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शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा: जब पर्दे पर उतरी रियल हीरो की कहानी

कारगिल युद्ध के हीरो कैप्टन विक्रम बत्रा का नाम इतिहास में अमर हो गया है. उन्होंने देश पर खुद को कुर्बान करते हुए पाकिस्तानियों के कब्जे से दो महत्वपूर्ण चोटियों को आजाद कराया था.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

कारगिल युद्ध के हीरो कैप्टन विक्रम बत्रा का नाम इतिहास में अमर हो गया है. उन्होंने देश पर खुद को कुर्बान करते हुए पाकिस्तानियों के कब्जे से दो महत्वपूर्ण चोटियों को आजाद कराया था. आज से ठीक 23 साल पहले यानी 7 जुलाई 1999 को वह शहीद हुए थे.

पिछले साल आई थी 'शेरशाह' 
कैप्टन विक्रम बत्रा को 'शेरशाह' नाम से भी जाना जाता था और इसी नाम से पिछले साल उनके जीवन पर बनी फिल्म भी रिलीज़ हुई थी. कैप्टन बत्रा को असल जिंदगी में जितना प्यार मिला, उतना ही प्यार उन पर बनी फिल्म को भी मिला. 55 करोड़ के बजट में बनी फिल्म ने आसानी से अपनी लागत निकालने हुए अच्छा कलेक्शन किया था. हालांकि, ये फिल्म सिनेमाघरों के बजाए OTT प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ हुई थी. 

रणभूमि में मिला प्रमोशन
कैप्टन विक्रम बत्रा बचपन से ही सेना में जाना चाहते थे और उन्होंने अपने इस सपने को 1996 में इंडियन मिलिटरी अकादमी में दाखिले के साथ सच कर दिखाया. 6 दिसंबर 1997 को कैप्टन बत्रा जम्मू और कश्मीर राइफल्स की 13वीं बटालियन में बतौर लेफ्टिनेंट शामिल हुए. जून 1999 को उनकी टुकड़ी को कारगिल युद्ध में भेजा गया. हम्प व राकीनाब को जीतने के बाद रणभूमि में ही विक्रम बत्रा को प्रमोट कर कैप्टन बनाया गया. इसके बाद श्रीनगर-लेह मार्ग के ठीक ऊपर सबसे महत्वपूर्ण 5140 चोटी को पाक सेना से मुक्त करवाने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई.  

ये दिल मांगे मोर
ये मिशन बेहद कठिन था, क्योंकि दुश्मन ऊपर छोटी पर जमा था और उसके लिए भारतीय सैनिकों को निशाना बनाना आसान था. इसके बावजूद कैप्टन बत्रा अपने साथियों के साथ आगे बढ़े और 20 जून 1999 को अलसुबह साढ़े तीन बजे ही इस चोटी को अपने कब्जे में ले लिया. इस मिशन के लिए बत्रा का जीत का मंत्र था, ‘ये दिल मांगे मोर’.

देश ने खो दिया सच्चा सपूत
इसके बाद भारतीय सेना ने 7 जुलाई 1999 को, प्वाइंट 4875 चोटी को कब्ज़े में लेने के लिए अभियान शुरू किया. इसकी जिम्मेदारी भी कैप्टन बत्रा और उनकी टुकड़ी को सौंपी गई. युद्ध के दौरान आमने-सामने की भीषण लड़ाई में कैप्टन विक्रम बत्रा ने पांच दुश्‍मन सैनिकों को मार गिराया. हालांकि, इस दौरान वह खुद भी दुश्मन के निशाने पर आ गए और भारत ने अपने एक सच्चे सपूत को खो दिया. कैप्टन बत्रा के साहस की बदौलत ही यह चोटी भारत को वापस मिली थी.

...तो कुछ और होता नजारा
कैप्टन बत्रा के साहस और बलिदान के बारे में लोगों को बताने के लिए 2021 में फिल्म ‘शेरशाह’ रिलीज़ की गई. इस फिल्म में कैप्टन विक्रम बत्रा की भूमिका सिद्धार्थ मल्होत्रा ने निभाई. अमेज़न प्राइम पर रिलीज़ हुई इस फिल्म को लोगों का भरपूर प्यार मिला. ट्रेंड एनालिस्ट और फिल्म क्रिटिक ट्रेंड एनालिस्ट और फिल्म क्रिटिक तरन आदर्श ने उस वक्त कहा था कि ‘शेरशाह’ को सिनेमा घरों में रिलीज किया जाता तो लोगों की तरफ से मिले जबरदस्त रिस्पोंस को देखते हुए ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 125 से 150 करोड़ की कमाई काफी ज्यादा आसानी से कर लेती.    


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