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FICCI ने रोबोटिक सर्जरी की समान पहुंच के लिए रिइम्बर्समेंट नीति में सुधार की मांग की

गोलमेज बैठक में विशेषज्ञों ने भारत में समान रोबोटिक-सहायक सर्जरी पहुंच का समर्थन करने के लिए तार्किक पुनर्भुगतान मॉडल, क्लिनीकल आउटकम ट्रैकिंग और राष्ट्रीय नीति कार्रवाई का आग्रह किया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत में रोबोटिक-सहायता प्राप्त सर्जरी (Robotic-Assisted Surgery - RAS) को सुलभ और टिकाऊ बनाने के लिए रिइम्बर्समेंट नीतियों (Reimbursement Reform) में व्यापक सुधार की आवश्यकता है. इस पर जोर देते हुए फिक्की (FICCI) ने एक उच्च स्तरीय गोलमेज बैठक का आयोजन किया. "Navigating Reimbursement for Robotic-Assisted Surgeries: Challenges, Insights & Strategic Guidance for Industry" शीर्षक से आयोजित इस बैठक में बीमा, स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा प्रौद्योगिकी और नीति निर्माण से जुड़े प्रमुख विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया. यह कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित फिक्की हाउस में संपन्न हुआ.

बैठक में यह सराहा गया कि भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) द्वारा रोबोटिक सर्जरी को Modern Treatment Methods की सूची में शामिल किया गया है, लेकिन विशेषज्ञों ने चेताया कि बीमा योजनाओं में उप-सीमाएं (sub-limits) अभी भी मरीजों की पहुंच में बड़ी बाधा बनी हुई हैं. चर्चा में यह सामने आया कि रिइम्बर्समेंट संरचना को रोबोटिक प्रक्रियाओं के क्लिनिकल परिणाम और आर्थिक लाभों के अनुरूप बनाना बेहद आवश्यक है.

"कुछ चुनिंदा प्रक्रियाएं ऐसी हैं जहां रोबोटिक सर्जरी स्पष्ट रूप से बेहतर क्लिनिकल और आर्थिक मूल्य प्रदान करती है," जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के हेल्थ डायरेक्टर सागर संपतकुमार ने कहा. उन्होंने बीमाकर्ताओं से ठोस साक्ष्यों के आधार पर रिइम्बर्समेंट नीतियों को आगे बढ़ाने की अपील की.

अन्य विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि सरकारी अस्पतालों में पायलट प्रोग्राम शुरू किए जाएं ताकि उपचार के परिणामों और लागत-प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके. राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (NHSRC) के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशासन प्रमुख डॉ. के मदन गोपाल ने कहा कि प्रशिक्षण, साक्ष्य-आधारित प्रक्रिया चयन और परिणामों की निगरानी रोबोटिक सर्जरी को सुरक्षित और न्यायसंगत तरीके से अपनाने के लिए जरूरी हैं.

बैठक से उभरकर आईं प्रमुख सिफारिशें:

- रोबोटिक सर्जरी के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्री का निर्माण, ताकि क्लिनिकल परिणामों की निगरानी हो सके.
- सरकारी और निजी बीमाकर्ताओं के साथ मिलकर पायलट रिइम्बर्समेंट मॉडल्स की शुरुआत.
- बहु-एजेंसी टास्क फोर्स का गठन, जो नीति, मूल्य निर्धारण और को-पेमेंट ढांचे को दिशा दे.
- मरीजों के लिए शिक्षा और पारदर्शी उपचार विकल्प सुनिश्चित करना.

“मरीजों को उन्नत विकल्प जैसे कि रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट को पारंपरिक तरीकों की तुलना में चुनने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए,” डॉ. रवि गौर, संस्थापक, डीआरजी पाथ लैब्स ने कहा, “FICCI को एक ऐसा मार्गदर्शक दस्तावेज तैयार करना चाहिए जो सभी हितधारक समूहों के बीच मानकीकरण, जागरूकता और रिइम्बर्समेंट की स्पष्टता का समर्थन करे.”

FICCI ने इन सिफारिशों को शामिल करते हुए एक समग्र रिइम्बर्समेंट मार्गदर्शन दस्तावेज़ विकसित करने की योजना की पुष्टि की है. यह दस्तावेज स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, IRDAI और नीति आयोग को नीति विचार हेतु प्रस्तुत किया जाएगा.

गोलमेज बैठक में यह निष्कर्ष निकला कि रिइम्बर्समेंट अब केवल उपचार के बाद की औपचारिकता नहीं रह गई है, बल्कि यह भारत की तेजी से विकसित हो रही सर्जिकल देखभाल प्रणाली में गुणवत्ता, समानता और नवाचार सुनिश्चित करने की एक पूर्वशर्त बन चुकी है.

 


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