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चीफ जस्टिस का कार्यकाल हुआ खत्म, इन ऐतिहासिक फैसले के लिए याद रखे जाएंगे DY Chandrachud

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल को ऐतिहासिक फैसलों के लिए जाना जाएगा, उन्होंने कई अहम फैसले दिए या कई मामलों में वह बेंच का हिस्सा रहे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में दो साल का कार्यकाल पूरा करने वावे जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का शुक्रवार को अंतिम कार्य दिवस था. वे रविवार, 10 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे और उनकी जगह अब जस्टिस संजीव खन्ना अगले चीफ जस्टिस होंगे. जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिन संविधान पीठ की अध्यक्षता करते हुए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने के मामले में एक अहम फैसला सुनाया. यह फैसला 4:3 के बहुमत से दिया गया. सीजेआई के रूप में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए. यहां इनमें से कुछ प्रमुख फैसलों पर एक नजर:

1. अनुच्छेद 370 को हटाना वैध

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने सर्वसम्मति से जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाए के केंद्र सरकार के फैसले को वैध करार दिया था. इसे 2019 में भारत की संसद द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले को संवैधानिक तौर पर स्वीकृति के रूप में देखा गया था.

2. रद किया इलेक्टोरल बॉन्ड

सीजेआई की अध्यक्षता में पांच न्यायाधीशों की पीठ ने इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक बताते हुए रद कर दिया था. पीठ ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को चुनावी बॉन्ड जारी करने पर तुरंत रोक लगाने के साथ चुनाव आयोग (ईसीआई) को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर राजनीतिक बॉन्ड का विवरण प्रकाशित करने का भी आदेश दिया था.

3. जेलों में भेदभाव पर रोक

सीजेआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने भारत में जेलों के भीतर जाति-आधारित भेदभाव को असंवैधानिक करार देते हुए जेल मैनुअल को तुरंत संशोधित करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने माना था कि जाति-आधारित काम का आवंटन संविधान का उल्लंघन है.

4. बाल विवाह के मामले पर दिशा-निर्देश

देश में बाल विवाह में वृद्धि का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए सीजेआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कई निर्देश जारी किए थे.

5. नागरिकता कानून की धारा 6ए वैध करार दी गई

सीजेआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने 4-1 के बहुमत के फैसले में नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6ए की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था. धारा 6ए, बांग्लादेश से असम आए प्रवासियों की नागरिकता से जुड़ी है.

6. दोबारा नीट-यूजी परीक्षा की अनुमति से इन्कार

सीजेआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने ने नीट-यूजी 2024 परीक्षा को रद करने या दोबारा कराने से इन्कार कर दिया था. सीजेआई ने कहा था कि ऐसी कोई सामग्री नहीं है, जिसके आधार पर ये निष्कर्ष निकाला जा सके कि परीक्षा के रिजल्ट में गड़बड़ी हुई है, या व्यवस्था फेल हो गई है.

7. अडानी-हिंडनबर्ग विवाद

सीजेआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने अडानी-हिंडनबर्ग विवाद में जांच के लिए कोई एसआईटी या विशेषज्ञों का समूह बनाने से इन्कार कर दिया था. पीठ ने कहा था कि किसी तीसरे पक्ष के संगठनों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट को निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता है.

8. मणिपुर यौन उत्पीड़न मामला

मणिपुर महिला यौन हिंसा से जुड़े वीडियो के प्रसारित होने के बाद सीजेआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए तीन महिला न्यायाधीशों वाली एक समिति का गठन किया था, जिसे महिलाओं के खिलाफ हिंसा से संबंधित जानकारी एकत्र करने का काम सौंपा गया था.

9. सांसदों-विधायकों के खिलाफ मामले

सीजेआई चंद्रचूड़ ने देश के सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को निर्देश दिया था कि वे सांसदों और विधायकों के लिए खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के तेज निस्तारण की निगरानी के लिए स्वत: संज्ञान मामले दर्ज करें.

10. समलैंगिक विवाह

जस्टिस चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने अक्टूबर 2023 में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया था. कहा गया था कि कानून द्वारा मान्यता प्राप्त विवाहों को छोड़कर विवाह करने का "कोई अयोग्य अधिकार" नहीं है.

11. यूपी का मदरसा कानून

इस महीने की शुरुआत में सीजेआई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने उत्तर प्रदेश में मदरसों के कामकाज को रेगुलेट करने वाले 2004 के कानून की वैधता को बरकरार रखा और इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें इस कानून को असंवैधानिक और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करने वाला घोषित किया गया था.
 


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