इस फैसले के बाद एक व्यापक बिल लाया जाएगा जिससे पूरे देश में लोकसभा, विधानसभा, शहरी निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराने का रास्ता साफ होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है. सूत्रों के मुताबिक इस बिल को मौजूदा शीतकालीन सत्र के दौरान ही संसद में पेश किया जा सकता है. इस बिल को लेकर सभी राजनीतिक दलों के सुझाव लिए जाएंगे. बाद में इसे संसद से पास कराया जाएगा. इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमिटी ने एक देश एक चुनाव से जुड़ी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी.
लोकसभा और विधानसभा के चुनाव होंगे एक साथ
‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के तहत लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए जाएंगे. रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमिटी की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि पहले कदम में लोकसभा और राज्यसभा चुनाव को एक साथ कराना चाहिए. कमेटी ने सिफारिश की है कि लोकसभा और राज्यसभा के चुनाव एक साथ संपन्न होने के 100 दिन के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव हो जाने चाहिए.
क्या है ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ का कॉन्सेप्ट?
दरअसल पीएम मोदी लंबे समय से ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ की वकालत करते आए हैं. उन्होंने कहा था कि चुनाव सिर्फ तीन या चार महीने के लिए होने चाहिए, पूरे 5 साल राजनीति नहीं होनी चाहिए. साथ ही चुनावों में खर्च कम हो और प्रशासनिक मशीनरी पर बोझ न बढ़े. ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ का मतलब है कि भारत में लोकसभा और सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं.
क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ से चुनावी खर्च में कमी आएगी, सार्वजनिक कल्याण योजनाओं में रुकावट कम होगी और देश में विकास कार्य तेजी से हो सकेंगे. इस पहल को लेकर सरकार अब विपक्ष और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा करेगी.
• ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ से जनता को बार-बार के चुनाव से मुक्ति मिलेगी.
• हर बार चुनाव कराने पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, जो कि कम हो सकते हैं.
• यह कॉन्सेप्ट देश में राजनीतिक स्थिरता लाने में अहम रोल निभा सकता है.
• इलेक्शन की वजह से बार बार नीतियों में बदलाव की चुनौती कम होगी.
• सरकारें बार-बार चुनावी मोड में जाने की बजाय विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगी.
• प्रशासन को भी इसका फायदा मिलेगा, गवर्नेंस पर जोर बढ़ेगा.
• पॉलिसी पैरालिसिस जैसी स्थिति से छुटकारा मिलेगा, अधिकारियों का समय और एनर्जी बचेगी.
• सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा और आर्थिक विकास में तेजी आएगी.
पहले भी एक साथ हो चुके हैं चुनाव
‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ भारत के लिए कोई नया कॉन्सेप्ट नहीं है. देश में आजादी के बाद से 1967 तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही कराए थे. 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हुए थे, लेकिन राज्यों के पुनर्गठन और अन्य कारणों से चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे.
6 विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण कर ली है. उनके मंत्रिपरिषद में प्रवेश सिंह, आशीष सूद, मनजिंदर सिंह सिरसा, रविंद्र इंद्राज सिंह और डॉ. पंकज सिंह शामिल हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जबरदस्त जीत के बाद आखिरकार दिल्ली को आज नया मुख्यमंत्री मिल गया है. रामलीला मैदान में आयोजित भव्य शपथग्रहण समारोह में शालीमार बाग से पहली बार विधायक चुनी गई रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उनके साथ दिल्ली के 6 विधायकों ने भी गुरुवार रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मंत्री पद की शपथ ली. इस शपथ ग्रहण समारोह में गृह मंत्री अमित शाह समेत बीजेपी शासित राज्यों के अधिकांश मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे.
दिल्ली में बीजेपी की चौथी सीएम बनीं रेखा गुप्ता
वह मदन लाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज के बाद दिल्ली में बीजेपी की चौथी मुख्यमंत्री हैं. शपथ ग्रहण के बाद वह वर्तमान में बीजेपी शासित किसी भी राज्य में एकमात्र महिला मुख्यमंत्री बन गई हैं. उपराज्यपाल के शपथ दिलाने के बाद रेखा गुप्ता दिल्ली की नौवीं मुख्यमंत्री बन गई हैं. हरियाणा के जुलाना में जन्मी गुप्ता दिल्ली यूनिवर्सिटी के दौलत राम कॉलेज से बीकॉम हैं. बाद में उन्होंने मेरठ के चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री हासिल की, फिर उन्होंने एक वकील के रूप में भी काम किया.
आरएसएस से पिछले 32 साल से जुड़ीं रेखा गुप्ता ने 1992 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के दौलतराम कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी. वह 1995-96 में दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ की सचिव बनी थीं, इसके बाद 1996-97 में वह डूसू अध्यक्ष चुनी गईं.
6 मंत्रियों ने भी ली शपथ
प्रवेश वर्मा- 2 बार के विधायक हैं, 2 बार सांसद रह चुके हैं राजनीति विरासत में मिली है, दिल्ली के पूर्व सीएम साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं. 2013 में महरौली विधानसभा सीट से विधायक बने 2014 और 2019 में 2 बार पश्चिमी दिल्ली के सांसद बने. 2024 में टिकट नही मिला लेकिन विधानसभा चुनाव में दूसरी बार विधायक बने केजरीवाल को चुनाव में हरा कर चर्चा में हैं.
आशीष सूद- एक बार के विधायक हैं, दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष रहे दिल्ली बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिव रहे दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के पार्षद और नेता सदन रह चुके हैं. गोवा में बीजेपी के प्रभारी हैं. जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के सह-प्रभारी हैं.
मनजिंदर सिंह सिरसा- बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव सिरसा 3 बार विधायक दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष रहे हैं. 1 दिसंबर 2021 को अकाली दल से बीजेपी में आए और 2025 में बीजेपी के टिकट पर विधायक बने. अगस्त 2023 से बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव हैं. पीएम मोदी के करीबी माने जाते हैं. सिख समाज के हर कार्यक्रम में पीएम मोदी के आस पास दिखते हैं.
रविंद्र सिंह- दलित नेता पहली बार बवाना सीट से विधायक बने है. दिल्ली के 16 फीसदी दलितों पर नजर 2020 में भी लड़े थे लेकिन हार गए थे. 50 साल के हैं. आप के जय भगवान को 31 हजार से ज्यादा वोटों से हराया बीजेपी एससी मोर्चे की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं.
कपिल मिश्रा- ब्राह्मण और पूर्वांचली करावल नगर से 2 बार के विधायक हैं. बीजेपी की नजर 30% पूर्वांचली और 13% ब्राह्मणों पर है. दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, दिल्ली बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं राजनीति विरासत में मिली है. पूर्वी दिल्ली नगर निगम की पूर्व मेयर अन्नपूर्णा मिश्रा के बेटे हैं.
पंकज कुमार सिंह- पूर्वांचली राजपूत पहली बार विकासपुरी से विधायक बने हैं, एमसीडी के 2 बार पार्षद रह चुके हैं दिल्ली बीजेपी पूर्वांचल मोर्चा के महासचिव हैं 4 बार पार्षद का चुनाव लड़ चुके हैं, मूल रुप से बिहार के रहने वाले हैं.
दिल्ली (Delhi) फतह के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य के मुख्यमंत्री का पद रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) को सौंप दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दिल्ली में मुख्यमंत्री पद को लेकर आखिरकार सस्पेंस खत्म हो गया है. भारतीय जनता पार्टी ने इस बार दिल्ली में महिला मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है. पार्टी ने महिला विधायक रेखा गुप्ता के नाम पर मुहर लगाई है और उन्हें दिल्ली का नया मुख्यमंत्री नियुक्त किया है. वह 20 फरवरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी. रेखा गुप्ता के अनुभव और संगठन में मजबूत पकड़ को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है. रेखा गुप्ता ने हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में शालीमार बाग सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रत्याशी को करीब 30 हजार वोटों से हराया था.
कौन हैं रेखा गुप्ता?
हरियाणा के जींद की मूल निवासी गुप्ता छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रही हैं. 50 वर्षीय रेखा गुप्ता ने मेरठ से कानून की पढ़ाई की है. उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी से पुराना नाता रहा है. उत्तरी दिल्ली की मेयर रह चुकी गुप्ता के पास प्रशासनिक अनुभव है. वह बीजेपी की महिला मोर्चा की प्रभावशाली नेता रही हैं, वह वर्तमान में दिल्ली भाजपा महिला मोर्चा की महासचिव और पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य हैं.
रेखा गुप्ता ने 1992 में दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज से पढ़ाई के दौरान ही छात्र राजनीति में कदम रखा. वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़ी रहीं. 1996-97 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) की अध्यक्ष बनीं. साल 2007 में उत्तरी पीतमपुरा से पार्षद चुने जाने के बाद, उन्होंने क्षेत्र में पुस्तकालय, पार्क और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाओं के विकास पर काम किया.
29 हजार वोटों से मिली थी जीत
रेखा गुप्ता ने इस बार हुए विधानसभा चुनाव में 29 हजार 595 वोट से जीत हासिल की थी. रेखा गुप्ता को 68 हजार 200 मिले थे. उन्होंने आम आदमी पार्टी की महिला उम्मीदवार बंदना कुमारी को हराया था. यहां से कांग्रेस उम्मीदवार प्रवीण कुमार जैन तीसरे स्थान पर रहे थे. 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में, आम आदमी पार्टी की बंदना कुमारी को ही इस सीट से जीत मिली थी. इससे पहले भी 2015 में बंदना कुमारी ने ही इसी सीट पर जीत दर्ज की थी. रेखा गुप्ता एबीवीपी से जुड़ी रही हैं, उन्होंने डीयू छात्र संघ चुनाव में महासचिव पद पर जीत हासिल की थी.
2015 और 2020 में लगा था झटका
2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में, आम आदमी पार्टी की बंदना कुमारी ने बीजेपी की रेखा गुप्ता को हराया था. बंदना कुमारी को तब 57,707 वोट मिले, जबकि रेखा गुप्ता को 54,267 वोट मिले. कांग्रेस पार्टी के जेएस नायोल को 2,491 वोट हासिल किए थे. इससे पहले, 2015 में भी रेखा गुप्ता को इस सीट पर हार मिली थी. उन्हें आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार बंदना कुमारी ने 62,656 वोट हासिल कर हराया था. उस समय कांग्रेस के सुलेख अग्रवाल को 3,200 वोट मिले थे.
दिल्ली के सियासी दंगल में भाजपा ने आम आदमी पार्टी को पछाड़ दिया है. आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल और सिसोदिया सहित कई दिग्गज चुनाव हार गए.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. भाजपा ने आम आदमी पार्टी (AAP) को चुनाव में हरा दिया है और पूरे 27 साल बाद राजधानी की सत्ता में कमल खिलाया है. वहीं, आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित कई कद्दावर नेता तक चुनाव हार गए हैं. पीएम मोदी ने इसे विकास और सुशासन की जीत करार दिया है, जबकि अरविंद केजरीवाल ने भी सामने आकर जनता को संबोधित करते हुए अपनी हार स्वीकार कर ली है.
बहुमत का आंकड़ा पार गई भाजपा
चुनाव के रुझानों में भाजपा ने शुरू से ही अपनी बढ़त बनाए रखी और अंत तक यह बढ़त कायम रखी. अब तक के परिणामों के अनुसार, भाजपा ने 70 सीटों में से 48 पर बढ़त बनाई है और कई सीटों पर पार्टी पहले ही जीत चुकी है. इसके विपरीत, आम आदमी पार्टी (AAP) को केवल 22 सीटों पर आगे रहने या जीतने का अवसर मिला है, जिससे इस चुनाव में भाजपा की जीत पूरी तरह से स्पष्ट हो गई. दिल्ली के रुझानों पर भाजपा खेमे में खुशी की लहर है. शाम 7.30 बजे पीएम मोदी भाजपा मुख्यालय पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे.
3182 वोटों के अंतर से केजरीवाल की हार
इस जीत का सबसे बड़ा झटका आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं को लगा है. नई दिल्ली सीट से अरविंद केजरीवाल भी चुनाव हार गए हैं. केजरीवाल 3182 वोटों के अंतर से प्रवेश वर्मा से चुनाव हार गए. इसके अलावा, मनीष सिसोदिया भी अपनी जंगपुरा सीट से हार गए.
कालका जी से मुख्यमंत्री आतिशी जीतीं
दिल्ली में भाजपा के प्रत्याशियों ने आप के कई महारथियों धूल चटा दी है. अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज, सोमनाथ भारती, अवध ओझा सहित कद्दावर नेता हार गए. हालांकि कालकाजी सीट पर लगातार पिछड़ने के बाद भी आतिशी चुनाव जीत गई. मालूम हो कि दिल्ली का पहला रुझान भाजपा के पक्ष में गया था. जिसके बाद भाजपा ने लगातार अपनी बढ़त बनाई रखी.
भाजपा कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर
दिल्ली के रुझानों के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है और पार्टी मुख्यालय पर विजय उत्सव का माहौल है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कहा कि दिल्ली की जनता ने विकास और सुशासन के पक्ष में वोट किया है. उन्होंने दिल्ली के विकास में भाजपा की प्रतिबद्धता की पुष्टि की और यह गारंटी दी कि दिल्ली के हर क्षेत्र में विकास को सुनिश्चित किया जाएगा. इस ऐतिहासिक जीत को भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जो 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में वापस लौटी है. पार्टी का कहना है कि इस जीत से साफ होता है कि दिल्ली के लोग अब भाजपा के साथ हैं और आने वाले समय में दिल्ली में अधिक समृद्धि और विकास देखा जाएगा.
मेट्रिज न्यूज कम्युनिकेशंस द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, 40% उत्तरदाताओं ने वर्तमान राज्य सरकार के प्रदर्शन को बहुत अच्छा बताया, जबकि 32% ने इसे खराब माना.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
कल यानी 8 फरवरी, 2025 को दिल्ली विधानसभा चुनाव का परिणाम आने वाला है. शुरुआत में आम आदमी पार्टी (AAP) को स्पष्ट बढ़त दिख रही थी, लेकिन मेट्रिज न्यूज कम्युनिकेशंस के एक ताजे सर्वे में भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक मजबूत चुनौती को दर्शा रही है, मोदी सरकार द्वारा घोषित टैक्स राहत ने चुनावी माहौल को नया मोड़ दिया है. आम आदमी पार्टी (आप) और भाजपा के बीच विकास वादों, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे अहम मुद्दों पर मुकाबला लगातार जोर पकड़ रहा है, जिससे चुनाव परिणामों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. मेट्रिज न्यूज कम्युनिकेशंस द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में मतदाता की मानसिकता में चौंकाने वाले बदलाव सामने आए हैं, जिनसे चुनावी परिदृश्य पर असर पड़ा है. तो आइए इस सर्वे पर एक नजर डालते हैं.
आयकर में छूट भाजपा के लिए गेम चेंजर कदम
मोदी सरकार द्वारा 12 लाख रुपये तक की आय पर आयकर छूट देने की घोषणा ने एक संभावित खेल-बदलने वाला कदम साबित हो सकता है. सर्वेक्षण के अनुसार, इस फैसले ने मतदाता की प्राथमिकताओं पर महत्वपूर्ण असर डाला है. जबकि पहले आप आगे थी, अब संशोधित कर स्लैब्स ने मतदाता की मानसिकता में बदलाव ला दिया है, जो चुनावी गतिशीलता को प्रभावित कर रहा है.
सर्वेक्षण में उत्तरदाताओं से महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता योजनाओं की विश्वसनीयता के बारे में पूछा गया. आप का वादा अब भी सबसे अधिक पसंद किया जा रहा है, हालांकि भाजपा पीछे नहीं है, जो एक मजबूत मुकाबले की ओर इशारा करता है. जबकि आप और भाजपा अभी भी कड़ी टक्कर में हैं, अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री के रूप में सबसे पसंदीदा उम्मीदवार बने हुए हैं. हालांकि, भ्रष्टाचार के आरोपों ने उनकी छवि को प्रभावित किया है. वर्तमान मुख्यमंत्री, अतिशी सिंह, को मजबूत जनसमर्थन नहीं मिल रहा है, और आप नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप पार्टी की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जैसा कि सर्वेक्षण में बताया गया.
दिल्ली के मतदाताओं के लिए प्रमुख मुद्दे बेरोज़गारी, महंगाई और भ्रष्टाचार हैं, जो जनता की चिंताओं में प्रमुख बने हुए हैं। सर्वेक्षण परिणामों से यह स्पष्ट होता है कि मतदाता विभाजित हैं, और हालिया बजट परिवर्तनों के कारण भाजपा को फायदा हुआ है. मेट्रिज न्यूज ने इसे 5 फरवरी के चुनावों से पहले अपना अंतिम ओपिनियन पोल घोषित किया है. वोटिंग समाप्त होने के बाद एक एक्जिट पोल का भी आयोजन किया जाएगा.
राज्य और केंद्रीय सरकार का प्रदर्शन: मिश्रित निर्णय
वर्तमान राज्य सरकार पर जनता की राय काफ़ी विभाजित है, जहां 40 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने सरकार के प्रदर्शन को 'बहुत अच्छा' बताया, वहीं 32 प्रतिशत ने इसे 'खराब' माना, जो असंतोष के उच्च स्तर को दर्शाता है. 21 प्रतिशत ने प्रशासन के काम को 'कुछ हद तक अच्छा' बताया, जबकि 7 प्रतिशत ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया. इसके विपरीत, नरेंद्र मोदी द्वारा नेतृत्व वाली केंद्रीय सरकार को अधिक सकारात्मक अनुमोदन रेटिंग मिल रही है। लगभग आधे उत्तरदाता (49 प्रतिशत) ने इसके प्रदर्शन को 'बहुत अच्छा' बताया, हालांकि 21 प्रतिशत ने असंतोष व्यक्त किया, जो केंद्र सरकार की शासन व्यवस्था के बारे में मिश्रित, लेकिन सामान्यतः सकारात्मक धारणा को दर्शाता है.
मुख्य चुनावी मुद्दे: बेरोजगारी मतदाताओं की चिंताओं में सबसे ऊपर
जब मतदाताओं से उनके वोट को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों के बारे में पूछा गया, तो बेरोज़गारी सबसे बड़ी चिंता के रूप में उभरी, जिसे 32 प्रतिशत मतदाताओं ने प्राथमिक मुद्दा माना, भ्रष्टाचार 18 प्रतिशत के साथ दूसरे नंबर पर था, जबकि बढ़ती कीमतों और महंगाई ने 10 प्रतिशत उत्तरदाताओं को परेशान किया. पर्यावरणीय मुद्दे जैसे प्रदूषण (7 प्रतिशत) और बुनियादी ढांचे की चिंताएँ जैसे सड़कें (6 प्रतिशत) भी प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं. दिलचस्प बात यह है कि पारंपरिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाने वाले मुद्दे—जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, अपराध, और महिलाओं की सुरक्षा—के बारे में केवल 1 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बात की, जो इस चुनाव चक्र में मतदाताओं की प्राथमिकताओं में बदलाव को दर्शाता है.
महिला-केन्द्रित योजनाएं : वोट प्रभावित करना या सिर्फ वादे?
महिलाओं को लक्षित योजनाएं इस चुनाव में एक प्रमुख बिंदु बन गई हैं. आप की 'महिला सम्मान योजना' को 28 प्रतिशत मतदाताओं के अनुसार महत्वपूर्ण प्रभाव डालने की उम्मीद है, जबकि 33 प्रतिशत का मानना है कि इसका कोई असर नहीं होगा. कांग्रेस की 'प्यारी दीदी' योजना, जो महिलाओं को प्रति माह 2,500 रुपये देने का वादा करती है, को संशय की नजर से देखा गया है. अधिकांश—59 प्रतिशत—इसे सिर्फ एक और चुनावी चाल मानते हैं, जबकि केवल 12 प्रतिशत इसे एक वास्तविक अच्छी पहल मानते हैं. इसके बावजूद, आप महिलाओं के कल्याण के संदर्भ में जनता की धारणा में हल्की बढ़त बनाए हुए है, क्योंकि 40 प्रतिशत का मानना है कि यह अपनी वादों को पूरा करेगा, जबकि भाजपा इसके बाद 38 प्रतिशत पर है.
नेतृत्व की प्राथमिकताएं: केजरीवाल बनाए रखते हैं बढ़त, लेकिन जांच का सामना कर रहे हैं
पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री पद के सबसे लोकप्रिय उम्मीदवार बने हुए हैं, जिनका समर्थन 46 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने किया. भाजपा के मनोज तिवारी 27 प्रतिशत पर हैं. हालांकि, केजरीवाल की बढ़त चुनौतियों के साथ आई है. आप नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोपों ने उनकी छवि को काफी प्रभावित किया है, और 45 प्रतिशत मतदाताओं का मानना है कि इन आरोपों ने उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर रूप से धूमिल किया है. जबकि 35 प्रतिशत इन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित मानते हैं, 33 प्रतिशत का मानना है कि ये आरोप सही हैं. वर्तमान मुख्यमंत्री अतिशी मर्लेना, इस बीच, जनसमर्थन के मामले में संघर्ष कर रही हैं। उनके प्रदर्शन को 37 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने 'ख़राब' बताया, जबकि केवल 23 प्रतिशत ने उनके कार्यकाल को 'बहुत अच्छा' माना.
आर्थिक उपाय: क्या टैक्स राहत से स्थिति बदलेगी?
इस चुनाव को प्रभावित करने वाली एक बड़ी घटना मोदी सरकार द्वारा 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर टैक्स में छूट की घोषणा है. इस नीति को एक संभावित गेम चेंजर के रूप में देखा जा रहा है, और 49 प्रतिशत मतदाता मानते हैं कि इसका चुनाव पर निर्णायक प्रभाव पड़ेगा। 65 प्रतिशत उत्तरदाता मानते हैं कि इसका सीधा लाभ भाजपा को होगा, जबकि केवल 13 प्रतिशत का मानना है कि आप को इसका फायदा होगा.
विकास के वादे: आप और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर
विकास के वादों के मामले में, आप को मामूली बढ़त प्राप्त है, क्योंकि 41 प्रतिशत मतदाता इसके योजनाओं को सबसे विश्वसनीय मानते हैं. भाजपा 39 प्रतिशत समर्थन के साथ नजदीक है, जो एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धात्मक माहौल को दर्शाता है. कांग्रेस, हालांकि, केवल 9 प्रतिशत समर्थन के साथ अपनी विकास योजना के मामले में पीछे है.
जैसे-जैसे दिल्ली विधानसभा चुनाव करीब आते हैं, यह स्पष्ट है कि आप और भाजपा के बीच मुकाबला पहले से कहीं अधिक कड़ा हो गया है. आप अपनी शासन व्यवस्था और कल्याण योजनाओं पर निर्भर है, जबकि भाजपा केंद्रीय सरकार के आर्थिक सुधारों और टैक्स राहत उपायों का सहारा ले रही है. बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, आर्थिक राहत और नेतृत्व की विश्वसनीयता जैसे मुद्दों के बीच मतदाताओं की प्राथमिकताएँ फैली हुई हैं, और अंतिम परिणाम अभी भी अनिश्चित है. दिल्ली के मतदाता यह तय करेंगे कि निरंतरता या बदलाव राजधानी के भविष्य को परिभाषित करेगा, यह चुनाव एक कड़ी टक्कर और उच्च दांव वाला चुनाव साबित होने वाला है.
Rapido ने ये फैसला इसलिए लिया ताकि ज्यादा से ज्यादा दिल्ली वासी सरकार बनाने के लिए वोट डाल सके.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की दिग्गज ऑटो/बाइक शेयरिंग कंपनी Rapido ने दिल्ली चुनाव को देखते हुए एक बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने दिल्ली के लोगों के लिए 2025 विधानसभा चुनाव में वोट डालना आसान बनाने का ऐलान किया है. कंपनी ने इस सिलसिले में एक कैंपेन की शुरुआत की है. कंपनी ने इस कैंपेन के तहत अपने "सवारी जिम्मेदारी की" की टैगलाइन दी है. इस अभियान के तहत, Rapido सभी बाइक टैक्सी राइड पर 100% छूट (₹40 तक) दे रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग वोट डालें. कंपनी ने ये फैसला इसलिए लिया ताकि ज्यादा से ज्यादा दिल्ली वासी सरकार बनाने के लिए वोट डाल सके.
इस कूपन कोड का करें इस्तेमाल
5 फरवरी 2025 को दिल्ली के लोग इस ऑफर का फायदा उठा सकते हैं. बस "VOTENOW" कूपन कोड इस्तेमाल करें और दो बाइक टैक्सी राइड पर छूट पाएं. यह पहल दिल्ली के मुख्य चुनाव कार्यालय के सहयोग से शुरू की गई है, जिससे वोट डालने जाने के लिए किफायती और आसान यात्रा सुनिश्चित हो सके. Rapido चाहता है कि लोग बिना किसी परेशानी के अपने मतदान केंद्र तक पहुंचें और अपने लोकतांत्रिक अधिकार का उपयोग करें. Rapido के सह-संस्थापक, पवन गुंटुपल्ली ने कहा, "लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए मतदान केंद्रों तक पहुंच जरूरी है.
मतदाताओं को वोटिंग के लिए प्रेरित
हम मानते हैं कि लोगों को सुविधाजनक यात्रा देकर मतदान के लिए प्रेरित किया जा सकता है. हमें दिल्ली चुनाव कार्यालय का समर्थन मिलने की खुशी है, जिससे यह पहल सफल हो सके. दिल्ली मुख्य चुनाव कार्यालय के प्रतिनिधि ने कहा कि यात्रा की परेशानी कभी भी वोटिंग में बाधा नहीं बननी चाहिए.
हम मतदान केंद्रों को और सुलभ बनाने के लिए Rapido के सहयोग की सराहना करते हैं. हम चाहते हैं कि हर योग्य मतदाता बिना किसी दिक्कत के अपना वोट डाल सके. यह पहल Rapido की सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है. कंपनी भारतभर में लोगों को सशक्त बनाने और बेहतर परिवहन सुविधाएं देने के लिए आगे भी नए प्रयास करती रहेगी.
1.56 करोड़ लोग शाम 6 बजे तक वोट कर सकेंगे. इसके लिए करीब 13 हजार पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों के लिए बुधवार को सुबह 7 बजे से वोटिंग जारी है. 1.56 करोड़ लोग शाम 6 बजे तक वोट कर सकेंगे. इसके लिए करीब 13 हजार पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं. लोकसभा चुनाव में INDIA ब्लॉक का हिस्सा रहीं 5 पार्टियां दिल्ली चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं. इनमें आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस सभी 70 सीटों पर आमने-सामने हैं. वहीं भाजपा ने 68 सीटों पर कैंडिडेट उतारे हैं. दो सीटें सहयोगी पार्टियों को दी हैं. इसमें जनता दल- यूनाइटेड (JDU) ने बुराड़ी और लोक जनशक्ति पार्टी - रामविलास (LJP-R) ने देवली सीट से प्रत्याशी उतारे हैं.
19% उम्मीदवार दागी, 81 पर हत्या बलात्कार जैसे गंभीर मामले दर्ज
चुनाव आयोग के मुताबिक निर्दलीय समेत विभिन्न पार्टियों के कुल 699 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) ने इन सभी उम्मीदवारों के हलफनामे की जांच करके एक रिपोर्ट तैयार की है. इसके मुताबिक करीब 19 फीसदी यानी 132 उम्मीदवार आपराधिक छवि के हैं. इनमें से 81 पर हत्या, किडनैपिंग, बलात्कार जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं. 13 उम्मीदवार महिलाओं के खिलाफ अपराधों में आरोपी हैं.
699 में सिर्फ 96 महिलाएं उम्मीदवार
ADR के अनुसार 5 उम्मीदवारों के पास 100 करोड़ रुपए या उससे ज्यादा की संपत्ति है. इसमें 3 भाजपा के जबकि एक-एक कांग्रेस और AAP का है. भाजपा उम्मीदवारों की औसत संपत्ति करीब 22.90 करोड़ रुपए है. वहीं, तीन उम्मीदवारों ने अपनी संपत्ति शून्य बताई है. करीब 28% यानी 196 उम्मीदवारों ने अपनी उम्र 25 से 40 साल के बीच बताई है. 106 (15%) की उम्र 61 से 80 साल के बीच, जबकि तीन की उम्र 80 साल से ज्यादा है. सभी 699 उम्मीदवारों में 96 महिलाएं हैं, जो करीब 14% होता है. प्रत्याशियों के एजुकेशन क्वालिफिकेशन की बात करें तो 46% ने अपने आपको 5वीं से 12वीं के बीच घोषित किया है. 18 उम्मीदवारों ने खुद को डिप्लोमा धारक, 6 ने साक्षर और 29 ने असाक्षर बताया है.
दिल्ली में 18% स्विंग वोटर्स किंगमेकर
लोकसभा चुनाव में दिल्ली की 7 सीटों पर AAP और कांग्रेस साथ चुनाव लड़ा था. AAP ने 4 और कांग्रेस ने 3 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन सभी 7 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया. भाजपा को 54.7%, जबकि INDIA ब्लॉक को कुल 43.3% वोट मिला था. जीत-हार का मार्जिन सभी सीटों पर औसतन 1.35 लाख रहा था। भाजपा 52 विधानसभा सीटों पर आगे रही थी. दिल्ली चुनाव लोकसभा के करीब 9 महीने बाद होते हैं लेकिन इतने कम वक्त में ही वोटिंग ट्रेंड्स में बड़ा बदलाव दिखता है. पिछले दो लोकसभा (2014 और 2019) और दो विधानसभा चुनावों (2015 और 2020) के डेटा के मुताबिक करीब 18% स्विंग वोटर्स दिल्ली की सत्ता तय करते रहे हैं.
कल यानी 5 फरवरी को दिल्ली में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होंगे. मतदान करने के लिए सबसे जरूरी है कि आपका नाम वोटर लिस्ट में शामिल हो और मतदान के लिए वोटर आईडी या आधार कार्ड लेकर जाएं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बुधवार यानी कल दिल्ली में विधानसभा चुनाव 2025 के लिए मतदान होने जा रहा है. आप पहली बार मतदान करने जा रहे हैं, या आपको अपने नजदीकी पोलिंग बूध की जानकारी नहीं है, तो यह खबर आपके काम आ सकती है. अगर आपके पास अब तक मतदान की पर्ची नहीं आई है, तो कोई चिंता की बात नहीं है. चुनाव आयोग ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए नागरिकों को अपने नजदीकी पोलिंग बूथ का पता आसानी से लगाने का अवसर दिया है। इस खबर में हम आपको यह बताएंगे कि आप घर बैठे किस तरह से अपने पोलिंग बूथ का पता लगा सकते हैं और मतदान प्रक्रिया को आसान बना सकते हैं. चलिए जानते हैं कैसे?
कल मतदान और 8 को नतीजे की घोषणा
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 का मतदान 5 फरवरी को होगा और नतीजे 8 फरवरी को घोषित किए जाएंगे. चुनाव में हिस्सा लेने के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आपका नाम वोटर लिस्ट में शामिल हो और आप मतदान के लिए आवश्यक पहचान दस्तावेज जैसे वोटर आईडी कार्ड या आधार कार्ड लेकर जाएं.
नजदीकी पोलिंग बूथ खोजने का तरीका
1. चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग करें -पोलिंग बूथ का पता लगाने के लिए आपको सबसे पहले चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा. इसके लिए आपको वोटर्स सर्विस पोर्टल पर जाना होगा. यहां आपको अपनी इलेक्टोरल फोटो आइडेंटिफिकेशन कार्ड (EPIC) नंबर डालना होगा. इसके बाद, आपको कैप्चा वेरिफिकेशन भरकर सर्च बटन पर क्लिक करना होगा. अब आपकी स्क्रीन पर पोलिंग बूथ की जानकारी आ जाएगी, जिसे आप देख सकते हैं.
2. Know Your Election System- सेक्शन का इस्तेमाल करें -चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाने के बाद, आपको Know Your Election System सेक्शन में जाना होगा. यहां पर अपना EPIC नंबर डालने के बाद, आपको कैप्चा वेरिफिकेशन पूरा करना होगा और फिर सर्च बटन पर क्लिक करना होगा. इसके बाद, आपको नजदीकी पोलिंग बूथ की जानकारी स्क्रीन पर मिल जाएगी. इस प्रक्रिया को बेहद सरल और समझने में आसान बनाया गया है.
3. वोटर हेल्पलाइन ऐप का इस्तेमाल करें - अगर आप मोबाइल ऐप से पोलिंग बूथ का पता लगाना चाहते हैं, तो आप वोटर हेल्पलाइन ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह ऐप एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफार्म पर उपलब्ध है. ऐप पर आप अपना EPIC नंबर और अन्य विवरण डालकर आसानी से अपना पोलिंग बूथ ढूंढ सकते हैं.
4. चुनाव आयोग की वेबसाइट पर लॉगइन करें - इसके अतिरिक्त, आप चुनाव आयोग की अधिकारिक वेबसाइट eci.gov.in पर भी जाकर पोलिंग स्टेशन का पता लगा सकते हैं. इसके लिए आपको अपना लॉगिन पासवर्ड और वोटर आईडी नंबर डालना होगा. इसके बाद सारी जानकारी आपके सामने आ जाएगी, जिससे आप आसानी से अपने पोलिंग बूथ का पता लगा सकते हैं.
5. ये सभी तरीके सुनिश्चित करेंगे कि आप अपना मतदान बिना किसी परेशानी के कर सकें. इससे न केवल आपकी वोटिंग प्रक्रिया आसान हो जाएगी, बल्कि आप लोकतंत्र को मजबूत बनाने में भी अपना योगदान दे पाएंगे.
आईडी कार्ड साथ लाना न भूलें
दिल्ली विधानसभा चुनाव में वोट डालने के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि आप अपना नाम वोटर लिस्ट में चेक कर लें. इसके साथ ही, पोलिंग बूथ पर जाते वक्त अपना वोटर आईडी कार्ड या आधार कार्ड साथ लाना न भूलें. यह आपके मतदान को वैध बनाने के लिए आवश्यक है. इस बार, डिजिटल तरीके से पोलिंग बूथ ढूंढने की प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाया गया है, ताकि चुनाव में हिस्सा लेना सभी के लिए सहज हो सके. मतदान की प्रक्रिया से जुड़ी इन बुनियादी जानकारी को ध्यान में रखकर, आप सही और सटीक तरीके से वोट डालने का अधिकार प्राप्त कर सकते हैं और लोकतंत्र को अपनी आवाज दे सकते हैं.
दिल्ली विधानसभा का चुनावी दंगल तैयार हो चुका हैं. राष्ट्रीय राजधानी की 70 सीटों पर कुल 699 प्रत्याशी मैदान में है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दिल्ली विधानसभा चुनाव में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. सभी राजनीतिक दलों के उम्मीदवार एक-दूसरे को शह-मात देने में जुटे हुए हैं. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विधानसभा चुनाव के लिए 5 फरवरी को वोटिंग होगी. जबकि मतों की गणना 8 फरवरी को होगी. दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच के बाद 719 उम्मीदवार मैदान में हैं. दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस से चुनाव लड़ने वाले करीब तीन चौथाई उम्मीदवार करोड़पति हैं. इस चुनाव में 155 करोड़पति प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 77.14 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति हैं. वहीं, राजधानी में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने इस बार 70 फीसदी ऐसे लोगों को टिकट दिया गया है, जो करोड़पति हैं. इसके अलावा बीजेपी ने मौजूदा विधानसभा चुनाव में 77.14 फीसदी करोड़पतियों पर भरोसा जताया है. रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में सबसे गरीब उम्मीदवार कांग्रेस के टिकट पर मोतीनगर से चुनाव लड़ रहे राजेंद्र सिंह हैं. उनके पास महज 24,000 रुपये की संपत्ति है, हालांकि उनकी पत्नी करोड़पति है. उनके पास 5.5 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति है.
दो अरबपति भी लड़ रहे चुनाव
दिल्ली चुनाव में दो अरबपति उम्मीदवार भी विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं. शकूरबस्ती से चुनाव लड़ रहे बीजेपी उम्मीदवार करनैल सिंह सबसे अमीर प्रत्याशी हैं. उनके नाम पर 227 करोड़ रुपरये की चल और अचल संपत्ति है. वहीं, करनैल सिंह के अलावा बीजेपी उम्मीदवार मनजिंदर सिंह सिरसा के पास भी 1.86 अरब रुपये की चल अचल संपत्ति है. चुनाव आयोग के अनुसार, दिल्ली के 70 निर्वाचन क्षेत्रों में से 11 जिलों की 58 सीट सामान्य हैं. जबकि 12 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. इसके अलावा दिल्ली में 83.49 लाख पुरुष मतदाता और 71.73 लाख महिला मतदाता हैं. थर्ड जेंडर के मतदाताओं की संख्या 1,261 है. इनमें 25.89 लाख युवा मतदाता भी हैं. दिल्ली में कुल 1.55 करोड़ से अधिक मतदाता हैं.
दिल्ली चुनाव 2025 की बड़ी बातें
दिल्ली चुनाव में कुल मतदान केंद्रों की संख्या 13,033 है, जिनमें से दिव्यांग व्यक्तियों और महिलाओं द्वारा प्रबंधित 70-70 मतदान केंद्र हैं. दिल्ली में सत्ता हासिल करने के लिए आम आदमी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस में टक्कर है. आम आदमी पार्टी जहां तीसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का दावा ठोक रही है. तो वहीं 10 साल से विधानसभा में अनुपस्थित रही कांग्रेस भी इस बार सिर्फ खाता खोलने की ही नहीं, बल्कि सरकार बनाने का दावा कर रही है.
इन दोनों पार्टियों के अलावा दिल्ली भाजपा ने विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री दिल्ली में बीजेपी प्रत्याशियों के चुनावी प्रचार कर रहे हैं. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कई चुनावी सभाएं यहां पर होनी हैं. दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों पर 5 फरवरी को वोटिंग होगी. 8 फरवरी को परिणाम घोषित किए जाएंगे.
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन फाइल कर दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
नई दिल्ली विधानसभा सीट से आम आदमी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने नॉमिनेशन फाइल कर दिया है. उन्होंने चुनावी हलफनामे में अपनी संपत्ति का खुलासा किया है. जिसके मुताबिक दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पास अचल संपत्ति 1 करोड़ 73 लाख रुपये है. वहीं इनकी पत्नी के नाम पर कुल अचल संपत्ति 2 करोड़ 10 लाख रुपये है.
अरविंद केजरीवाल की चल संपत्ति की बात करें तो इनके पास कुल चल संपत्ति 3 लाख 46 हजार रुपये से ज्यादा है, जबकि इनकी पत्नी के नाम चल संपत्ति 1 करोड़ 89 हजार रुपये है. ऐसे में देखा जाए तो अरविंद केजरीवाल के पास कुल संपत्ति करीब 1 करोड़ 77 लाख रुपये है. वहीं उनकी पत्नी के पास कुल संपत्ति 3 करोड़ 99 लाख रुपये हैं.
अरविंद केजरीवाल पर नहीं है कर्ज
चुनावी हलफनामे के मुताबिक अरविंद केजरीवाल के पास नकद 50 हजार रुपये, जबकि उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल के पास नकद 42000 रुपये है. अरविंद केजरीवाल के नाम पर कोई कार नहीं है, जबकि उनकी पत्नी के नाम पर एक मारुति बलेनो कार है. इसके अलावा सुनीता केजरीवाल के नाम पर गुरुग्राम में एक फ्लैट है. दोनों पति-पत्नी के नाम पर कोई कर्ज नहीं है.
केजरीवाल की पत्नी के नाम पर घर
आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के नाम पर घर नहीं है. उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल के नाम घर है, जिसकी अभी मार्केट वैल्यू लगभग 1.5 करोड़ रुपये है. वहीं अरविंद केजरीवाल के पास नॉन एग्रीकल्चर लैंड भी है, जिसकी कीमत 1 करोड़ 70 लाख रुपये है.
पत्नी के नाम इतनी कीमत की ज्वेलरी
अरविंद केजरीवाल ने शेयर बाजार और अन्य जगहों पर किसी भी तरह का कोई भी निवेश नहीं किया है. वहीं उनकी पत्नी के पास 25 लाख 92 हजार रुपये की सोने और चांदी की ज्वेलरी है. पीपीएफ में भी स्पॉउस के नाम पर अकाउंट है, जिस अकाउंट में 26 लाख रुपये से ज्यादा का डिपॉजिट है.
प्रवेश वर्मा ने भी किया संपत्ति का खुलासा
बता दें अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा ने इनके खिलाफ प्रवेश वर्मा को यहां से टिकट दिया है. उन्होंने भी बुधवार को नांमाकन दाखिल किया और अपनी संपत्ति का खुलासा किया, जिसके मुताबिक प्रवेश वर्मा के पास करीब 95 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति है. वहीं कालकाजी विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी ने भी नामांकन कर दिया है.
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अगले दो वर्षों में दिल्ली के बुनियादी ढांचे को बदलने के लिए ₹1 लाख करोड़ के निवेश की घोषणा की.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दिल्ली में चुनावी हलचल के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा दावा किया है. नितिन गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार दिल्ली के बुनियादी ढांचे को बदलने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को क्रियान्वित करेगी. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैं आपसे वादा करता हूं कि आने वाले दो सालों में 1 लाख करोड़ रुपये के काम किए जाएंगे. यह पूरी दिल्ली की सूरत बदल देगा. नमामि गंगे योजना के तहत, हमारे पास यमुना को साफ करने की कुछ योजनाएं हैं.
33 हजार करोड़ के पहले ही हो चुके है काम
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हम सीवेज के पानी को यमुना में जाने से रोकने के लिए काम कर रहे हैं. लेकिन, चूंकि दिल्ली सरकार परियोजनाओं के लिए अपने हिस्से का पैसा नहीं दे रही है, इसलिए कुछ काम अभी भी होने बाकी हैं. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सड़क और परिवहन मंत्रालय 65,000 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम कर रहा है, जिसमें से 33,000 करोड़ रुपये के काम पहले ही पूरे हो चुके हैं. गडकरी ने बताया कि सड़क और परिवहन मंत्रालय आने वाले समय में 32,000 करोड़ के बचे हुए काम पूरे कर लेगा.
प्रदूषण का समाधान करने की कोशिश करेंगे
दिल्ली वायु प्रदूषण और ट्रैफिक जाम को लेकर उन्होंने कहा कि लोग बहुत परेशान है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, सड़क निर्माण मंत्रालय ने दिल्ली को प्रदूषण से मुक्त करने और भीड़भाड़ कम करने के लिए कई परियोजनाओं को शुरू किया और लागू किया है. गडकरी ने आगे कहा कि सरकार दिल्ली में प्रदूषण का समाधान करने की कोशिश करेगी. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार इलेक्ट्रिक बसें, कार और स्कूटर लेकर आई. क्योंकि दिल्ली का 40 प्रतिशत प्रदूषण जीवाश्म ईंधन के कारण होता है. हम सीएनजी (वाहन) भी लेकर आए और हम 5 साल में दिल्ली को प्रदूषण से मुक्त कर देंगे. उन्होंने कहा कि पराली जलाने में 20 प्रतिशत की कमी आई है, जो पंजाब, हरियाणा और आस-पास के इलाकों में 200 लाख टन जलाई गई. गडकरी ने कहा कि 400 परियोजनाओं में से कुल 60 संयंत्रों ने काम करना शुरू कर दिया है.
उन्होंने कहा कि पराली जलाने में 20 प्रतिशत की कमी आई है. ऐसा इसलिए है क्योंकि अब इस पराली से सीएनजी का उत्पादन किया जा रहा है और 400 संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें से 60 पहले से ही चालू हैं. इसके परिणामस्वरूप, कचरे को संपदा में बदला जाएगा और ट्रक और बसें सीएनजी से चलेंगी. केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि सरकार ने पानीपत में एक परियोजना शुरू की है, जो पराली से 1 लाख लीटर इथेनॉल, 150 टन बायो-विटामिन और 78,000 टन विमानन ईंधन का उत्पादन करेगी. उन्होंने कहा कि इससे दिल्ली में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी और इस तरह हम आयात पर बचत करेंगे, नए रोजगार सृजित करेंगे और किसानों के कल्याण में भी सुधार करेंगे.