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ATM Card से फ्रॉड करने का अजीबोगरीब तरीका, आखिर कहां से लाते हैं ऐसे आइडियाज
जब जालसाजों ने अपने तरीके का खुलासा किया तो उसे सुनने वाले सभी अधिकारी भी हैरान रह गए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: आपने कई बार ATM कार्ड के जरिए धोखाधड़ी करने के बारे में सुना होगा. आपने यह भी सुना होगा कि जालसाज पलक झपकते ही आपका ATM कार्ड बदल देते हैं और फिर आपको चपत लगाते हैं. आपके कार्ड का क्लोन बना लेते हैं और आपके साथ धोखाधड़ी करते हैं, लेकिन एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें जालसाज न तो आपका कार्ड बदलते हैं और ना ही उसका क्लोन बनाते हैं, बल्कि आपके कार्ड से ही आसानी से पैसा निकालते हैं और आप कुछ कर भी नहीं पाते.
48 ATM कार्ड बरामद किए गए
मामला उत्तर प्रदेश के मैनपुरी का है, जहां साइबर सेल ने 6 जालसाजों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. इन जालसाजों ने 100 से ज्यादा घटनाओं को अंजाम दे चुके थे. ऐसी घटनाएं बढ़ने के बाद मामला साइबर सेल के पास गया था, जिसके बाद पूरे प्लान के तहत मिशन को अंजाम दिया गया और इन जालसाजों को गिरफ्तार किया गया. इनके पास से 48 ATM कार्ड, 65 सिम, 6 मोबाइल, 2 तमंचे, 4 कारतूस, 6 पैकेज फेवीक्विक, 2 सर्जिकल ब्लेड और 75 हजार रुपये की नकदी बरामद हुई है.
अधिकारियों के भी होश उड़ गए
जब इनसे पूछताछ की गई तो इन्होंने ATM कार्ड से फ्रॉड करने का ऐसा तरीका बताया जिसे सुनकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए. जालसाजों ने बताया कि उनकी पूरी टीम एक साथ काम करती थी. पहले उनका एक साथी ATM केबिन के अंदर जाता था और जहां से कार्ड एंटर किया जाता है, वहां फेवीक्विक लगा देता था. उसके बाद एक कागज पर मोबाइल नंबर लिखकर मशीन पर चिपका देता था. इसके बाद वह बाहर निकल आता था.
फ्रॉड करने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल करते थे जालसाज
दूसरा साथी ATM सेंटर के बाहर ग्राहक का इंतजार करता. जैसे ही कोई ग्राहक केबिन में दाखिल होता, वह उसके साथ-साथ अंदर चला जाता था. ग्राहक जैसे ही कार्ड को एंटर करता था, वह कार्ड चिपक जाता था, लेकिन ग्राहक को ऐसा लगता था कि उसका कार्ड फंस गया है. परेशानी में वह कुछ समझ सके, उससे पहले जो जालसाज केबिन के अंदर मौजूद रहता है, वह ग्राहक को मशीन पर चिपके मोबाइल नंबर को कस्टमर केयर का नंबर बताता और उसपर फोन करने को कहता. गिरोह का तीसरा साथी फोन रिसीव करता और समस्या का समाधान बताने के क्रम में मशीन में पिन एंटर करने को कहता, जिसे केबिन में मौजूद अन्य जालसाज आसानी से देख लेता. फिर भी कार्ड बाहर नहीं निकलता तो उसे यह बताया जाता कि टेक्निकल फॉल्ट की वजह से कार्ड फंस गया है, जिसे अब इंजीनियर ही निकाल सकता है और ग्राहक को यह आश्वस्त करते हुए घर भेज दिया जाता था कि कार्ड सुरक्षित रूप से उसके रजिस्टर्ड एड्रेस पर पहुंचा दिया जाएगा. ग्राहक जैसे ही बाहत जाता, जालसाज इकट्ठा होते और फिर उसी कार्ड का इस्तेमाल करके आसानी से पैसा निकाल लेते और रफूचक्कर हो जाते.
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