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ब्रिटिश काल के दौरान फैले भ्रष्टाचार और पितृसत्ता को उजागर करता मगही उपन्यास: फूल बहादुर

01 अप्रैल 1928 को प्रकाशित, यह प्रमुख कॉमिक मगही उपन्यास हाल ही में कवि और राजनयिक अभय के द्वारा अंग्रेजी में अनुवादित किया गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

काफी समय से समलाल के मन में राय बहादुर बनने का सपना पल रहा था. हालांकि वह भली-भांति जानता था कि वह इस पद के योग्य नहीं है, फिर भी उसे अपने चापलूसी की कला पर पूरा विश्वास था. यह उद्धरण मगही साहित्य के रत्न ‘फूल बहादुर’ (Fool Bahadur) से है, जो मूल रूप से भारतीय लेखक जयनाथ पति द्वारा मगही भाषा में लिखा गया है. यह उपन्यास ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बिहार शरीफ के शहरी जीवन पर एक व्यंग्य है, जो कानून और नौकरशाही में कार्यरत लोगों की मूर्खतापूर्ण आकांक्षाओं और जीवन को दर्शाता है.

नौकरशाही और न्यायपालिका में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करता उपन्यास

कहानी का केंद्र है मुख्य पात्र मुख्तार बाबू समलाल की महत्वाकांक्षाएं और उनका वह सफर, जिसमें वह तत्कालीन चर्चित 'राय बहादुर' का खिताब प्राप्त करने की कोशिश करता है. उपन्यास में अन्य महत्वपूर्ण पात्रों में एक नवाब, एक सर्कल अधिकारी और एक दरबारी महिला हैं. लेखक ने अपनी सजीव और हास्यपूर्ण लेखनी से एक छोटे और बेईमान मुख्तार के जीवन को पेश किया है, जो किसी भी हाल में यह खिताब हासिल करना चाहता है. कहानी उस समय की नौकरशाही और न्यायपालिका में व्याप्त व्यापक भ्रष्टाचार को उजागर करती है, जैसा कि नवाब के शब्दों से स्पष्ट होता है: "मैं वादा करता हूं कि तुम्हें राय बहादुर बना दूंगा, और अगर ऐसा नहीं हुआ, तो मैं अपने हाथ काट लूंगा. इसके बदले, तुम्हें मेरी मदद करनी होगी." यह दिलचस्प है कि लेखक ने यह सुनिश्चित किया कि अंत हास्यपूर्ण और मनोरंजक हो, जबकि यह जीवन के पूर्ण चक्र को दर्शाते हुए एक शिक्षा भी दे कि आखिरकार न्याय मिलता है.

उपन्यास में वर्णित भ्रष्टाचार और पितृसत्ता आज भी प्रासंगिक

यह उपन्यास 01 अप्रैल 1928 को पहली बार प्रकाशित हुआ था और हाल ही में इसे कवि और राजनयिक अभय के द्वारा अंग्रेजी में अनुवादित किया गया. यह पहला मगही उपन्यास है जो अंग्रेजी में अनुवादित हुआ है, और अब पेंगुइन मॉडर्न क्लासिक के रूप में प्रकाशित होने के बाद, यह साहित्य के इस अमूल्य खजाने को नए जीवन के साथ एक बड़ी दर्शक वर्ग तक पहुंचाएगा. लेखक के ही गृह राज्य से आने वाले, उनकी मातृभाषा में रुचि रखने वाले और एक नौकरशाह के रूप में अभय का इस विशिष्ट क्लासिक में गहरी रुचि होना स्वाभाविक है. उपन्यास में ब्रिटिश राज काल में एक युवा वकील की सामाजिक ऊँचाइयों को छूने की दौड़, वही आज के समय की तरह ही है. उपन्यास में वर्णित न्यायिक और नौकरशाही भ्रष्टाचार और पितृसत्ता आज भी प्रासंगिक है, जिससे यह जयनाथ पति द्वारा लिखा गया व्यंग्य आज भी हमारे समाज में असर डालता है. उस समय की पितृसत्ता का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि जब फूल बहादुर का पहला संस्करण प्रकाशित हुआ था, तो उपन्यास के कवर पेज पर "महिलाओं और बच्चों के लिए नहीं" लिखा था. हालांकि हम इस मामले में काफी आगे बढ़ चुके हैं, फिर भी समाज के हर स्तर पर भ्रष्टाचार को रोकने में अभी लंबा रास्ता तय करना है.

राजा अशोक के दरबार की आधिकारिक भाषा थी मगही

इस किताब का एक और दिलचस्प हिस्सा है उसका विस्तृत अनुवादक नोट, जो उपन्यास की प्रस्तावना के रूप में दिया गया है. यह नोट पाठकों को मगही साहित्य के महान इतिहास और उत्पत्ति के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है. यह भी बताता है कि कैसे अनुवादक को जून 2020 के बाद ही मगही साहित्य के अस्तित्व का पता चला, जो अब तक उनके लिए अज्ञात था. यह घटना उस समय की है जब उन्होंने अपनी मातृभाषा से जुड़ने के प्रयास में एक कविता लिखी थी, जिसके बाद लोगों ने उन्हें मगही साहित्य के उस खजाने के बारे में बताया जो अब तक अनुवादित और खोजा नहीं गया था. यह माना जाता है कि बुद्ध और महावीर ने मगधी प्राकृत में अपने उपदेश दिए थे, जो बाद में मगही भाषा का रूप बन गई. इसके अलावा, मगही राजा अशोक के दरबार की आधिकारिक भाषा भी थी. इस समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई धरोहर का हिस्सा होना वाकई गर्व की बात है और इसे दुनिया के सामने लाने का श्रेय अभय के ही पास है, जिन्होंने सबसे पहले मगही उपन्यास का अंग्रेजी अनुवाद प्रस्तुत किया.

लेखक का परिचय

अभय एक राजनयिक कवि, अनुवादक और मुस्कुराते हुए संपादक हैं और उन्होंने कई काव्य संग्रह लिखे हैं. उनकी कविताएं एशिया लिटरेरी रिव्यू और पोएट्री साल्जबर्ग रिव्यू जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं. उन्हें 2020-21 में कालिदास की ऋतु संहार और मेघदूत के अनुवादों के लिए केएलएफ पोएट्री बुक ऑफ द ईयर पुरस्कार भी मिला. उन्हें 2013 में साउथ एशियन आर्ट्स एंड कल्चर के लिए साअर्क साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया और उनकी कविताएं वॉशिंगटन डीसी स्थित लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस में रिकॉर्ड की गईं. इस योग्यता और मातृभाषा के साहित्य को दुनिया के मानचित्र पर लाने की इच्छा के साथ, हम उम्मीद कर सकते हैं, कि वह दिन दूर नहीं जब मगही को अपनी उचित पहचान मिलेगी और साहित्य का यह अमूल्य खजाना सभी के लिए सुलभ होगा. अभय के शब्दों में यह भावना स्पष्ट रूप से व्यक्त होती है, जब वह अनुवादक नोट में लिखते हैं: "मुझे आशा है कि फूल बहादुर का अंग्रेजी अनुवाद प्रकाशित होने से मागही साहित्य की समृद्ध दुनिया पर अधिक ध्यान दिया जाएगा और आने वाले वर्षों में मागही साहित्य के और भी काव्य कार्यों का अनुवाद किया जाएगा."


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