इन अवॉर्ड के लिए डॉ. ललित भसीन के नेतृत्व में एक ज्यूरी का निर्माण किया गया था जिसने इन पुरस्कारों के लिए अलग-अलग श्रेणियों में उम्मीदवारों का चयन किया है.
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ललित नारायण कांडपाल
बीडब्ल्यू लीगल वर्ल्ड ग्लोबल लीगल लीडर्स कॉन्फ्रेंस एंड अवार्ड्स 2023 का पांचवां संस्करण की घोषणा हो चुकी है. अवॉर्डस का ये कार्यक्रम 24 जून, 2023 को देश की राजधानी दिल्ली के द इंपीरियल, होटल दिल्ली में हुआ. इस कार्यक्रम में कानून के विभिन्न जानकारों के बीच अलग-अलग बेहतरीन पैनल चर्चाएं हुईं, जिससे दर्शकों का ज्ञानवर्धन हुआ और विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए.
किन्हें दिए गए हैं ये अवॉर्डस
ग्लोबल लीगल समिट एंड लीडर्स अवार्ड्स 2023 उन योग्य कानून फर्मों और वकीलों को पहचानने और उनके काम को पुरस्कृत करने की एक पहल है जिन्होंने अपने क्षेत्रों में अपने उत्कृष्ट योगदान दिया है. हर साल आयोजित किए जाने वाले ये अवॉर्डस कानूनी के क्षेत्र में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए कानून फर्मों और व्यक्तिगत वकीलों की पहचान करने और सक्षम करने के लिए संकल्पित किया गया है, जिनमें नेतृत्व करने की क्षमता है.
किस ज्यूरी ने किया चयन
जिन लोगों ने अवॉर्ड जीते हैं उन विजेताओं को जूरी के नेतृत्व वाली सख्त प्रक्रिया के माध्यम से शॉर्टलिस्ट किया गया था. प्रतिष्ठित जूरी पैनल के सदस्यों में कानूनी उद्योग के निम्नलिखित प्रसिद्ध नाम शामिल थे. इनमें जूरी के अध्यक्ष डॉ. ललित भसीन, प्रबंध भागीदार, भसीन एंड कंपनी, न्यायमूर्ति सीकरी, पूर्व न्यायाधीश, भारत का सर्वोच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति दीपक वर्मा, पूर्व न्यायाधीश, भारत का सर्वोच्च न्यायालय , डॉ. अनुराग बत्रा, फाउंडर एक्सचेंस फॉर मीडिया और प्रधान संपादक, बीडब्ल्यू बिजनेसवर्ल्ड शामिल रहे. इसके अतिरिक्त, अर्शदीप सिंह, प्रमुख: कानूनी एवं अनुपालन, एमप्लस एनर्जी सॉल्यूशंस, जतिन जालुंधवाला, कंपनी सचिव और संयुक्त अध्यक्ष (कानूनी), अदानी समूह, कौशिक मुखर्जी, अध्यक्ष (कानूनी),
इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड, मोहित शुक्ला, इंडिया लीगल, लीड भारत सरकार एवं नियामक मामले, बार्कलेज बैंक, निखिल गुलियानी, प्रमुख - कानूनी और सचिवीय, एनडीटीवी समूह नई दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड, पूजा सहगल मेहतानी, जनरल काउंसिल, एशिया सर्विस सेंटर और कंपनी सचिव सन लाइफ, राजीव चोपड़ा, प्रबंध निदेशक - कानूनी, एक्सेंचर, राजेंद्र मिश्रा, कार्यकारी उपाध्यक्ष और जनरल काउंसिल, द इंडियन होटल्स कंपनी, रूप लूम्बा, जनरल काउंसिल, अक्ज़ोनोबेल, वाणी मेहता, जनरल काउंसिल, दक्षिण एशिया, जीई, शामिल रहे. इस साल जिन लोगों ने अवॉर्ड जीते हैं उनमें बीडब्ल्यू लीगल वर्ल्ड ग्लोबल लीगल लीडर्स अवार्ड्स के विजेताओं की सूची यहां दी गई है.
किसने किस कैटेगिरी में जीता अवॉर्ड
जिन लोगों ने अवॉर्ड जीते हैं उनमें Litigation Law Firm of the Year कैटेगिरी में करनजावाला एंड कंपनी, Competition Law Firm of the Year में चंडियोक एंड महाजन, M&A and Private Equity Law Firm of the Year में सर्राफ एंडपार्टनर्स, ADR Law Firm of the Year में सर्राफ एंडपार्टनर्स, Intellectual Property Law Firm of the Year में इंटेल एडवोकेयर, Banking and Financial Services Law Firm of the Year में एसएनजी एंड पार्टनर, Tax law Firm of the Year में सर्राफ एंडपार्टनर्स, General Corporate Law Firm of the Year नित्या फर्म्स, Real Estate Law Firm of the Year में लूथरा एंड लूथरा ऑफिस, Financial Regulatory Law Firm of the Year में लॉ एसिस्ट, Restructuring and Insolvency Law Firm of the Year में रेगस्ट्रीट लॉ एडवाइजर, Technology,
Media and Telecommunications Law Firm of the year में चंडियोक एंड महाजन, Startups and Investments Law Firm of the Year में टीएमटी लॉप्रैक्टिसेस, Most Innovative Lawyer of the Yea में लेक्सस्टार्ट पार्टनर, Best IP Lawyer of the Year में राधिका एम दूधत, Best Tech Lawyer of the Year में शिवाती बजाज, Best Real Estate Lawyer of the Year में वैभव कक्कड़, Emerging Law Firm of the Year में शिवाती बजाज, Woman Lawyer of the Year में सूम्स दीवान,अनीषा पटनायक, पूर्णिमा रंगनाथ, Managing Partner of the Year में मनीषा सिंह ने पुरस्कार जीते.
NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को प्रस्तावित है. ऐसे में सरकार ने किसी भी संभावित पेपर लीक या परीक्षा संबंधी अनियमितता को रोकने के लिए टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया था. यह प्रतिबंध 22 जून तक लागू रहेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दिल्ली हाईकोर्ट ने NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले भारत में टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को बरकरार रखा है. अदालत ने केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह कदम परिस्थितियों के अनुसार सबसे कम प्रतिबंधात्मक और उचित उपाय था. इसके साथ ही टेलीग्राम की ओर से दायर चुनौती को खारिज कर दिया गया.
22 जून तक बंद रहेगा Telegram
न्यायमूर्ति तेजस करिया ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि केंद्र सरकार का आदेश अनुपातिकता की कसौटी पर खरा उतरता है. अदालत ने माना कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उठाया गया यह कदम आवश्यक था. NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को प्रस्तावित है. ऐसे में सरकार ने किसी भी संभावित पेपर लीक या परीक्षा संबंधी अनियमितता को रोकने के लिए टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया था. यह प्रतिबंध 22 जून तक लागू रहेगा.
NTA और शिक्षा मंत्रालय की सिफारिश पर हुई कार्रवाई
केंद्र सरकार ने यह कदम राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की सिफारिशों के आधार पर उठाया. इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A का इस्तेमाल करते हुए भारत में टेलीग्राम की सेवाओं को अस्थायी रूप से ब्लॉक करने का आदेश जारी किया.
सरकार ने टेलीग्राम को 30 जून तक पुराने संदेशों में एडिटिंग फीचर भी निष्क्रिय करने का निर्देश दिया है.
सरकार का दावा- लीक सामग्री फैलाने में अहम भूमिका
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि टेलीग्राम की तकनीकी संरचना बड़ी मात्रा में सामग्री के प्रसार की अनुमति देती है. उन्होंने कहा कि एक बार किसी बॉट या चैनल को बंद करने के बाद भी उसकी कॉपी या मिरर बॉट्स तेजी से सक्रिय हो जाती हैं और आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार जारी रखती हैं.
सरकार का कहना था कि परीक्षा से जुड़ी लीक सामग्री के प्रसार में टेलीग्राम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसलिए यह कदम जरूरी था.
Telegram ने फैसले का किया विरोध
टेलीग्राम ने अदालत में प्रतिबंध का विरोध करते हुए कहा कि केवल उसी को निशाना बनाना उचित नहीं है, जबकि अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बिना किसी रोक के काम कर रहे हैं. टेलीग्राम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता ने कहा कि कंपनी लगातार सरकारी एजेंसियों के संपर्क में रही है और अवैध सामग्री के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करती रही है.
कंपनी के अनुसार, 9 जून को अधिकारियों से सूचना मिलने के एक घंटे के भीतर चिह्नित URLs हटा दिए गए थे. साथ ही NEET से जुड़ी अवैध सामग्री वाले 900 से अधिक लिंक भी हटाए गए. टेलीग्राम ने दावा किया कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और मैनुअल मॉडरेशन के जरिए नियमों के उल्लंघन वाली सामग्री की पहचान करता है.
अदालत में उठे कानूनी सवाल
सुनवाई के दौरान टेलीग्राम ने यह सवाल भी उठाया कि क्या किसी परीक्षा से जुड़ी चिंताओं के आधार पर देश की संप्रभुता और अखंडता के हित में ब्लॉकिंग आदेश जारी किया जा सकता है. हालांकि, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए टेलीग्राम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है.
जांच और निगरानी जारी
फिलहाल टेलीग्राम पर लगा प्रतिबंध 22 जून तक प्रभावी रहेगा. सरकार का मानना है कि पुनर्परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी रोकने और परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह कदम आवश्यक है. वहीं, टेलीग्राम का कहना है कि वह कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग जारी रखेगा और अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करता रहेगा.
इस मामले में ED दिल्ली, मुंबई और खंडाला में एक साथ रेड, लोन ट्रांजैक्शंस में वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को कथित बैंक लोन असाइनमेंट मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली, मुंबई और खंडाला में 17 स्थानों पर छापेमारी की. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच एजेंसी की यह कार्रवाई YES Bank से जुड़े कथित फर्जी ऋण हस्तांतरण (Loan Assignment) मामले में की गई है. जांच के दायरे में बैंक का एक पूर्व कर्मचारी भी आया है.
किन कंपनियों पर है ED की नजर?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी ने अपनी तलाशी कार्रवाई के दौरान सुरक्षा एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी (SARCL), सुरक्षा रियल्टी, ख्याति रियल्टर्स और उनसे जुड़े प्रमोटर्स, निदेशकों तथा कर्मचारियों के परिसरों को निशाना बनाया. एजेंसी इन संस्थाओं और व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है.
क्या है पूरा मामला?
यह जांच वित्त वर्ष 2016-17 और 2017-18 के दौरान मैक्स्टार मार्केटिंग और उससे जुड़ी अन्य कंपनियों के लोन खातों के असाइनमेंट से संबंधित है. ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन ऋणों के हस्तांतरण की प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितताएं हुईं या फिर धन शोधन निवारण कानून (PMLA) के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया.
दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की जांच
जांच एजेंसी कथित लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और संचार माध्यमों की बारीकी से जांच कर रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, एक साथ कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाकर साक्ष्य जुटाने की कोशिश की गई है.
बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
ईडी यह भी जांच कर रही है कि लोन असाइनमेंट प्रक्रिया में कंपनी अधिकारियों, बैंक कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की क्या भूमिका रही. एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या किसी बैंक अधिकारी या बाहरी संस्था को इन लेन-देन से अनुचित लाभ पहुंचा या उन्होंने कथित अनियमितताओं को बढ़ावा दिया.
अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं
फिलहाल इस मामले में किसी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है. ईडी ने तलाशी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों और अन्य सामग्रियों की जांच शुरू कर दी है. एजेंसी के अनुसार, साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा. जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं.
एनआईए का कहना है कि यह नेटवर्क देश में बड़े पैमाने पर हमलों की योजना बना रहा था, लेकिन समय रहते इसे रोक दिया गया. अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए कार बम विस्फोट मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ लगभग 7,500 पन्नों का आरोपपत्र विशेष अदालत में दाखिल किया है. एजेंसी के अनुसार यह हमला पिछले वर्ष हुआ था, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे.
विस्फोट की साजिश और जांच
जांच एजेंसी का कहना है कि यह विस्फोट 10 नवंबर 2025 को हाई-इंटेंसिटी व्हीकल-बॉर्न इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (VBIED) के जरिए किया गया था. धमाके से क्षेत्र में भारी तबाही और जान-माल का नुकसान हुआ.
आरोपपत्र पटियाला हाउस कोर्ट स्थित विशेष एनआईए अदालत में दाखिल किया गया. एजेंसी ने आरोप लगाया है कि सभी 10 आरोपी आतंकी संगठन “अंसार गजवत-उल-हिंद” (Ansar Ghazwat-ul-Hind) से जुड़े थे, जिसे वह अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (Al-Qaeda in the Indian Subcontinent) की शाखा बताती है.
‘जिहादी साजिश’ का आरोप
एनआईए के अनुसार यह पूरा मामला एक बड़े “जिहादी षड्यंत्र” का हिस्सा है, जिसकी योजना और क्रियान्वयन वैज्ञानिक और फॉरेंसिक जांच के जरिए सामने आया. एजेंसी का यह भी दावा है कि कुछ आरोपी “कट्टरपंथी मेडिकल प्रोफेशनल्स” थे, जिन्हें अंसार गजवत-उल-हिंद और अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट की विचारधारा से प्रभावित किया गया था.
मुख्य आरोपी और नेटवर्क
आरोपपत्र में मुख्य साजिशकर्ता के रूप में डॉ. उमर उन नबी का नाम शामिल है. वह पुलवामा के निवासी और पहले Al-Falah University में सहायक प्रोफेसर रह चुके थे. हालांकि उनकी मृत्यु हो चुकी है, इसलिए उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त करने की सिफारिश की गई है.
अन्य आरोपियों में आमिर राशिद मीर, जसिर बिलाल वानी, डॉ. मुज़म्मिल शकील, डॉ. आदिल अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयाब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार शामिल हैं.
जांच में दावा किया गया है कि 2022 में एक गुप्त बैठक श्रीनगर में हुई थी, जिसके बाद यह समूह फिर से सक्रिय हुआ. यह बैठक उस समय हुई जब सदस्य तुर्किए के रास्ते अफगानिस्तान जाने की कोशिश में असफल रहे थे.
हथियार, विस्फोटक और ड्रोन प्रयोग
एनआईए के अनुसार आरोपी समूह ने हथियार इकट्ठा किए, प्रचार फैलाया और रसायनों की मदद से विस्फोटक तैयार किए. जांच में यह भी सामने आया कि उन्होंने कई तरह के IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विकसित और परीक्षण किए.
एजेंसी का दावा है कि रेड फोर्ट हमले में इस्तेमाल विस्फोटक TATP (Triacetone Triperoxide) था, जिसे रासायनिक पदार्थों के जरिए प्रयोगात्मक रूप से तैयार किया गया था.
इसके अलावा आरोपियों पर AK-47, Krinkov राइफल और देसी पिस्तौल जैसे हथियारों की अवैध खरीद का भी आरोप है.
जांच में यह भी सामने आया कि समूह ने ड्रोन आधारित और रॉकेट-आधारित IED बनाने के प्रयोग किए, खासकर जम्मू-कश्मीर और अन्य क्षेत्रों में, जिनका उद्देश्य सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना था.
जांच का दायरा
एनआईए ने बताया कि यह जांच हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली एनसीआर सहित कई राज्यों में की गई. मामले में 588 गवाहों के बयान, 395 से अधिक दस्तावेज और 200 से ज्यादा जब्त वस्तुएं शामिल हैं. एजेंसी ने यह भी कहा कि डॉ. उमर उन नबी की पहचान डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के जरिए की गई. जांच अभी जारी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है.
एनआईए का कहना है कि यह नेटवर्क देश में बड़े पैमाने पर हमलों की योजना बना रहा था, लेकिन समय रहते इसे रोक दिया गया. अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई कथित फर्जी GST खरीद, मनी लॉन्ड्रिंग और निर्यात से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच के तहत की गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पंजाब सरकार में स्थानीय निकाय एवं संसदीय कार्य मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. सूत्रों के मुताबिक 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित फर्जी जीएसटी (GST) बिल, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने चंडीगढ़, दिल्ली और गुरुग्राम समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की. लंबी पूछताछ के बाद अरोड़ा को हिरासत में लिए जाने की चर्चा तेज है, हालांकि एजेंसी की ओर से आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है.
सुबह 7 बजे शुरू हुई छापेमारी
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब सात बजे ईडी की कई टीमों ने एक साथ कार्रवाई शुरू की. चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-2 आवास के अलावा दिल्ली, गुरुग्राम और अन्य ठिकानों पर भी तलाशी अभियान चलाया गया. सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीआईएसएफ और सीआरपीएफ के जवान तैनात रहे. ईडी अधिकारियों ने कई घंटों तक वित्तीय दस्तावेजों, कारोबारी लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच की.
फर्जी GST बिल और ITC घोटाले की जांच
सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई कथित फर्जी GST खरीद, मनी लॉन्ड्रिंग और निर्यात से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच के तहत की गई. जांच एजेंसी को संदेह है कि मोबाइल फोन कारोबार से जुड़े फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और GST रिफंड हासिल किया गया. ईडी अब दुबई से जुड़े कथित फंड ट्रांजैक्शन और राउंड ट्रिपिंग एंगल की भी जांच कर रही है.
देर रात हिरासत की चर्चा तेज
दिनभर चली कार्रवाई के बाद देर शाम राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि ईडी ने संजीव अरोड़ा को हिरासत में ले लिया है. हालांकि आधिकारिक स्तर पर न तो गिरफ्तारी की पुष्टि की गई और न ही विस्तृत बयान जारी किया गया. सूत्रों का कहना है कि आगे की पूछताछ के लिए उन्हें दिल्ली ले जाया जा सकता है.
पंजाब की राजनीति में बढ़ी हलचल
ईडी की कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई है. आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है. वहीं विपक्षी दल लगातार सरकार पर सवाल उठा रहे हैं. मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले भी केंद्र सरकार और भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगा चुके हैं. दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि यदि जांच हो रही है तो सच्चाई सामने आनी चाहिए.
अगले 24 घंटे अहम
सूत्रों के अनुसार, आने वाले 24 घंटों में ईडी इस मामले में आधिकारिक जानकारी साझा कर सकती है. फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर पंजाब की राजनीति और कारोबारी जगत की नजरें टिकी हुई हैं.
ईडी ने अपनी जांच में पाया कि अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों ने कथित रूप से 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग की.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रिलायंस समूह से जुड़े दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है. यह मामला कथित लोन फ्रॉड और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है.
ईडी के अनुसार, अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत हिरासत में लिया गया है. यह कार्रवाई केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा पहले दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर की गई है.
किन कंपनियों से जुड़ा है मामला
सीबीआई की जांच में सामने आया कि यह मामला रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़ा है. इन कंपनियों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और बैंक फंड के दुरुपयोग के आरोप हैं.
₹40,000 करोड़ से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
ईडी ने अपनी जांच में पाया कि अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों ने कथित रूप से 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग की. एजेंसी ने अब तक लगभग 17,000 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की हैं. इसमें मुंबई स्थित अनिल अंबानी का करीब 3,700 करोड़ रुपये का आवास भी शामिल है.
अनिल अंबानी से भी हो चुकी है पूछताछ
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने अनिल अंबानी से कई बार पूछताछ की है. हालांकि, उनका कहना है कि उन्होंने वर्ष 2017 में संबंधित कंपनियों के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था.
झुनझुनवाला और बापना की भूमिका
अमिताभ झुनझुनवाला, जो रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस कैपिटल के वाइस चेयरमैन रह चुके हैं, पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रहे हैं. जांचकर्ताओं का मानना है कि उन्होंने RHFL और RCFL से जुड़े वित्तीय फैसलों में अहम भूमिका निभाई. वहीं, अमित बापना रिलायंस फाइनेंस में एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्यरत थे.
कैसे हुआ घोटाला
ईडी के अनुसार, RHFL और RCFL ने कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जनता का पैसा जुटाया, जिसमें से 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बाद में एनपीए (Non-Performing Assets) में बदल गई. जांच में यह भी सामने आया कि इस धन को शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए अन्य रिलायंस समूह की कंपनियों में ट्रांसफर किया गया, जिनकी वित्तीय स्थिति बेहद कमजोर थी और जिनका कोई ठोस व्यवसाय नहीं था.
किन बैंकों ने दर्ज कराई शिकायत
ईडी ने यह मामला जुलाई 2025 में दर्ज किया था, जो यस बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शिकायतों पर आधारित था. सीबीआई ने कंपनियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के उल्लंघन के तहत मामला दर्ज किया है.
ईडी की आगे की कार्रवाई
मार्च 2026 में ईडी ने इस पूरे मामले में पैसे की हेराफेरी के तरीके (मोडस ऑपरेंडी) का खुलासा किया था और संपत्तियों को जब्त करने का आदेश जारी किया था. एजेंसी ने कहा है कि वह वित्तीय अपराधों के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगी और अवैध संपत्तियों को उनके वास्तविक हकदारों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है.
ईडी की यह गिरफ्तारी कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की परतें खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. एजेंसी इस मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान और नेटवर्क के विस्तार को समझने की कोशिश कर रही है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजनीतिक परामर्श फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के सह-संस्थापक विनेश चंदेल को पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई है. यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा नवंबर 2020 में दर्ज की गई एफआईआर से जुड़ा है. इसमें पश्चिम बंगाल में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी का आरोप लगाया गया था. जांच में अवैध खनन और कोयले की हेराफेरी से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है.
PMLA के तहत गिरफ्तारी
ईडी ने विनेश चंदेल को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के प्रावधानों के तहत दिल्ली में हिरासत में लिया. उन्हें जल्द ही विशेष अदालत में पेश किया जाएगा. एजेंसी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध कमाई के प्रवाह की जांच कर रही है.
वित्तीय लेन-देन की जांच पर फोकस
ईडी की जांच का मुख्य फोकस कथित अपराध से जुड़े पैसों के लेन-देन और उनकी ट्रेल का पता लगाना है. एजेंसी यह भी जांच रही है कि कोयला चोरी के नेटवर्क और चंदेल से जुड़े संस्थानों के बीच क्या संबंध हैं. इससे पहले ईडी ने दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई सहित कई स्थानों पर छापेमारी की थी, जहां से वित्तीय दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाए गए.
लंबे समय से जांच के दायरे में घोटाला
पश्चिम बंगाल कोयला घोटाला पिछले कई वर्षों से जांच के दायरे में है. इसमें सरकारी खदानों से संगठित तरीके से अवैध कोयला निकालने और बेचने के आरोप हैं. इस मामले में कई व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका की जांच की जा रही है.
ईडी की यह गिरफ्तारी कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की परतें खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. एजेंसी इस मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान और नेटवर्क के विस्तार को समझने की कोशिश कर रही है.
यह फैसला बीमा क्षेत्र में जवाबदेही तय करने और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी बीमा पॉलिसी से जुड़े एक गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी (NIC) के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) को आपराधिक मामले में आरोपी बनाए जाने का आदेश दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने पूरे मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का आदेश भी दिया.
यह मामला मोटर दुर्घटना से जुड़े एक क्लेम में कथित रूप से फर्जी बीमा पॉलिसी के इस्तेमाल से संबंधित है. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने यह आदेश देते हुए बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई.
कंपनी की लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब कंपनी खुद यह दावा कर रही थी कि बीमा पॉलिसी फर्जी है, तब भी उसने कोई आपराधिक शिकायत दर्ज नहीं कराई, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है. कोर्ट ने इसे “जिम्मेदारी की घोर कमी” बताया.
कोर्ट ने टिप्पणी की कि अब समय आ गया है कि बीमा कंपनियां अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाएं, क्योंकि वे जो भुगतान करती हैं, वह आम जनता के पैसे से होता है.
SIT को सौंपी गई जांच
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को “राष्ट्रीय महत्व का टेस्ट केस” बताते हुए SIT को निर्देश दिया कि वह नया केस दर्ज करे, जिसमें NIC के CMD से लेकर स्थानीय शाखा प्रबंधक तक सभी संबंधित कर्मचारियों को आरोपी बनाया जाए. साथ ही बस के मालिक को भी आरोपी के रूप में शामिल करने को कहा गया है.
कोर्ट ने SIT को निर्देश दिया कि जांच तेजी और गंभीरता से की जाए तथा फर्जी बीमा दस्तावेज तैयार करने की साजिश की गहराई से पड़ताल की जाए.
DGP ने कोर्ट में मांगी माफी
इस मामले में पहले तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया था. उनके हलफनामे में कहा गया था कि मोटर दुर्घटना मामलों में पुलिस बीमा दस्तावेजों की सत्यता की जांच नहीं करती.
इस पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई. शुक्रवार को DGP ने कोर्ट में पेश होकर बिना शर्त माफी मांगी, जिसे बेंच ने स्वीकार कर लिया. उन्होंने बताया कि अब E-DAR और वाहन पोर्टल के जरिए बीमा विवरण का तुरंत और स्वचालित सत्यापन संभव हो गया है.
पीड़ित को जल्द मुआवजा देने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि दुर्घटना पीड़ित को मुआवजा मिलने में और देरी न हो. कोर्ट ने बीमा कंपनी को चार सप्ताह के भीतर सीधे पीड़ित को मुआवजा देने का आदेश दिया. हालांकि, कंपनी को यह राशि बाद में वाहन के नियंत्रण में रहे व्यक्ति (लीजधारक) से वसूलने की अनुमति दी गई है.
मामला कैसे शुरू हुआ
यह मामला के. सरवनन नामक एक सड़क दुर्घटना पीड़ित से जुड़ा है, जो बस हादसे में घायल हो गए थे. लंबा इलाज और सर्जरी के बाद उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी. उन्होंने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) में मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी.
बीमा कंपनी ने दावा पूरी तरह खारिज करते हुए पॉलिसी को अमान्य बताया, लेकिन MACT और बाद में मद्रास हाईकोर्ट ने कंपनी की दलीलें खारिज कर दीं और मुआवजा देने का आदेश दिया. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.
बताया जा रहा है कि NDTV से जुड़े इस कार्यक्रम की खबर पहले NDTV Profit की वेबसाइट पर प्रकाशित हुई थी, लेकिन बाद में वह खबर वहां से हटा दी गई और लिंक खोलने पर “404 Something Went Wrong” दिखने लगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मुंबई में मशहूर रैपर और सिंगर यो यो हनी सिंह के NDTV GoodTimes से जुड़े ‘My Story India Tour’ के एक कॉन्सर्ट को लेकर विवाद सामने आया है. जानकारी के मुताबिक, कार्यक्रम में लेजर लाइट के इस्तेमाल से जुड़े नियमों के उल्लंघन के मामले में पुलिस ने FIR दर्ज की है. इस FIR ने शहर में बड़े सार्वजनिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस को तेज कर दिया है.
कॉन्सर्ट की जानकारी और आयोजन स्थल
यह कॉन्सर्ट 28 मार्च को मुंबई के बांद्रा स्थित एमएमआरडीए ग्राउंड में आयोजित किया गया था. रिपोर्ट्स के अनुसार, शो के दौरान लेजर लाइट्स का इस्तेमाल किया गया, जबकि इसके लिए पहले से निर्धारित सुरक्षा नियमों और दिशानिर्देशों का पालन पूरी तरह नहीं किया गया. स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि संबंधित एजेंसियों की ओर से आयोजकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनके उल्लंघन की शिकायत सामने आई. इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने FIR दर्ज की.
लेजर लाइट और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन
कानूनी आरोपों में उच्च-तीव्रता वाली लेजर लाइट का उपयोग शामिल है, जिसके लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी. यह स्थल हवाई मार्ग के पास आता है, जहां ऐसी लाइट के उपयोग पर सख्त नियम हैं. इस तरह की अनियंत्रित लाइट्स से हवाई सुरक्षा को खतरा हो सकता है.
भीड़ नियंत्रण और प्रवेश में अव्यवस्था
कॉन्सर्ट में बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे और प्रवेश द्वार पर अव्यवस्था देखी गई. सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में एक महिला फैन गेट पर चढ़ने की कोशिश करती नजर आई, जिससे सुरक्षा कर्मियों के साथ तकरार हुई. इस मामले ने भीड़ नियंत्रण और एंट्री पॉइंट्स के महत्व को उजागर किया.
मीडिया में चर्चा
इस मामले का सबसे चर्चित पहलू मीडिया इंडस्ट्री में चर्चा का विषय बना हुआ है. बताया जा रहा है कि NDTV से जुड़े इस कार्यक्रम की खबर पहले NDTV Profit की वेबसाइट पर प्रकाशित हुई थी, लेकिन बाद में वह खबर वहां से हटा दी गई और लिंक खोलने पर “404 Something Went Wrong” दिखने लगा.
FIR में शामिल आरोप
पुलिस ने आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिसमें निम्नलिखित आरोप शामिल हैं.
1. अवैध लेजर लाइट का उपयोग जो हवाई सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करता है
2. सुरक्षा नियमों और दिशानिर्देशों का पालन न करना
3. भीड़ नियंत्रण में लापरवाही
जांच यह निर्धारित करेगी कि किन परिस्थितियों में नियमों का उल्लंघन हुआ और क्या आयोजकों ने आवश्यक अनुमति ली थी.
आयोजकों और प्रदर्शन की प्रतिक्रिया
कॉन्सर्ट का प्रदर्शन हाई एनर्जी और दर्शकों में लोकप्रिय रहा, जिसमें हनी सिंह ने अपने कई हिट गानों से मनोरंजन किया. लेकिन यह कानूनी मामला अब विवाद का मुख्य केंद्र बन गया है, जिससे कॉन्सर्ट की सफलता पर सवाल उठे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े आयोजन जैसे लाइव कॉन्सर्ट में सुरक्षा मानकों का पालन और भीड़ प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर हवाई मार्ग के पास के क्षेत्रों में.
पुलिस अब अनुमतियों, सुरक्षा प्रोटोकॉल और आयोजन के दौरान निर्णयों के दस्तावेज़ों की गहन जांच करेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं. जांच के आधार पर आयोजकों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है.
यह मामला मीडिया, कॉरपोरेट जगत और कानून के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के प्रमुख उद्योगपति अनिल अंबानी ने मीडिया जगत से जुड़े एक बड़े विवाद में कानूनी कार्रवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया है. उन्होंने जाने-माने पत्रकार अर्नब गोस्वामी और उनके चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है. यह मामला हाल ही में प्रसारित कुछ टीवी कार्यक्रमों से जुड़ा बताया जा रहा है.
टीवी प्रसारण पर उठे सवाल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा विवाद उन कार्यक्रमों को लेकर है जिनमें अनिल अंबानी के वित्तीय लेन-देन से संबंधित खबरें दिखाई गई थीं. अंबानी का आरोप है कि इन प्रसारणों में ऐसी सामग्री दिखाई गई, जिससे उनकी छवि और प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है.
याचिका में क्या कहा गया?
दायर याचिका में दावा किया गया है कि चैनल के कुछ शो में मानहानिकारक बातें प्रसारित की गईं. इसके चलते आम जनता, कारोबारी समुदाय और निवेशकों के बीच उनके प्रति गलत धारणा बनी. अंबानी का कहना है कि इस तरह की रिपोर्टिंग से उनकी साख पर नकारात्मक असर पड़ा है.
कोर्ट से क्या मांग की गई?
अनिल अंबानी ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि अंतिम फैसला आने तक अर्नब गोस्वामी और ‘रिपब्लिक टीवी’ को उनके खिलाफ किसी भी तरह की सामग्री प्रसारित या प्रकाशित करने से रोका जाए. इसके लिए उन्होंने इंटरिम राहत (अस्थायी रोक) की मांग की है.
याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि ऐसे कार्यक्रमों का प्रसारण जारी रहता है, तो उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर छवि को और अधिक नुकसान हो सकता है. इस नुकसान की भरपाई करना भविष्य में बेहद कठिन होगा.
अगली सुनवाई कब?
यह मामला 1 अप्रैल को जस्टिस मिलिंद जाधव की बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हो सकता है. फिलहाल केस प्रारंभिक चरण में है और अदालत यह तय करेगी कि अनिल अंबानी को अंतरिम राहत दी जानी चाहिए या नहीं.
दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद UNI के राफी मार्ग कार्यालय की भूमि आवंटन रद्द करने के फैसले पर कार्रवाई की गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
संयुक्त समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (UNI) के दिल्ली कार्यालय को 20 मार्च 2026 को सील कर दिया गया. यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस और प्रशासन की टीम द्वारा की गई. पुलिस ने बताया कि यह कदम दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उठाया गया.
UNI के राफी मार्ग कार्यालय की जमीन का आवंटन पहले ही रद्द किया जा चुका था. UNI ने इस फैसले के खिलाफ न्यायालय में अपील की थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने उसकी याचिका खारिज कर दी और जमीन रद्द करने के आदेश को बरकरार रखा. इसके बाद कार्यालय खाली करने का निर्देश दिया गया.
पुलिस ने किया कार्यालय खाली और सील
उच्च न्यायालय के आदेश के आधार पर पुलिस ने कार्यालय को खाली कराकर सील कर दिया. मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी मौजूद थे. अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुसार और वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ की गई.
कार्यालय सील होने के दौरान कर्मचारियों में हलचल रही. कर्मचारियों का कहना था कि उन्हें जबरन बाहर निकाला गया और कुछ कर्मचारियों को अपने सामान इकट्ठा करने का समय नहीं मिला. हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी कार्रवाई नियमों के अनुसार की गई.
दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद UNI के राफी मार्ग कार्यालय की भूमि आवंटन रद्द करने के फैसले पर कार्रवाई की गई. अधिकारियों ने सुनिश्चित किया कि सभी कदम कानूनी प्रक्रिया के अनुसार उठाए गए और कार्यालय सील करने की प्रक्रिया पूरी तरह नियंत्रित तरीके से संपन्न हुई.