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दुनियाभर में फेल, भारत में सफल हुए 10 मिनट में सामान पहुंचाने वाले क्विक प्लेटफॉर्म, जानिए इसकी वजह?

भारत का क्विक कॉमर्स मार्केट पिछले साल ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) के मामले में सालाना आधार पर 77 प्रतिशत बढ़कर 2.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारत में क्विक कॉमर्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. खासकर युवाओं के बीच ये काफी लोकप्रिय है, वे अपनी जरूरत के हर छोटे-बड़े सामान के लिए इन्हीं पर निर्भर हो रहे हैं. आपको ये जानकर हैरानी होगी कि क्विक कॉमर्स दुनिया के बाकी देशों में ज्यादा सफल नहीं रहा, लेकिन भारत में ये कारोबार खूब तेजी से बढ़ रहा है. आप जानते हैं ऐसा क्यों है? अगर नहीं, तो चलिए आज आपको इसकी वजह बताते हैं.

घर बैठे आसानी से मिलता है जरूरत का सामान

मान लीजिए आपका ऑफिस जाने से पहले ब्रेड के साथ चाय पीने का मन है. किचन पहुंचे, तो देखा कि चायपत्ती और ब्रेड दोनों खत्म हैं, तो आपने फोन निकाला और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर प्लेस करके दूसरे कामों में लग गए और थोड़ी देर में ही आपका ऑर्डर दरवाजे पर पहुंच जाएगा. आधे घंटे के अंदर ही ये आपके पास सामान पहुंचा देते हैं. इस सर्विस ने शहरी डिजिटल उपभोक्ताओं के बीच अपनी गहरी पैठ बना ली है, उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है. एक रिपोर्ट के अनुसार भारत का क्विक कॉमर्स मार्केट पिछले साल ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) के मामले में सालाना आधार पर 77 प्रतिशत बढ़कर 2.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.

भारत में इन कारणों से सफल हो रहे क्विक कॉमर्स
1. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में जनसंख्या काफी अधिक है. साथ ही, गली-गली में किराना स्टोरों की भी भरमार है. ऐसे में ब्लिंकइट और जेप्टो जैसी कंपनियों को काफी कम लागत में अपनी सेवाएं उपलब्ध कराने का मौका मिल जाता है.
2. युवा पीढ़ी (GenZ) हर रोज अपने जरूरत का सामान ऑनलाइन मंगा रही है. शुरुआत में ये प्लेटफॉर्म सिर्फ किराने का सामान डिलीवर करते थे. लेकिन, जल्द ही अपना दायरा सभी सेगमेंट तक फैला लिया. इसमें आटा-दाल से लेकर सब्जियां और साबुन-शैंपू के साथ शेविंग प्रोडक्ट्स तक शामिल हैं.
3. ग्राहक को क्विक कॉमर्स में कई बार मार्केट रेट से कम कीमत पर सामान मिल जाता है. मार्केट जाना भी नहीं पड़ता, समय की भी बचत हो जाती है.

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ये हैं क्विक कॉमर्स की बड़ी कंपनियां
भारत में क्विक कॉमर्स की 3 बड़ी कंपनियां हैं, जिनमें जोमैटो का ब्लिंकइट, स्विगी का इंस्टामार्ट और जेप्टो शामिल हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार क्विक ग्रॉसरी कॉमर्स दुनिया के अन्य देशों में सफल नहीं हो पाए, लेकिन भारत में वे कामयाबी की नई ऊंचाईयां हासिल कर रहे हैं. हालांकि, पाकिस्तान में क्विक कॉमर्स कुछ हद तक सफल रहा, वहां किराने के सामान की इंस्टैंट डिलीवरी करने वाला एयरलिफ्ट एक्सप्रेस देश का पहला यूनिकॉर्न बनने की कगार पर भी था, लेकिन वह भी जल्द ही बर्बाद हो गया.

डार्क स्टोर बढ़ा रहीं कंपनियां

क्विक कॉमर्स कंपनियां अपने डार्क स्टोर की संख्या लगातार बढ़ा रही हैं. डार्क स्टोर कंपनियों के गोदाम की तरह होते हैं. यहां कंपनियां अपने प्रोडक्ट को स्टोर करती हैं, लेकिन आप यहां सीधे जाकर खरीदारी नहीं कर सकते. आपको ऑनलाइन ही ऑर्डर प्लेस करना होगा. कंपनी सामान डिलीवरी आपके बताए पते पर करती है. आपको बता दें, भारत में स्विगी इंस्टामार्ट के 500, ब्लिंकइट के 450 और  जेप्टो के 340 स्टोर्स हैं.


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