताह के आयात का खर्च चल सकता था. लेक‍िन मनमोहन स‍िंह ने कुर्सी संभालने के बाद अपने फैसलों से बाजी पलट दी. आइए जानते हैं मनमोहन स‍िंह के व‍ित्‍त मंत्री बनने का द‍िलचस्‍प क‍िस्‍सा...

वीपी सिंह सरकार की टॉप इकोनॉमिक पॉलिसी टीम का हिस्सा बनना था 

साल 1990 में मनमोहन सिंह साउथ कमीशन के सेक्रेटरी जनरल के रूप में अपना काम पूरा कर भारत आए थे. उन्हें वीपी सिंह सरकार की टॉप इकोनॉमिक पॉलिसी टीम का हिस्सा बनना था. PM ने सिंह को अपनी आर्थिक सलाहकार परिषद का अध्यक्ष बनने के लिए कहा था. उन्होंने यह पद स्वीकार भी कर लिया था. लेकिन पहले ही वीपी सिंह की सरकार गिर गई. इसके बाद कांग्रेस के समर्थन से चंद्रशेखर की सरकार बनी. चंद्रशेखर ने डॉ. सिंह को प्रधानमंत्री कार्यालय में आर्थिक सलाहकार का पद दिया. 1991 में चंद्रशेखर की सरकार भी गिर गई. इस समय UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के अध्यक्ष का पद खाली था. ऐसे में डॉ. सिंह को वहां नियुक्त किया गया. 

नींद से जगा कर दिया गया ऑफर 

चंद्रशेखर की सरकार गिरने के बाद नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने थे. तब अर्थव्यवस्था की स्थिति बहुत खराब हो रही थी. अगला वित्त मंत्री कौन होना चाहिए, इसकी चर्चा हो रही थी. शुरुआत में सभी भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर आईजी पटेल के नाम पर सहमत हुए. लेकिन पटेल ने यह पद नहीं लिया. उसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह का नाम आगे किया गया. शपथ ग्रहण समारोह से एक दिन पहले राव ने पीसी अलेक्जेंडर को डॉ. सिंह से संपर्क करने को कहा. हालांकि इस फैसले के होने तक रात हो चुकी थी और 20 जून 1991 की रात देर से नीदरलैंड से लौटे डॉ. सिंह सो रहे थे. अलेक्जेंडर ने उन्हें फोन किया और बताया कि वो तुरंत मिलना चाहते हैं.

इसके बाद रात में ही अलेक्जेंडर, मनमोहन सिंह के घर पहुंचे और राव की सरकार में वित्त मंत्री बनने के लिए कहा. सिंह को अलेक्जेंडर पर यकीन नहीं हुआ और वो सुबह यूजीसी दफ्तर निकल गए. उधर सिंह का इंतजार शपथ समारोह में किया जा रहा था. समारोह में नजर नहीं आए तो खोजबीन शुरू हुई. फिर उनसे फोन पर पूछा गया कि क्या वो अगले वित्त मंत्री के तौर पर शपथ लेने आएंगे? 

मनमोहन सिंह को विश्वास नहीं हुआ. फिर उनसे कहा गया कि वो घर जाकर तैयार होकर शपथ समारोह में शामिल हों. समारोह में सिंह को वित्त मंत्रालय का पद नहीं सौंपा गया. हालांकि शपथ समारोह के बाद उन्हें बतौर वित्त मंत्री नॉर्थ ब्लॉक ऑफिस से काम शुरू करने को कहा गया. बाद में विज्ञप्ति जारी कर मनमोहन सिंह को आधिकारिक तौर वित्त मंत्रालय दिया गया.

नरसिम्हा राव ने द‍िया था साफ संदेश...

इसके बाद मनमोहन स‍िंह के नाम का ऐलान व‍ित्‍त मंत्री के तौर पर क‍िया गया. शपथ लेने से पहले नरसिम्हा राव ने मनमोहन सिंह से कहा था, 'मैं आपको काम करने की पूरी आजादी दूंगा. अगर हमारी पॉल‍िसी सफल होती हैं तो हम सब उसका क्रेड‍िट लेंगे. लेकिन अगर असफल हुए तो आपको जाना पड़ेगा.' 24 जुलाई, 1991 को पहली बार मनमोहन सिंह ने व‍ित्‍त मंत्री के तौर पर अपने भाषाण की शुरुआत की. इस दौरान उन्‍होंने कहा वह राजीव गांधी के मुस्कराते हुए चेहरे को मिस कर रहे हैं. जयराम रमेश ने अपनी किताब में ल‍िखा है, 'मनमोहन स‍िंह ने पूरे भाषण के दौरान उस परिवार का बार-बार नाम लिया जिसकी नीतियों और विचारधारा को वो बजट के जर‍िये एक तरफ से पलट रहे थे.' मनमोहन सिंह ने अपने बजट भाषण में खाद पर दी जाने वाली सब्सिडी को 40 प्रत‍िशत कम कर द‍िया. इसके अलावा चीनी और एलपीजी सिलेंडर के दाम में इजाफा कर द‍िया.
 


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